17 पिछड़ी जातियों वाले फैसल पर ओमप्रकाश राजभर, बोले- भाजपा का दोहरा चरित्र हुआ उजागर

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सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने भाजपा पर तल्ख बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के संबंध में केंद्रीय मंत्री की ओर से संसद में दिया गया वक्तव्य भाजपा के दोहरे चरित्र को उजागर कर रहा है। पूर्व मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बलिया में पत्रकारों से बातचीत की। इससे पहले गुरुवार की सुबह वे नकहरा तिवारी गांव गए जहां एक ही परिवार के चार लोगों की मौत होने पर उन्होंने परिवारीजनों को सांत्वना दी। 

ओमप्रकाश राजभर ने योगी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि जब निर्धारित प्रक्रिया पालन नहीं हुआ। आरजीआई ने जातियों को सूचीबद्ध नहीं किया और अनुसूचित जाति जनजाति आयोग ने इन जातियों को अपने कॉलम में रखा ही नहीं है तो जो प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश क्यों दिया गया है। उसकी उपयोगिता क्या और कहां है।

उन्होंने कहा कि 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी कुछ ऐसा ही आदेश जारी किया था और कई लोगों ने उस आदेश के आधार पर प्रमाण पत्र बनवा लिया। बाद में वह प्रमाणपत्र रद्दी कागज के समान हो गया।ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मोदी और योगी की जोड़ी पिछड़ी जातियों के हक को समाप्त करने में लगी है। एक तरफ योगी सरकार आरक्षण का ढिंढोरा पीट रही है तो दूसरी ओर मोदी सारे सरकारी उपक्रमों को उद्योगपतियों के हाथों में बेचकर पिछड़ी और अनुसूचित जाति-जनजाति को मिल रहे आरक्षण के लाभ को समाप्त कर रहे हैं।

ओमप्रकाश राजभर ने मांग की कि यदि भाजपा सही मायने में पिछड़े और अनुसूचित जाति-जनजाति के विकास के लिए प्रतिबद्ध है तो निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करे और सामाजिक न्याय समिति की जो रिपोर्ट है, 27 प्रतिशत आरक्षण में पिछड़ा, अति पिछड़ा और 22.5 प्रतिशत में दलित, अतिदलित जातियों का वर्गीकरण करने का प्रस्ताव है, उसे शत प्रतिशत लागू करें। 

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