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बलिया – बैंकों की तरह अब कोटेदारों के यहां ऐसे मिलेगा राशन!

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बलिया डेस्क : ग्रामीण क्षेत्र में कोटेदार की दुकान पर सोशल डिस्टेंस का पूरी तरह पालन हो सके, इसके लिए जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अंतर्गत 12494 मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न (चावल) के वितरण के सम्बंध में अलग व्यवस्था लागू की है। बैंकों की तरह अब कोटेदार के यहां भी राशन कार्ड में अंकित इकाई के अंक के आधार पर तिथि तय की गई है, उसी अनुसार राशन मिलेगा। उन्होंने सभी कार्डधारक को अपने राशन कार्ड में अंकित इकाई के अंक के आधार पर ही राशन लेने के लिए दुकान पर जाने को कहा है। इस व्यवस्था के अनुसार वितरण नहीं करने वाले कोटेदार पर भी कार्रवाई होगी।

व्यवस्था की जानकारी देते हुए जिलाधिकारी ने बताया कि अंत्योदय एवं पात्र गृहस्थी राशन कार्ड में जिनके इकाई का अंक 0 होगा, उनको 15 अप्रैल को राशन मिलेगा। इसी प्रकार जिनके राशन कार्ड में इकाई का अंक 1 होगा उनको 16 अप्रैल को, 2 होगा उनको 17 अप्रैल को, 3 होगा तो 18 अप्रैल को, 4 होगा तो 19 अप्रैल को, 5 होगा तो 20 अप्रैल को, 6 होगा तो 21 अप्रैल को, 7 होगा तो 22 अप्रैल को, 8 होगा तो 23 अप्रैल को और इकाई का अंक 9 होगा तो 24 अप्रैल को राशन मिलेगा। जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को यह सुनिश्चित कराने को कहा है कि कोटेदार के माध्यम से इसी आधार पर राशन वितरण कराया जाए। इससे उचित दर दुकानदारों के यहां भीड़ नहीं होगी।

कोई दुकान सम्बद्ध है तो उसके लिए अलग निर्देश

अगर कोई दुकान किसी अन्य दुकानदार के यहां सम्बद्ध है तो उनके लिए अलग निर्देश है। ऐसे कोटेदार अपने स्वयं के कार्डधारको के राशन कार्ड में अंकित इकाई के अंक 0 व 1 का वितरण 15 अप्रैल को, इकाई अंक 2 व 3 वालों को 16 अप्रैल, 4 व 5 वाले कार्डधारक को 17 अप्रैल, 6 व 7 वाले को 18 अप्रैल, 8 व 9 अंक वाले कार्डधारकों को 19 अप्रैल को राशन देंगे। जबकि, सम्बद्ध दुकान के कार्डधारकों के इकाई अंक 0 व 1 वाले को 20 अप्रैल को, 2 व 3 वाले को 21 अप्रैल, 4 व 5 वाले कार्डधारक को 22 अप्रैल, 6 व 7 अंक वाले को 23 अप्रैल और 8 व 9 अंक वाले राशन कार्डधारक को 24 अप्रैल को वितरण करेंगे। इस बीच छूटे हुए कार्डधारक को 25 अप्रैल तथा उसके बाद भी छूटे कार्डधारक को प्राक्सी के माध्यम से 26 अप्रैल को वितरण किया जाए। 26 अप्रैल को उन्हीं लाभार्थियों में वितरण किया जाए, जिनका अंगूठा 15 से 25 अप्रैल के बीच ई-पास मशीन में मैच ना कर पाया हो।

सुबह 6 से शाम 6 बजे तक वितरण, बरतें ये सावधानी

जिलाधिकारी ने बताया कि 15 अप्रैल से 26 अप्रैल तक सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक वितरण करें। इस दौरान दुकान पर साबुन, पानी, सैनिटाइजर रख वितरण से पहले कार्डधारक का हाथ ठीक से धुलवाया जाए। दुकान पर भीड़ न हो और सोशल डिस्टेंस का पूरी तरह पालन हो। बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना अंतर्गत अप्रैल और मई महीने में निशुल्क वितरण के लिए 12494 मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न (चावल) का वितरण होना है।

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सांसद नीरज शेखर ने रेल मंत्री से की मांग, बलिया से चले कामायनी एवं सुहेलदेव एक्सप्रेस

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बलिया। भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने शनिवार को भारत सरकार के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा है। राजधानी नई दिल्ली में नीरज शेखर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मांग की है कि कामायनी एक्सप्रेस और सुहेलदेव एक्सप्रेस को बलिया से चलाया जाए। ताकि बलिया की जनता भी इन दोनों एक्सप्रेस ट्रेनों का लाभ आसानी से ले सके।

