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बलिया स्पेशल

Exclusive- बलिया के सांसद ने लोकसभा में इतिहास को लेकर पेश किया ग़लत तथ्य

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नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अब बीजेपी के बलिया से सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने इतिहास को लेकर ग़लत तथ्य पेश किए हैं। उन्होंने दावा किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1941-42 में बलिया के टाउन हॉन में हुई मीटिंग के दौरान पहली बार ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा दिया था। जबकि ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर उनका यह दावा बिल्कुल ग़लत है।

इतिहासकारों और नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर लिखी गई किताबों की मानें तो नेताजी ने ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा पहली बार बर्मा में दिया था। इतिहासकारों के मुताबिक, 14 अगस्त सन 1942 में जब नेताजी अपनी आज़ाद हिंद फौज के साथ बर्मा पहुंचे थे, ये नारा तभी दिया गया था। इतना ही नहीं बीजेपी सांसद ने यह भी दावा किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने यह नारा 1942 में कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर रहते हुए दिया था।

जबकि उनका यह दावा भी तथ्यों की कसौटी पर ग़लत साबित होता है। विकिपीडिया पर ही नेताजी के बारे में जो जानकारी दी गई है, उसके मुताबिक नेताजी ने 1939 में ही कांग्रेस पार्टी से ख़ुद को अगल कर लिया था।

उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का फ़ैसला महात्मा गांधी के अहिंसावादी सिद्धांतों के चलते किया था। हैरानी की बात तो यह है कि वीरेंद्र सिंह ने यह दोनों ग़लत दावे संसद में बजट पर चर्चा के दौरान किए। जब वह यह दावे कर रहे थे तो वहां मौजूद कई सांसद इस बात पर उनकी प्रशंसा भी कर रहे थे।

वहां मौजूद किसी भी सांसद ने वीरेंद्र सिंह को इस ग़लत बयानी के लिए नहीं टोका। यहां तक कि स्पीकर ने भी बीजेपी सांसद से ये नहीं कहा कि वह इतिहास के बारे में लोगों को ग़लत पाठ पढ़ा रहे हैं। ख़ैर, बीजेपी सांसद की इतिहास को लेकर इस ग़लत बयानी पर इतनी हैरानी नहीं होनी चाहिए। इससे पहले भी बीजेपी के कई कद्दावर नेता इतिहास को लेकर ग़लत बयानी करते रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है।

उन्होंने पिछले साल मई में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान यह दावा किया था कि ब्रिटिश शासन में जब भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त और वीडी सावरकर जेल में थे, तब कांग्रेस के किसी नेता ने उनसे मुलाकात नहीं की। जबकि उनका यह दावा ग़लत था। देश के पहले प्रधानमंत्री और कांग्रेस के अग्रणी नेता जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा ‘टोवर्ड फ्रीडम- द ऑटोबायोग्राफी ऑफ जवाहरलाल नेहरू’ में भगत सिंह से लाहौर जेल में हुई मुलाकात का जिक्र किया है। यह मुलाकात 1929 में हुई थी, जब असेंबली में बम धमाके के बाद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को गिरफ्तार किया गया था।

वहीँ बलिया के ही रहने वाले और सामजिक कार्यकर्ता अरविन्द मूर्ति ने भी वीरन्द्र सिंह मस्त के इस बयान पर कड़ी आपति दर्ज करते हुए सांसद जी को इतिहास पढ़ने की सलाह दे डाली ।

बलिया ख़बर ने जब वीरेंद्र सिंह के इस बयान के बारे में समाजवादी पार्टी के नेता सनातन पांडेय से बात की तो उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सिंह को इतिहास के बारे में कुछ नहीं पता। इसलिए वह लोकतंत्र के मंदिर में इतिहास का ग़लत ज्ञान दे रहे हैं, जो शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र सिंह को बलिया के लोग पसंद भी नहीं करते, वह चुनाव में हुई गड़बड़ी की वजह से यहां से सांसद बने हैं। बता दें कि वीरेंद्र सिंह ने लोकसभा चुनाव में सनातन पांडेय से मिली कड़ी टक्कर के बाद जीत दर्ज की थी।

वीरेंद्र सिंह ने सनातन पांडे को 15 हजार 519 वोटों से हराया था। हालांकि इन नतीजों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्नातन पांडेय ने कोर्ट में नतीजों पर संदेह व्यक्त करते हुए याचिका दायर की है।

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बलिया में 11 दिसंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रचार गाड़ी रवाना

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बलिया। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के तत्वाधान में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन दिनांक 11 दिसम्बर 2021 को किया जाना है। जिसके व्यापक प्रचार-प्रसार और जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिये नवागत माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विक़ार अहमद अंसारी की अध्यक्षता में सभी न्यायिक अधिकारीगण की एक आवश्यक बैठक आहूत की गयी।

इस बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व एवं उपयोगिता पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।माननीय जिला न्यायाधीश द्वारा लोक अदालत के कार्य पारदर्शिता और व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु एक प्रचार वैन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। उक्त प्रचार वैन का उद्देश्य जन-जन तक राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व को बताना है तथा जनसामान्य को यह बताना है कि वह अपने किस तरह के मामलें को राष्ट्रीय लोक अदालत में लगाकर, सस्ता व सुलभ न्याय प्राप्त कर सकते है। जनपद बलिया के समस्त लोगो से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने मामलों के त्वरित न्याय के लिये सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दीवानी न्यायालय परिसर बलिया से सम्पर्क कर सकते है।

