Connect with us

बलिया

मनीष गुप्ता हत्याकांड: आरोपित दारोगा की तलाश में बलिया पहुंची पुलिस, क्या हाथ लगा?

Published

on

मनीष गुप्ता की हत्या के आरोपितों में एक नाम बलिया के नरहीं थाना क्षेत्र के निवासी दारोगा अक्षय कुमार मिश्रा का भी नाम है। (तस्वीर: मनीष गुप्ता)

उत्तर प्रदेश के व्यापारी मनीष गुप्ता हत्याकांड मामले में पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है। मनीष गुप्ता की हत्या के आरोपितों में एक नाम बलिया के नरहीं थाना क्षेत्र के निवासी दारोगा का भी नाम है। नरहीं के कोट गांव के रहने वाले दारोगा अक्षय कुमार मिश्र की तलाश में कानपुर पुलिस की एक टीम गत गुरूवार को बलिया पहुंची। कानपुर पुलिस ने कोट में जांच-पड़ताल की। साथ ही ग्रामिणों से भी अक्षय कुमार मिश्रा के बारे में पूछताछ की।

कोट गांव में कानपुर पुलिस की टीम के हाथ कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस ने अक्षय कुमार मिश्र के परिवार वालों से बातचीत की। गांववालों से बात करने के बाद अंत में पुलिसकर्मियों को खाली हाथ लौटना पड़ा। परिजनों और ग्रामिणों से पुलिस को आरोपित का कुछ अता-पता नहीं चल सका। कोट में हुई इस दौरे पर पुलिस को इस बात की जानकारी मिली कि अक्षय कुमार मिश्रा ने बाराबंकी में मकान बनवा लिया था और वहीं रहता था।

नरहीं थाना के एसओ ने इस बाबत मीडिया को जानकारी दी कि “कानपुर पुलिस आरोपित दारोगा अक्षय कुमार मिश्रा की तलाश में आई थी। पुलिस की सहायता के लिए नरहीं थाने के पुलिसकर्मियों को भेजा गया था।” बता दें कि अक्षय कुमार मिश्र के खिलाफ गोरखपुर में मुकदमा दर्ज किया गया है। गोरखपुर पुलिस में अक्षय कुमार मिश्र पर 25 हजार के इनाम की घोषणा भी की है।

गौरतलब है कि कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता की पिछले दिनों हत्या कर दी गई थी। मनीष गुप्ता अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर गए हुए थे। गोरखपुर के एक होटल में ही पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि पुलिस वालों ने ही शराब के नशे में मनीष गुप्ता का कत्ल कर दिया। इस मामले में गोरखपुर पुलिस में कई पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है।

Continue Reading
Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

code

बलिया

बलिया के नगरा सीएचसी में कैसे होगा इलाज, अस्पताल खुद ही पड़ा है बीमार

Published

on

बलिया जिले के नगरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दुर्व्यवस्था से मरीजों को दिक्कत हो रही है। (फोटो साभार: दैनिक जागरण)

बलिया जिले के नगरा में मरीजों के इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की स्थापना की गई थी। लेकिन आलम ये है कि नगरा सीएचसी खुद ही इलाज खोज रहा है। इस सामुदायिक अस्पताल में दुर्व्यवस्था इस कदर समा चुकी है कि मरीज यहां जाने से भी भय खा रहे हैं। बिजली से लेकर अस्पताल में लगे बेड तक की हालत खराब है।

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के मुताबिक नगरा सीएचसी में कुल तीस बेड हैं। लेकिन इनमें से महज एक दर्जन बेड ही ठीक हालत में हैं। शेष सभी बेड टूटे हुए पड़े हैं। रिपोर्ट बताती है कि अस्पताल में लगे पंखे तक सुरक्षित नहीं है। वार्ड में लगे पंखे गायब हो चुके हैं और किसी दूसरे के घरों को हवा देने के काम आ रहे हैं।

हालांकि पंखा चलने के लिए जरूरी है बिजली। लेकिन अस्पताल में बिजली तक उपलब्ध नहीं है। बीमारियों का उपचार करने के लिए शुरू किया गया नगरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमारियों का अड्डा बन चुका है। सीएचसी के बाहर बाउंड्री नहीं है। इस वजह से यहां चिकित्सकों के साथ-साथ अड्डेबाजों की भी आवाजाही होती रहती है।

नगरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. टी. एन. यादव ने मीडिया में बयान दिया है कि “सीएचसी की समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता रहा है। शासन से सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं तो सीएचसी नगरा के लोगों के लिए वरदान सिद्ध होगा। लेकिन बजट के अभाव में सीएचसी की दुर्दशा हो गई है।”