राज्यसभा सांसद नीरज शेखरर ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र सौंपकर सात मांगें की हैं। नीरज शेखर ने कामायनी एक्सप्रेस और सुहेलदेव एक्सप्रेस को बलिया से चलाने की मांग की है। इसके अलावा हमसफर एक्सप्रेस का स्टॉप बलिया रेलवे स्टेशन पर तीन दिन करने, हरिहर नाथ एक्सप्रेस में एसी कोच की संख्या बढ़ाने की भी मांग की है।

बता दें कि कामायनी एक्सप्रेस वाराणसी से चलकर बांद्रा तक जाती है। तो वहीं सुहेलदेव एक्सप्रेस गाजीपुर से चलकर आनंद बिहार टर्मिनल तक जाती है। सांसद नीरज शेखर ने अब इन दोनों ट्रेनों को बलिया से चलाने की मांग की है। बलिया के लोगों को इन ट्रेनों से सफर करने के लिए पहले वाराणसी और गाजीपुर जाना पड़ता है। जबकि बलिया से चलाने पर दोनों के रास्ते में वाराणसी और गाजीपुर आ सकते हैं।

बलिया रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए मकराना पत्थर लगाने की मांग भी सांसद नीरज शेखर ने की है। बलिया शहर में स्थित रेलवे स्टेशन पर शहर के दोनों छोर को जोड़ने वाले फुट ओवरब्रिज के मरम्मत की मांग भी रखी गई है। चुनाव नजदीक है तो लोगों को उम्मीद है कि ये मांगें पूरी हो जाएंगी। लेकिन देखना होगा कि रेल मंत्रालय नीरज शेखर के पत्र पर क्या संज्ञान लेता है।

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बलिया की करिश्मा ने किया करिश्माई प्रदर्शन, बड़ी परीक्षा में हासिल किया पहला स्थान

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बलिया की करिश्मा खानम ने यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता पद के लिए हुए चयन परीक्षा में पहला रैंक हासिल किया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की चयन परीक्षा में बलिया जिले की करिश्मा खानम ने सहायक अभियंता के पद को अपना नाम कर लिया है। करिश्मा खानम जिले के दुबहड़ ब्लॉक घोड़हरा गांव की रहने वाली हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की चयन परीक्षा में करिश्मा पहले पायदान पर काबिज हैं। करिश्मा की करिश्माई प्रदर्शन ने जिले का नाम प्रदेश भर में ऊंचा कर दिया है।

बलिया की करिश्मा ने अपनी इस सफलता को माता सदरून निशा और पिता डा. इकबाल अहमद को समर्पित किया है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन ऑफ इंडिया कहे जाने वाले डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी प्रेरणा मानने वाली करिश्मा ने सहायक अभियंता चयन परीक्षा पहला रैंक लाकर जिले को गौरवान्वित किया है। उनकी इस सफलता पर जिले भर के लोग खुश हैं।

करिश्मा खानम की शुरुआती शिक्षा बलिया में ही हुई। उन्होंने बलिया के नगवा स्थित शहीद मंगल पांडेय इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा पास की। 2012 में हाईस्कूल की परीक्षा में करिश्मा ने 85.6 फीसदी अंक हासिल किया था। इसके बाद करिश्म ने बलिया के टाउन पॉलीटेक्निक से डिप्लोमा की डिग्री हासिल की।

करिश्मा पढ़ाई-लिखाई में हमेशा से ही होनहार रही हैं। 2015 में बीटेक में प्रवेश लेने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) की ओर से आयोजित परीक्षा में दूसरा रैंक पर अपनी जगह बनाई थी। 2018 में उन्होंने अपना इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में बीटेक पूरा किया। कानपुर के हार्कोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) से 83.5 प्रतिशत अंकों के साथ करिश्मा ने बीटेक की डिग्री हासिल की।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के सहायक अभियंता पद के लिए हुए चयन परीक्षा के पहले करिश्मा खानम ने दिल्ली में कोचिंग किया। उसके बाद स्व अध्ययन यानी सेल्फ स्टडी से ही यह सफलता प्राप्त की है। बता दें कि सहायक अभियंता के कुल ग्यारह पदों के लिए यह चयन परीक्षा आयोजित की गई थी। जिसमें करिश्मा खानम ने पहले स्थान पर ही अपना नाम दर्ज करवा लिया है।

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पूर्वांचल को प्रधानमंत्री दे रहे भर-हाथ सौगात, बलिया के हिस्से सिर्फ वादे क्यों?

