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बलिया में हेल्थ एटीएम शुरू, 40 तरह की होगी जांच

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बलिया । स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में शासन द्वारा तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग में अब एक नई कवायद तेज हो गई है। बलिया में हेल्थ एटीएम की स्थापना की तैयारी चल रही है, इससे मरीजों को काफी सहूलियत होगी।  प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा निजी स्तर पर भी इस तरह की व्यवस्था के संचालन को लेकर मंथन किया जा रहा है। लैब, अस्पताल, मेडिकल स्टोर व अन्य निजी संस्थानों से संपर्क कर हेल्थ एटीएम लगवाए जाएंगे। इसमें स्वास्थ्य से संबंधित 58 प्रकार की जांच कराने की सुविधा मिलेगी। इसी उद्देश्य के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर में 4 अक्टूबर को एक हेल्थ एटीएम स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त बैरिया ब्लाक स्थित रानी बाजार में भी एक निजी संस्थान द्वारा हेल्थ एटीएम स्थापना का कार्य प्रक्रियाधीन है।जनपद के हेल्थ एटीएम नोडल अधिकारी डॉ अभिषेक मिश्रा ने बताया कि हेल्थ एटीएम सामान्य ऑटोमेटेड ट्रांजैक्शन मशीन के जैसा ही दिखता है एवं इसका आकार और ऊंचाई भी सामान्य एटीएम जैसी ही होती है। इस हेल्थ एटीएम के द्वारा मात्र 15 से 20 मिनट के अंदर 40 से अधिक प्रकार के जांचो को किया जा सकेंगा। जिसमें ब्लड प्रेशर, बोन मास, BMI, बॉडी हाइड्रेशन, मेटाबॉलिक रेट, बॉडी फैट परसेंटेज, टेंम्परेचर, ऑक्सीजन सैचुरेशन, सामान्य खून की जांच जैसे कि लिपिड प्रोफाइल, हीमोग्लोबिन, पेशाब की जांच, गर्भावस्था की जांच आदि के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, HIV आदि की जांच भी की जा सकेगी।

इस मशीन के द्वारा ईसीजी, स्किन एवं कान की भी जांच की जा सकेगी। इसके साथ ही मशीन द्वारा प्रिंटेड रिपोर्ट तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करते हुए auto-generated कंसल्टेशन भी प्रदान किया जाता है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि पैथोलॉजी लैब में संचालित सामान्य मशीन में व्यक्ति की नसों से लगभग 5ml के आसपास खून लेना होता है और जांच के नतीजे आने में कम से कम 2 से 3 घंटों का समय लगता है, अधिकतर मामलों में तो जांच रिपोर्ट अगले दिन ही दी जाती है। जबकि हेल्थ एटीएम में उपरोक्त सभी जाचो को करने के लिए मात्र तीन से चार बूंद रक्त की आवश्यकता होती है। जिस प्रकार ग्लूकोमीटर द्वारा जांच हेतु उंगली को प्रिक करके कैपिलरी ब्लड लिया जाता है, उसी प्रकार हेल्थ एटीएम से जांच हेतु भी कैपिलरी ब्लड लिया जाता है।हेल्थ एटीएम में जाचो के साथ-साथ टेलीकंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध होती है। हेल्थ एटीएम एक ऐसी यूनिट है जिसमें सामान्य शारीरिक जांच, खून, पेशाब आदि की जांच के साथ-साथ टेलीकंसल्टेशन भी दिया जा सकता है। वर्तमान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पर स्थापित हेल्थ एटीएम “योलो” कंपनी का है जो पूरी तरह स्वदेशी है तथा भारतीय तकनीक द्वारा निर्मित है। हेल्थ एटीएम के क्रियान्वयन से सुदूर ग्रामीण अंचलों में चिकित्सक तथा प्रयोगशाला की कमी को दूर किया जा सकेगा।

इंस्टॉलेशन के साथ ही योलो कंम्पनी से आए इंजीनियर नरेंद्र द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर पर कार्यरत उमेश चंद्र तिवारी प्रयोगशाला प्राविद्धिग्य, नंदलाल नेत्र परीक्षण अधिकारी, अशोक यादव फार्मासिस्ट, पुष्कर राय स्टाफ नर्स आदि को हेल्थ एटीएम के संचालन हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यशाला 2 दिनों तक चलेगी। हेल्थ एटीएम स्थापना के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर के अधीक्षक डॉ. व्यास कुमार, डॉ. दिग्विजय कुमार, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. अभिषेक राय, डॉ. मुख्तार यादव, आदि उपस्थित रहे।

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बलिया के कई औषधि विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित, दवाई क्रय-विक्रय पर लगा प्रतिबंध

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बलिया में औषधि विभाग के द्वारा चलाए गए निरीक्षण अभियान में पाई गई अनियमितता के बाद कई औषधी विक्रय प्रतिष्ठानों का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। इनसे औषधि क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

