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IAS जुनैद अहमद का बलिया से ट्रांसफर, झांसी के मुख्य विकास अधिकारी बनें

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उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 13 आईएएस अधिकारियों के तबादला और पोस्टिंग के आदेश जारी किए हैं। इस लिस्ट में बलिया में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/सदर एसडीएम के पद पर रहे आईएएस जुनैद अहमद का ट्रांसफर कर दिया गया हैं। अब उन्हे झांसी जिले का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है।

कौन हैं आईएएस जुनैद अहमद-  UPSC परीक्षा 2018 के टॉपर IAS अफसर जुनैद अहमद बलिया के सदर SDM के रुप में कार्यरत थे। जुलाई 2021 में जुनैद अहमद को बलिया सदर एसडीएम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जुनैद उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता जावेद हुसैन पेशे से वकील हैं और मां आयश रजा एक हाउस मेकर हैंय़ जुनैद शुरु से ही पढ़ाई में औसत छात्र थे। दसवीं और 12वीं की परीक्षा में उनके लगभग 60 फीसदी ही अंक आए। 12वीं के बाद शारदा यूनिवर्सिटी, नोएडा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वहां भी उनके 65 फीसदी तक ही अंक आए। कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद जुनैद के मन में IAS अधिकारी बनने का सपना जागा, इस पर लोग कहते थे कि 60 प्रतिशत वाला कोई औसत छात्र आईएएस नहीं बन सकता। पर जुनैद ने हार नहीं मानी।

पांचवे प्रयास में बने UPSC टॉपर– जुनैद ने 2013 से सिविल सर्विसेज की तैयारी की। शुरुआत से अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर न रहने वाले जुनैद ने इस बार लगन के साथ पढ़ाई की। जुनैद ने सिविल सर्विसेज 2018 की परीक्षा में ऑल ओवर इंडिया में तीसरी रैंक हासिल की थी। अपने पहले तीन प्रयास में जुनैद अहमद को असफलता मिली। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और चौथे प्रयास में कामयाबी हासिल की। चौथे प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा तो पास कर ली लेकिन रैंक 352 आई। ऐसे में उनको आईआरएस सेवा मिली लेकिन उनका सपना आईएएस बनना था। तो वह दोबारा तैयारी में लग गए और पांचवे प्रयास में पूरे देश में तीसरी रैंक हासिल कर आईएएस बने।

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टशन में रह गए बलिया के बड़े अधिकारी और दिनदहाड़े हो गया खेल!

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बलिया में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता बेहद ही संवेदनशील मामला उजागर हुआ है। जहां एक आरोपी ने न सिर्फ़ अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकी बल्कि फर्जी अधिकारी बनकर अधिकारियों के साथ ही छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में कुछ व्यापारियों को गिरफ्तार भी किया गया। अब व्यापारी फर्जी अधिकारी के साथ मौजूद अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

नाम बदलकर पैसा ऐंठता है आरोपी- बता दें कि जड़ी बूटी विक्रेता पारसनाथ गुप्ता, रोशन कुमार पटेल, संदीप कुमार, संजीव कुमार और अनिल कुमार को वन विभाग ने बीते 18 और 19 सितंबर को छापा मारके आपत्तिजनक सामग्री बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस बीच पीड़ित परिजनों को हरियाणा के जिंद जिले के एसपी ने फोन कर बताया कि आप लोगों की दुकानों पर छापेमारी के दिन जो वन अधिकारी बनकर गया था। वे कोई अधिकारी नहीं बल्कि फर्जी आदमी है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग- आरोपी दीपक की इसके पहले कई जगह गिरफ्तारी भी हुई है। बीते दिनों अयोध्या में भी उसकी गिरफ्तारी हुई थी। हर जगह वे अपना नाम बदल कर घटना को अंजाम देता है, फिर पैसा ऐंठकर फुर्र हो जाता है। यह खबर आग की तरह व्यापारियों में फैलते ही व्यापारियों ने ओकडेगंज पुलिस चौकी के सामने चक्काजाम कर दिया। शनिवार को कलेक्ट्रेट में भी प्रदर्शन किया। और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

सवालों में प्रशासन- सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस दिन दीपक फर्जी वन अधिकारी बनकर छापेमारी करने आया था उस दिन साथ में डीएफओ, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी भी जांच के दौरान मौजूद थे। क्या किसी की आंखें फर्जी वन अधिकारी को नहीं पहचान पाई। जबकि पुलिस को स्कैनिंग करने की खास ट्रैनिंग दी जाती है। बावजूद जिस तरह दीपक ने सबकी आंखों में धूल झोंका है। उससे यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि डीएफओ, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी अपने पद के काबिल नहीं है।

जिले में शिवम ठाकुर बनकर दिया घटना को अंजाम –  बता दें कि फर्जी वन अधिकारी का असल नाम दीपक है। जबकि 18 और 19 सितंबर को जिस दिन चौक में छापेमारी हुई थी, उस दिन दीपक अपना नाम शिवम ठाकुर बताया था। इतना ही नहीं डीएफओ के पास भी जो दस्तावेज दिए उसमें वे शिवम ठाकुर ही बताया। लेकिन अधिकारियों ने दस्तावेज का वेरिफिकेशन नहीं किया। 

पहले से मामले हैं दर्ज-  उसके ऊपर पहले से ही 420 ई ब्लैक मेलिंग के मुकदमे दर्ज हैं। जब इस बात की सूचना बलिया मे पहुंची तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वही व्यापार मंडल ने इस मामले को डीएम के समक्ष रखकर व्यापारियों की रिहाई और संलिप्त अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। अब सवाल यह है कि जालसाज इतनी बड़ी साजिश को स्थानयी पुलिस और अधिकारियों के सामने अंजाम देता हैं और किसी को इसकी भनक तक नहीं पड़ती।

