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मंत्री उपेंद्र तिवारी ने अधिकारियों के साथ की बैठक, बोले- सुधार होने तक जिले में ही रहूंगा

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बलिया: खेल मंत्री उपेंद्र तिवारी ने सोमवार को प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर कोविड रोकथाम की समीक्षा की। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार व कोविड नियंत्रण में आने वाली समस्याओं पर चर्चा की और उसे दुरुस्त कराने पर खास जोर दिया।

वर्तमान में उपलब्ध कुल ऑक्सीजन सिलेंडरों की संख्या के बारे में पूछने पर सीडीओ प्रवीण वर्मा ने बताया कि कुल 174 छोटे व 86 बड़े सिलेंडर उपलब्ध हैं। इस पर मंत्री ने सवाल किया कि न सिलेंडर की कमी है न बेड की, तो फिर समस्या क्या हैं ? मरीज परेशान हो रहे हैं, ऐसा नहीं चलेगा। इस पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान दें।

उन्होंने पिछले वर्ष कोविड संक्रमण के दौरान शासन द्वारा उपलब्ध कराए गए धन, संसाधन व उसके उपभोग के बारे में पूछा तो सीएमओ ने विभाग से सूचना मंगाकर बताया कि पिछले वर्ष एसडीआरएफ मद में 1 करोड़ 80 लाख, पंचायती राज मद में 2 करोड़ 50 लाख, शासन द्वारा 10 आईसीयू बेड, विभिन्न जनप्रतिनिधियों द्वारा सांसद व विधायक निधि से 1 करोड़ 96 लाख एवं विभिन्न कंपनियों द्वारा सहयोग के तौर पर 18 वेंटीलेटर मिले थे।

वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ एसडीआरएफ मद में शासन ने धन भेजा है। पिछले वर्ष का धन अभी उपलब्ध हैं, खर्च नहीं हो पाया हैं । आक्सीजन प्लांट के लिए आज टेंडर खुल रहा हैं। बहुत जल्द यह स्थापित होगा। खेल मंत्री ने कहा कि इतने धन और संसाधन के बावजूद अभी तक वेंटीलेटर और आईसीयू बेड क्रियाशील क्यों नहीं हुआ ? कहा, ‘उस धन से अभी तक सुविधाएं शुरू न होने के दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।’

बैठक में ही प्रमुख सचिव व कमिश्नर से की बात

खेल मंत्री ने मीटिंग हॉल से ही मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री व कमिश्नर से वार्ता कर हालात से अवगत कराया। कहा कि सारे विवरण के साथ अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री जी को दूंगा। कहा कि अधिकारियों की लापरवाही जैसे सुविधाओं के लिए मिले धन खर्च नहीं कर पाना, वेंटीलेटर व आईसीयू चालू नहीं करा पाना आदि से सरकार की छवि खराब हो रही हैं।

सुधार होने तक जिले में ही रहूंगा

मंत्री श्री तिवारी ने फोन से जिलाधिकारी से बात की। जिलाधिकारी ने सारी व्यवस्थाएं एक सप्ताह में सही करने को कहा। मंत्री ने साफ कहा कि जब तक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, मैं जिले में ही रहूंगा। मीटिंग में यह भी निर्देश दिया कि तीन दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट से जनपद के सभी जनप्रतिनिधियों को अवगत करा दिया जाए। बैठक में सिकंदरपुर विधायक संजय यादव , जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू , राज्यसभा सांसद नीरज शेखर के प्रतिनिधि संजय सिंह, लोकसभा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के प्रतिनिधि अमन कुमार, एडीएम रामआसरे, एएसपी संजय कुमार, नगर मजिस्ट्रेट नागेंद्र सिंह, सीएमओ डॉ राजेन्द्र प्रसाद, एसडीएम सदर राजेश यादव, सहित कोविड ड्यूटी से संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

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चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह संपन्न, 33 मेधावी गोल्ड मेडल से हुए सम्मानित

