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इन 5 लड़कों ने बालिया का नाम किया रोशन, कोई बना एसडीएम, कोई बना कमिश्नर

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बलिया–  अगर हुनर और काबिलियत आपके पास है तो दुनिया की कोई ताकत आपको कामयाब होने से नहीं रोक सकती। यूपीपीएससी पीसीएस-2016 (UPPSC) का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है। इसमें बलिया (Ballia) जिले के 5 नौजवानों ने जिले का नाम रोशन करते हुए नई बुलंदियों को छुआ है।  आज हम उन 5 शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने नामुमकीन काम को मुमकीन कर दिखाया और बलिया का नाम रोशन किया है।

सौरभ सिंह (Saurabh Singh) – “कहते हैं कि कोशिशें तो खत्म करने की अंधेरों ने बहुत की, मगर आदमी में फिर भी चाहत है रोशनी की  जीवन में बहुत से लोग संघर्ष करते हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो भीड़ से बाहर निकलकर एक उदाहरण बन जाते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं बलिया (Ballia) के सौरभ सिंह की जिन्होंने, पीसीएस-2016 में टॉप 10 में जगह बनाई है। आठवां स्थान हासिल करने वाले सौरभ का चयन एसडीएम के पद पर हुआ है। सितम्बर 2015 से प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद पर तैनात सौरभ सिंह बिल्थरारोड (Belthara Road) क्षेत्र के भीमपुरा- बरेवा मुखलिसपुर निवासी परमात्मानन्द सिंह के इकलौते पुत्र  हैं।  सौरभ सिंह ने ये सफलता अपने दूसरे प्रयास में प्राप्त किया है। सौरभ की शुरूआती पढ़ाई नागा जी सरस्वती विद्या मंदिर बलिया में हुई। रामकरण से इंटर व पन्ना महाविद्यालय भीमपुरा से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान 2015 में प्राथमिक विद्यालय सिसवार कला में सौरभ को शिक्षक के पद पर तैनाती मिल गयी। अपनी सफ़लता के बारे में बात करते हुए सौरभ सिंह ने balliakhabar.com को बताया की धैर्य, निरंतरता और सटीक गाइडेंस से उन्होंने यह सफलता हासिल की। सिंह ने बताया की मेरे स्कूल का स्टाफ मेरे प्रति बहुत ही सपॉर्टिव( supportive) रहा है। सौरभ सिंह के माता- पिता जूनियर हाई स्कूल में अध्यापक है । इनके परिवार में मां, पिता के अलावा तीन बहनें भी है।  सौरभ की तीन बहनों में सबसे बड़ी बहन,  Indian Council of Medical Research (ICMR) में वैज्ञानिक हैं, दूसरी बहन बंगलुरु में प्रॉफेसर है तो तीसरी बहन शिक्षक हैं। टॉप 10 में आने के सवाल पर सौरभ ने हमें बताया कि ये मेरे लिए खुद चौकाने (Surprising) वाला था, हालाँकि अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था लेकिन ऐसा विश्वास नहीं था की टॉप 10 में जगह बना पाऊंगा।

श्याम बाबू (Shyam Babu)–   14 साल से पुलिस विभाग में बतौर कॉन्स्टेबल कार्यरत श्याम बाबू  बलिया (Ballia) बैरिया तहसील के इब्राहिमाबाद गांव के निवासी हैं। वो इस वक़्त पुलिस विभाग में बतौर कॉन्स्टेबल प्रयागराज हेडक्वॉर्टर में तैनात हैं। श्याम बाबू ने पीसीएस-2016 में 52वीं रैंक हासिल की है। डिप्टी कलेक्टर के रूप में उनका चयन हुआ है। श्याम बाबू के पिता धर्मनाथ गांव में ही किराना की दुकान चलाते हैं। इनके परिवार में मां किशोरी देवी, पिता धर्मनाथ के अलावा पांच बहनें और एक बड़ा भाई है। पांचों बहनों की शादी हो चुकी है, बड़े भाई उमेश कुमार इनकम टैक्स में इंस्पेक्टर हैं। श्याम बाबू के मुताबिक, उन्होंने पीसीएस की तैयारी ग्रैजुएशन के बाद 2009-10 से शुरू कर दी थी लेकिन 2013 के बाद इसे लेकर गंभीर हुए।वर्ष 2001 में श्री सुदिष्ट बाबा इंटर कालेज रानीगंज से हाईस्कूल व 2003 में इंटर पास किया। उसके बाद इन्होंने पीजी कालेज सुदिष्टपुरी में बीए में दाखिला ले लिया। अभी बीए द्वितीय वर्ष की परीक्षा पास की तभी वर्ष 2005 में यूपी पुलिस में भर्ती हो गये। सिपाही की नौकरी करते हुए ही प्राइवेट से परीक्षा देकर 2008 में बीए फाइनल की डिग्री हासिल की।इस सफलता के बारे में श्याम बाबू ने कई अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मैंने शुरू में थाने में नौकरी की लेकिन बाद में ऑफिस में आ गया। ऑफिस में आने से इस बात की सहूलियत हो गई कि दिन के वक्त दफ्तर का काम खत्म करता था और रात में पढ़ाई हो जाती थी।

