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बलिया

यूपी बिहार के जिलों को पूर्वांचल एक्सप्रेस से जोड़ेगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस

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पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बनने के बाद ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे विकास के मार्ग पर मील का पत्थर साबित होगा। गाजीपुर के जंगीपुर से शुरु 117 किलोमीटर का एक्सप्रेस वे मांझी घाट तक जाएगा। इससे यूपी ही नहीं बिहार के भी कई जनपद पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से कनेक्टर हो पाएंगे।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे बनने से बलिया के साथ साथ बक्सर, आरा, भोजपुर, छपरा, सीवान और पटना समेत बिहार के कई जिलों का सीधा जुड़ाव पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से होगा। गाजीपुर से निकला एक्सप्रेस वे करीमुद्दीनपुर, चितबड़ागांव, फेफना, हल्दी और बैरिया होते हुए गुजरेगा। करीमुद्दीनपुर से तीन किलोमीटर आगे उत्तमपुर गांव के पास पूर्वांचल एक्सप्रेस से जोड़ा जाएगा। भरौली के रास्ते बिहार के कई जनपद पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से जुड़ जाएंगे।

अलग अलग चरणों में निर्माण हो रहा है। परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी 14 नवंबर को चौधे चरण की परियोजना का शुभारंभ करेंगे। चौथ चरण बक्सर स्पर (17 किलोमीटर) होगा। यह करीमुद्दीनपुर से शुरू होगा और भरौली में गंगा के पुल (बक्सर से तीन किलोमीटर (पहले) के पास समाप्त होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने देशभर से आईं आठ कंपनियों के ई-टेंडर दस्तावेज स्वीकार किए हैं। कुल 134 किलोमीटर के फोरलेन निर्माण में अब 513.73 करोड़ रुपये अधिक खर्च होंगे।

केंद्र सरकार ने कुल 5311 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसमें एनएचएआइ ने यूपीडा (यूपी एक्सप्रेसवेज डेवलेपमेंट अथारिटी) को 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। उन्होंने 150 करोड़ बलिया और 100 करोड़ रुपये गाजीपुर प्रशासन को दिए हैं। आजमगढ़ एनएचएआई एसपी पाठक का कहना है कि गाजीपुर में भी जल्द जमीन अधिग्रहण शुरू कराया जाएगा। दो फेज के लिए 13 कंपनियों के आवेदन स्वीकार किए गए है। अब उनके टेंडर दस्तावेज का अध्ययन होगा। दिसंबर तक कंपनी फाइनल होगी। बता दें कि एक्सप्रेस वे के लिए बलिया के 99 गांवों से 438 हेक्टेयर भूखंड और गाजीपुर के 86 गांव से 312 हेक्टेयर भूखंड खरीदा जाएगा।

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सुरहाताल में नौकायन से पहले स्थानीय नाविकों को दिया गया प्रशिक्षण

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बलिया के सुरहा ताल में 10 दिसंबर से पक्षी महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसमें नौकायन भी होगा। इसको लेकर नावों के सफल संचालन के लिए स्थानीय नाविकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण रखा गया।

बता दें कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बलिया व रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण नीति के अंतर्गत तैयार की गई एसओपी के बारे विस्तृत रूप से नाविकों को बताया गया। नाविकों को लाइफ जैकेट को सही तरीके से पहनने, लाइफ व्याय रिंग के प्रयोग तथा नाव के रखरखाव एवं परिचालन में विशेष सावधानी बरतने के संबंध में विस्तृत रूप से प्रशिक्षित किया गया।

उक्त प्रशिक्षण में जिला आपदा विशेषज्ञ पीयूष सिंह बघेल, नायब तहसीलदार संत विजय सिंह ,रेड क्रॉस सोसाइटी से शैलेंद्र कुमार पांडे,अभिषेक राय तथा जनपद के प्रशिक्षित आपदा मित्र धर्मेंद्र ठाकुर ,राजकिशोर यादव सहित सुरहा ताल के आसपास के लगभग 2 दर्जन नाविक उपस्थित रहे।

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बलिया

बलियाः 10 साल बीते पर अब तक बनकर तैयार नहीं हुआ मांझी रेल पुल

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बलिया में विकास कार्यों की रफ्तार कितनी धीमी है, इसका अंदाजा लगाने के लिए मांझी रेल पुल ही काफी है। पिछले 10 सालों से निर्माणाधीन इस पुल का काम आजतक पूरा नहीं हुआ है। लोग अब भी पुल के पूरी तरह बनने की बांट जोह रहे हैं लेकिन पुल कब तक बनकर तैयार होगा यह कहना मुश्किल है।

बता दें कि साल 1856 में अंग्रेज इंजीनियर इंचकेप ने इसका निर्माण करवाया था। साल 1993 में भूंकप के झटके से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इस पुल को सुधवाया गया तब से पुल पर राजधानी सहित दर्जनों मेल एक्सप्रेस, मालगाड़ी व पैसेंजर गाड़ियों का आवागमन जारी है।

150 साल पुराना यह पुल धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। लिहाजा इसके ठीक पास में वाराणसी-छपरा रेलखंड पर बकुल्हा मांझी रेलवे स्टेशनों के बीच सरयू नदी पर लगभग 300 करोड़ की लागत से नया पुल बन रहा है। लेकिन इसका निर्माण काफी धीमी गति से हो रहा है।

पिछले 10 सालों से बन रहे इस पुल का 95 फीसदी काम पूरा हो गया है लेकिन पुलिस का एक पाया निर्माण के साथ ही टेढ़ा हो गया। जिसकी मरम्मत में वक्त लगेगा। कहा जा रहा है कि पुल 6 महीने बाद ही बनकर तैयार हो पाएगा।

पूर्वोत्तर रेलवे जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि मांझी रेल पुल का कार्य जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था को आदेशित किया गया है, सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो गर्मी के मौसम में नए रेल पुल पर ट्रेनें दौड़ने लगेगी।

 

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MLA उमाशंकर ने विस में उठाया बंद पड़े ओवरहेड टैंकों व जर्जर बिजली तारों का मुद्दा

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बसपा विधायक उमाशंकर सिंह विधानसभा में बलिया से जुड़े मुद्दे उठाते रहते हैं। मंगलवार को विधायक सिंह ने जिले में बंद पड़े ओवरहेड टैंकों, जर्जर विद्युत तारों व डीएपी के अभाव का मुद्दा उठाया।

विधायक ने विधानसभा में अवगत करता हेुए बताया कि खनवर, कुरेजी, अठिलापुरा, सिसवार, हजौली, जाम, शाहमुहम्मदपुर के ओवर हेड टैंक चालू किए जाने के कुछ समय बाद ही बंद हो गए। पिपरा पट्टी बहीरापुर, प्रधानपुर में टैंक तैयार हैं फिर भी चालू नहीं किए जा सके। इसके चलते स्थानीय लोगों को काफी ज्यादा परेशानी हो रही हैं।

इसके साथ ही विधायक ने चिलकहर ब्लॉक में विद्युत आपूर्ति हेतु लगभग 50 वर्ष पुराने लगे 33 व 11 केवीए के जर्जर तारों को तत्काल बदलने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुराने जर्जर तारों से हादसे होने का डर बना रहता है। साथ ही बिजली आपूर्ति भी प्रभावित होती हैं ऐसे में जल्द से जल्द तारों को बदला जाए ताकि स्थानीय लोगों की परेशानी दूर हो सके।

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