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बलिया: जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह सोमवार को आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वर्चुअली शिरकत की। इस प्रोगाम में 33 मेधावियों को गोल्ड मेडल तथा 320 छात्र-छात्राओं को उपाधि वितरित की गयी।

इस दौरान समारोह का शुभारंभ डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर के कुलपति प्रो. रमेश चंद श्रीवास्तव व चंद्रशेखर विवि की कुलपति प्रो कल्पलता पाण्डेय ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान वर्चुअल शामिल हुईं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने जनपद के सेनानियों व साहित्यकारों को याद कर की। उन्होंने छात्र-छात्राओं के चहुँमुखी विकास और गांव को बेहतर बनाने के लिए विश्वविद्यालय को कुछ जिम्मेदारियां भी सौंपी। उन्होंने चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय द्वारा 125 से ज्यादा गांवों को गोद लिए जाने की सराहना करते हुए कहा, हम लोगों ने कई नए कार्यक्रम यूनिवर्सिटी के माध्यम से शुरू किए हैं। इसमें टीबी वाले बच्चों को गोद लेना भी शामिल है। इसलिए यह लक्ष्य बनाएं कि इन 125 गांवों में सभी प्रसव अस्पताल में ही हो, तथा एक भी शिशु की मृत्यु नहीं होने पाए।

आंगनबाड़ी में अगर कोई भी कुपोषित बच्चा हो तो ग्राम प्रधान को सूचित करते हुए गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि बच्चे को स्वस्थ बनाया जा सके। केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ इन 125 गांवों में सभी पात्रों को मिल रहा है या नहीं, यह भी देखें। लाभ दिलाने का प्रयास भी करें। कुलाधिपति ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर कई अन्य बहुपयोगी कार्यों में प्रकाश का महत्वपूर्ण योगदान है। इसमें सोलर पैनल के प्रयोग को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जाए।

कुलाधिपति श्रीमती पटेल ने छात्र-छात्राओं को अपना संदेश देते हुए कहा कि जीवन मे शिक्षा का कभी अंत नहीं होता। यहीं से जीवन की असली परीक्षा शुरू होती है। निरन्तर परिश्रम ही आप सबको सफलता की ओर ले जाएगा। राष्ट्र के निर्माण में उच्च शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के प्राविधानों के अनुरूप विश्वविद्यालय स्थानीय लघु उद्योग एवं रोजगारपरक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रतिबद्ध है। एक जनपद-एक उत्पाद के अंतर्गत बिंदी उद्योग, स्थानीय सिन्होरा एवं काष्ट शिल्प तथा कृत्रिम आभूषण निर्माण को भी अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

कुलाधिपति ने कहा कि बहुत से लोग अपनी बेटियों को किसी अन्य जनपद में या दूर कहीं पढ़ाई के लिए भेजने में संकोच करते हैं। ऐसे में इस जिले में विश्वविद्यालय का होना सौभाग्य की बात है। सभी बेटियां भी इसका लाभ लें और बेहतर शिक्षा ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सभी बेटियों का हीमोग्लोबिन टेस्ट समय-समय पर करवाता रहे। आज की बेटी कल की मां बनने वाली है, इसलिए वह सशक्त और स्वस्थ होनी चाहिए। विश्वविद्यालय का यह कर्तव्य बनता है कि बेटियों को सही मार्ग दिखाया जाए।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में सभी से यह अपील की कि 18 वर्ष के ऊपर के सभी छात्र-छात्राएं अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें। अपने माता-पिता व अभिभावक को भी साथ ले जाएं और मतदान को प्रेरित करें। आपका हर एक वोट राष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी कहा कि कोविड की तीसरी लहर में सावधानी और सतर्कता ही जीवन बचाएगी। इसलिए कोविड नियमों का पालन करें। आगामी गणतंत्र दिवस की भी उन्होंने बधाई दी। अंत में उन्होंने सभी मेधावी छात्रों को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने अपने सम्बोधन की शुरुआत भोजपुरी भाषा से की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तमाम परेशानियों के बाद भी विश्वविद्यालय जिस तरह प्रगति कर रहा है, काबिले तारीफ है। ‘लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया’ फोरम की स्थापना करके यहां की विभूतियों को उनकी मिट्टी से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया। यह यहां के लिए एक बेहतर थिंक टैंक का कार्य करेगा।

