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बांसडीह

बलिया में पूर्व प्रधान की हत्या, मौके पहुंचे एसपी, जांच में जुटी पुलिस

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बलिया में मंगलवार को पूर्व प्रधान की हत्या कर दी गई। घटनास्थल पर पुलिस अधीक्षक राजकरन नय्यर के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।  जानकारी के मुताबिक सुखपुरा थाना क्षेत्र के भलुही गांव में बदमाशों ने पूर्व प्रधान हृदयनारायण सिंह (66) की हत्या कर दी है। पूर्व प्रधान बरामदे में सोये थे।

मंगलवार की सुबह उनकी हत्या की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कम्प मच गया। लोगों की भारी भीड़ जुट गयी। घटनास्थल पर पुलिस अधीक्षक राजकरन नय्यर के अलावा बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच गया है। हर विन्दुओं पर जांच-पड़ताल में जारी है। फॉरेंसिक टीम भी पहुंची है।

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हृदय नारायण सिंह हत्याकांड: बलिया पुलिस के हाथ अब तक खाली, कॉल डिटेल से मिलेगा सुराग !

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बलिया। बलिया के सुखपुरा थाना क्षेत्र के भलुही के पूर्व प्रधान और केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष हृदय नारायण सिंह की हत्या की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ पाई है। हत्याकांड का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। एक ओर जहां 3 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं तो वहीं दूसरी ओर खुलासा करने का दबाव बन रहा है।

फोन खोलेगा राज! – मामले में पुलिस संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। साथ ही पूर्व प्रधान के मोबाइल की कॉल डिटेल का भी सहारा लिया जा रहा है। जांच के लिए कई टीमों को लगाया गया है और उन्हें टास्क भी दिए गए हैं। हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए एसपी राज करन नय्यर खुद निगरानी कर रहे हैं।पुलिस पर बढ़ा दबाव– सोमवार रात हुए हत्याकांड का खुलासा करने का पुलिस पर दबाव बढ़ रहा है। सांसद विधायक, पूर्व मंत्री आदि ने भी मौके पर पहुंचकर पुलिस अधिकारियों से बात कर जल्द खुलासे को कहा है। ऐसे में पुलिस पर दबाव भी है। यही कारण है कि पुलिस की कई टीमों को अलग-अलग टास्क देकर तहकीकात में लगाया गया है। पूरे मामले की मॉनिटरिंग पुलिस के आला अधिकारी कर रहे है।

गैरजनपद से बुलाए जवान – सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हत्याकांड की तह तक जाने के लिए पूर्व में सुखपुरा थाने पर तैनात रह चुके पुलिस के जवानों को भी गैरजनपद से बुलाया गया है। भलुहीं गांव में वर्ष 1992 और 2003 में हुई वारदातों को खंगालने के साथ ही पुलिस का जोर निष्पक्ष जांच कर असली दोषियों तक पहुंचाने पर है।

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पूर्व प्रधान की हत्या मामले में ताबड़तोड़ दबिश, बलिया पुलिस के हाथ लगे अहम सुराग!

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बलिया: सुखपुरा के भलुही ग्राम के पूर्व प्रधान हृदय नारायण सिंह की हत्या मामले में बलिया पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रही है। साथ ही मामले में कई संदिग्धों से पूछताछ भी की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि हर बिंदुओं की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपित कानून के शिकंजे में होंगे। पूर्व प्रधान के बड़े पुत्र इंद्रपाल सिंह सोनू ने सुखपुरा पुलिस को तहरीर दी है। संदिग्धों में पूर्व प्रधान के करीबियों के साथ एक महिला भी शामिल है। गांव में एहतियातन पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। है। एसओजी, सर्विलांस, फोरेंसिक सहित चार टीमें तफ्तीश में जुटी हैं।

