डीजे बजाने पर बवा’ल की पूरी कहानी, देवरिया पुलि’स बोली- ह’त्या को सांप्रदा’यिक रूप न दें !

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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जन्माष्टमी समारोहों के दौरान तेज डीजे बजाने को लेकर शुरू हुए विवाद ने शनिवार की रात सांप्रदा’यिक रंग पकड़ लिया। जिसके परिणामस्वरूप सचिन नाम के एक व्यक्ति की मौ’त हो गई । जिसके बाद उतेजि’त भीड़ ने एक धार्मि’क स्थल में तोड़फो’ड़ की और धार्मिक किताबों को भी नुकसान पहुचाया। साथ ही कुछ मुसलमानों की दुकानों को भी लुटा गया।

बता दें की सोमवार तक पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया है । जिन पर दंगा भड़काने का मामला दर्ज किया गया है । इस सांप्रदायिक तनाव में स्थानीय मीडिया और सोशल मीडिया के द्वारा भी इसे खूब ‘सांप्रदायिक रंग देने’ की कोशिश की गई । साथ ही पुलिस पर भी गैर-जिम्मेदाराना भूमिका निभाने का आरोप लगा है तो स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की ही ‘लापरवाही’ को जिम्मेदार ठहराया है। ।बता दें की यह घटना जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर बरहज के पटेल नगर में शनिवार आधी रात के बाद हुई जब लोग जन्माष्टमी मना रहे थे।

देवरिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्रीपति मिश्रा ने कहा, “कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर पटेल नगर में कुछ युवक तेज संगीत बजा रहे थे, तभी मुन्नालाल ने वहां आकर संगीत बंद करने के लिए कहा, जिसके बाद वहां मौजूद युवकों ने मुन्नालाल पर लाठियों से हमला कर दिया।”उन्होंने कहा, “जब उन्हें बचाने उनकी पत्नी संजू देवी के साथ उनके बेटे सुमित और सचिन आए, तो हमलावरों ने उन्हें भी पीट दिया।” जिसके बाद 23 साल के सुमित की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।

वहीँ दूसरी तरफ न्यूज़ क्लीक वेबसाइट ने बरहज के थाना इंचार्ज शिवशंकर चौबे के हवाले से लिखा है- “पहले प्रद्युम्न गुप्ता और मन्नू जायसवाल के बीच झड़प हुई, फिर प्रद्युम्न ने अपने दोस्तों को बुलाया जिसमें हिंदू और मुसलमान दोनों थे। इसलिए सांप्रदायिक मामला नहीं है।” उन्होंने कहा कि पुलिस ने छह आरोपियों को सोमवार को गिरफ्तार किया, जिनमें प्रद्युम्न गुप्ता भी शामिल था।

आगे उन्होंने बताया “यह एक सांप्रदायिक घटना नहीं है बल्कि एक ग्रुप की लड़ाई है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। छह आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 302, 147, 148, 323, 504, 506 और 34 आईपीसी के तहत गिरफ्तार किया गया है। जिनमें प्रद्युम्न गुप्ता, दुर्गेश गुप्ता, चेदि मद्धेशिया, इफ्तिखार अहमद, फैयाज और हैदर अली, “चौबे ने कहा,” गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

स्थानीय लोगों ने पुलिस को ‘लापरवाही’ के लिए दोषी ठहराया– बलिया खबर ने भी कुछ स्थानीय निवासियों से उस रात की घटना जानने के लिए संपर्क किया। जिसमें बरहज के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया स्थानीय मीडिया ने दो ग्रुपों की लड़ाई को हिंदू-मुस्लिम विवाद बना दिया हालाँकि ऐसा कोई मामला ही नहीं था । जिसके बाद ऐसी स्थिती यहाँ उत्तपन हुई है।

उन्होंने बताया “यह घटना शनिवार आधी रात को हुई थी जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को सुलझाया गया। सब कुछ शांतिपूर्ण था, लेकिन प्रद्युम्न पांच-छह दोस्तों (हिन्दू मुस्लिम दोनों) को ले आया और मन्नू के घर गए और जिसके बाद झगड़ा हुआ लेकिन लोगों ने अफवाह फैला दी कि मुसलमान ने एक हिन्दू को चाक़ू से मार दिया जो की सच नहीं है, ”उन्होंने कहा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि सिर में चोट लगने कारण सुमित की मौत हुई है ।

‘मस्जिद में तोड़फोड़, मुस्लिमों की लूटी दुकानें’– वहीँ पुलिस की लापरवाही को दोषी ठहराते हुए स्थानीय लोगों ने कहा: “यह घटना शनिवार की रात को हुई थी और रविवार दोपहर को पुलिस बल तैनात किया गया था। अगर जिला प्रशासन सुबह उठता तो मामला हाथ से नहीं निकलता। मुस्लिम दुकानें नहीं जलाई गई होतीं और मस्जिद को भी भीड़ द्वारा नुक्सान नहीं पहुचाया गया होता”

“अगले दिन (रविवार) इलाके में बंदी थी जिसका फायदा उठाकर मुसलमानों की दुकानों को निशाना बनाया गया था। मुसलमानों की चार दुकानें से लगभग 30 लाख रुपये की लूटी भी की गईं। उन्होंने कहा यहाँ एक सब्जी बाजार है जहां ज्यादातर दुकानें मुसलमानों द्वारा चलाई जाती हैं।

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