प्रो. श्रीवास्तव ने कहा कि शोध किसी भी विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी होती है, इसलिए यहां प्राकृतिक संसाधनों पर विभिन्न विभागों द्वारा शोध को बढ़ावा दिया जाए, ताकि रोजगारपरक तकनीकों का विकास हो सके। आज ऐसी शिक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है, जो अधिक से अधिक रोजगार देने में सहायक हो। कृषि बलिया का मुख्य व्यवसाय है। कुछ छोटे-मोटे उद्योग धंधे भी यहां रोजगार के प्रमुख साधन हैं। इसलिए यह भी प्रयास हो कि यहां के लोगों को कौशल विकास एवं कृषि आधारित उद्योग-धंधों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाए।

केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्रीवास्तव ने ‘वी कैन डू इट, वी विल डू इट’ लाइन के जरिए सभी छात्र-छात्राओं में सकारात्मक ऊर्जा भरने का प्रयास किया। उन्होंने सभी छात्र छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कुलपति प्रो. कल्पलता पांडेय ने कहा कि पिछले वर्ष दूसरे दीक्षांत समारोह के दौरान कुलाधिपति की ओर से मिली प्रेरणा से विवि और बेहतर स्वरूप में आया है। कोविड से पठन-पाठन प्रभावित जरूर हुआ, लेकिन एनसीसी, रोवर्स रेंजर्स आदि ने महामारी के दौरान जिस सेवाभाव से कार्य किया, सराहनीय हैं। विवि परिसर ने 5 गांव गोद लिए, तथा 135 महाविद्यालयों के 14 संकुलों ने 70 गांव गोद लेकर उन गांवों में समाज कार्य किए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालय द्वारा डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, समस्तीपुर तथा भारतीय दलहन शोध संस्थान, कानपुर के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं। इसके अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन व किसानों को बीज आवंटित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। उद्यान विज्ञान को गति देने के लिए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, अदलपुरा से समझौता की प्रक्रिया विचाराधीन है। विश्वविद्यालय में लगभग 70 शोधार्थियों को पंजीकृत किया गया है, जिन्होंने शोध कार्य शुरू कर दिया है। कुलपति ने कहा कि लिविंग लीजेंड्स की संख्या 80 से ऊपर पहुँच गई है, जिसमें आज के मुख्य अतिथि भी शामिल हैं।

कुलपति प्रो. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा खेल प्रतियोगिता में अंतर-विश्वविद्यालयीय स्तर पर पूर्वी जोन में सहभाग किया गया। इसमें यूनिवर्सिटी के आरिफ अली ने हाफ मैराथन में स्वर्ण पदक प्राप्त करके विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया है। इसके अलावा बीपीएड के छात्र अभिषेक सोनी ने भी अंतर-विश्वविद्यालयीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में छठवां स्थान पाया, जिनका चयन खेलो इंडिया में भी हो सकता है।

दीक्षांत समारोह आयोजन के दौरान कुल सचिव एसएल पाल, यूनिवर्सिटी के कुलानुशासक डॉ अरविंद नेत्र पांडेय, कुलपति के पीआरओ डॉ जैनेन्द्र पांडेय, डॉ अखिलेश राय, डॉ मान सिंह, डॉ अखिलेश राय, डॉ आशुतोष यादव, डॉ शुभनीत कौशिक, डॉ दिलीप श्रीवास्तव, डॉ ममता वर्मा, डॉ निशा राघव, डॉ साहब दूबे, डॉ अजय पांडेय, धर्मात्मानंद गुप्ता, अशोक श्रीवास्तव, डॉ रामशरण पांडेय, डॉ अशोक सिंह, डॉ प्रमोद पांडेय, डॉ यादवेंद्र, डॉ निवेदिता श्रीवास्तव, अतुल सिंह, नेहा बिसेन, अजय बिहारी पाठक, फुलबदन सिंह आदि थे। संचालन डॉ दयालानन्द राय ने किया।

