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केतकी सिंह की रोती हुई तस्वीर की असलीयत क्या है? क्या सपा कार्यकर्ताओं ने की अभद्र नारेबाजी?

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सोशल मीडिया पर एक फोटो शेयर करते हुए दावा किया गया कि भाजपा नेता केतकी सिंह के नामांकन के मौके पर सपा कार्यकर्ताओं ने अभद्र नारेबाजी की।

बलिया में चुनावी माहौल पूरी तरह ज्वलंत हो चुका है। राजनीतिक दलों के टिकट घोषणा के बाद चुनावी चहलपहल और भी बढ़ चुकी है। तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। ताकि जनता को अपने पक्ष में मोड़ा जा सके। साम, दाम, दंड, भेद किसी भी तरह से अपने पक्ष में हवा बनाने की जुगत हो रही है। ऐसा ही कुछ हुआ है बलिया की बांसडीह सीट पर।

बांसडीह से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं रामगोविंद चौधरी। निषाद व भाजपा पार्टी के गठबंधन ने इस सीट से केतकी सिंह को मैदान में उतारा है। आज सोशल मीडिया पर केतकी सिंह की एक तस्वीर शेयर की गई। फोटो में भाजपा के कार्यकर्ता हैं। साथ में केतकी सिंह भी हैं। केतकी सिंह भाजपा के ही नेता गोपाल को पकड़े हुए रोती हुई नजर आ रही हैं। आसपास भाजपा के कुछ कार्यकर्ता एक सुरक्षा घेरा बनाए हुए हैं।

फोटो में केतकी सिंह रोती हुई नजर आ रही हैं। इस फोटो को यह कहकर शेयर किया जा रहा है कि नामांकन के दौरान केतकी सिंह के खिलाफ सपा के कार्यकर्ताओं ने अपमानजनक नारेबाजी की। फेसबुक पर ऐसे ही यूजर ने लिखा कि “यह आंसू सैलाब बनके (बनकर) आएगा और रामगोविंद चौधरी को बहा कर ले जाएगा।” दावा किया गया कि “आज सपा के नामांकन के दौरान सपा के गुंडों ने नेत्री केतकी सिंह के खिलाफ अपमानजनक नारेबाजी की।” यूजर ने लिखा कि “जवाब मिलेगा… जरुर जवाब मिलेगा।”

फोटो पर फर्जी दावे के साथ शेयर किया गया केतकी सिंह का फोटो

फोटो पर फर्जी दावे के साथ शेयर किया गया केतकी सिंह का फोटो

क्या है सच्चाई:

सवाल है कि क्या सच में केतकी सिंह के खिलाफ सपा के कार्यकर्ताओं ने अभद्र नारेबाजी की? फेसबुक पर शेयर किए गए इस पोस्ट में लिखा गया है कि नामांकन के दौरान केतकी सिंह के खिलाफ अपमानजनक नारेबाजी हुई। जबकि केतकी सिंह ने अब तक अपना नामांकन ही नहीं किया है। तो फेसबुक पोस्ट का पहला दावा यहीं फर्जी साबित हो गया।

फोटो में केतकी सिंह जिसे पकड़कर रो रही हैं वो भाजपा नेता गोपाल जी हैं। गोपाल ने बलिया खबर से बातचीत में कहा कि “भाजपा से टिकट मिलने के बाद केतकी सिंह के साथ हमारी पहली मुलाकात हुई। जिसके चलते केतकी सिंह भावुक हो गईं। इसी वजह से केतकी सिंह के आंसू छलक गए।”

वहीं फोटो में घेरा बनाए में दिख रहे एक और शख्स चंचल से भी बलिया खबर ने बात की उनका भी कहना है कि “जिस फोटो में केतकी सिंह रोते हुए दिख रही हैं वो मनीयर की तस्वीर है और वहाँ ऐसी कोई बात नहीं हुई । हालांकि उन्होंने कहा कि हूटिंग एक दिन पहले बहुआरा में हुई थी लेकिन वहाँ कोई नारेबाजी नहीं की गई। इस फोटो को गलत दावे से सोशल मीडिया पर डाल दिया गया है। उन्होंने भी कहा कि केतिकी सिंह का नांनाकन 11 को है अभी तक उन्होंने नामांकन नहीं किया है।

