Connect with us

featured

ओम प्रकाश राजभर का ऐलान, ‘सपा का समर्थन करेंगे’ जिले में इनकी राह हुई मुश्किल !

Published

on

बलिया। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा का समर्थन करने का ऐलान किया। श्री राजभर का कहना है कि वह भाजपा को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। वह वाराणसी में एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहाँ उन्होंने राजनीतिक टिप्पणी करके पूर्वांचल की सियासत में हलचल पैदा कर दी है।

ओमप्रकाश राजभर का यह ऐलान कई मायनों में पूर्वांचल की राजनीति पर असर डालने वाला है। पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ में चुनाव लड़े ओम प्रकाश भाजपा की तरफ से कैबिनेट मंत्री भी बनाए गए। मगर 2 साल के भीतर ही इस्तीफा देकर ओमप्रकाश राजभर ने भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। पंचायत चुनाव के ठीक पहले प्रदेश में आप सहित कई दलों एवं ओवैसी की पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव में उतरे थे।

‘भागीदारी संकल्प मोर्चा’ नाम के इस गठबंधन में फूट की भी खबरें आ रही थी लेकिन ओमप्रकाश राजभर ने इस बार बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि ओवैसी, कृष्णा पटेल, बाबूलाल कुशवाहा की पार्टी सहित 10 संगठनों वाले भागीदारी संकल्प मोर्चा के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। सपा के समर्थन पर कहा कि अखिलेश यादव व शिवपाल यादव दोनों से बातचीत चल रही है। मोर्चा के संकल्प व उद्देश्यों के साथ जो आएगा, सभी का स्वागत होगा।

बलिया की राजनीति पर क्या होगा असर

ओमप्रकाश राजभर के ऐलान के बाद बलिया की सियासत पर सपा की पकड़ मजबूत होने के आसार हैं। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा के पास फिलहाल बलिया में एक दर्जन जिला पंचायत सदस्य हैं। लगभग इतनी ही संख्या में सपा के पास भी जिला पंचायत सदस्य हैं। 58 जिला पंचायत सदस्यों वाले इस जिले में फिलहाल इस घोषणा के बाद सपा की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। अप्रत्यक्ष तौर पर आर्थिक हिसाब से तय होने वाले इस चुनाव में फिलहाल सपा जिला अध्यक्ष राज मंगल यादव की पत्नी और वार्ड नम्बर 42 से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य रंजू यादव की दावेदारी की अटकलें लग रहीं थीं।

अब ओमप्रकाश राजभर का कहना है कि वह सपा का समर्थन करेंगे। ऐसे में स्पष्ट है कि श्री राजभर विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सपा के उम्मीदवार को ही चयनित करने का मन बना रहे हैं। इधर 8 जिला पंचायत सदस्यों के साथ बसपा से अंबिका चौधरी के पुत्र भी अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहे थे। गौरतलब है कि वार्ड नंबर 45 से पूर्व सपा नेता और पिछले विधानसभा में बसपा में शामिल हुए अंबिका चौधरी के पुत्र आनन्द चौधरी बसपा के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं।

भाजपा की क्या है स्थिति

भारतीय जनता पार्टी ने वार्ड नंबर 10 के कद्दावर नेता देवेंद्र यादव को टिकट दिया था। हालांकि कोई आधिकारिक ऐलान नहीं था फिर भी माना जा रहा था कि देवेंद्र यादव ही भारतीय जनता पार्टी की तरफ से जिला पंचायत अध्यक्ष के उम्मीदवार होंगे। देवेंद्र यादव जिला पंचायत सदस्य नहीं बन पाए और भाजपा के लिए यह बहुत बड़ा झटका था। हालांकि बीते दिनों पार्टी के बागी नेता अक्षय लाल यादव को वापस शामिल किया है। अक्षय लाल यादव की पत्नी हेमंती देवी वार्ड नंबर 20 से जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुई हैं। स्पष्ट है कि भाजपा के भीतर खाने में भी जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए दावेदारी चल रही है।

