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बेलथरा रोड में ईडी की एंट्री से हड़कंप, इस शख्स के घर चस्पा किया नोटिस, जानिए पूरा मामला

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बलियाः करीब दस वर्ष पुराने प्रदेश के बहुचर्चित एनआरएचएम (राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन) घोटाले के मामले में ईडी (Enforcement Directorate) ने पूर्व सीएमओ कन्हैया लाल पर शिकंजा कसा है। कन्हैया लाल के बेल्थरारोड वार्ड सात स्थित मकान पर ईडी ने जमानती वारंट नोटिस चस्पा किया है।

यह नोटिस प्रवर्तन निदेशालय के असिस्टेंट डायरेक्टर अंकुर जायसवाल के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। नोटिस चस्पा करने के साथ ही ईडी ने सख्त रुख अपनाना शुरु कर दिया है। माना जा रहा है कि पूर्व सीएमओ पर बड़ी कार्यवाही हो सकती है।

इससे पहले भी ईडी ने 30 जुलाई तक हाजिर होने की मोहलत दी थी। अब ईडी ने जमानती वारंट नोटिस चस्पा किया है। बताया जा रहा है कि कन्हैया लाल का लोकेशन चित्रकूट मिल रहा है, जहां वे अपने बेटे सुभ्रांशु के साथ रह रहे हैं। करीब ढ़ाई माह पहले मोहल्लेवासियों ने उन्हें इस घर में देखा था, उसके बाद से यहां ताला लगा हुआ है।

बता दें कि एनआरएचएम घोटाले के समय कन्हैयालाल गोरखपुर में सीएमओ के पद पर पदस्थ थे। 2012 में वह कुशीनगर के स्वास्थ्य विभाग के एडी पद पर रह चुके थे। 2011 में केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार सदस्यीय टीम ने यूपी में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) में हुए हजारों करोड़ के घोटाले की जांच शुरू किया था। 17 जिलों के तत्कालीन सीएमओ और 22 निजी फर्मों के खिलाफ चार मुकदमे भी दर्ज किए थे। इनमें बहराइच के तत्कालीन सीएमओ हरिप्रकाश, गोंडा के पूर्व सीएमओ एसपी पाठक, गोरखपुर के पूर्व सीएमओ कन्हैयालाल जांच के घेरे में रहे।

2012 में ही सीबीआई ने उन्हें हिरासत में लेकर बेल्थरारोड पहुंची थी और उनके आवास पर छापेमारी की थी। कई दस्तावेजों को जब्त कर सीबीआई कन्हैया को बेल्थरारोड में ही छोड़कर वापस लौट गई थी। इसके बाद सीबीआई ने लंबी जांच की। सीबीआई ने  22 जिलों में दवा आपूर्ति में 22 करोड़ रुपये की अनियमितता भी पकड़ी थी। इस चर्चित एनआरएचएम घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदस्थ तीन चिकित्सकों की हत्या हो चुकी है, जबकि एक ने खुदकुशी कर ली थी। वहीं एक चिकित्सक की सड़क हादसे में मौत हो गई है। इस एक दशक में कन्हैयालाल हमेशा जांच के घेरे में रहे। अब सीबीआई के बाद ईडी ने उनपर जांच बैठाई है।

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बलिया: परिवहन मंत्री के ज़िले में बस डिपो हुआ बेहाल, नियमों की उड़ रही खिल्ली

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बलिया डिपो परिसर में बने टिकट काउंटर पर ताला लटका रहता है.

उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री है दयाशंकर सिंह. बलिया ज़िले की सदर सीट से दयाशंकर सिंह विधायक हैं. अब ऐसे में अगर बलिया में ही परिवहन विभाग चौपट हो जाए तो सवाल उठना लाज़मी है. बलिया में सड़क परिवहन निगम के कायदे-कानूनों की कायदे से धज्जियां उड़ रही है. हाल ये है कि डिपो परिसर में बने टिकट काउंटर पर ही ताला लटका रहता है. जिसकी वजह से यात्रियों को साधारण रोडवेज बसों में ऑनलाइन और ऑफलाइन आरक्षण सेवा का फायदा नहीं मिल पा रहा है.