साफ जाहिर है कि फर्जी दावे से एक माहौल बनाने की कोशिश की गई है। लोगों के बीच सहानुभूति कार्ड खेलने की कोशिश की गई। लेकिन भाजपा नेता ने खुद ही इस दावे का पोल खोल दिया है। गौरतलब है कि केतकी सिंह भाजपा की पुरानी नेता हैं। 2017 के चुनाव में केतकी सिंह को भाजपा ने टिकट नहीं दिया था। तब केतकी सिंह निर्दलीय ही चुनाव लड़ी थीं। लेकिन इस बार उनकी वापसी भाजपा में हुई। भाजपा ने केतकी सिंह को रामगोविंद चौधरी के खिलाफ उन्हें मैदान में उतारा है। चुनावी टक्कर जोरदार है। इंच-इंच की लड़ाई है। ऐसे में किसी भी तरह से बढ़त बनाने की कवायद चल रही है।

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बलिया- एक्शन में स्वास्थ्य विभाग, 5 महीने से गायब डॉक्टर पर होगी कार्रवाई !

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बलिया में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में नजर आ रहा है। जहां अब 5 महीने से गायब डॉक्टर निशांत के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। जिनका ट्रांसफर सोनवानी सीएचसी से सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए किया गया था, लेकिन वह सोनबरसा में अपना स्थानांतरण पत्र देने के बाद काम पर नहीं गए। ऐसे में CMO डा. नीरज कुमार पांडेय ने उनके विरूद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया है। जिसके लिए उन्होंने विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।

शिकायत के बाद जांच में खुलासा- दरअसल चिकित्सकों की मनमानी के कारण सीएचसी सोनबरसा की स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ गई है। लोगों की शिकायत पर सीएमओ की जांच में मामला पकड़ में आया। सीएमओे ने तीन अन्य चिकित्सकों का भी तीन दिन पहले स्थानांतरण किया है। बताया कि व्यवस्था को ठीक करने के लिए लापरवाह लोगों की समीक्षा की जा रही है। चिकित्सा क्षेत्र में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

3 साल से एक जगह पर जमे कर्मचारी हटेंगे- वहीं शासन ने ग्रुप-ग (तृतीय श्रेणी) के कर्मचारियों का हर 3 साल में पटल-क्षेत्र में परिवर्तन करने का निर्देश दिया है। यह परिवर्तन 30 जून तक अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी है। सीएमओ ने बताया कि 3 साल से एक ही पटल देख रहे संवेदनशील या लोक व्यवहार की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा कर बदलाव की किया जाएगा।

 

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बलिया के बड़े भवनों में नहीं है आग से बचाव के इंतजाम, स्कूलों- अस्पतालों में सुरक्षा उपकरण नदारद

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बलियाः गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाओं में इजाफा हो जाता है। कभी-कभार आग इतनी भयानक हो जाती है कि दमकल की गाड़ियां भी आग बुझाने में नाकाम साबित होती है। ऐसे में जरुरी है कि संस्थानों में आग से बचाव की व्यवस्थाएं हों। लेकिन जिले के सरकारी व व्यवसायिक भवनों में आग से बचने के इंतजाम न के बराबर हैं।यहां तक कि स्कूल-कॉलेजों में भी आगजनी से बचने सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। होटल-लॉज, निजी व सरकारी अस्पतालों के भी यही हाल हैं। सभी भवनों में शासन के द्वारा जारी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

लापरवाही का आलम भी यह है कि मानकों का पालन न करने वाले भवनों को संबंधित विभाग व जिम्मेदार अधिकारियों ने एनओसी भी जारी कर दिया है। जबकि एनओसी देने के पहले अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को भवनों का भौतिक सत्यापन करना चाहिए, आग से बचाव के उपकरण लगें हैं या नहीं, सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, इन सभी बातों पर निरीक्षण के बाद ही एनओसी देने का प्रावधान हैं लेकिन विभागीय अधिकारी भवनों का बिना सत्यापन करे ही एनओसी जारी कर रहे हैं।

यही वजह है कि अब गांव देहात ही नहीं बल्कि शहरों में भी बगैर सुरक्षा उपकरणों के ही स्कूल-कॉलेज व अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन भवनों में आग से बचाव के इंतजाम नदारद हैं। इन्हीं लापरवाहियों की वजह से आग की घटनाएं बड़े हादसे का कारण बनती हैं। मानकों के अनुसार सरकारी, गैर सरकारी भवनों में स्प्रिरंकलर सिस्टम बनाना चाहिए। इसमें एक फव्वारा होता है, जो आग लगने की स्थिति में ऑटोमैटिक पानी फेंकने लगता है।