 

पंचानन वर्मा (Panchanan Verma) “जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का, फिर देखना फुजूल है क़द आसमान का”, यह पंक्ति पंचानन पर अक्षरश है, बलिया (Ballia) के सिकंदरपुर के रहने वाले पंचानन वर्मा ने पीसीएस की परीक्षा में कामयाबी हासिल की है । उनका चयन ट्रेजरी आफिसर के पद पर हुआ है। फ़िलहाल राजकीय इंटर कालेज बांदा में प्रवक्ता के पद पर तैनात पंचानन की शुरुवाती पढाई जूनियर हाईस्कूल सिकंदरपुर से हुई है । शिक्षा ग्रहण करने के बाद गांधी इंटर कालेज सिकंदरपुर से इंटर की परीक्षा पास कर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के बाद 2010 में प्रवक्ता के पद पर चयन हुआ था। पंचानन वर्मा ने 2012 में UGC NET भी क्वालीफाई किया था। पंचानन के पिता राजाराम वर्मा वर्तमान में सिकंदरपुर में जूनियर हाई स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। इनके परिवार में मां, पिता के अलावा दो बहने और एक भाई हैं।  यूपीएससी (Union Public Service Commission)  की परीक्षा में चार  बार असफल होने के बाद भी उन्होंने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा है। इसके लिए वह तैयारी जा रखेंगे। पंचानन वर्मा ने  balliakhabar.com से बात करते हुए बताया की मेरा बस एक ही मकसद हैं, कैसे भी करके IAS ऑफिसर बनना चाहता हूं। पंचानन ने अपनी सफलता के पीछे की टैग लाइन के बारे में बात करते हुए कहा कि धैर्य के साथ निरंतर प्रयास ही सफ़लता का मूल मन्त्र है।

सौरभ सिंह (Saurabh Singh)  बलिया ही के एक और सौरभ सिंह ने  भी अपनी लगन, दृढ़ इच्छाशक्ति व टाइम मैनेजमेंट के दम पर कामयाबी दर कामयाबी हासिल की है। टीटीई से शुरू हुआ उनके कैरियर का सफर प्रीवेंटिव आफिसर व वाणिज्य कर अधिकारी (Commercial Tax Officer) से होते हुए अब एसडीएम (SDM) तक पहुंचा है। . सौरभ सिंह वर्तमान में मऊ जिले में वाणिज्य कर अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वर्ष 2003 में उनका चयन टीटीई (TTE) के रूप में हो गया। वहां 2008 तक उन्होंने काम किया। उसके बाद एसएससी की परीक्षा पास की और प्रीवेंटिव आफिसर (PREVENTION OFFICE) के पद पर चयन हुआ। वहां भी वर्ष 2010 से 2016 तक काम किया। तभी पीसीएस 2014 में उनका चयन वाणिज्य कर अधिकारी के रूप में हो गया। शुक्रवार को पीसीएस 2016 के परिणाम में उनका चयन एसडीएम के पद पर हुआ है। उनकी कामयाबी से गांव में जश्न है।

राहुल कुमार( Rahul Kumar)  बलिया के रामपुर महावल निवासी राहुल का भी असिस्टेंट कमिश्नर पर चयन हुआ। इनकी इस सफलता से क्षेत्रीय लोगों में खुशी व्याप्त है। balliakhabar.com ने राहुल कुमार से भी संपर्क करने की कोशिश कि लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।  बलिया ख़बर की टीम इन सभी परीक्षार्थियों को ज़िले का नाम रोशन करने के लिए मुबारकबाद पेश करती है !