गांव में बुधवार को सन्नाटा पसरा रहा। पुलिस अधीक्षक राजकरन नय्यर देर शाम तक थाने पर मौजूद रहकर जांच-पड़ताल करते रहे। एसपी ने कहा कि हर पहलू की जांच की जा रही है। पुलिस के हाथ अहम सुराग लगे हैं। जल्द ही घटना का अनावरण किया जाएगा।

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लाइब्रेरी की कहानी : पीले पर्चे ने बदल दी बलिया के इस लड़के की ज़िंदगी, पहले प्रयास में मिला JRF

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‘ये साल 2015 की बात है। मैंने एक दिन सुबह अखबार उठाया तो उसमें से  एक पीला पर्चा जमीन पर गिर पड़ा। उसे पढ़ने पर पता चला कि मेरे घर से मात्र 3 किलोमीटर दूर एक लाइब्रेरी खुल रही है जो पढ़ने की जगह, किताबें, और मासिक परीक्षा, नि: शुल्क मुहैया कराती है।  मैं वहां जाने लगा और करेंट अफेयर पढ़ने की आदत लगी जिससे बीएचयू में एडमिशन हो सका। और आज इसी आदत की वजह से मैं पहले प्रयास में ही जूनियर रिसर्च फेलोशिप(जेआरएफ) के योग्य बन सका हूं’

साहित्य सदन पुस्तकालय'

साहित्य सदन पुस्तकालय’

ये कहना है मनियर के पास के एक गांव मानिकपुर के रहने वाले शिवशक्ति का। शिवशक्ति ने बीते सप्ताह ही जेआरएफ की परीक्षा उत्तीर्ण की है और लगभग 35 हजार मासिक की फेलोशिप के हकदार हो गए हैं। आइये शिवशक्ति की इस उपलब्धि के बहाने मनियर के उस पुस्तकालय के बारे में जानते हैं जो पिछले 10 साल से लगातार और चुपचाप अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।

मठों-मंदिरों के देश में किताब को सरस्वती मां का दर्जा देकर हमने धर्मिक स्थलों की शृंखला गढ़ दी। इसी सब के बीच काश! हमने किताबों के पढ़े जाने के लिए अलग से कुछ प्रबंध किया होता तो विद्वानों की एक फौज खड़ी हो सकती थी। लेकिन उम्मीद बरकरार है। जिले के मनियर में समाजसेवी और भाजपा नेता गोपाल जी ने 2015 में ‘साहित्य सदन पुस्तकालय’ की नींव रखी तो सिर्फ एक कमरा था। लेकिन उन्हें किताबों की कीमत पता थी, बच्चों के आदत का अंदाजा था। आज बमुश्किल सात साल के भीतर साहित्य सदन पुस्तकालय से हरेक साल दर्जन भर छात्र बड़े विश्विविद्यालयों में एडमिशन पाते हैं। गौरव की बात तो ये है कि 12वीं तक मनियर इटंर कॉलेज में पढ़े और पुस्तकालय के सक्रीय छात्र शिव शक्ति कुमार ने इस साल नेट- जेआरएफ की परीक्षा पास कर ली है। शिव शक्ति अब पीएचडी करेंगे और उन्हें भारत सरकार द्वारा मासिक तौर पर अध्येतावृति मिलेगी।

गोपाल जी के पुस्तकालय में फिलहाल 758 किताबें हैं। ये किताबें देश भर के पुस्तकमेला में घूम कर और अन्य माध्यमों से मंगाईं गई हैं। उनके सहयोगी और वो स्वयं लेखकों- प्रकाशकों से मिलकर किताबे खरीदते हैं। इसके अलावा बच्चों के कहने पर किताबें ऑनलाइन भी मंगाई जाती हैं। हालांकि इन बातों को कहते वक्त गोपाल जी वरिष्ठ पत्रकार हेमंतर शर्मा का जिक्र अलग से करते हैं। गोपाल जी बताते हैं कि हेमंत शर्मा ने अपने पिता और कमाल के रचनाकार मनु शर्मा की प्रभात प्रकाशन से छपी सभी किताबें लाइब्रेरी को उपलब्ध कराई हैं।