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भारत के प्रधानमंत्री और भाजपा के खेवनहार नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिया हो चुके हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक ही मंच से योजनाओं-परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं। पूर्वांचल को भी खूब उपहार दिए जा रहे हैं। तो सवाल है कि पूर्वांचल के एक बड़े जनपद बलिया को क्या मिल रहा है?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। इनमें अकेले पूर्वांचल के खाते में 160 से अधिक सीटें मौजूद हैं। ऐसे में पूर्वांचल का राजनीतिक महत्व हर दल और नेता जानते हैं। खबरों के मुताबिक पिछले दो महीने प्रधानमंत्री तीन बार पूर्वांचल का दौरा कर चुके हैं। इस महीने यानी दिसंबर में भी उनके दो दौरे होने वाले हैं। आगामी 7 दिसंबर को प्रधानमंत्री गोरखपुर और 13 दिसंबर को वाराणसी में पधारेंगे। दोनों ही जिलों में पीएम मोदी कई परियोजनाओं का लोकार्पण करने वाले हैं।

वाराणसी से बहुत दूर नहीं है बलिया जनपद। यहां कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक विराजमान हैं। लेकिन पूर्वांचल में परियोजनाओं के बौछार के बीच बलिया में सूखा पड़ा हुआ है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य किसी भी क्षेत्र में बलिया को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से क्या मिला ये बड़ा सवाल है।

बीते महीने की 16 तारिख को प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण किया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे नौ जिलों से होकर गुजरता है। लेकिन बलिया की पहुंच से यह एक्सप्रेस-वे कोसों दूर है। बलिया के लोगों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सफर करने के लिए काफी सोचना पड़ेगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बलिया के पड़ोसी जिला गाजीपुर से होकर जाता है। बलिया के लोगों को पहले यहां तक पहुंचना होगा। सरकार की ओर से बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए एक लिंक एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना है। लेकिन अब तक लिंक एक्सप्रेस-वे कहीं धरातल पर नहीं दिखती है।

लिंक एक्सप्रेस-वे का काम पहले यूपीडा को सौंपी गई थी। लेकिन अब इसे एनएचएआई को थमा दिया गया है। पचास करोड़ की राशि भी आवंटित की गई थी। जिसे अब यूपीडा एनएचएआई को देगी। लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट भी गलत बनाया गया था। तकरीबन सोलह गांवों में लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट में एनएच-31 के रूट पर ही बना दिया गया था। लिंक एक्सप्रेस-वे कब तक बनकर तैयार होगा कहा नहीं जा सकता।

हिंदुस्तान की एक खबर के अनुसार 7 दिसंबर को गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर की नौ लैबों का लोकार्पण करेंगे। बलिया जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग लंबे अरसे से हो रही है। गत 25 अक्‍टूबर को प्रधानमंत्री ने सिद्धार्थनगर से उत्तर प्रदेश के नौ मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया था। लेकिन इनमें से एक भी बलिया की जमीन पर नहीं है। जिले में एक भी कायदे की सरकारी अस्पताल नहीं है। गंभीर रोगियों को वाराणसी के बीएचयू में रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल भ्रष्टाचार और दुर्व्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। यह बात खुद भाजपा नेता रामइकाबल सिंह ही कई बार कह चुके हैं। जिला अस्पताल की जर्जर हालत को लेकर जिले के छात्रों ने कुछ ही महीने पहले बलिया बंद का आयोजन किया था।

गत 20 अक्‍टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। बलिया जिले में एयरपोर्ट बनाने की मांग कई सालों से हो रही है। लेकिन सरकार का ध्यान इस ओर नहीं गया है। अक्सर भाजपा के मंत्री और सांसद-विधायक यह तर्क देते नजर आते हैं कि बलिया में एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि रसड़ा से बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह ने पिछले दिनों के एक अखबार के कार्यक्रम में भाजपा सरकार में मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला की मौजदूगी में कहा था कि “सरकार चाहे तो मैं अपनी जमीन देने को तैयार हूं।”

बलिया जिले की कुल आबादी तीस लाख से अधिक है। बेरोजगारी के मामले में बलिया प्रदेश भर के अग्रणी जिलों में शुमार है। बेरोजगारी का आलम ये है कि लाखों की संख्या में नौजवान जिले से पलायन करने पर मजबूर हैं। युवा दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में जाकर मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं। क्योंकि बलिया में कल-कारखाने या रोजगार के अन्य साधन चौपट हैं। फैक्ट्री लगाने की मांग भी मेडिकल कॉलेज और एयरपोर्ट की ही तरह हो रही है। लेकिन यहां भी हाल वही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव बस कुछ ही महीनों बाद होने वाला है। प्रदेश की सत्ता में वापसी करना भाजपा के लिए एक चुनौती है। जिससे निपटने के लिए भाजपा ने अपने सबसे बड़े खिलाड़ी को मैदान में उतार दिया है। परियोजनाओं की बाढ़-सी आई हुई है। बलिया के लोग निहार रहे हैं कि इस बाढ़ की कोई धारा उन तक पहुंचेगी या मंचों से बड़े-बड़े दावों के बारिश से ही खुद को सराबोर करना होगा?

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