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पूर्वांचल

पूर्वांचल में राजभर बीजेपी को दे रहे तगड़ा झटका, सिर्फ इतनी सीटों पर सिमट जाएगी पार्टी

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राजनीति के जानकारों की मानें तो इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तगड़ा झटका लगने वाला है। ऐसे में पूर्वांचल की लोकसभा सीटें बीजेपी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। पिछली बार बीजेपी पूर्वांचल में 30 सीटें जीतने में कामयाब रही थी। लेकिन इस चुनाव में ओमप्रकाश राजभार बीजेपी के उम्मीदों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं। राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पूर्वांचल में काफी असर रखती है। राजभर ने बीजेपी से बगावत कर दी है। ओमप्रकाश राजभर और उनकी पार्टी के नेता योगी सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं। इतना ही नहीं ओमप्रकाश राजभर ने ऐलान किया है कि पूर्वांचल में 30 सीट जीतने वाली बीजीपी अब अगर 3 सीटें जीत जाएं तो वो राजनीति छोड़ देंगे।

ओमप्रकाश राजभर के मुताबकि वाराणसी को छोड़कर हर जगह बीजेपी की हालात खस्ता है। ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि अखिलेश यादव और मायावती का महागठबंधन यूपी में जीत रहा है हम अब किसी भी गठबंधन के साथ नहीं जाएंगे।

ओमप्रकाश राजभर ने ऐसे समय इस्तीफा दिया है जब पूर्वांचल की सीटों पर मतदान होना है। 12 और 19 मई को अंतिम छठे और सातवें चरण के लिए मतदान होना है। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर का इस समय अलग होना बीजेपी की परेशानी बढ़ा सकता है। इस्तीफा देने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने कहा था कि बीजेपी मेरी फोटो लगा कर वोट मांग रही है। ऐसे में राजभर वोटर बीजेपी से सावधन रहे। बता दें कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी चुनाव 2017 से पहले सुभासपा से गठबंधन किया था इसके बाद यूपी चुनाव परिणाम आने के बाद ओमप्रकाश राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था लेकिन यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद से राजभार और बीजेपी के रिश्ते बिगड़ते गये थे, जो इस्तीफा देने के साथ खत्म भी हो गए।

वो लगातार सूबे में अफसरों की मनमानी के खिलाफ बोलते रहे हैं साथ ही वो इसी सरकार में मंत्री रहते हुए डीएम के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे। इस बार उन्होंने 39 उम्मीदवार खड़े किए है जिसमें से राजभर जाति के 13 मजबूत उम्मीदवार बीजेपी के लिए सरदर्द बन गए हैं।

पूर्वांचल की इन सीटों पर है इतने राजभर वोटर

लखनऊ के राजनीति मामलों के जानकार सज्जन शुक्ला के मुताबिक पूर्वांचल में राजभर वोट बैंक की एकजुटता इनकी ताकत है। इन्हीं 26 सीटों पर 50 हजार से सवा दो लाख तक राजभर जाति की वोट हैं।13 लोकसभा सीट पर तो राजभर एक लाख से ज्यादा हैं।

घोसी:-2.5 लाख, बलिया:-1.15 लाख, चंदौली:-1.50 लाख, सलेमपुर:-1.50 लाख, गाजीपुर:-1.75 लाख, देवरिया:-80 हजार, आजमगढ़:-1.50 लाख, लालगंज:-2 लाख, अम्बेडकर नगर:-2.50 लाख, मछलीशहर:-डेढ़ लाख, जौनपुर:-1.15 लाख, वाराणसी:-1.50 लाख, मिर्जापुर:-70 हजार व भदोही में 80 हजार

यूपी में छठे चरण के चुनाव में सुल्तानपुर, फूलपुर, इलाहाबाद ,डुमरियागंज, बस्ती, संतकबीरनगर लालगंज ,आजमगढ़,जौनपुर, मछलीशहर और भदोही में चुनाव है जबकि 19 मई को सातवें चरण में मिर्जापुर,रॉबर्ट्सगंज,वाराणसी,गाजीपुर, गोरखपुर,कुशीनगर ,देवरिया और महराजगंज में चुनाव है इनमे एक दर्जन से ज्यादा सीटो पर राजभर समाज का जबरदस्त प्रभाव है। ओमप्रकाश राजभर अब घोसी से अपने बेटे अरविंद राजभर को चुनाव लड़ा रहे हैं।

2014 में इन्ही ओमप्रकाश राजभर ने नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने के लिए एकता मंच का गठन किया था।आज वो उन्हें हराना चाहते हैं।ओमप्रकाश कहते हैं”इन लोगो ने जनता को भृमित करने का काम किया है हर बार काठ की हांडी नही चढ़ सकती”।

2017 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजभर की पार्टी को 7 विधानसभा सीटें दी गई थीं। जिसमें से 4 पर उनकी पार्टी को जीत मिली थी। हालांकि वो सरकार में रहने के बावजूद योगी सरकार की आलोचना करते रहे हैं। ओमप्रकाश कहते हैं कि “मुझे मंत्री पद का लालच नही है समाज के लिए मैंने उसे लात मार दी है।समाज को अपनी स्वतंत्र आवाज चाहिए जिसे बीजेपी नहीं देना चाहती है”।

अपनी राय हमें  balliakhabar@gmail.com के जरिये भेजें.