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बलिया DM के निरीक्षण में क्रय केंद्र मिला बन्द, डिप्टी आरएमओ व प्रभारी का रोका वेतन

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बलिया DM के निरीक्षण में क्रय केंद्र मिला बन्द, डिप्टी आरएमओ व प्रभारी का रोका वेतन

बलिया: जिलाधिकारी अदिति सिंह ने सोमवार को रसड़ा क्षेत्र के तीन धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान एक क्रय केंद्र संचालित नहीं होने पर क्रय केंद्र प्रभारी के साथ जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी का भी वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश दिया है। उन्होंने अन्य केंद्रों पर मिली कमियों को भी सुधारने की चेतावनी दी है। एडीएम, सभी एसडीएम व खरीद से जुड़े अधिकारियों को लगातार क्रय केंद्रों का निरीक्षण करते रहने का निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी क्रय केन्द्र मण्डी समिति रसड़ा पर पहुंचीं। वहां धान खरीद से सम्बन्धित उपकरण नहीं पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। केन्द्र प्रभारी के आईडी-पासवर्ड आदि की भी जानकारी नहीं थी। 18 नवम्बर से ही किसानों का पंजीकरण करने के बाद भी प्रभारी किसी भी किसान के धान का नमूना मँगाकर नमी मापक यन्त्र के माध्यम से यह देखा नहीं कि धान क्रय योग्य है अथवा नहीं। साथ ही अब तक इस केन्द्र पर किसी भी किसान का धान खरीद नहीं हुई पाई गई। किसानों के लिए कोई मूलभूत सुविधाएं भी वहां नहीं थी। इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर की।

मंडी समिति रसड़ा के विपणन शाखा के केन्द्र पर भी खरीद के प्रति कोई सार्थक प्रयास नहीं पाया गया। इस पर क्रय केन्द्र प्रभारी मण्डी निरीक्षक एवं मंडी समिति रसड़ा के सचिव का वेतन रोकने का आदेश दिया है। साथ ही तत्काल धान की खरीद शुरू करने का निर्देश दिया। चीनी मिल परिसर में संचालित होने वाले क्रय केंद्र पर न तो कोई बोर्ड मिला और न ही कोई उपस्थित था।

अब तक यह क्रियाशील ही नहीं हुआ है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी तथा केंद्र प्रभारी का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश एडीएम को दिया। उन्होंने अपर जिलाधिकारी, सभी एसडीएम व जिला खाद्य विपणन अधिकारी को निर्देश दिया है कि तत्काल सुधार लाते हुए धान खरीद की प्रगति को बढ़ाया जाए। सभी अधिकारी फील्ड में उतरकर केंद्रों का निरीक्षण करते रहें।

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बलिया में छात्र संघ चुनाव का रास्ता साफ? नोटिस जारी

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बलिया। धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन की चेतावनी के बाद बलिया में छात्र संघ चुनाव के लिए रास्ता साफ होने लगा है। जिले के जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में आने वाले दिनों में जल्द ही छात्र संघ चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र संघ की नियमावली जारी कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन की सहमति के बाद छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित कर दी जाएगी।

सोमवार यानी आज जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की ओर से एक ज्ञापन जारी किया गया है। कुलसचिव की ओर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि “एतद्द्वारा महाविद्यालयों के छात्रों द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन दिनांक 18 नवंबर, 2021 के अनुक्रम में सत्र 2021-22 में छात्र संघ चुनाव हेतु जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया की चुनाव नियमावली विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अग्रेतर कार्यवाही हेतु अपलोड की जा रही है।”

बता दें कि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से संबद्ध मुरली मनोहर टाउन पीजी कॉलेज (टीडी कॉलेज) के छात्रों की ओर से छात्र संघ चुनाव के लिए लगातार ज्ञापन सौंपा जा रहा था। बीते दिनों टीडी कॉलेज के छात्रों ने इसे लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। बता दें कि छात्रों की ओर से गत रविवार यानी 21 नवंबर को जिला कार्यालय पर ‘हल्ला बोल’ का ऐलान भी किया गया था।

छात्रों ने महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए जिला कार्यालय पर आगामी मंगलवार यानी 23 नवंबर को ‘हल्ला बोल’ करने की घोषणा की है। हालांकि ठीक एक दिन पहले ही विश्वविद्यालय की ओर से छात्र संघ चुनाव को लेकर नोटिस जारी कर दी गई है। जननायक विश्वविद्यालय महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए नियमावली अपने आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर रहा है। जिसके बाद छात्र संघ चुनाव और उसकी तारीखों को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।

गौरतलब है कि छात्र संघ के चार पदों के लिए चुनाव कराए जाते हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और पुस्तकालय मंत्री। कोरोना महामारी के आने के बाद से छात्र संघ का चुनाव बंद कर दिया गया था। लेकिन कोरोना महामारी पर काबू पा लेने और गतिविधि के शुरू हो जाने के बाद भी इस बार प्रशासन की मंशा छात्र संघ चुनाव कराने की नहीं दिख रही है।

छात्र संघ चुनाव अब पूरी तरह जिला प्रशासन की सहमति पर निर्भर है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसे हरी झंडी मिल चुकी है। देखना होगा कि मंगलवार को जिला कार्यालय पर हल्ला बोल पर प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या होगी?

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