गौरतलब है कि बलिया के जिले अस्पताल की स्थिति भी खराब है। अस्पताल में संसाधनों की कमी है। जब जिला अस्पताल की व्यवस्था ही सुदृढ़ नहीं है तो ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्या बात की जाए? बलिया से ही पूर्व भाजपा विधायक राम इकबाल सिंह जिला अस्पताल और सीएचसी की दुर्व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन पर सवाल उठाते रहे हैं। राम इकबाल सिंह ने इस मसले पर बलिया की जिलाधिकारी को पत्र भी सौंपा था। जिसका जिला प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

Continue Reading

बलिया

बलियाः कॉलेज हॉस्‍टल के पास मिला महिला का कंकाल, दुपट्टे से बंधे मिले पैर

Published

on

बलिया के पकड़ी थाना अंतर्गत कॉलेज के पास नरकंकाल मिलने का मामला सामने आया है। इससे पूरे इलाके में हडकंप मच गया है। बताया जा रहा है कि नरकंकाल महिला का है। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बता दें कि घटनास्थल के पास टूटी चूड़िया और चप्पल भी मिला है। सूत्रों के अनुसार महिला के कंकाल का पैर दुपट्टा से बंधा पाया गया। ऐसे में अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि हत्या के बाद महिला के शव को वहां फेंक दिया गया होगा। वहीं पुलिस ने नरकंकाल को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल में होगा।

इस संबंध में एसएचओ पकड़ी विनोद कुमार ने बताया कि फिलहाल कुछ भी कहना सम्भव नहीं है। उक्त कंकाल की जांच कराई जाएगी। उधर सूचना पर सीओ सिकन्दरपुर राजेश तिवारी भी मौके पर पहुंच कर अपने स्तर से जांच में जुट गए ।

Continue Reading

featured

बलिया: लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी का खामियाजा, NHAI के हाथ सौंपी गई परियोजना

Published

on

बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज डेवलपमेंट (यूपीडा) को सौंपी गई थी। लेकिन अब परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआइ को दे दी गई है। यूपीडा ने लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया था। जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। जिसके बाद शासन ने यह फैसला लिया है।

खबरों के मुताबिक दो दिन पहले यूपीडा और एनएचएआइ के बीच एक संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट को एनएचएआइ को सौंपने पर सहमति बन गई। एनएचएआइ अब लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएगी। अभी तक इस एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही तैयार हो सका है। जिसमें बलिया जिले के ब्लू प्रिंट में गलती पाई गई थी।

योजना के अनुसार लिंक एक्सप्रेस-वे 24.2 किलोमीटर लंबी होगी। एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई है 120 मीटर प्रस्तावित है। लिंक एक्सप्रेस-वे का चौदह किलोमीटर हिस्सा गाजीपुर में है। तो वहीं 10.2 किलोमीटर हिस्सा बलिया से होकर गुजरेगा। बलिया जिले के कुल तेरह गांवों से यह एक्सप्रेस-वे होकर जाएगा। बीते अगस्त महीने में यूपीडा ने इसके लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार कर शासन को भेजी थी।

यूपीडा के ब्लू प्रिंट में जो रूट दर्शाया गया उसमें अनियमितता पाई गई। दरअसल बलिया से होकर जाने वाले एनएच-31 के ही रूट पर लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट बना दिया गया था। शासन ने इस पर यूपीडा को ब्लू प्रिंट ठीक करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एक्सप्रेस-वे का पूरा कार्य एनएचएआइ को सौंप दिया गया है। लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए शासन की ओर से यूपीडा को पचास करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी थी। अब यूपीडा यह राशि एनएचएआइ को स्थानांतरित करेगी।

लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बलिया जिला पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा। उसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे दिल्ली पहुंचा जा सकेगा। इस तरह बलिया से दिल्ली तक का सफर आसान हो जाएगा। लेकिन ये सारी बातें भविष्य की बैताल हैं। ऐसा होगा तो वैसा हो जाएगा के फार्मेट पर पूरी कहानी टिकी हुई है। दिल्ली अभी बहुत दूर है। जब यूपीडा जैसी संस्था एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही किसी दूसरी सड़क के रूट पर बना दे तो दिल्ली की दूरी और अधिक हो जाती है।

देखना होगा कि बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़कर बारह घंटे दिल्ली पहुंचाने का ख्वाब कब तक रात के अंधेरे से निकलकर जमीन के उजाले में प्रवेश करती है?

Continue Reading

TRENDING STORIES

error: Content is protected !!