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बलिया की मिट्टी से निकला भोजपुरी सिनेमा का ”एक्शन किंग यश कुमार”

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संघर्ष जब कामयाबी की बुलंदी पर पहुंचता है तो वो एक मिसाल बनता है और उसे ज़माना याद करता है. आज ज़माना यश कुमार को भोजपुरी फिल्म के एक्शन किंग के नाम से जानता है. लोग यश कुमार के दीवाने हैं. उनकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल करती हैं. यश कुमार भोजपुरी फिल्मों के कामयाब,सुपर हिट हीरो और सिंगर हैं. 12 फरवरी 1985 को बलिया  के थाना उभावं के चैनपुर गुलौरा में यश कुमार का जन्म हुआ. बचपन से एक्टिंग के शौकीन यश कुमार ने एक ही सपना देखा था हीरो बनने का. करोड़ों दिलों की धड़कन बन चुके यश कुमार ने अपनी ज़िंदगी में लंबा संघर्ष किया है.
आज कामयाबी की बुलंदी पर बलिया के छोटे से गांव का नौजवान है, आज सब यश कुमार की कामयाबी,स्टारडम देख रहे हैं लेकिन यश कुमार अपने संघर्ष के वक्त को याद करते हुए कहते हैं कि उन्होंने ना हार मानना सीखा है ना ही पीछे मुड़कर देखना.  बलिया खबर.कॉम से खास बात करते हुए यश कुमार ने अपनी ज़िंदगी के तमाम पहलुओं के बारे में बातचीत की. 4 साल के अंदर 21 फिल्म देकर यश कुमार ने साबित किया है कि वो भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार हैं और उन्हें दर्शकों का बहुत प्यार मिला है. यश कुमार को आज भी वो तारीख याद है जब उन्होंने बलिया से मुंबई का सफ़र शुरु किया था.
7 जुलाई 2002 को यश कुमार मां के पर्स से सिर्फ़ 150 रुपए चुराकर मुंबई अपने सपनों मे रंग भरने निकल पड़े थे. यश कुमार बताते है कि मुंबई में उन्होंने साल 2002 से 2013 तक स्ट्रगल की. एक वक्त ऐसा भी था जब वो हफ्ते में दो दिन गुरुद्वारे के लंगर में खाना खाते थे और बाकि के दिन कभी भूखे तो कभी वड़ापाव खाकर रहते थे.
यश कुमार कहते हैं कि उन्होंने मुंबई में टिके रहने के लिए फुटपाथ पर सामान भी बेंचा है. फिर योग सीखकर, योगा क्लासेस लेने लगे. एक्टर बनने से पहले यश कुमार ने असिस्टेंट और एसोसिएट डायरेक्टर काम किया.लेकिन यश कुमार का पहला प्यार हीरो बनना ही था.बस उन्हें एक मौका चाहिए था अपने इस ख्वाब को हक़ीक़त में तब्दील करने के लिए.
यश कुमार की ज़िंदगी का पहला ब्रेक साल 2013 में मिला जब उनकी भोजपुरी फिल्म ”दिलदार सांवरिया” आई. दिलदार सांवरिया से यश कुमार ने भोजपुरी फिल्मों में अपना डेब्यू किया. इस फिल्म में यश कुमार के साथ भोजपुरी फिल्म की मश्हूर अभिनेत्री अंजना सिंह थीं.हालांकि ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं कर पाई लेकिन यश कुमार के लिए भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के रास्ते खुल गए जिसके बाद यश कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा.
यश कुमार की दूसरी फिल्म राजाजी आई लव यू आई जिसने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया. इस फिल्म के बाद यश कुमार दर्शकों के चहेते सुपर स्टार बन गए. तीसरी ही फिल्म में यश कुमार को भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार पवन सिंह के साथ काम करने का मौका मिला. फिल्म का नाम था दिल लगा डुपट्टा वाली से. इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया.
