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बलिया में रजिस्टर्ड हैं महज़ 111 एंबुलेंस, सड़क हैं पर सैकड़ों, इस तरह हो रहा है बड़ा खेल

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बलिया डेस्क : बलिया में एंबुलेंस के नाम पर किस तरह से मरीजों का शोषण किया जाता है, यह बात अब किसी से छुपी नहीं है. सरकार की तरफ से चलने वाली एंबुलेंस हो या फिर प्राइवेट एंबुलेंस, एंबुलेंस संचालक मजबूरी का फायदा उठाकर जमकर इसका दुरुपयोग करते हैं.

मनमानी तरीके से तीमारदारों से पैसा वसूला जाता है. इसके साथ साथ प्राइवेट एंबुलेंस वाले निजी अस्पताल से सेटिंग करके कमीशन के लिए मरीजों को वहां भर्ती करा देते हैं और अपमा कमीशन ले लेते हैं. इस तरफ यह खेल प्रशासन की नाक के नींचे होता है लेकिन बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं की जाती है.

ऐसे में प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों द्वारा मरीजों का खूब शोषण किया जाता है. एक हकीक़त यह भी है कि बलिया में महज़ 111 एंबुलेंस पंजीकृत हैं लेकिन हकीक़त पर गौर करें तो अपने यहाँ सैंकड़ों की तादाद में सड़क पर एंबुलेंस दौड़ती नज़र आएँगी. इनमे न तो जीवन रक्षक उपकरण है और न ही यह मानकों पर खरी उतरती हैं.

ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि यह एंबुलेंस किस तरह से अपने खेल को अंजाम दे रहे हैं और घोर मुनाफा कमा रही हैं. लोगों का यह भी कहना है कि इन एंबुलेंस को न तो पुलिस की तरफ से रोका जाता है और न ही परिवहन विभाग की तरफ से, ऐसे में यह खूब फायदा उठाते हैं.

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CM योगी ने रामगोविंद चौधरी को आखिरी क्यों दी काले गाजर का हलवा खाने की नसीहत?

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बलिया। उत्तरप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में विधानसभा उपाध्यक्ष चुनाव के चलते गरम रहा सदन का माहौल उस वक्त खुशनुमा हो गया, जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने नेता खन्ना से मुकाबले के लिए रामगोविंद को बलिया के काले गाजर का हलवा खिलाने की बात कही। दरअसल विधानसभा के विशेष सत्र में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना के बीच खूब मीठी नोकझोंक हुई और इस पर हंसते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खूब चुटकी ली।

विधानसभा में करीब 6 घंटे लगातार चले सदन में माहौल खासा खुशनुमा रहा और खूब हास परिहास दोनों ओर से हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष सुबह से तैश में बातें कह रहे थे लेकिन संसदीय कार्यमंत्री ने भी शाहजहांपुर का आटा खाया है और वह नेता प्रतिपक्ष का मजबूती से जवाब देते हैं। अब नेता विपक्ष को बलिया के काले गाजर का हलवा खाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नेता विपक्ष रामगोविंद संवाद में यकीन रखने वाले एक सज्जन व्यक्ति हैं लेकिन दलीय अंतर्विरोधों को झेलने की ताकत नहीं रखते, इसीलिए सदन में अनावश्यक झगड़ पड़ते हैं।

सदन में जब रामगोविंद चौधरी ने उपाध्यक्ष के चुनाव में संसदीय परंपराओं का पालन न करने का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा तो बचाव में सुरेश खन्ना ने कहा कि परंपराएं हमने नहीं आप लोगों ने तोड़ी हैं। आपके यहां गुटबाजी थी, इसलिए आप लोग खुद प्रत्याशी नहीं दे पाए। वक्त परिवर्तनशील होता है परंपराएं बनती और टूटती हैं। अगली बार भी आप लोग यहीं बैठेंगे तब आपकी बात हम लोग मान लेंगे। रामगोविंद चौधरी ने हंसते हुए कहा कि हम लोग सरकार में आएंगे और खन्ना जी को उपाध्यक्ष बनाएंगे।
इस पर सुरेश खन्ना कहां चूकने वाले थे। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की ओर संकेत करते हुए कहा कि एक्टिंग में आप को कोई मुकाबला नहीं कर सकता। रामगोविंद चौधरी ने एक फिल्म को याद करते हुए कहा कि उसमें एक गाना अजी रूठ कर कहां जाइएगा जहां जाइएगा हमें पाइएगा, वाली स्थिति यहां है। जब नितिन अग्रवाल उपाध्यक्ष चुन लिए गए तो नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह तो सीधे हैं। विधानसभा का मुश्किल से एक ही सत्र और होगा। उसमें अध्यक्ष ही बैठेंगे। इन उपाध्यक्ष को आसन पर बैठने का मौका तो मिलना नहीं।

इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों की हंसी छूट गई। नितिन तो सत्ता पक्ष में गए ही थे आप लोगों ने इधर भेज दिया। अरे उन्हें कैबिनेट मंत्री ही बना देते। इन्हें तो कुछ मिला नहीं। मुख्यमंत्री जब मुस्कुरा रहे थे तो नेता प्रतिपक्ष ने उनसे मास्क उतारने को कहा। मुख्यमंत्री ने मास्क नीचे कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा हमें तो आपके स्वास्थ्य की चिंता रहती है। बलिया की काली गाजर का हलुवा खाना चाहिए। रामगोविंद चौधरी ने सत्ता पक्ष पर विधायकों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया।

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चित्तू पांडेय क्रासिंग पर अंडरपास बनाने का प्रोजेक्ट क्यों हो गया रद्द?