रिपोर्ट- तिलक कुमार 

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बलिया स्वास्थ्य विभाग मे 152 फर्जी नियुक्तियों की जांच जारी, सिर्फ 141 कर्मचारी ही बता पाए दस्तावेज

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बलिया के स्वास्थ्य विभाग में 152 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति का मामला उजागर होने के बाद एक्शन लिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में गठित टीम मामले की बारीकी से जांच कर रही है। इस जांच में सिर्फ 141 कर्मचारियों ही अपना मूल डॉक्यूमेंट और उसकी फोटो कॉपी जांच कमेटी के सामने प्रस्तुत कर पाए।

जबकि साल 2009 से 2017  तक सी.एच.सी. और पी.एच.सी. मिलाकर कुल 352 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। जिसमें से 152 नियुक्त कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति किए जाने की शिकायत शासन से की गई थी। इसलिए अभी 152 नियुक्तियों को ही टारगेट रखकर जांच की जा रही है। इसके बाद शेष नियुक्तियों की जांच की जाएगी।

बता दें कि वर्ष 2009 से 2017 के बीच स्वास्थ महकमे में 352 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को नियुक्ति दी गयी थी। जिसे फर्जी बताते हुए शासन से शिकायत की गई। जिसके चलते सभी कर्मचारी नियुक्ति से संबंधित सभी मूल दस्तावेजों के साथ सीएमओ कार्यालय पर जांच के लिए जांच कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर अपने डॉक्यूमेंट्स जमा करने पहुंचे हैं।

जांच टीम में शामिल सिटी मजिस्ट्रेट का कहना है कि  2009 से 2017 के बीच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के फर्जी होने की शिकायत शासन स्तर पर की गई है कि यह जो नियुक्तियां हैं फर्जी हैं। इस संबंध में हम लोग टीम गठित करके जांच हेतु यहां पर एकत्रित हुए थे सभी पीएचसी सीएचसी पर नियुक्त वार्ड, बॉय स्वीपर चौकीदार आदि पदों पर नियुक्त सभी कर्मचारी लोग आए थे। अभी 141 कर्मचारियों ने ही अपने डॉक्यूमेंट्स जमा कराए हैं।

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Ballia- बांसडीह में डूबते विकास की तस्वीर! चर्चित समाजसेवी ने जलभराव में खड़े होकर किया प्रदर्शन

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बलिया। बलिया की बांसडीह विधानसभा से डूबते विकास की तस्वीर सामने आई है। यहां की सड़कें पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। जिनमें घुटनों तक पानी भरा रहता है। सड़कों की इस बदतर हालत पर अब लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। पूर्वांचल के चर्चित समाजसेवी पत्रकार ब्रज भूषण दूबे जब सुखपुरा चौराहे से गुजरे तो उन्होंने देखा कि सड़क के भयंकर गड्ढे में गाड़ियां फंसी हैं, लोग चोटिल हो रहे हैं। यह सब दृश्य देखकर उन्होंने वहीं मोर्चा खोल दिया।

वह सड़क के जलजमाव के बीच घुटने बराबर गड्ढे में घुस गए और अपनी नाराजगी जताते हुए सांसद रवींद्र कुशवाहा, विधायक केतकी सिंह, डीएम व सीडीओ के नाम लिखी तख्ती जलाकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि अब तक गंभीर रूप से कई दर्जन लोग चोटिल हो चुके हैं। सत्ता अच्छी सड़कों का भले ही दावा क्यों न करे, लेकिन जमीन पर बहुत भयावह स्थिति है। सबसे खास बात यह है कि कमियां दिखाने के बाद भी इन्हें समस्याओं का संज्ञान नहीं होता।

उन्होंने खराब सड़कों को लेकर विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी समस्या है, पर विपक्ष अपने धर्म का पालन नहीं कर रहा है। कारण यह कि उनके समय में भी सड़कों की हालत ऐसी ही थी। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक केतकी सिंह, क्षेत्रीय सांसद रविंद्र कुशवाहा के साथ बलिया के जिलाधिकारी मुख्य विकास अधिकारी और विपक्षी पार्टी के नेताओं को भी जमकर ललकारा।

हैरानी की बात यह है कि विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश के अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी का भी घर है। लेकिन फिर भी यहां की सड़कों की हालत दयनीय है। ऐसे में समाजसेवी ने कहा कि हम फोकट में अच्छी सड़कें नहीं मांग रहे हैं हम सड़कों का टैक्स देते हैं और अच्छी सड़कों पर चलना हमारा मौलिक अधिकार है। उन्होंने बलिया के जिला प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया। उनका कहना है कि अगर फिर भी सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जन आंदोलन किया जाएगा।

कौन हैं ब्रजभूषण दुबे ?- ब्रजभूषण दुबे बलिया के पड़ोसी जिले गाजीपुर रहने वाले हैं । चर्चित यूट्यूबर होने के साथ- साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। हाल ही में  ब्रजभूषण दुबे को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की उपस्थिति में श्रीनगर में श्री शारदा शताब्दी सम्मान से नवाजा गया था। ब्रज भूषण दुबे द्वारा चलाए जा रहे रक्तदान, नेत्रदान, देहदान के अलावा विविध सामाजिक क्षेत्रों एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन जैसे उत्कृष्ट कार्य की सराहना होती रहती हैं। ब्रजभूषण दुबे के यूट्यूब  पर विडिओ के लाखों – लाखों में व्यू जाते हैं।

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