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पूर्व पीएम चंद्रशेखर के छोटे भाई कृपा शंकर सिंह का दिल्ली में निधन

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नई दिल्ली/ बलिया :  देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के छोटे भाई कृपा शंकर सिंह का शनिवार की सुबह दिल्ली में निधन हो हो गया । उनके निधन पर जनपद में शोक की लहर दौड़ गई है । जिले के इब्राहिमपट्टी में 1 मई 1937 को पैदा हुए कृपा शंकर सिंह हृदय रोग से पीड़ित थे ।

इनके निधन की सूचना मिलते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई । पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के चार भाइयों में कृपा शंकर उनके अत्यंत प्रिय माने जाते थे। पूर्व प्रधानमंत्री के जीवनकाल में हमेशा उनके साथ साए की तरह साथ रहते थे।

कृपा शंकर के तीन पुत्र डॉ नवीन सिंह, प्रवीण सिंह व बब्बू के साथ ही एक पुत्री है। पहली मई 1937 को जन्मे कृपा शंकर सिंह बलिया में देवस्थली विद्यापीठ के प्रबंधक व दूजा देवी महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष भी रहे। इनके भतीजे नीरज शेखर भाजपा से सांसद व पौत्र रविशंकर सिंह पप्पू विधान परिषद के सदस्य हैं। उनके निधन की सूचना मिलते ही बलिया में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के घर पहुंचकर शोक संवदेना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया।

सपा के वरिष्ठ नेता व उत्तर प्रदेश विधानसभा में विरोधी दल के नेता राम गोविंद चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी के अनुज श्री कृपाशंकर सिंह के आकस्मिक निधन की खबर पर गहरा दुःख प्रकट किया है ।

श्री चौधरी ने अपने शोक संदेश में कहा है कि कृपाशंकर सिंह के निधन की खबर से वह बेहद मर्माहत हैं । उन्होंने कहा है कि कृपाशंकर जी बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे । उनके मृदुभाषी व्यक्तित्व व समतामूलक विचारधारा को भुलाया नही जा सकता । वह पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर जी के राजनैतिक व्यवस्थाओं को बखूबी सम्भालते थे तथा बलिया के लोगो को दिल्ली में एक अभिभावक सा अपनत्व देते थे।

 

 

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जन्मदिन विशेष: जब मंगल पांडे को फांसी नहीं देना चाहते थे जल्लाद, ये थी बड़ी वजह

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बलिया : अंग्रेजी हुकूमत से आजाद होने और खुली हवा में सांस लेने के साल 1857 में देश में पहली बार आजादी की मशाल रौशन करने वाले मंगल पांडे का आज जन्मदिन है. आजादी के सबसे पहले क्रांतिकारी माने जाने वाले मंगल पांडेय ने देशवासियों में स्वतंत्रता की भावना जगाई थी. मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था.

इनके पिता जी का नाम दिवाकर पांडे और माता जी का नाम अभारानी पांडे था. मंगल पांडे ने 1849 में बंगाल आर्मी जॉइन की थी. मंगल पांडे ऐसे स्वतंत्राता सेनानी थे, जिनसे अंग्रेजी हुकूमत भी थर-थर कांपती थी. 19 जुलाई को साल 1827 में उत्तरप्रदेश के बलिया जिले के नगवा ग्राम में उनका जन्म हुआ था. अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ विद्रोह की शुरुआत करने से वे ब्रिटिश हुकूमत की निगाहों में खटकने लगे थे. 

मंगल पांडे 34वे बंगाल नेटिव इन्फेंट्री के पांचवी कंपनी में निजी सैनिक थे. 1857 में 29 मार्च को मंगल पांडे ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह की पहली चिंगारी सुलगाई थी, जो देखते ही देखते पूरे देश में आजादी की ज्वाला में बदल गई. बता दें कि विद्रोह का प्रारम्भ एक बंदूक की वजह से हुआ था. सेना में शामिल की नई रायफल ‘एनफील्ड p53’ में लगने वाले कारतूस में गाय और सूअर की चर्बी है. जिसे सैनिकों को इसमें ग्रीज लगी कार्टिज को मुंह से छीलकर हटाना पड़ता था.

यही कारण था कि हिन्दू-मुस्लिम सैनिकों में आक्रोश फैलने लगा. जिसके बाद मंगल पांडे ने विरोध शुरू कर दिया और उन्होंने बंगाल की बैरकपुर छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इंफेन्टरी के मंगल पांडे ने परेड ग्राउंड में दो अंग्रेज अफसरों पर हमला किया और फिर खुद को गोली मारकर घायल कर लिया था. जिसके बाद मंगल पांडेय की गिरफ्तारी और कोर्ट मार्शल कर दिया गया.

लेकिन मंगल पांडे द्वारा भड़काई गई आजादी की चिंगारी पूरे देश में सुलगने लगी. जिसे देख अंग्रेज घबरा गए और उनकी सरकार ने मंगल पांडे को 6 अप्रैल को फांसी की सजा सुना दी गई. स्थानीय जल्लादों ने मंगल पांडेय को फांसी देने से मना कर दिया था, जिसकी वजह से कोलकाता से चार जल्लादों को बुलाकर 8 अप्रैल को ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ असंतोष भड़कता देख अंग्रेजों ने मंगल पांडेय को फांसी पर चढ़ा दिया.