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शादी के 2 महीने बाद ही फांसी के फंदे पर लटकी मिली नवविवाहिता, पति से हुआ था झगड़ा

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बलियाः बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के एक गांव में नव विवाहिता की लाश फांसी के फंदे से लटकी मिली। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरु कर दी है।

घटना पीपरपाती गांव की है। जहां रेवती थाना क्षेत्र के मूनछपरा निवासी 28 वर्षीय खुशबू की शादी 2 माह पहले 26 नवंबर को पीपरपाती निवासी बरमेश्वर नाथ ओझा के साथ हुई थी। लेकिन शादी की बाद से ही खुशबू का पति से विवाद होता रहता था। रविवार की रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ, तो पति दूसरे कमरे में सोने के लिए चला गया।

सोमवार सुबह जब खुशबू अपने कमरे से बाहर नहीं निकली तो परिजनों ने आवाज लगाई। दरवाजा खटखटाया मगर कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुची पुलिस ने खुशबू के कमरे का दरवाजा तोड़ा। अंदर उसका शव पंखे से लटका देख घऱवालों के होश उड़ गए।

ये ख़बर गांव में आग की तरह फैल गई। ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर से लाश को कब्जे में लिया। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर वीरेंद्र मिश्रा की सूचना पर एसडीएम सदर जुबेर अहमद और सीओ बांसडीह प्रीति त्रिपाठी भी मौके पर पहुचीं। इंस्पेक्टर वीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है कि मृतका का उसके पति से कुछ विवाद हुआ था। इसके कारण उसने आत्महत्या की है। आगे की जांच चल रही है। बताया की मृतका के मायके वाले दिल्ली रहते हैं। उन्हें भी सूचना देकर बुलाया गया है। बताया कि अभी किसी प्रकार की तहरीर नहीं मिली है।

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बैरियाः सुरेमनपुर स्टेशन पर विजिलेंस टीम ने मारा छापा, ड्यूटी से गायब मिले लिपिक

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बैरियाः गोरखपुर रेलवे की विजिलेंस टीम ने सुरेमनपुर रेलवे स्टेशन पर छापा मार कर टिकट काउंटर की जांच की। अचानक टीम के निरीक्षण करने से स्टेशन पर हड़कंप मच गया।

सबसे पहेल टीम आरक्षण काउंटर और साधारण टिकट काउंटर पर पहुंची, वहां जांच करते हुए रेलवे कर्मियों की जेब की तलाशी ली। वहीं साधारण टिकट काउंटर के लिपिक ड्यूटी से गायब मिले। कैश काउंटर में आठ रुपए से अधिक मिले। इन दोनों अनियमितताओं को लेकर टीम ने नाराजगी जताई और कहा कि दोनों मामलों में अलग से जांच की जाएगी।

बता दें कि मुख्य सतर्कता अधिकारी पूर्वौत्तर रेलवे गोरखपुर ओपी सिंह और जैनेंद्र कुमार भट्ट रेलवे सुरक्षा बल के सहयोगियों के साथ सिविल ड्रेस में अचानक रेलवे स्टेशन पहुंच गए। सुबह 11 बजे उन्होंने स्टेशन के आरक्षण टिकट खिड़की पर छापा मारा। जहां लिपिक विक्की कुमार तैनात थे, उस वक्त केवल तत्काल टिकट अप गंगा कावेरी एक्सप्रेस में विजयवाड़ा का हुआ था। अधिकारियों ने उसे कब्जे में ले लिया।

इसके साथ ही बुकिंग ऑफिस में जाकर पूछताछ की। इसके अलावा साधारण टिकट काउंटर खिड़की पर लिपिक रमेश सिंह यादव गायब मिले। उनके गायब रहने की किसी को जानकारी नहीं थी, यहां तक कि खिड़की भी बंद नहीं थी, कैश चेक किया तो 8 रुपए से अधिक था। जिस पर टीम ने नाराजगी जताते हुए जांच की बात कही है।

 

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