बता दें कि औषधि निरीक्षक ,खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बताया है कि प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के दौरान कमियाँ पायी गयी थी। इस दौरान अग्रिम कार्यवाही हेतु सहायक आयुक्त (औषधि), आजमगढ़ मण्डल, आजमगढ़ को प्रेषित की गयी थी। सहायक आयुक्त (औषधि), आजमगढ़ मण्डल, आजमगढ़ द्वारा पायी गयी कमियों के सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।इस दौरान औषधि विक्रय प्रतिष्ठानों के द्वारा संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं दिया गया। जिसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। अब निलम्बन की अवधि के दौरान औषधियों का क्रय-विक्रय किया जाना अवैधानिक होगा एवं ऐसा करते हुए पाये जाने पर सम्बन्धित औषधि विक्रय प्रतिष्ठान के विरूद्ध औषधि एवं प्रशासन सामग्री अधिनियम-1940 के अन्तर्गत अग्रिम कानूनी कार्यवाही कर दी जायेगी।

निलम्बित किये गये प्रतिष्ठानों में मेसर्स रेशमा मेडिकल स्टोर, हास्पिटल रोड, मेसर्स के.जी.एन. मेडिकल स्टोर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र के सामने नियर रेवती हास्पीटल, पो0-रेवती, तथा मेसर्स महेश्वरी मेडिकल स्टोर, बंदुचक, पोस्ट- बाबूबेल, थाना- हल्दी, और मेसर्स मनोज मेडिकल स्टोर, केवरा, पो०- केवरा, थाना बासडीह, शामिल है।

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सुरहाताल में नौकायन से पहले स्थानीय नाविकों को दिया गया प्रशिक्षण

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बलिया के सुरहा ताल में 10 दिसंबर से पक्षी महोत्सव का शुभारंभ होगा। इसमें नौकायन भी होगा। इसको लेकर नावों के सफल संचालन के लिए स्थानीय नाविकों का एक दिवसीय प्रशिक्षण रखा गया।

बता दें कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, बलिया व रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश नाव सुरक्षा एवं नाविक कल्याण नीति के अंतर्गत तैयार की गई एसओपी के बारे विस्तृत रूप से नाविकों को बताया गया। नाविकों को लाइफ जैकेट को सही तरीके से पहनने, लाइफ व्याय रिंग के प्रयोग तथा नाव के रखरखाव एवं परिचालन में विशेष सावधानी बरतने के संबंध में विस्तृत रूप से प्रशिक्षित किया गया।

उक्त प्रशिक्षण में जिला आपदा विशेषज्ञ पीयूष सिंह बघेल, नायब तहसीलदार संत विजय सिंह ,रेड क्रॉस सोसाइटी से शैलेंद्र कुमार पांडे,अभिषेक राय तथा जनपद के प्रशिक्षित आपदा मित्र धर्मेंद्र ठाकुर ,राजकिशोर यादव सहित सुरहा ताल के आसपास के लगभग 2 दर्जन नाविक उपस्थित रहे।

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बलियाः 10 साल बीते पर अब तक बनकर तैयार नहीं हुआ मांझी रेल पुल

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बलिया में विकास कार्यों की रफ्तार कितनी धीमी है, इसका अंदाजा लगाने के लिए मांझी रेल पुल ही काफी है। पिछले 10 सालों से निर्माणाधीन इस पुल का काम आजतक पूरा नहीं हुआ है। लोग अब भी पुल के पूरी तरह बनने की बांट जोह रहे हैं लेकिन पुल कब तक बनकर तैयार होगा यह कहना मुश्किल है।

बता दें कि साल 1856 में अंग्रेज इंजीनियर इंचकेप ने इसका निर्माण करवाया था। साल 1993 में भूंकप के झटके से पुल क्षतिग्रस्त हो गया। इस पुल को सुधवाया गया तब से पुल पर राजधानी सहित दर्जनों मेल एक्सप्रेस, मालगाड़ी व पैसेंजर गाड़ियों का आवागमन जारी है।

150 साल पुराना यह पुल धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। लिहाजा इसके ठीक पास में वाराणसी-छपरा रेलखंड पर बकुल्हा मांझी रेलवे स्टेशनों के बीच सरयू नदी पर लगभग 300 करोड़ की लागत से नया पुल बन रहा है। लेकिन इसका निर्माण काफी धीमी गति से हो रहा है।

पिछले 10 सालों से बन रहे इस पुल का 95 फीसदी काम पूरा हो गया है लेकिन पुलिस का एक पाया निर्माण के साथ ही टेढ़ा हो गया। जिसकी मरम्मत में वक्त लगेगा। कहा जा रहा है कि पुल 6 महीने बाद ही बनकर तैयार हो पाएगा।

पूर्वोत्तर रेलवे जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि मांझी रेल पुल का कार्य जल्द से जल्द पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था को आदेशित किया गया है, सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो गर्मी के मौसम में नए रेल पुल पर ट्रेनें दौड़ने लगेगी।

 

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