यात्रियों का कहना है कि टिकट काउंटर तय वक्त पर नहीं खुलता है. जिसकी वजह से उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ता है. साधारण बसों के लिए रिजर्वेशन टिकट नहीं मिल पाता है. जिससे बस के रूट और समय मालूम नहीं हो पाता है. ऐसा नहीं है टिकट काउंटर पर कोई कमी है. जिससे काउंटर खुल नहीं रहा है. बल्कि डिपो कर्मचारियों की ये लापरवाही का नतीजा है. आला अधिकारियों की नज़र भी इस ओर नहीं है.

यात्रियों की शिकायत पर बलिया ख़बर की टीम डिपो पर पहुंची. जहां नगरा के रहने वाले एक यात्री से मुलाकात हुई. इस मसले पर उन्होंने बताया कि “टिकट मिलती है तो सुविधा होती है. क्योंकि उस पर यात्री की हर जानकारी लिखी होती है. बस के नंबर से लेकर बस के रवाना होने और पहुंचने तक का समय लिखा रहता है. इससे एक सुविधा होती है कि अगर बस लेट होती है तो ड्राइवर या कंडक्टर से सवाल भी पूछा जा सकता है. लेकिन लिखित ना होने पर आप कुछ भी पूछ नहीं पाते हैं.”

परिवहन विभाग के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक उमाकांत मिश्रा का एक बयान अमर उजाला में छपा है. उमाशंकर मिश्रा का कहना है कि “टिकट काउंटर अपने समय के अनुसार ही खुलता है. ऑनलाइन सुविधा भी चालू है. 10 बसों में रिजर्वेशन की सुविधा है. लोगों की जानकारी कम होने की वजह से रिजर्वेशन कम हो रहा है.” इस तरह सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने यात्रियों की शिकायत को खारिज करते हुए इसे कम जानकारी घोषित कर दिया.

रिजर्वेशन टिकट का किराया:

रिजर्व टिकट के लिए यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना होता है. यात्रा के मूल किराए के अलावा 20 रुपए प्रति टिकट और फिर 18 फीसदी जीएसटी देना होता है. ये ऑफलाइन पेमेंट का हिसाब-किताब है. अगर टिकट का भुगतान ऑनलाइन करते हैं तो फिर 8 रुपए गेट-वे चार्ज का भी देना पड़ता है. इस तरह किराया जरूर बढ़ जाता है लेकिन यात्रा में सुविधा भी मिलती है.

एक मसला ये है कि अगर आप टिकट कैंसल कराते तब किराए का कितना हिस्सा आपको वापस मिलता है? टिकट निरस्त कराने पर सिर्फ मूल किराया ही मिलता है. जीएसटी और 8 रुपये गेट-वे चार्ज की कटौती की जाती है. तो वहीं 2 घंटे पहले रिजर्वेशन निरस्त कराने पर मूल किराए से 10 फीसदी चार्ज भी काट लिया जाता है.कब सुधरेगा हाल ?

सवाल ये है कि अगर परिवहन मंत्री के ज़िले में ही बस डिपो का ये हाल है तो दूसरे ज़िलों का हाल क्या होगा? यात्रियों की शिकायत के बाद देखना होगा कि क्या ये स्थिति बदलती है? या फिर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के दौरे के वक्त ही महज कुछ वक्त के लिए ये हाल बदलता रहेगा?

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बेल्थरा रोड: नगर पंचायत चुनाव जीतने के लिए बीजेपी का मास्टर प्लान ये है?

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बेल्थरा रोड नगर पंचायत चुनाव के लिए दावेदार तैयार

उत्तर प्रदेश में इन दिनों उपचुनाव की चर्चाएं तेज हैं. मैनपुरी, रामपुर और खतौली में होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी पारा हाई है. लेकिन नेपथ्य में निकाय चुनाव की जमीन तैयार हो रही है. निकाय चुनाव को लेकर 29 नवंबर यानी कल का अपडेट ये है कि सीटों की आरक्षण सूची मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश किया जा चुका है. सीएम योगी से हरी झंडी मिलने के बाद आरक्षण सूची जारी होने की संभावना है. बहरहाल, निकाय चुनाव स्पेशल में यहां हम बात करेंगे बलिया ज़िले के बेल्थरा रोड नगर पंचायत की. जहां जीत के लिए के लिए बीजेपी ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है. तो दूसरी पार्टियां भी राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद में जुटी हैं.