लगभग 20 हजार रुपयों के मूल्य की किताबों के साथ हेमंत शर्मा के सहयोग पर बात करते वक्त गोपाल जी कहते हैं, ’हम लोग पैसा रुपया के लिए सोच ही रहे थे लेकिन मनु शर्मा जी की किताबें लेनी ही थीं। हेमंत जी ने हमारी बात सुनी और बिना कुछ कहे सभी किताबें भेज दीं। इसके अलावा पुस्कालय में प्रतियोगिता दर्पण, बालहंस, इंडिया टूडे सरीखी लगभग एक दर्जन पत्रिकाओं का सालाना सब्सक्रिप्शन है। इन्होंने इसके लिए मनियर के ही लोगों को चुना है। हरेक व्यक्ति के नाम एक पत्रिका है, उसका सालाना खर्च वो शख्स उठाता है।’

हरेक माह के अंत में होती है प्रतियोगिता

पुस्तकालय परिसर में महीने के अंत में कई तरह की गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। कभी निबंध प्रतियोगिता, कभी पेंटिंग तो कभी सामान्य ज्ञान के सवालों की श्रृंखला की प्रतियोगिता। शुरू में ही ये बता दिया जाता है कि इस महीने प्रतियोगिता में क्या होने वाला है। खास बात ये है किअधिकतर प्रतियोगिताएं ओएमआर शीट पर होती हैं। पुस्तकालय के लिए काम करने वाले आशुतोष तोमर बताते हैं, ‘बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ओएमआर शीट ही मिलती है, हमारा उद्देश्य रहता है कि उन्हें पहले से ये सबकुछ पता हो।’  

यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग शुरू कराने का प्लान

राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले गोपाल जी फिलहाल शिव शक्ति के सेलेक्शन से बहुत खुश हैं। पुस्तकालय के लिए ये पहला मौका है जब वहां के सक्रिय छात्र को ऐसी उपलब्धि हासिल हुई है। गोपाल जी कहते हैं,  ‘हम चाहते हैं कि शिव शक्ति जैसे और भी विद्यार्थी हों। सभी को मौका मिलें। अब हमारे टीम की कोशिश है कि जल्द ही सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था भी शुरू की जाए।’

अभी तक नहीं मिला कोई सरकारी सहयोग

साहित्य सदन पुस्तकालय को खुले सात साल हो गए हैं। कई बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक गतिविधियों के चलते पुस्तकालय चर्चा में भी रहा है लेकिन यहां अब तक किसी भी तरह का सरकारी सहयोग नहीं उपलब्ध हो सका है। पुस्तकालय की देखरेख और किताबों का जिम्मा उठाने वाले मदन यादव कहते हैं,’हमारी तकरीबन 10 लोगों की टीम है। हमने कई बार कोशिश की। लेकिन शासन सत्ता से वैसा सहयोग नहीं मिला जैसी उम्मीद थी। हमलोग समय नहीं गवांते हैं, हमारे बच्चे अच्छा कर रहे हैं, यही हमारा उद्देश्य भी है’

ऑनलाइन कोचिंग में लगने वाली तकनीकी चीजों के लिए गोपाल जी सक्रिय और चिंतित दोनों हैं। सरकारी मदद के सवाल पर वो कहते हैं, ‘हमने अपनी इच्छाशक्ति और टीम के मनोबल से यह सबकुछ किया है। हमारा उद्देश्य इलाके के बच्चों को शिक्षित और चुनौतियों के लिए तैयार करना है, वो हम कर रहे हैं। सरकार का सहयोग मिले तो और भी अच्छी बात है’ फिलहाल पुस्तकलाय में खुशी का माहौल है। यहां आने वाले बच्चे खुश हैं, कार्यरत लोग खुश हैं। इन्हें उम्मीद है कि चीजें और बेहतर होंगी।

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