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पूर्वांचल को प्रधानमंत्री दे रहे भर-हाथ सौगात, बलिया के हिस्से सिर्फ वादे क्यों?

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भारत के प्रधानमंत्री और भाजपा के खेवनहार नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सक्रिया हो चुके हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री की जनसभाएं आयोजित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक ही मंच से योजनाओं-परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं। पूर्वांचल को भी खूब उपहार दिए जा रहे हैं। तो सवाल है कि पूर्वांचल के एक बड़े जनपद बलिया को क्या मिल रहा है?

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। इनमें अकेले पूर्वांचल के खाते में 160 से अधिक सीटें मौजूद हैं। ऐसे में पूर्वांचल का राजनीतिक महत्व हर दल और नेता जानते हैं। खबरों के मुताबिक पिछले दो महीने प्रधानमंत्री तीन बार पूर्वांचल का दौरा कर चुके हैं। इस महीने यानी दिसंबर में भी उनके दो दौरे होने वाले हैं। आगामी 7 दिसंबर को प्रधानमंत्री गोरखपुर और 13 दिसंबर को वाराणसी में पधारेंगे। दोनों ही जिलों में पीएम मोदी कई परियोजनाओं का लोकार्पण करने वाले हैं।

वाराणसी से बहुत दूर नहीं है बलिया जनपद। यहां कुल सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें से पांच विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक विराजमान हैं। लेकिन पूर्वांचल में परियोजनाओं के बौछार के बीच बलिया में सूखा पड़ा हुआ है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य किसी भी क्षेत्र में बलिया को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से क्या मिला ये बड़ा सवाल है।

बीते महीने की 16 तारिख को प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण किया। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे नौ जिलों से होकर गुजरता है। लेकिन बलिया की पहुंच से यह एक्सप्रेस-वे कोसों दूर है। बलिया के लोगों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सफर करने के लिए काफी सोचना पड़ेगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे बलिया के पड़ोसी जिला गाजीपुर से होकर जाता है। बलिया के लोगों को पहले यहां तक पहुंचना होगा। सरकार की ओर से बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए एक लिंक एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना है। लेकिन अब तक लिंक एक्सप्रेस-वे कहीं धरातल पर नहीं दिखती है।

लिंक एक्सप्रेस-वे का काम पहले यूपीडा को सौंपी गई थी। लेकिन अब इसे एनएचएआई को थमा दिया गया है। पचास करोड़ की राशि भी आवंटित की गई थी। जिसे अब यूपीडा एनएचएआई को देगी। लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट भी गलत बनाया गया था। तकरीबन सोलह गांवों में लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट में एनएच-31 के रूट पर ही बना दिया गया था। लिंक एक्सप्रेस-वे कब तक बनकर तैयार होगा कहा नहीं जा सकता।

हिंदुस्तान की एक खबर के अनुसार 7 दिसंबर को गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर की नौ लैबों का लोकार्पण करेंगे। बलिया जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग लंबे अरसे से हो रही है। गत 25 अक्‍टूबर को प्रधानमंत्री ने सिद्धार्थनगर से उत्तर प्रदेश के नौ मेडिकल कॉलेजों का उद्घाटन किया था। लेकिन इनमें से एक भी बलिया की जमीन पर नहीं है। जिले में एक भी कायदे की सरकारी अस्पताल नहीं है। गंभीर रोगियों को वाराणसी के बीएचयू में रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल भ्रष्टाचार और दुर्व्यवस्था की भेंट चढ़ गया है। यह बात खुद भाजपा नेता रामइकाबल सिंह ही कई बार कह चुके हैं। जिला अस्पताल की जर्जर हालत को लेकर जिले के छात्रों ने कुछ ही महीने पहले बलिया बंद का आयोजन किया था।

गत 20 अक्‍टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। बलिया जिले में एयरपोर्ट बनाने की मांग कई सालों से हो रही है। लेकिन सरकार का ध्यान इस ओर नहीं गया है। अक्सर भाजपा के मंत्री और सांसद-विधायक यह तर्क देते नजर आते हैं कि बलिया में एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है। गौरतलब है कि रसड़ा से बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह ने पिछले दिनों के एक अखबार के कार्यक्रम में भाजपा सरकार में मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला की मौजदूगी में कहा था कि “सरकार चाहे तो मैं अपनी जमीन देने को तैयार हूं।”

