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बलिया के निजी विद्यालयों की लापरवाही से 7 हजार बच्चों के साढ़े तीन करोड़ रुपए फँसे !

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बलिया डेस्क : बलिया में चल रहे निजी विद्यालय शासन के बार-बार निर्देशों के बावजूद सुधरने का नाम नहीं ले रहे । राइट-टू-एजुकेशन के तहत जिन बच्चों का संबंधित विद्यालयों में दाखिला हुआ वह विद्यालय बच्चों की लिस्ट बीएसए आफिस को भेज नहीं रहे हैं। जिससे न तो शासन के पास बच्चों की सूची पहुंच पा रही है और न ही शासन कापी-किताब व ड्रेस हेतु पांच हजार रुपये संबंधित अभिभावकों के खाते में भेज पा  रहा है हैं।

यह सिलसिला विगत दो वर्षों से चला आ रहा है, ऐसे में लगभग सात हजार बच्चों के साढ़े तीन करोड़ रुपये अधर में लटका है।
राइट-टू-एजुकेशन के तहत निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीट आरक्षित है। इन सीटों पर गुरबत में जीने वाले बच्चों का दाखिला होता है। जिसके बाद बच्चों के पठन-पाठन का सारा खर्च सरकार बहन करती है। इसी क्रम में शिक्षा सत्र 2019-20 व 2020-21 में कुल सात हजार बच्चों का एडमिशन हुआ।

इन बच्चों को स्कूल वाले दाखिला तो ले लिया, लेकिन सूची अभी तक बीएसए आफिस में नहीं भेजी, जिससे उपरोक्त बच्चों का हक अभी भी अधर में लटका पड़ा है। गौरतलब हो कि सरकार की ओर से कापी-किताब व ड्रेस के लिए प्रति बच्चे ५००० रुपये संबंधित अभिभावक के खाते में भेजने का प्राविधान है। ऐसे में दो साल को मिला दिया जाए तो कुल साढ़े तीन करोड़ रुपये हो रहा है।

वृहद स्तर पर आंदोलन की तैयारी
आरटीई को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत मनोज राय हंस ने बताया कि पहले स्कूल वाले एडमिशन लेने से इंकार कर रहे थे, अब एडमिशन ले लिए तो उनकी सूची बीएसए आफिस में न भेजकर बच्चों का हक मारने का काम कर रहा है। ऐसे में मैं चुप नहीं बैठूंगा और एक सप्ताह के अंदर यदि सूची बीएसए आफिस नहीं भेजी गई तो इसे लेकर वृहद स्तर पर आंदोलन करूंगा।

वहीँ इस पुरे मामले पर बीएसए शिवनारायण सिंह ने बताया कि मेरे द्वारा विद्यालयों को नोटिस भेजा गया है, लेकिन विद्यालय की ओर से अभी तक बच्चों की लिस्ट नहीं भेजी गई है, ऐसे में मैं एक बार फिर से नोटिस जारी करूंगा और यदि इस बार विद्यालय वाले सूची नहीं भेेजेते हैं तो कार्रवाई तय है।

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बलिया में टायर व पेट्रोल शव जलाने का वीडियो वायरल, 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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बलिया ।  बलिया में पुलिस की संवेदनहीनता सामने आई है। यहां गंगा में बहती लाशों को निकाल कर अंतिम संस्कार के समय उस पर पेट्रोल छिड़क दिया गया, जिससे वह जल्दी जल जाए। इतना ही नहीं चिता पर लकड़ी के साथ-साथ टायर भी रख दिए गए।

इसका वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने पांच सिपााहियों को सस्पेंड कर दिया है। पूरे मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार को सौंपी गई है ।

 

बताया गया है कि विडिओ यह फेफना के माल्देपुर घाट का है। यहां गंगा नदी से लाशों को निकालने के बाद सही तरीके से उनका अंतिम संस्कार नही किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि चिता पर लड़की के साथ टायर रखे गए हैं। शव को जल्दी से जलाने के लिए बीच-बीच में उसपर पेट्रोल भी छिड़का जा रहा है। यह सब सिपाहियों की मौजूदगी मे होता है।

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बुजुर्ग महिला को आवास नहीं मिला तो बलिया के बलवंत ने चंदा जुटा कर बनवा दिया घर