बेल्थरा रोड से फिल्हाल दिनेश कुमार गुप्ता नगर पंचायत अध्यक्ष हैं. एक बार फिर दिनेश कुमार गुप्ता चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. दिनेश कुमार गुप्ता भाजपा से पीछली बार नगर पंचायत अध्यक्ष बने थे. उनके सामने प्रवीण नारायण गुप्ता, लखी गुप्ता, भगवती राजभर,
मनीष जायसवाल, कालिका प्रसाद गुप्ता, अवधेश यादव, शेख ऐजाजुद्दीन दावेदारी करते दिख सकते हैं.

बात करें बेल्थरा रोड नगर पंचायत की जनसंख्या की. यहां करीब 20 हजार से ज्यादा की आबादी रहती है. इसमें करीब 73 फीसदी जनसंख्या हिंदु समुदाय की है. तो वहीं करीब 26 फीसदी मुस्लिम समुदाय के लोग हैं. मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या हिंदुओं की अपेक्षा जरूर कम है. लेकिन हर बार इस वर्ग के मतदाता हार-जीत के बीच खड़े होते हैं. सियासी भाषा में कहें तो किंग मेकर की भूमिका निभाते हैं.

भाजपा का मास्टर प्लान:

बलिया ज़िला पूर्वांचल का हिस्सा है. निकाय चुनाव को जब 2024 लोकसभा चुनाव के लिहाज से देखा जाता है तो इसकी अहमियत बढ़ जाता है. हालांकि निकाय चुनाव को लेकर भाजपा ने अब तक उम्मीदवारों के पत्ते नहीं खोले हैं. सूत्र भाजपा के एक आंतरिक सर्वे के हवाले से बताते हैं कि बलिया और खासकर बेल्थरा रोड की लड़ाई इस बार भाजपा के लिए आसान नहीं है. स्थानीय स्तर पर पार्टी की गुटबाजी, एंटी इनकम्बेंसी, बड़ी संख्या में बगावत ने भाजपा की राहों में कांटे बिछा दिए हैं.

बीते महीने यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी बलिया के दौरे पर आए थे. इसके अलावा यूपी सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी कई बार बलिया के दौरे पर आ चुके हैं. पसमांदा मुसलमानों को रिझाने के लिए दानिश आजाद अंसारी को आगे किया जा रहा है. दानिश आजाद अंसारी का गृह जिला भी बलिया ही है. भाजपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नगर पंचायत अध्यक्ष के पद पर पार्टी किसी मुसलमान प्रत्याशी को बैकडोर से मैदान में उतार या सपोर्ट कर सकती है. ताकि मुख्य प्रत्याशी की जीत के लिए मुस्लिम वोट के समीकरण को साधा जा सके.हालांकि मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव को कम करने के लिए भाजपा बलिया की कुछ और सीटों पर यहीं रणनीति अपनाने वाली है. वजह साफ स्थानीय स्तर पर पार्टी के नेतृ्त्व से मुस्लमान समुदाय के मतदाताओं में नाराज़गी है. देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा समेत दूसरे दल बेल्थरा रोड से किन प्रत्याशी पर दांव लगाते हैं. साथ ही भाजपा स्थानीय स्तर के आक्रोश और सत्ता विरोधी लहर को कम करने के लिए क्या रणनीति अपनाती है?

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हत्‍या के प्रयास मामले में कोर्ट ने पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप समेत 5 को सरेंडर करने का दिया आदेश

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बलिया। 9 साल पुराने मामले में भाजपा के पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला को कोर्ट ने सरेंडर करने का आदेश दिया है। छात्र नेता पर जानलेवा हमले के मामले में भाजपा के पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला और 4 अन्य को 2 दिसंबर तक कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।

फरियादी के वकील दिनेश तिवारी ने कहा कि छात्र नेता सुधीर ओझा के मामले में स्थानीय सांसद/विधायक अदालत के विशेष न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी ने आदेश जारी किया है। बता दें बलिया शहर के कोतवाली क्षेत्र के सतीश चंद्र महाविद्यालय में 15 जनवरी 2013 को सुधीर ओझा पर चाकू से हमला किया गया था।

अब इस मामले में 9 साल बाद कोर्ट ने भाजपा के पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला और 4 अन्य को 2 दिसंबर तक कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। अब देखना होगा कि मामले के आरोपी क्या कुछ कदम उठाते हैं।

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