बहुत जल्द यश कुमार भोजपुरी सिनेमा की सुपर स्टार अभिनेता रानी चटर्जी के साथ फिल्म दरिया दिल में नज़र आए. लेकिन यश कुमार जिस फिल्म से भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार बने वो फिल्म थी बिन बजाव सपेरा जिसमें यश के साथ पवन सिंह थे. इसी फिल्म से यश कुमार सुपर स्टार बने.
एक्टिंग के साथ यश कुमार को सिंगिंग का शौक है और इसी शौक को पूरा करने के लिए साल 2015 में यश कुमार ने अपना एक एल्बम निकाला जो काफी हिट रहा. हालांकि यश कुमार कहते हैं कि वो सिर्फ़ एक्टिंग पर भी फोकस करते हैं लेकिन अगर उन्हें कभी लगता है कि उनकी फिल्म का कोई गाना उनके मिजाज़ का है तो वो उसे खुद गाना पसंद करते हैं.
यश कुमार का कहना है कि भोजपुरी एलबमों के गलत प्रयोग व प्रचलन ने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को काफी अश्लील बना दिया और अच्छे दर्शक इससे दूर हो गए । इस दाग को वे मिटाने में लगातार लगे हैं। यश कुमार कई बड़ी फिल्मों में काम कर रहे हैं जो जल्द ही रुपहले पर्दे पर नज़र आएंगी. उनका ड्रीम प्रोजेक्ट एक पारिवारिक फिल्म है जिसका नाम ‘मेरी बिटिया’ है.
इस फिल्म के बारे में यश कुमार बताते हैं कि ये उनका खुद का प्रोडक्शन है. ये फिल्म बाप-बेटी के भावनात्मक रिश्तों पर आधारित है. इस फिल्म के ज़रिए यश कुमार एक बेटी के पिता का संघर्ष और भावनात्मक लगाव दिखाना चाहते हैं. फिल्म की खास बात ये है कि इस फिल्म में कोई हीरोइन नहीं है. यश कुमार का कहना है कि ये कमर्शियल सिनेमा से आगे की फिल्म है. हम इस फिल्म के ज़रिए दर्शकों का नज़रिया भोजपुरी फिल्मों के लिए बदलने की कोशिश करेंगे. ये फिल्म पूरे देश में इसी साल छठ के मौके पर रिलीज़ होगी.
यश देश में बलात्कार की बड़ती घटनाओं से आहत हैं. वो कहते हैं कि उनकी सरकार से और देश की जनता से एक ही मांग है कि वो बलात्कार के पुराने कानून को बदलकर सख्त कानून लाए जिसमें बलात्कारी को सरेआम चौराहे पर फांसी दी जाए और उसका लाइव टेलीकास्ट हो ताकि बलात्कार जैसा घिनौना अपराध करने की हिम्मत किसी में ना हो.
यश कुमार की पर्सनल लाइफ की बात करें तो यश कुमार ने भोजपुरी फिल्म की मश्हूर हीरोइन अंजना सिंह से साल 2013 में शादी की. 2015 में यश एक प्यारी सी बेटी के पिता बने. बलिया के छोटे से गांव से निकल कर यश कुमार ने ना सिर्फ़ कामयाबी हासिल की बल्कि बलिया का सिर भी फ़क्र से ऊंचा किया है. यश कुमार लगातार भोजपुरी सिनेमा के बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं.
यश का सपना है कि वो भोजपुरी फिल्मों को भी बॉलीवुड जैसा सम्मान मिले. और इसके लिए वो लगातार कोशिश कर रहे हैं. यश कुमार कहते हैं कि भोजपुरी फिल्म को 25 करोड़ लोगों का चहेता बनाने तक वे दम नहीं लेने वाले । भोजपुरी सिनेमा और यश कुमार के फैन्स के लिए इस साल उनकी बड़ी फिल्म देखने को मिलेंगी जिसमें मेंहदी लगा के रखना पार्ट-2 , नागराज, मोहब्बत ज़िंदबाद और मेरी बिटिया शामिल हैं.
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बलिया मूल के मॉरिशस के पूर्व पीएम अनिरुद्ध जगन्नाथ का निधन