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बलिया। कहते हैं रोटी कपड़ा और मकान के लिए ही लोग जीवन भर संघर्ष करते रह जाते हैं। इसमें भी मकान का तो क्या ही कहना। जैसा समय है, व्यक्ति रोटी, कपड़ा का जुगाड़ कर ले बहुत है। लेकिन बलिया के एक शख्स ने कमाल का काम किया है।

पुराना मकान

सहतवार के बिसौली गांव के रहने वाले बलवन्त ने एक दिव्यांग महिला का घर बनवाने की जिम्मेदारी ले ली है। वह बीते कुछ महीनों से चंदा जुटा कर धीरजा देवी का घर बनवा रहे हैं।
देखिए कुछ तस्वीरें

मुख्यमंत्री तक ने नहीं सुनी बात
बलवंत बताते हैं कि शासन-प्रशासन के यहां वह दौड़ भाग करके थक गए। लेकिन सत्ता में बैठे किसी भी जनप्रतिनिधि का ना तो मन पसीजा और ना ही अपनी निधि से एक गरीब के लिए वह घर ही बनवा पाए।

उन्होंने धीरजा देवी का घर बनवाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। सीएम आदित्यनाथ के के जनता दरबार में कहने के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई और गरीब का घर नहीं बन सका।

बलवंत ने हमें बताया की बलिया के तत्कालीन डीएम भवानी सिंह खंगरौत तक बात गई थी। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने धीरजा देवी के घर के लिए डीएम से कहा था। बलवंत खुद कई बार जिम्मेदारी समझते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर कह चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

लगातार संपर्क और दौड़ भाग के बाद भी जब किसी ने कोई मदद नहीं की तो बलवंत ने खुद ही घर बनवाने का बीड़ा उठा लिया। बलवंत ने तय किया है कि वह चंदा जुटा कर ही धीरजा राजभर का घर बनवाएंगे। फिलहाल घर बन रहा है और इलाके में इस प्रयास की काफी चर्चा हो रही है। बलवंत ने बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो दो-तीन महीनों में ही घर तैयार भी हो जाएगा।

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बेटी के सिर से उठ गया था पिता का साया, उमाशंकर सिंह ने निभाई पिता की भूमिका, कराई शादी

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बलिया। जिले के रसड़ा विधानसभा से विधायक उमाशंकर सिंह ने क्षेत्र के एक गांव की गरीब बेटी की शादी अपने खर्च पर कराई है। जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।  बता दें कि शादी के ठीक छह महीने पहले  नेहा के पिता का साया उसके सिर से उठ गया।

छठ पूजा के दिन ही कुछ लोगों ने रसड़ा क्षेत्र के सरया गांव निवासी हीरामन यादव की गोली मारकर हत्या कर दी। पूरा परिवार बेसुध पड़ा था। पिता के शव पर बेटी का विलाप सबको झकझोर दे रहा था। भारी भीड़ के बीच रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। बेटी नेहा चीख-चीखकर कह रही थी, अब उसकी शादी कैसे होगी? मेरा कन्यादान कौन करेगा?

उसके सवाल लोगों का कलेजा चीर रहे थे। विधायक ने भरोसा दिया कि पिता को तो मैं वापस नहीं ला सकता लेकिन दोषियों पर कार्रवाई जरूर कराएंगे तथा शादी भी उसी धूमधाम से सम्पन्न कराएंगे, जैसा आपके पिता चाहते थे।

छह महीना पहले बंधायी गयी इस आस को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने 14 मई को पूरा किया। बेटी के तिलक से लेकर विवाह तक की सारी तैयारी अपनी देखरेख में करायी। बेटी के लिए उपहार व बरातियों-रिश्तेदारों के स्वागत में कोई कमी न रह जाय, इसकी सारी तैयारी खुद पूरी करायी।

तिलक के दिन ढेर सारा उपहार नेहा की ससुराल जगदीशपुर में भेजवाया तो 14 मई को शादी के दिन घंटों नेहा के घर पर एक अभिभावक की तरह मौजूद रहे। द्वारपूजा से लगायत अन्य सभी रस्मों में तत्परता से एक ‘बाबुल की भूमिका निभायी। कन्यादान नेहा के चाचा ने किया।

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