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बलिया मूल के मॉरिशस के पूर्व पीएम अनिरुद्ध जगन्नाथ का निधन

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मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ का 91 साल की उम्र में 3 जून, 2021 को निधन गया है। अनिरुद्ध जगन्नाथ मॉरिशस के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों ही पदों पर कार्य कर चुके हैं। जगन्नाथ के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुख जताया है।

बलिया से मॉरिशस पहुंचे उनके पिता ने अपने साथी मजदूरों के साथ मिलकर ऐसे राष्ट्र का निर्माण किया, जो हमेशा हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तानियों के दिलों में धड़कता रहा है। उनके असमय जाने से बलिया ही नहीं समूचे हिन्दुस्तानियों  को आघात पहुंचा है।

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ के पूर्वज उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के मूल निवासी थे। बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र का अठिलपुरा गांव उनके पुरखों का निवास स्थान रहा है। गांव वालों के अनुसार उनके पिता विदेशी यादव और चाचा झुलई यादव को अंग्रेजों ने वर्ष 1873 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में जहाज से गन्ने की खेती के लिए मारीशस भेजा था। गिरमिटिया मजदूर से लेकर सत्ता के शीर्ष तक का सफर तय करने वाला परिवार आज मॉरीशस का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार भी माना जाता है।

जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री प्रविंद अपने पुरखों की भूमि बलिया तो नहीं जा सके लेकिन वाराणसी में जनवरी 2019 में आठ दिवसीय दौरे पर भारत आए तो आयोजन के बाद भी वह काशी में ठहरे और विभिन्न मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना इस भाव से किया कि कभी इन्हीं मंदिरों में उनके पुरखों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए तमाम मन्नतें मांगी होंगी।

अभिलेखों में दर्ज दस्तावेजों के अनुसार 2 नवंबर, 1834 को भारतीय मजदूरों का पहला जत्था गन्ने की खेती के लिए कलकत्ता से एमवी एटलस जहाज पर सवार होकर मारीशस पहुंचा था। आज भी वहां हर साल दो नवंबर को ‘आप्रवासी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। जिस स्थान पर भारतीयों का यह जत्था उतरा था वहां आज भी आप्रवासी घाट की वह सीढ़ियां स्मृति स्थल के तौर पर मौजूद हैं।

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संविधान, लोकतंत्र एवं भारत विषयक वेबिनार का युवा चेतना ने किया आयोजन

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नई दिल्ली डेस्क : संविधान,लोकतंत्र एवं भारत विषयक वेबिनार का आयोजन युवा चेतना ने किया। वेबिनार का उद्घाटन करते हुए स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की संविधान और लोकतंत्र दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की लोकतंत्र में सब बराबर हैं और संविधान जनता का रक्षा कवच।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की संविधान की रक्षा प्रत्येक भारतीय की जवाबदेही है। मुख्य अतिथि भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस केजी बालाकृष्णन ने कहा की जब विश्व के अन्य देश संविधान निर्माण की प्रक्रिया में थे तो भारतीय संविधान उनके लिए मानक था।न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा की संविधान नागरिकों के लिए प्रकाश पुंज है।लोकतंत्र में सरकार अगर ग़लत करती है तो संविधान जनता का सहायक होता है।

न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा की संविधान और राष्ट्र के प्रति सबको निष्ठा रखना चाहिए। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा की प्रभु राम ने भी पत्नी का त्याग जनता को संतुष्ट करने हेतु किया था और देवी सीता ने भी जनता के मन में उत्पन्न द्वन्द को समाप्त करने हेतु प्रभु राम का सहयोग किया था।पूर्व में राजा और नेता जनभावनाओं के प्रति चिंतनशील होते थे परंतु अब स्थिति बदल गई है।

श्री सिंह ने कहा की हमारा संविधान हमें बराबरी का अधिकार देता है परंतु राष्ट्रपति के घर का बच्चा और गाँव में खेती करने वाले किसान का बच्चा एक जैसे विद्यालय में शिक्षा नहीं प्राप्त कर पाता है।श्री सिंह ने कहा की 1952 से लेकर 2020 तक चुनावी मुद्दे नहीं बदले लोकतंत्र रोटी,कपड़ा और मकान से आगे नहीं निकल पाया।

श्री सिंह ने कहा की भारत के पुनर्निर्माण हेतु सबको आगे आना होगा।
वेबिनार को सम्बोधित करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जेपी सिंघल ने कहा की गरीब को ताकत भारतीय लोकतंत्र में संविधान से मिलता है। पूर्व सांसद विवेक गुप्ता ने कहा की हमारे संविधान में 125 बार संशोधन हुआ है।हमारा संविधान हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देता है।

श्री गुप्ता ने कहा की सरकार को संयुक्त सूची पर विचार करना चाहिए।केंद्र सरकार को राज्य सरकारों को कुछ छूट देने की आवश्यकता है।
यूईटीआर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति जेसी जैन ने कहा की लोकतंत्र की सुंदरता संविधान से ही है।

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डॉक्टर से IAS टॉपर्स की सूची में शामिल आनंद शर्मा से जानिए कैसे हासिल किया ये मुकाम !

