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पूर्वांचल

आजमगढ़ में बोले अखिलेश यादव, कहा- ‘अगर वो चाय वाले तो हम भी हैं दूधवाले’

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आजमगढ़ सदर लोकसभा सीट से गठबंधन के प्रत्याशी अखिलेश यादव गुरुवार को नामांकन करने आजमगढ़ की पुलिस लाइन बजे पहुंचे।

जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि नेता जी हमेशा कहते है कि अगर इटावा मेरा घर है तो आजमगढ़ दूसरा घर है। भाजपा पर निशाना साधते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सपा बसपा और रालोद का गठबंधन महा मिलावट नहीं, बल्कि महापरिवर्तन का गठबंधन है। हमारे गठबंधन में तो बस तीन दल शामिल हैं।

लेकिन भाजपा जवाब दें कि 38 दलों के साथ गठबंधन को क्या कहेगी भाजपा? भाजपा का गठबंधन महामिलावट है। भाजपा ने रोजगार में चोरी की है। देश की जनता को बहकाया है। अखिलेश यादव ने कहा कि  यूरिया कि हर बोरी से 5 किलो खाद की चोरी हुई है। नोटबंदी करने से भ्रष्टाचार भी नहीं खत्म हुआ। अखिलेश ने कहा कि 36 हजार से ज्यादा उद्योगपति देश की जनता के पैसे लेकर विदेश भाग गए।

पीएम के चाय पर चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि अगर वो चाय वाले तो हम भी दूधवाले हैं। चायवाले की चाय खराब निकल गई। जब हमारा दूध ही अच्छा नहीं होगा तो उनकी चाय कैसे अच्छी बनेगी। लगता है वह दूध नहीं बल्कि काली चाय बनाते हैं। इसलिए उनका सारा कारनामा ही काला है।

अखिलेश यादव ने कहा कि यह चुनाव आम चुनाव नहीं है। यह चुनाव देश का भविष्य बदलने का चुनाव है। उत्तर प्रदेश में हमारे मुख्यमंत्री ठोकीदार भी है। जो हमेशा सबको ठोकते रहते हैं। सीएम के तर्ज पर ही भाजपा के सांसद ने विधायक को 12 जूतों की सलामी भी दी। जनता ‘चौकीदार’ और ठोकीदार की चौकी जरूर छीनेगी।

अखिलेश यादव ने कहा कि दुनिया के बड़े लड़ाकू विमान सपा सरकार द्वारा बनाई गई सड़क पर उतरे हैं। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का काम रोकने के पीछे प्रदेश सरकार का हाथ है। अखिलेश ने भरोसा दिलाया कि सपा सरकार अगर सत्ता में आती है तो पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को बनवाने का काम पूरा करेगी।

अखिलेश यादव बोले कि कांग्रेस और भाजपा सरकार में कोई अंतर नहीं है। मंच से सीएम योगी पर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारियों को मुख्यमंत्री आवास पर तड़के सुबह भेज कर बंगले की टोटी चेक करा रहे थे। लखनऊ से जब भी ठोकीदार सरकार जाएगी तो मैं अधिकारियों से चीलम ढूंढ कर लाने को कहूंगा।

अखिलेश यादव ने कहा कि नेताजी और मायावती का आशीर्वाद लेकर मैं नामांकन पत्र भरने आया। शिक्षामित्रों, आंगनबाड़ियों और आशा बहनों को भाजपा ने धोखा दिया है। पूर्वांचल की जनता तानाशाह सरकार को हटाने का काम करेगी। इसके साथ ही गठबंधन में सभी बसपा प्रत्याशियों के पक्ष में वोट करने की अपील की।

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तीन मार्गों को मिलाकर बन गया नया स्टेट हाईवे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बलिया

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ghajipur-turtipar road and purvanchal express-way

बलिया जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़े जाने के लिए शासन की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है। लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी बलिया जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए हो रहा है। अब एक और रास्ता बनाया जा रहा है जो बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा। लोक निर्माण विभाग ने गाजीपुर से तुर्तीपार तक के तीन सड़कों को मिलाकर स्टेट हाईवे घोषित कर दिया है।

लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि “गाजीपुर से तुर्तीपार रोड अब स्टेट हाईवे हो गया है। इसे कोड भी आवंटित कर दिया गया है। यह रास्ता पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ता है। इसलिए संबे समय से इसे गड्ढा मुक्त किए जाने की मांग हो रही थी।”

गाजीपुर से तुर्तीपार तक के 74 किलोमीटर लंबी तीन सड़कों को मिलाकर स्टेट हाईवे बना दिया गया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसे स्टेट हाईवे कोड 108 दिया गया है यानी एसएच-108. एसएच-108 का 47 किलोमीटर हिस्सा बलिया से गुजरता है। इस हाईवे को अगले वर्ष में फोर लेन बनाने की योजना है। फिलहाल इसे गड्ढा मुक्त बनाया जा रहा है। दैनिक जागरण की एक खबर के मुताबिक बलिया के 47 किलोमीटर हिस्से में अब तक पांच सौ से ज्यादा गड्ढे भर दिए गए हैं।