निर्दल प्रत्याशियों की भूमिका

जिले में एक दर्जन से अधिक निर्दल प्रत्याशी निर्वाचित हुए हैं। इनमें अधिकतर सपा के बागी हैं। अब देखना यह है कि यह बागी विजेता किन आधारों पर और किसे वोट करने को तैयार होते हैं। हमने ऊपर भी लिखा है कि अप्रत्यक्ष तौर पर आर्थिक आधार से तय होने वाला या चुनाव वैचारिक पैमाने पर नहीं लड़ा जाता है। ऐसे में अपने आर्थिक मानकों पर किस पार्टी के उम्मीदवार को जिताने के लिए ‘मेहनत’ की जाएगी यह तो नतीजा आने के बाद ही पता चल सकेगा। फिलहाल ओमप्रकाश राजभर के इस ऐलान ने सपा के जिलापंचायत अध्यक्ष के रास्ते को आसान कर दिया है।

featured

बलिया में कितने फीसदी लोग हैं गरीब, नीति आयोग ने बता दिया

Published

on

भारत सरकार के नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों का बहुआयामी गरीबी सूचकांक यानी एमपीआई जारी किया है। नीति आयोग के इस बहुआयामी गरीबी सूचकांक में बलिया जिले के लोगों की गरीबी का आंकड़ा भी बताया गया है। एमपीआई के मुताबिक बलिया में तेरह लाख पैंतीस हजार नौ सौ साठ (1335960) लोग गरीब हैं। बलिया की कुल आबादी लगभग 36 लाख है।

नीति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार बलिया की कुल आबादी के 37.11 प्रतिशत लोग गरीब हैं। आयोग ने सभी जिलों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी गरीबी के आंकड़े जारी किए हैं। बलिया के ग्रामीण इलाकों में गरीबी शहरी क्षेत्रों से ज्यादा है। हालांकि ये अंतर बहुत अधिक नहीं है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 37.73 फीसदी लोग गरीब हैं। तो वहीं शहरी आबादी के 31.60 फीसदी लोग गरीब हैं। आंकड़े बताते हैं कि बलिया के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है।

उत्तर प्रदेश गरीबी के मामले में बलिया 37वें स्थान पर है। जबकि पड़ोसी आजमगढ़ और मऊ क्रमशः 50वें और 51 वें पायदान पर हैं। यानी कि आजमगढ़ और मऊ के मुकाबले बलिया में गरीबी ज्यादा है। हालांकि शहरी इलाकों में गरीबी के मामले में मऊ अन्य दो जिलों से भी आगे है।

गौरतलब है कि गत शुक्रवार यानी 27 नवंबर को नीति आयोग ने एमपीआई जारी की थी। नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों में वर्ष 2015-16 के बेसलाइन सर्वे पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक तैयार की है। इस सूचकांक में लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को पैमाना बनाया गया है। इसमें पोषण, बाल किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते की संख्या को भी आधार बनाया गया है।

सूचकांक में सभी मानकों की स्थिति को अलग-अलग बताया गया है। बलिया में पोषण 40.90 प्रतिशत है। बाल और किशोर मृत्यु दर 5.92 फीसदी। प्रसव पूर्व देखभाल 41 फीसदी। स्कूली शिक्षा 11.86 प्रतिशत। स्कूल में उपस्थिति 8.47 फीसदी। खाना पकाने के ईंधन में 81.61 प्रतिशत। स्वच्छता में 76.73 फीसदी। बैंक खाते बलिया में 3.60 प्रतिशत हैं।

Continue Reading

featured

ओमिक्रोन से लड़ने की क्या है बलिया स्वास्थ्य विभाग की तैयारी, जानिए यहां

Published

on

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन को लेकर बलिया जिले का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। नए वेरिएंट से बचाव के साथ ही संक्रमण फैलने से रोकने के लिए टेस्टिंग बढ़ाई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने माइक्रोप्लान तैयार किया है।

एक दिसंबर यानि आज से लेकर तीन दिसंबर तक जिले के उच्च शिक्षण संस्थानों में तथा तीन से छह दिसम्बर तक सरकारी व प्राइवेट अस्पताल के स्टाफों का सेम्पलिंग किया जाएगा। इस पूरे काम पर स्वास्थ्य विभाग अपनी नजर रखेगा।

स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग हो ताकि संक्रमण का समय रहते पता लग सके। वहीं सीएमओ तन्मय कक्कड़ के मुताबिक आरटीपीसीआर जांच में तेजी लाई गई है। सीएमओ ने बताया कि  विभाग की ओर से चार टीमें रेलवे स्टेशन, दो टीमें रोडवेज बस स्टैंड व एक टीम शहर के चौक बाजार में सेम्पलिंग कर रही है। इन सभी जगहों पर बाहर से आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है और उनका सेम्पलिंग किया जा रहा है।

