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सरकारी कागजों में बलिया की सड़कें गड्ढा मुक्त, क्या है जमीनी हकीकत?

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20 सितंबर से 8 अक्टूबर तक जिले में गड्ढा मुक्त अभियान चलाकर सड़को को दुरुस्त करने का कार्य किया गया।

बलिया को गड्ढा मुक्त करने के लिए प्रशासन की ओर से एक अभियान चलाया गया। 20 सितंबर से 8 अक्टूबर तक जिले में गड्ढा मुक्त अभियान चलाकर सड़को को दुरुस्त करने का कार्य किया गया। जिले की टूटी-फूटी सड़कों के मरम्मत के लिए अभियान चलाया गया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सड़कें जमीन पर कम कागजों में ज्यादा गड्ढा मुक्त हुई हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अभियान की रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दिया गया है।

बलिया जिले के सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के तहत आने वाली सड़कों गड्ढा मुक्त किए जाने के लिए अभियान चलाई गई थी। इसके तहत लगभग 91 सड़कों के 43 किलोमीटर लंबाई को को गड्ढा मुक्त किया जाना था। गड्ढा मुक्त अभियान के नाम पर प्रशासन ने गड्ढों में गिट्टी और मिट्टी भरवा दिया। यह काम इस ढंग से किया गया कि तत्काल सड़क ठीक दिखने लगे। ताकि शासन को भेजे जा रहे रिपोर्ट में काम दिखाया जा सके।

बता दें कि इस अभियान के तहत बलिया के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जाना था। बारिश का मौसम होने की वजह से लंबे समय तक काम ठप ही रहा। लेकिन मौसम ठीक होने के बाद जब काम शुरू हुआ तब भी महज कोरम ही पूरा किया गया। ग्रामीण इलाकों की सड़कों के गड्ढों में गिट्टी और मिट्टी मिलाकर भर दिया गया। लेकिन काम पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद ये गड्ढे फिर से मुंह खोलकर बैठ गए हैं। शहरी इलाकों का भी हाल कमोबेश इसी तरह है। नगर के टीडी कॉलेज चौराहा से डीएम आवास होते हुए कुंवर सिंह चौराहा तक जाने वाली सड़क गड्ढा मुक्त किए जाने के कुछ ही दिनों बाद झांझर हो गई है। वाहनों की आवाजाही के साथ गड्ढों में भरे गए गिट्टी भी अपनी जगह बदल रहे हैं।

अपना बचाव करते हुए बलिया के सीआरओ और नगरीय क्षेत्र के नोडल अधिकारी ने मीडिया में बयान दिया है कि “सड़कों को पिच नहीं करना था। बल्कि गड्ढा मुक्त करना था। जो कि कर दिया गया है। बारिश की वजह से काम पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर काम बच गया है उसे जल्द ही निपटाया जाएगा।” गौरतलब है कि प्रशासन की ओर से जिन सड़कों को गड्ढा मुक्त किए जाने की रिपोर्ट भेजी गई है उनमें बलिया नगर पालिका की 12 सड़कें, रसड़ा नगर पालिका की दस, बेल्थरारोड नगर पंचायत की 16, रेवती नगर पंचायत की तीन, बांसडीह नगर पंचायत की 5, सिकंदरपुर नगर पंचायत की 3 सड़कें शामिल हैं।

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बलिया DM ने सुनी जनता की समस्या, पांच अधिकारियों का रोका वेतन !

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बलिया: सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी अदिति सिंह ने बैरिया तहसील में जनता की समस्याओं को सुना और त्वरित निस्तारण के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। इस दौरान तमाम तरह की समस्याएं आई, जिनमें कुछ का मौके पर निस्तारण कराया गया। वहीं, शेष समस्याओं को सम्बन्धित अधिकारियों को ​इस निर्देश के साथ सौंपा कि समयान्तर्गत व गुणवत्तापरक निस्तारण सुनिश्चित कराएं।

सम्पूर्ण समाधान दिवस पर अवैध कब्जे, राशन, पेंशन, भूमि विवाद सम्बन्धी मामले प्रमुख रूप से आए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से लें। कोई भी शिकायत डिफाल्डर की श्रेणी में नहीं जानी चाहिए। ध्यान रहे कि निस्तारण की गुणवत्ता भी बेहतर हो, ताकि शिकायकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो जाए। जिलाधिकारी ने पुलिस से जुड़ी समस्याओं को भी सुना और थाना प्रभारियों को आवश्यक दिशा—निर्देश दिए। इस अवसर पर सीडीओ प्रवीण वर्मा, एसडीएम अभय सिंह, सीओ अशोक मिश्र, डीएसओ केजी पांडेय, नायब तहसीलदार रजत सिंह, समाज कल्याण अधिकारी अभय सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी राजीव यादव समेत जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

समाधान दिवस में अनुपस्थित पांच अधिकारियों का रोका वेतन

बैरिया तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में पांच अधिकारियों का अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी अदिति सिंह ने उनका एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी की जनसुनवाई में जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता अनुपस्थित थे। तीन दिन के अंदर इन सभी अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है।

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बलिया: सहयोग राशि देने में वादा खिलाफी के आरोप पर क्या बोले विधायक धनंजय कन्नौजिया?