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अंडरपास बनाने की परियोजना के रद्द होने के साथ ही चित्तू पांडेय क्रासिंग पर जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद ने भी दम तोड़ दिया है। (फोटो साभार: दैनिक जागरण)

बलिया जिले के चित्तू पांडेय क्रासिंग पर अंडरपास बनाने का प्रोजेक्ट निरस्त कर दिया गया है। अंडरपास बनाने की परियोजना के रद्द होने के साथ ही चित्तू पांडेय क्रासिंग पर जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद ने भी दम तोड़ दिया है। रेलवे के इंजीनियरों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि क्रासिंग के पास अंडरपास नहीं बनाई जा सकती है। जगह कम होने की वजह से यह प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया है।

शहर को भारी जाम से मुक्ति दिलाने के मार्च, 2021 में एक पहल शुरू की गई। जिसके तहत चित्तू पांडेय रेलवे क्रासिंग के पास एक अंडरपास बनाने की योजना बनी। रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बैठक हुई। रेलवे विभाग और सेतु निगम को संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई।

छह महीने से इस योजना पर काम हो रहा था। रेलवे विभाग और सेतु निगम लगातार अध्ययन कर रहा था। अध्ययन के दौरान ही रेलवे विभागों के इंजीनियरों ने पाया कि क्रासिंग के पास अंडरपास बनाने के लिए जगह पर्याप्त नहीं है। साथ ही क्रासिंग के दोनों ओर कई बड़े निर्माण भी हैं। जिन्हें तोड़ा नहीं जा सकता है।

लंबे अध्ययन के बाद रेलवे विभाग ने अपनी रिपोर्ट में यह बात बताई है कि चित्तू पांडेय रेलवे क्रासिंग के पास अंडरपास बनाना संभव नहीं है। बता दें कि क्रासिंग नजदीकी क्षेत्रों में ही रोडवेज बस स्टेशन, कचहरी और कई अन्य सरकारी कार्यालय भी हैं। शहर का व्यस्त इलाका होने की वजह से हर दिन घंटों इस क्रासिंग के पास लोगों को जाम का सामना करना पड़ रहा है।

चित्तू पांडेय क्रासिंग पर ट्रेनों का दबाव भी अधिक है। जिसकी वजह से दिन भर में कई बार क्रासिंग ठप पड़ा रहता है। गाड़ियों की आवाजाही शुरू होते ही जाम लग जाता है और फिर लोगों को घंटों इस मुसीबत का सामना करते हैं। अंडरपास की योजना से जाम से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी थी। लेकिन प्रोजेक्ट के रद्द होने के साथ ही यह उम्मीद चकनाचूर हो गई है।

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बलिया- रेलवे स्टेशन पर नया फुट ओवरब्रिज शुरू, ट्रैक पार करने में होगी आसानी

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बलिया। जनता की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म एक से 4 को जोड़ने के लिए बना नया फुट ओवरब्रिज चालू कर हो गया है। इसका निर्माण पिछले दो सालों से चल रहा था। तीन करोड़ से फुट ओवरब्रिज और स्वचालित सीढ़ी का कार्य हुआ है। सोमवार को किसान आंदोलन के कारण प्लेटफार्म पर बिना टिकट प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात रहे। बाजार जाने और ट्रेन पकड़ने के लिए हर किसी ने नए फुट ब्रिज का इस्तेमाल किया। इस पर काफी चहल पहल रही, इसके शुरू होने से सिविल लाइन क्षेत्र से आने वाले यात्रियों को ट्रैक पार करने से मुक्ति मिली।

9 माह पहले तोड़ा गया था 125 साल पुराना ओवरब्रिज- शहर दो हिस्सों में बंटा है। पहला सिविल लाइन तो दूसरा चौक क्षेत्र। चौक में मुख्य बाजार है और सिविल लाइन में सभी प्रशासनिक कार्यालय और जिले की सबसे ज्यादा आबादी है। रेलवे स्टेशन के साइकिल स्टैंड के सामने फुटओवर ब्रिज था, यह ब्रिज छोटी लाइन के समय का था, जो करीब 125 वर्ष पुराना था। प्रतिदिन हजारों यात्री आते-जाते थे। रेलवे ने प्लेटफार्म चार का विद्युतीकरण करने के लिए जनवरी में इसे तोड़ दिया, इसके चलते हजारों लोग रेलवे पटरी पार करते हए आने-जाने को विवश थे।

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