बलिया जिले की कुल आबादी तीस लाख से अधिक है। बेरोजगारी के मामले में बलिया प्रदेश भर के अग्रणी जिलों में शुमार है। बेरोजगारी का आलम ये है कि लाखों की संख्या में नौजवान जिले से पलायन करने पर मजबूर हैं। युवा दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में जाकर मेहनत-मजदूरी कर रहे हैं। क्योंकि बलिया में कल-कारखाने या रोजगार के अन्य साधन चौपट हैं। फैक्ट्री लगाने की मांग भी मेडिकल कॉलेज और एयरपोर्ट की ही तरह हो रही है। लेकिन यहां भी हाल वही है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव बस कुछ ही महीनों बाद होने वाला है। प्रदेश की सत्ता में वापसी करना भाजपा के लिए एक चुनौती है। जिससे निपटने के लिए भाजपा ने अपने सबसे बड़े खिलाड़ी को मैदान में उतार दिया है। परियोजनाओं की बाढ़-सी आई हुई है। बलिया के लोग निहार रहे हैं कि इस बाढ़ की कोई धारा उन तक पहुंचेगी या मंचों से बड़े-बड़े दावों के बारिश से ही खुद को सराबोर करना होगा?

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तीन मार्गों को मिलाकर बन गया नया स्टेट हाईवे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बलिया

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ghajipur-turtipar road and purvanchal express-way

बलिया जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़े जाने के लिए शासन की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है। लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी बलिया जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए हो रहा है। अब एक और रास्ता बनाया जा रहा है जो बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा। लोक निर्माण विभाग ने गाजीपुर से तुर्तीपार तक के तीन सड़कों को मिलाकर स्टेट हाईवे घोषित कर दिया है।

लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि “गाजीपुर से तुर्तीपार रोड अब स्टेट हाईवे हो गया है। इसे कोड भी आवंटित कर दिया गया है। यह रास्ता पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ता है। इसलिए संबे समय से इसे गड्ढा मुक्त किए जाने की मांग हो रही थी।”

गाजीपुर से तुर्तीपार तक के 74 किलोमीटर लंबी तीन सड़कों को मिलाकर स्टेट हाईवे बना दिया गया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसे स्टेट हाईवे कोड 108 दिया गया है यानी एसएच-108. एसएच-108 का 47 किलोमीटर हिस्सा बलिया से गुजरता है। इस हाईवे को अगले वर्ष में फोर लेन बनाने की योजना है। फिलहाल इसे गड्ढा मुक्त बनाया जा रहा है। दैनिक जागरण की एक खबर के मुताबिक बलिया के 47 किलोमीटर हिस्से में अब तक पांच सौ से ज्यादा गड्ढे भर दिए गए हैं।

बलिया के हिस्से की सड़क का चालीस लाख रुपए की लागत से पैचवर्क किया गया है। हालांकि पूरी एसएच-108 का हाल अभी दुरुस्त नहीं हो सका है। गाजीपुर के हिस्से की सड़क अभी भी गड्ढों से पटी हुई है। गाजीपुर में 27 किलोमीटर का मार्ग है। इसे गड्ढा मुक्त किया जाना अभी बाकि है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कासिमाबाद राही इसी रास्ते बलिया आते-जाते हैं।

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बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बिहार, जानिए पूरा रूट

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बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा बिहार, जानिए पूरा रूट

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन कर दिया है। अब पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से बिहार को जोड़ने की तैयारी हो रही है। एनएचएआइ बिहार को बलिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना बना रही है। पहले पटना-बक्सर फोर लेन को हैदरिया के रास्ते पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की बात चल रही थी। लेकिन अब इस चर्चा पर पूर्ण विराम लग गया है।

एनएचएआइ की योजना है कि बिहार को बलिया से होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाए। ताकि पटना से दिल्ली जाने में 18 से 20 घंटे के बजाए 10 से 12 घंटे ही लगें। अब तक पटना-बक्सर फोर लेन को हैदरिया के नजदीक पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने पर मंथन चल रहा था। लेकिन अब योजना बदल गई है। दैनिक जागरण ने एनएचएआइ का बयान छापा है कि बलिया के नजदीक से बिहार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे कनेक्टिवटी मिलेगी। यहां भी एक पुल है।

बता दें कि हैदरिया के समीप पटना-बक्सर फोर लेन को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए एनएचएआइ ने कंसल्टेंट तय कर लिया था। लेकिन योजना बदले जाने के बाद कंसल्टेंट से काम वापस लिए जाने की खबर है। इसके बाद एनएचएआइ नई रूट पर काम शुरू कर देगा।

बक्सर से बलिया की दूरी लगभग चालीस किलोमीटर है। बक्सर और पटना के बीच की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है। पटना से बक्सर होते हुए बलिया का रूट बनेगा। यहां से फिर पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने का मार्ग तय होगा। बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे का काम चल रहा है। बलिया से गाजीपुर होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर पहुंचा जा सकेगा।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के जरिए लोग लखनऊ तक कम समय में ही पहुंच जाएंगे। जिसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से होते हुए राजधानी पहुंचा जा सकेगा। एक्सप्रेस-वे की इस जाल से गुजरते हुए बिहार से दिल्ली पहुंचने के बीच लगभग छह से आठ घंटे तक का समय कम लगेगा। हालांकि बता दें कि यह काम इतनी जल्दी पूरा होने वाला नहीं है। अब तक महज योजना ही बनाई गई है।

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