वहीं जिन देशों में ओमिक्रोन फैल चुका है। उन देशों से आने वाले लोगों का सैंपलिंग एयरपोर्ट पर ही करवाई जानी है। सैंपलिगं के बाद व्यक्ति की सूची जिले के स्वास्थ्य विभाग को मिलेगी। और फिर उस व्यक्ति पर निगरानी रखी जाएगी। सीएमओ का कहना है कि अपर मुख्य सचिव के आदेश आने के साथ ही तैयारी कर ली गयी है। अभी तक जिले में ऐसे लोगों की सूची नहीं है। जांच तेजी से किया जायेगा ताकि स्थिति न बिगड़े और समय पर इलाज हो सके।

Continue Reading

featured

क्रिप्टो करेंसी के खतरे पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सरकार से बेहद जरूरी सवाल पूछा!

Published

on

नई दिल्ली। दुनिया भर में क्रिप्टो करेंसी को लेकर बहस चल रही है। भारत में भी आजकल क्रिप्टो पर खूब चर्चा हो रही है। लोग जमकर इसमें निवेश कर रहे हैं। लेकिन बताया जा रहा है कि क्रिप्टो में निवेश करना लोगों के लिए घाटे का सौदा हो सकता है। इससे बचने की सलाह भी दी जा रही है। इसी बीच मंगलवार यानी आज बलिया जिले से राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपनी ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार से सवाल पूछा है।

नीरज शेखर ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रश्नकाल में क्रिप्टो करेंसी को लेकर भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से दो सवाल पूछे। नीरज शेखर ने सवाल किया कि “सभी लोग बात कर रहे हैं कि बिल आने वाला है। लेकिन क्रिप्टो करेंसी यानी बिटकॉइन जो शुरू हुआ था एक डॉलर से और आज साठ हजार डॉलर उसका मूल्य है। एक अनुमान लगाया गया है कि भारत में करोड़ों लोगों ने इसमें निवेश किया है। लाखों-करोड़ रुपया इसमें चला गया है। क्या भारत सरकार उन लोगों को बताने की कोशिश कर रही है कि ये अभी सुरक्षित नहीं है? ये ऐसा पैसा लगा रहे हैं जिसमें आगे उनका नुकसान हो सकता है। हमारा वित्त मंत्रालय इस मामले में क्या कर रहा है?”

राज्यसभा में सांसद नीरज शेखर के इस सवाल का जवाब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया। निर्मला सीतारमण ने कहा कि “हां, बिल आएगी। लेकिन सेबी व आरबीआई के जरिए और एक बार भारत सरकार की ओर से बयान जारी कर यह बताने की कोशिश की गई है कि यह एक रिस्की क्षेत्र है। जो लोग इस ओर जा रहे हैं सचेत रहना चाहिए कि वो क्या कर रहे हैं।” वित्त मंत्री ने बताया कि “यह भी कहा गया है कि ये एक ऐसा क्षेत्र है जो अभी रेगुलेटरी फ्रेम में नहीं है। हमारी ओर से अलर्ट जारी किया जा चुका है कि यह अभी एक हाई रिस्की क्षेत्र है।”

इसके बाद राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने क्रिप्टो करेंसी को लेकर ही एक और सवाल पूछा। नीरज शेखर ने कहा कि “आप कहीं भी इंटरनेट पर कोई वेबसाइट खोलिए तो क्रिप्टो करेंसी के विज्ञापन बहुत आ रहे हैं। हमारे नौजवान साथी इसमें पैसा खूब लगा रहे हैं। तो क्या जब तक बिल आएगा तब तक के लिए इन विज्ञापनों को बंद करने का कोई उपाय हो सकता है?”

इंटरनेट पर क्रिप्टो करेंसी के विज्ञापन पर रोक लगाने के सवाल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि “विज्ञापन को बंद करने का कोई उपाय अभी तक नहीं है। लेकिन युवाओं को इस बार में सावधान करने का और इसके रिस्क को लेकर ध्यान दिलाने के लिए सरकार के द्वारा कदम उठाया जा रहा है। सेबी और आरबीआई के द्वारा भी जागरुकता के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मगर अब हम इस कगार पर पहुंच चुके हैं कि इस पर हमारा जल्दी आने वाला है।”

Continue Reading

TRENDING STORIES

error: Content is protected !!