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बलिया के बेल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया पर एक राम कथा कार्यक्रम में मंच से 11 हजार रुपए का वादा करके सिर्फ 1 हजार देने का आरोप लगा है। राम कथा कार्यक्रम के आयोजकों ने विधायक धनंजय कन्नौजिया से नाराज होकर उन्हें 1 हजार रुपया लौटा दिया। साथ ही उन्हें दिया गया स्मृति चिन्ह भी वापस ले लिया। इस पूरे बखेड़े पर भाजपा विधायक ने चुप्पी तोड़ी है।

मंच से 11 हजार देने का वादा करके 1 हजार रुपए देने के आरोप पर विधायक धनंजय कन्नौजिया ने कहा है कि “मैंने ऐसी कोई घोषणा नहीं की थी। मंच से 11 रुपए देने की बात अफवाह है। लोग बेवजह मेरी छवि खराब करने के लिए इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। मैं कभी भी धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग राशि देने की घोषणा नहीं करता हूं।”

पूरा बखेड़ा समझिए: बलिया के बेल्थरारोड में पूरा और पतोई गांव द्वारा हर साल नवरात्र के समय राम कथा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। गांव के ही एक दुर्गा मंदिर पर इस साल भी यह आयोजन किया गया था। राम कथा कार्यक्रम में बेल्थरारोड से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया को बतौर अतिथि बुलाया गया था। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर मंच से धनंजय कन्नौजिया ने ग्यरह हजार की सहयोग राशि देने की घोषणा की। लेकिन बाद में पलट गए और सिर्फ एक हजार रुपया ही दिया। दिलचस्प बात यह है कि राम कथा कार्यक्रम का आयोजक खुद भारतीय जनता पार्टी का ही एक बूथ अध्यक्ष है।ग्यारह हजार का वादा कर एक हजार रुपया थमाने पर कार्यक्रम के आयोजक नाराज हो गए। आयोजकों ने विधायक धनन्जय कन्नौजिया को उनका एक हजार रुपया लौटा दिया। साथ ही कार्यक्रम में दिया गया स्मृति चिन्ह भी वापस ले लिया। आयोजकों ने इस बात की घोषणा बाकायदे मंच पर चढ़ कर दिया। आयोजकों द्वारा मंच से दी गई इस जानकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर रायता फैला रहा है।

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बलिया पुलिस ने तीन किसान नेताओं को किया नजरबंद, यह है वजह!

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बलिया के सुखपुरा से ख़बर, जहां तीन किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के किसान व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा पुतला दहन करने की घोषणा की थी। जिसके बाद गुरुवार शाम से ही तीनों किसानों नेताओं के नजरबंद किया गया है। शनिवार को भी यही हालात हैं।

किसान नेताओं में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला मंत्री व बोड़िया के यमुना प्रसाद वर्मा, किसान मजदूर शोषित गरीब असहाय संगठन के जिलाध्यक्ष शिव बहादुर यादव एवं संगठन मंत्री रामनाथ यादव (निवासी गण अपायल) शामिल हैं। इनके आवास पर एक-एक पुलिस कांस्टेबल की तैनाती की गई है। उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

पुलिस का पहरा इतना कड़ा है कि परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य कोई भी किसान नेताओं से नहीं मिल सकता। किसान नेताओं को ज़रा भी बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। जिसको लेकर अन्य किसान नेताओं में आक्रोश है। किसानों की नजरबंदी की विप्लव सिंह, पारसनाथ सिंह, विक्रमा राम, शिवजी राम, अख्तर अली, दीनानाथ सिंह, सुरेश राजभर, गुलाम राजभर, राजू सिंह, फुलमुहम्मद मास्टर आदि ने भर्त्सना की है। उनका कहना है कि यह कार्यवाही गलत है। सरकार कुछ भी कर ले, किसानों की आवाज को दबा नहीं पाएगी। किसान आखिर दम तक लड़न को तैयार हैं।

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