बलिया के हिस्से की सड़क का चालीस लाख रुपए की लागत से पैचवर्क किया गया है। हालांकि पूरी एसएच-108 का हाल अभी दुरुस्त नहीं हो सका है। गाजीपुर के हिस्से की सड़क अभी भी गड्ढों से पटी हुई है। गाजीपुर में 27 किलोमीटर का मार्ग है। इसे गड्ढा मुक्त किया जाना अभी बाकि है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कासिमाबाद राही इसी रास्ते बलिया आते-जाते हैं।

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बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बिहार, जानिए पूरा रूट

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बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बिहार, जानिए पूरा रूट

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया है। अब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से बिहार को जोड़ने की तैयारी हो रही है। एनएचएआइ बिहार को बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना बना रही है। पहले पटना-बक्सर फोर लेन को हैदरिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की बात चल रही थी। लेकिन अब इस चर्चा पर पूर्ण विराम लग गया है।

एनएचएआइ की योजना है कि बिहार को बलिया से होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाए। ताकि पटना से दिल्ली जाने में 18 से 20 घंटे के बजाए 10 से 12 घंटे ही लगें। अब तक पटना-बक्सर फोर लेन को हैदरिया के नजदीक पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने पर मंथन चल रहा था। लेकिन अब योजना बदल गई है। दैनिक जागरण ने एनएचएआइ का बयान छापा है कि बलिया के नजदीक से बिहार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे कनेक्टिवटी मिलेगी। यहां भी एक पुल है।

बता दें कि हैदरिया के समीप पटना-बक्सर फोर लेन को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए एनएचएआइ ने कंसल्टेंट तय कर लिया था। लेकिन योजना बदले जाने के बाद कंसल्टेंट से काम वापस लिए जाने की खबर है। इसके बाद एनएचएआइ नई रूट पर काम शुरू कर देगा।

बक्सर से बलिया की दूरी लगभग चालीस किलोमीटर है। बक्सर और पटना के बीच की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है। पटना से बक्सर होते हुए बलिया का रूट बनेगा। यहां से फिर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने का मार्ग तय होगा। बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे का काम चल रहा है। बलिया से गाजीपुर होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचा जा सकेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के जरिए लोग लखनऊ तक कम समय में ही पहुंच जाएंगे। जिसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से होते हुए राजधानी पहुंचा जा सकेगा। एक्सप्रेस-वे की इस जाल से गुजरते हुए बिहार से दिल्ली पहुंचने के बीच लगभग छह से आठ घंटे तक का समय कम लगेगा। हालांकि बता दें कि यह काम इतनी जल्दी पूरा होने वाला नहीं है। अब तक महज योजना ही बनाई गई है।

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पूर्वांचल

पूर्वांचल में टीकाकरण में पिछड़ गया बलिया, मिला छठा स्थान

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कोविड टीकाकरण में बलिया पिछड़ गया है। पूरे पूर्वांचल के सभी दस जनपदों में टीकाकरण के मामले में बलिया का नाम छठे स्थान पर आया है। इस सूची में सबसे शीर्ष पर वाराणसी का नाम है। बलिया में अब तक आधी आबादी को भी कोविड का टीका नहीं लगाया जा सका है। स्वास्थय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार बलिया में अब तक महज 11,46,739 लोगों को ही कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगाई जा सकी है। यह आंकड़ा पूरे बलिया की आधी आबादी के भी बराबर नहीं है।पूरे बलिया जिले की आबादी लगभग 32 लाख से ज्यादा है। लेकिन अभी तक लगभग साढ़े ग्यारह लाख लोगों को ही कोविड की लगाई गई है। बता दें कि केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से पूर्वांचल के सभी जिलों में हुए टीकाकरण का आंकड़ा जारी किया। यह आंकड़ा गत सोमवार यानी 13 सितंबर के दोपहर तक हुए टीकाकरण की है। इसमें कुल दस जिलों के आंकड़े शामिल हैं। जिसमें बलिया को छठा स्थान मिला है। इस सूची में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी सबसे ऊपर काबिज है। इसके बाद आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर और मीरजापुर का नाम है। बलिया से भी कम टीकाकरण मऊ, चंदौली, भदोही और सोनभद्र में हुई है।

बलिया में ग्राम पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर लोगों को कोरोना की टीका लगाई जा रही है। इसके बावजूद भी जिले में टीकाकरण की स्थिति खराब है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ही जिले की पचास फीसदी से भी कम आबादी को टीका लगाई गई है। जबकि इनमें से कई लोगों को टीका लगाए जाने का फर्जी प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।बीते अगस्त महीने की 27 अगस्त को पूरे देश में एक करोड़ लोगों को कोविड टीका लगाए जाने का दावा किया गया था। इसी दिन अकेले उत्तर प्रदेश में 29 लाख लोगों के टीकाकरण का दावा किया गया था। हालांकि उसी दिन बलिया जिले के हुसैनाबाद गांव से यह खबर आई थी कि गांव के लगभग तीस लोगों को बिना वैक्सीन लगाए ही टीकाकरण का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था। जिले में चिकित्साकर्मियों की कमी होने की वजह से टीकाकरण पर असर पड़ा है। लेकिन प्रशासन और जिले के नेताओं का ध्यान इस ओर नहीं है।

 

 

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