सबसे बुरा हाल बलिया के सरकारी जिला अस्पताल का है। यहां हर रोज हजारों मरीज अपना इलाज करवाने आते हैं, कई मरीज भर्ती रहते हैं। लेकिन इतने बड़े अस्पताल में आग से बचने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के नए भवन में स्प्रिरंकलर सिस्टम (फायर हाइड्रेंट) स्थापित किया गया है। इसमें भी नियमित पानी नहीं भरने के चलते शोपीस ही बना रहता है। अग्निशमन विभाग के अफसरों की मानें तो किसी भी एसी कमरे में आग लगने पर तेजी से फैलने का खतरा होता है। शहर के कई अस्पताल ऐसे हैं जहां आपतकालीन स्थितियों में बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था तक नहीं हैं।

इस संबंध में सीएफओ डीपी सिंह यादव का कहना है कि फायर सुरक्षा नहीं करने वाले संस्थानों व विभागों को समय-समय पर नोटिस भेजा जाता है। इसकी सूची बनाकर जिलाधिकारी व मुख्यालय को भेजी जाती है। इसके अलावा आगजनी रोकने नगरपालिका के इंतजाम भी नाकाफी हैं। नगरपालिका के द्वारा शहर के अलग अलग स्थानों पर करीब 31 हाइड्रेंट लगाए गए थे, लेकिन इनमें से 8 खराब स्थिति में पड़े हैं।

पुराना पोस्ट ऑफिस, विशुनीपुर मस्जिद, एससी कॉलेज, जापलिनगंज नया चौक, आर्य समाज रोड व सतनीसराय में स्थित हाइड्रेंट मिट्टी के नीचे दब चुके हैं। अग्निशमन विभाग के अफसरों का कहना है कि इमरजेंसी में शहर के हाइड्रेंटों की जरूरत पड़ती है, लेकिन कई बार पत्र लिखने के बाद भी नगर पालिका की ओर से इस दिशा में पहल नहीं हो सकी है।

वहीं शहर के प्रमुख प्रतिष्ठान तो खुले स्थानों पर हैं, लेकिन कई छोटे व मझोले प्रतिष्ठान सकरी गलियों में हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का वाहन मौके पर नहीं पहुंच पाता है। कई बार यहां आगजनी की घटनाओं में आग बुझाने में परेशानी हुई है। चौक, विशुनीपुर, टाउन हॉल आदि स्थानों पर सकरी गलियों में आभूषणों की दुकानें हैं, जहां हमेशा गैस सिलेंडर मौजूद रहते हैं। हालांकि कई दुकानदारों ने आग से बचने के प्राथमिक उपाय मसलन सीज फायर आदि की व्यवस्था कर रखी है।

बता दें कि शासन व कोर्ट के द्वारा बताए गए मानकों के अनुसार बड़ी बिल्डिंगों में ओवरहेड या अंडरग्राउंड (स्ट्रेटिक) टैंक होने चाहिए। हाइड्रेंट सिस्टम बनाकर हमेशा पर्याप्त पानी की व्यवस्था होनी चाहिए, चौड़ा रास्ता हो ताकि फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच सके। भवनों के बाउंड्री वॉल से दोनों ओर रास्ता और भवनों में डबल सीढ़ी होनी चाहिए। लेकिन जिले के सरकारी व निजी भवनों में इन मानकों का पालन नहीं हुआ।

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UP- बिहार को सौगात, आरा-बक्सर-हरदिया-बलिया तक बनेगा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर

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बलिया। उत्तरप्रदेश और बिहार के लोगों को जल्द ही एक और सौगात मिलने जा रही है। जिसका लाभ बलिया वासियों को मिलेगा। बिहार की राजधानी पटना से आरा-बक्सर-हरदिया-बलिया तक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर बनेगा। 4 लेन में इसकी लंबाई 118 किमी होगी और इस पर 8500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका निर्माण 4 फेज में होगा।

जो पूर्वांचल एक्सप्रेस से भी जुड़ेगा। इसके बाद पटना और आरा से दिल्ली की दूरी आधी हो जायेगी। आरा रिंग रोड भी ग्रीन फील्ड कॉरिडोर से जुड़ेगा। इसके लिए 381 करोड़ की लागत से 21 किमी कनेक्टिंग रोड बनाया जायेगा। बता दें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पटना-बक्सर फोरलेन को जोड़ने वाले कोईलवर सोन नदी में 266 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार सिक्स लेन पुल की डाउन स्ट्रीम थ्री लेन (दूसरी लेन) का शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोकार्पण किया।

इसके साथ ही यह पुल जनता के लिए खोल दिया गया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बिहार में 3 साल में अमेरिका की सड़क के बराबर रोड बनाएंगे। बिहार में 8 ग्रीन फील्ड कॉरिडोर पर एक लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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