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घूरा राम के निधन पर अखिलेश यादव समेत बलिया के इन नेताओं ने जताया दुख, बताया अपूरणीय क्षति

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बलिया डेस्क : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री घूरा राम का लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। वहीं बलिया के जिलाधिकारी ने उनके कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि की है।

अखिलेश यादव ने जताया शोक-  घूरा राम के निधन पर अखिलेश यादव ने अपने ऑफिशियल ट्ववीटर पर लिखा कि “वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री श्री घूरा राम जी का आकस्मिक निधन अपूरणीय क्षति! दिवंगत आत्मा को शांति एवं परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करे ईश्वर। शत-शत नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि”।

पार्टी के नेताओं ने  भी शोक संवेदना प्रकट की- समाजवादी पार्टी ने अपने नेता के निधन पर शोक जताया है. पार्टी ने अपने ऑफिशियल ट्ववीटर पर लिखा कि ‘समाजवादी पार्टी एवं दलित समाज के वरिष्ठ, कर्मठ और लोकप्रिय नेता पूर्व मंत्री श्री घूरा राम जी का आकस्मिक निधन अत्यंत हृदय विदारक! शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना एवं दिवंगत आत्मा को शांति दे भगवान”। वहीं बलिया समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अद्याशंकर यादव ने शोक व्यक्त किया है। अद्याशंकर ने बलिया ख़बर से फोन पर बात करते  हुए कहा कि उनके निधन से सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में क्षति हुई है। जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।

वहीं पूर्व मंत्री और सपा नेता नारद राय ने भी शोक व्यक्त किया है  उन्होंने कहा कि ये खबर बेहद दुःखद है समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री आदरणीय घूरा राम जी का निधन अपूरणीय क्षति है।  वहीं पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक मोहम्मद रिजवी ने भी शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है “वंचित एवं शोषित वर्ग की मजबूत आवाज, सपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री घूरा राम के निधन पर पूरे बलिया समेत पूरे प्रदेश के लिये दुखदाई खबर है।  इस दुख की घड़ी में हम सब उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं” ।

सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने भी घूरा राम के निधन पर शोक प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि “पूर्व मंत्री दलित समाज के लोकप्रिय नेता श्री घूरा राम जी का आकस्मिक निधन अत्यंत हृदय विदारक! शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना एवं ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें। अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि गौरतलब है की बीएसपी संस्थापक कांशीराम के विश्वस्त सहयोगी रहे घूरा राम साल 1993 , 2002 और 2007 में जिले की रसड़ा सुरक्षित सीट से विधायक रहे और मायावती सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे. हाल ही में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे. एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने घूरा राम को दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया था।

 

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ट्रेन से जबलपुर के लिए निकले थे, पहुच गए बलिया, सुनाई दर्दनाक आपबीती

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बलिया डेस्क :कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में जारी लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर प्रवासी श्रमिक और कामगारों पर पड़ा है।फिर भी कोरोना वायरस संक्रमण और देशव्यापी लॉकडाउन के बीच श्रमिकों के घर पहुंचने की राह की जटिलता कम होने का नाम नहीं ले रही। ट्रेनों का निर्धारित रूट से भटकना अब भी जारी है। सोमवार को 5 दिन की यात्रा करने के बाद बलिया पहुंचे शंकरगढ़ के श्रमिकों ने आपबीती सुनाई।

शंकरगढ़ उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिला और यूपी-मध्य प्रदेश के बार्डर पर स्थित है। श्रमिकों की संख्या 100 के करीब है। बलिया स्टेशन पहुंचकर इन लोगों ने शंकरगढ़ भिजवाने की अपील की।

शंकरगढ़ के श्रमिकों का कहना था कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन 21 मई को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से चली। इस ट्रेन को जबलपुर आना था। बताया गया कि जबलपुर से शंकरगढ़ के लिए कोई न कोई ट्रेन मिल जाएगी। हम सभी इसलिए ट्रेन में सवार हो गए। कोल्हापुर से जबलपुर पहुंचने में ट्रेन का अधिकतम 24 घंटे समय लगता है।

दुर्भाग्य से यह ट्रेन भुसावल से इटारसी न जाकर नागपुर की तरफ चली गई। इसके बाद वह छत्तीसगढ़ के रायपुर से ओडिशा, झारखंड, बंगाल होते हुए कटिहार (बिहार) पहुंची। 5 दिन की यात्रा के बाद भी सफर पूरा नहीं हुआ है। हम सब भोजन-पानी के लिए तरस गए।

कटिहार रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर वहां के जिला प्रशासन ने शंकरगढ़ न भिजवाकर वाहन से पटना भेज दिया। हमें कहा गया कि वहां से बलिया रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन मिलेगी।

प्रवासियों ने बताया कि पटना से हम सभी 5-5 हजार में वाहन करके किसी तरह बलिया पहुंचे हैं। इसके बाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर अधिकारियों से हम सभी ने शंकरगढ़ भिजवाने की अपील की।

ये प्रवासी अपने परिवार के साथ चिलचिलाती धूप में रेलवे स्टेशन पर घंटों बैठकर साधन का इंतजार करते रहे। बलिया के अधिकारियों ने इन सभी को रोडवेज बस अड्डे पर भेज दिया। जहां इन सभी को शंकरगढ़ भेजने की व्यवस्था की गई। स्थानीय प्रशासन इस संदर्भ में बात करने से कन्नी काटता रहा। बस इतना कहा गया कि इन्हें सुरक्षित घर तक भेजने की व्यवस्था कर दी गई है।

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