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यह हैं आनंद शर्मा. साल 2018 की यूपीएससी सीएसई एग्जाम में इनमा नाम टॉपर्स की सूची में नाम में शामिल था. आनंद शर्मा एमबीबीएस डॉक्टर थे, जिसके बाद यह यूपीएससी में आए. 2015 में इन्होने मुरादाबाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली से एमबीबीएस किया और इसके बाद से ही यूपीएससी सीएसई में लग गए. सफलता मिली चौथे प्रयास में. 2018 में. 62वीं रैंक हासिल की. दरअसल आनदं जब तीसरी बार टॉपर बने तो बीते हर साल में उनका निबंध में ग्राफ बढ़ता गया. ऐसे में अपने अनुभव के आधार पर वह निबंध लेखन और सेलेक्शन के बारे में कुछ टिप्स दे रहे हैं. डॉ. आनंद कहते हैं कि पेपर आने के बाद निबंध लिखने में जल्दबाजी न करें.

पहले सभी विषयों को अच्छे से पढ़ें और फिर सोचे की किस पर आप सबसे अच्छा इन पुट दे सकते हैं. वह कहते हैं कि पहले वह उन दो टॉपिक को हटा देते थे जिसमे उनके पास फॉर या अगेंस्ट में प्वॉइंट्स नहीं होते थे. इसके बड़े बचे हुए दो टॉपिक में फैसला कर सकते थे कि किस पर वह बढियां लिख सकते हैं. इसके बाद रफ में वह निबंध के फॉर और अगेंस्ट में जो कुछ भी आ रहा है उनके दिमाग में, वह सब लिख देते थे. और इसी के आधार पर वह आगे एक्सप्लेन करते थे. दरअसल फ्लो में लिखने के दौरान कुछ छूट न जाये, इसलिए वह ऐसा करते थे. निबंध के तीन हिस्से होते हैं. इंट्रोडक्शन, बॉडी और कॉन्क्लूजन.

आनंद कहते हैं कि इंट्रोडक्शन में कोई कोट लिख देने से अधिक प्रभाव पड़ता है. उन्होंने पहले ही मुख्य विषयों पर कोट तैयार किये हुए थे. वह कहते हैं कि अगर कोट नहीं भी मालूम तो आप किसी शानदार और प्रभावशाली लाइन से शुरुआत करें. बाद इसके अगले स्पेट में एक पैर में ऐस्से की समरी लिखते हैं. जिसमे यह बताते थे कि इस इससे में क्या-क्या है. एस्से के बॉडी में वह बिन्दुओं के अनुसार फॉर और अगेंस्ट दोनों एंगल्स लिखना चाहिए. साथ ही साथ उदाहरण भी दें.

रियल लाइफ का उदहारण हो तो और बेहतर. बाद इसके फैक्ट्स, फिगर्स, डेटा से लेकर कोट्स या जो भी हो, उसे लिखकर एस्से को वजनदार बनायें. इसके अलावा एस्से लिखने के दौरान समय बैलेंस्ड करके चले. वह बताते हों कि आपका एस्से का झुकाव फॉर की तरफ हो या अगेंस्ट की तरफ, जिस भी तरफ झुकाव हो, उसके विपरीत पॉइंट्स को भी लेकर चलें और ज़िक्र करें. चूँकि आप एक अधिकारी बनने के लिए एस्से लिख रहे हैं. ऐसे में एस्से का अंत पोजिटिव करें और समस्या का संभावित समाधान भी ज़रूर लिखें.

इसके अलावा वह कहते हैं कि एग्जाम से पहले खूब प्रैक्टिस करें. वह कहते हैं कि आपने जिस विषय पर एस्से लिखने की प्रैक्टिस की है अगर वही विषय एग्जाम में आ जाये तो हड़बड़ी में न रहें. बल्कि उसे अच्छी तरह पढ़ें और समझें कि उसमे क्या पूछा गया है. विषय से भटकना नहीं है.

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