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मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ का 91 साल की उम्र में 3 जून, 2021 को निधन गया है। अनिरुद्ध जगन्नाथ मॉरिशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों ही पदों पर कार्य कर चुके हैं। जगन्नाथ के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुख जताया है।

बलिया से मॉरिशस पहुंचे उनके पिता ने अपने साथी मजदूरों के साथ मिलकर ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया, जो हमेशा हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों के दिलों में धड़कता रहा है। उनके असमय जाने से बलिया ही नहीं समूचे हिन्दुस्तानियों  को आघात पहुंचा है।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ के पूर्वज उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के मूल निवासी थे। बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र का अठिलपुरा गांव उनके पुरखों का निवास स्थान रहा है। गांव वालों के अनुसार उनके पिता विदेशी यादव और चाचा झुलई यादव को अंग्रेजों ने वर्ष 1873 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में जहाज से गन्ने की खेती के लिए मारीशस भेजा था। गिरमिटिया मजदूर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक का सफर तय करने वाला परिवार आज मॉरीशस का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार भी माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री प्रविंद अपने पुरखों की भूमि बलिया तो नहीं जा सके लेकिन वाराणसी में जनवरी 2019 में आठ दिवसीय दौरे पर भारत आए तो आयोजन के बाद भी वह काशी में ठहरे और विभिन्न मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना इस भाव से किया कि कभी इन्हीं मंदिरों में उनके पुरखों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए तमाम मन्नतें मांगी होंगी।

अभिलेखों में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार 2 नवंबर, 1834 को भारतीय मजदूरों का पहला जत्था गन्ने की खेती के लिए कलकत्ता से एमवी एटलस जहाज पर सवार होकर मारीशस पहुंचा था। आज भी वहां हर साल दो नवंबर को ‘आप्रवासी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। जिस स्थान पर भारतीयों का यह जत्था उतरा था वहां आज भी आप्रवासी घाट की वह सीढ़ियां स्मृति स्थल के तौर पर मौजूद हैं।

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संविधान, लोकतंत्र एवं भारत विषयक वेबिनार का युवा चेतना ने किया आयोजन

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नई दिल्ली डेस्क : संविधान,लोकतंत्र एवं भारत विषयक वेबिनार का आयोजन युवा चेतना ने किया। वेबिनार का उद्घाटन करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की संविधान और लोकतंत्र दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की लोकतंत्र में सब बराबर हैं और संविधान जनता का रक्षा कवच।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की संविधान की रक्षा प्रत्येक भारतीय की जवाबदेही है। मुख्य अतिथि भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने कहा की जब विश्व के अन्य देश संविधान निर्माण की प्रक्रिया में थे तो भारतीय संविधान उनके लिए मानक था।न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा की संविधान नागरिकों के लिए प्रकाश पुंज है।लोकतंत्र में सरकार अगर ग़लत करती है तो संविधान जनता का सहायक होता है।

न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा की संविधान और राष्ट्र के प्रति सबको निष्ठा रखना चाहिए। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा की प्रभु राम ने भी पत्नी का त्याग जनता को संतुष्ट करने हेतु किया था और देवी सीता ने भी जनता के मन में उत्पन्न द्वन्द को समाप्त करने हेतु प्रभु राम का सहयोग किया था।पूर्व में राजा और नेता जनभावनाओं के प्रति चिंतनशील होते थे परंतु अब स्थिति बदल गई है।

श्री सिंह ने कहा की हमारा संविधान हमें बराबरी का अधिकार देता है परंतु राष्ट्रपति के घर का बच्चा और गाँव में खेती करने वाले किसान का बच्चा एक जैसे विद्यालय में शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाता है।श्री सिंह ने कहा की 1952 से लेकर 2020 तक चुनावी मुद्दे नहीं बदले लोकतंत्र रोटी,कपड़ा और मकान से आगे नहीं निकल पाया।

श्री सिंह ने कहा की भारत के पुनर्निर्माण हेतु सबको आगे आना होगा।
वेबिनार को सम्बोधित करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जेपी सिंघल ने कहा की गरीब को ताकत भारतीय लोकतंत्र में संविधान से मिलता है। पूर्व सांसद विवेक गुप्ता ने कहा की हमारे संविधान में 125 बार संशोधन हुआ है।हमारा संविधान हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है।

श्री गुप्ता ने कहा की सरकार को संयुक्त सूची पर विचार करना चाहिए।केंद्र सरकार को राज्य सरकारों को कुछ छूट देने की आवश्यकता है।
यूईटीआर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जेसी जैन ने कहा की लोकतंत्र की सुंदरता संविधान से ही है।

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डॉक्टर से IAS टॉपर्स की सूची में शामिल आनंद शर्मा से जानिए कैसे हासिल किया ये मुकाम !

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यह हैं आनंद शर्मा. साल 2018 की यूपीएससी सीएसई एग्जाम में इनमा नाम टॉपर्स की सूची में नाम में शामिल था. आनंद शर्मा एमबीबीएस डॉक्टर थे, जिसके बाद यह यूपीएससी में आए. 2015 में इन्होने मुरादाबाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से एमबीबीएस किया और इसके बाद से ही यूपीएससी सीएसई में लग गए. सफलता मिली चौथे प्रयास में. 2018 में. 62वीं रैंक हासिल की. दरअसल आनदं जब तीसरी बार टॉपर बने तो बीते हर साल में उनका निबंध में ग्राफ बढ़ता गया. ऐसे में अपने अनुभव के आधार पर वह निबंध लेखन और सेलेक्शन के बारे में कुछ टिप्स दे रहे हैं. डॉ. आनंद कहते हैं कि पेपर आने के बाद निबंध लिखने में जल्दबाजी न करें.

पहले सभी विषयों को अच्छे से पढ़ें और फिर सोचे की किस पर आप सबसे अच्छा इन पुट दे सकते हैं. वह कहते हैं कि पहले वह उन दो टॉपिक को हटा देते थे जिसमे उनके पास फॉर या अगेंस्ट में प्वॉइंट्स नहीं होते थे. इसके बड़े बचे हुए दो टॉपिक में फैसला कर सकते थे कि किस पर वह बढियां लिख सकते हैं. इसके बाद रफ में वह निबंध के फॉर और अगेंस्ट में जो कुछ भी आ रहा है उनके दिमाग में, वह सब लिख देते थे. और इसी के आधार पर वह आगे एक्सप्लेन करते थे. दरअसल फ्लो में लिखने के दौरान कुछ छूट न जाये, इसलिए वह ऐसा करते थे. निबंध के तीन हिस्से होते हैं. इंट्रोडक्शन, बॉडी और कॉन्क्लूजन.

आनंद कहते हैं कि इंट्रोडक्शन में कोई कोट लिख देने से अधिक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने पहले ही मुख्य विषयों पर कोट तैयार किये हुए थे. वह कहते हैं कि अगर कोट नहीं भी मालूम तो आप किसी शानदार और प्रभावशाली लाइन से शुरुआत करें. बाद इसके अगले स्पेट में एक पैर में ऐस्से की समरी लिखते हैं. जिसमे यह बताते थे कि इस इससे में क्या-क्या है. एस्से के बॉडी में वह बिन्दुओं के अनुसार फॉर और अगेंस्ट दोनों एंगल्स लिखना चाहिए. साथ ही साथ उदाहरण भी दें.

रियल लाइफ का उदहारण हो तो और बेहतर. बाद इसके फैक्ट्स, फिगर्स, डेटा से लेकर कोट्स या जो भी हो, उसे लिखकर एस्से को वजनदार बनायें. इसके अलावा एस्से लिखने के दौरान समय बैलेंस्ड करके चले. वह बताते हों कि आपका एस्से का झुकाव फॉर की तरफ हो या अगेंस्ट की तरफ, जिस भी तरफ झुकाव हो, उसके विपरीत पॉइंट्स को भी लेकर चलें और ज़िक्र करें. चूँकि आप एक अधिकारी बनने के लिए एस्से लिख रहे हैं. ऐसे में एस्से का अंत पोजिटिव करें और समस्या का संभावित समाधान भी ज़रूर लिखें.

इसके अलावा वह कहते हैं कि एग्जाम से पहले खूब प्रैक्टिस करें. वह कहते हैं कि आपने जिस विषय पर एस्से लिखने की प्रैक्टिस की है अगर वही विषय एग्जाम में आ जाये तो हड़बड़ी में न रहें. बल्कि उसे अच्छी तरह पढ़ें और समझें कि उसमे क्या पूछा गया है. विषय से भटकना नहीं है.

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