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बलिया में आज रात आठ बजे से मंगलवार सुबह तक लाकडाउन का आदेश जारी

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बलिया। बलिया में बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए शुक्रवार की शाम 8 बजे से शुरू होकर मंगलवार की सुबह 7 बजे तक लागू रहेगा. इसको लेकर भी डीएम अदिति सिंह ने दिशा-निदेश जारी कर दिए हैं.

कर्फ्यू के समय आवश्यक सेवाओं/पंचायत चुनाव से जुड़ी मत मतगणना पार्टियों/स्वास्थ्य सेवाओं/सफाई आदि से जुड़े हुए कर्मियों के अतिरिक्त कोई अन्य आवागमन की अनुमति नहीं होगी.

उपरोक्त का उल्लंघन महामारी अधिनियम 1867 यथासंशोधित द्वारा महामारी अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश 2020 आपदा मोचन अधिनियम 2005 के सुसंगत प्राविधानों तथा भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 188 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा.

तीन दिन के लॉकडाउन में कहां बैन, कहां मिलेगी छूट
प्रतिबंध के दौरान, मॉल,रेस्तरां, धार्मिक स्थान बंद रहेंगे, साथ ही सिनेमा हॉल, बार, खेल कॉम्प्लेक्स, जिम, स्पा और स्विमिंग पूल प्रतिबंधित रहेंगे.

संक्रमण को रोकने के लिए कंटेनमेंट क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा.  आवश्यक सेवाओं जैसे स्वास्थ्य, सेवा, पुलिस, अग्नि, बैंक, विद्युत, जल एवं सिंचाई, पब्लिक परिवहन के निर्धारित संचालक, आवश्यक सेवाएं और गतिविधियां रहेंगी.

मतगणना को लेकर भी जारी हुई नई गाइडलाइन

मतगणना को लेकर जिलाधिकारी अदिति सिंह ने नई गाइडलाइन जारी की है. इसमें मतगणना एजेंट या प्रत्याशियों के लिए ‘कोरोना निगेटिव रिपोर्ट’ की अनिवार्यता को सशर्त शिथिल कर दिया है. नई गाइडलाइन के मुताबिक, जिस व्यक्ति को कोविड 19 के लक्षण बुखार व जुकाम आदि हो, उसे मतगणना स्थल में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.
मतगणना के दिन पल्स आक्सीमीटर/थर्मामीटर से टेस्ट में स्वस्थ्य मिलने पर ही मतगणना केन्द्र में प्रवेश की अनुमति दी जायेगी.  गौरतलब हो कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी अदिति सिंह ने गुरुवार को आदेश जारी किया था कि उन्हीं प्रत्याशियों या मतगणना अभिकर्ताओं को मतगणना केन्द्र में जाने की अनुमति होगी, जिनके पास 72 घंटे पहले की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होगी.
इस आदेश के बाद गुरुवार को अस्पतालों पर भीड़ उमड़ पड़ी. सीएचसी/पीएचसी व जिला अस्पताल पर किट का अभाव हो गया. इसको ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने इस प्रतिबंध को शिथिल कर दिया है. अब कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य नहीं है. मतगणना स्थल के गेट पर थर्मल स्केनिंग, आक्सीमीटर व थर्मामीटर से जांच की व्यवस्था होगी. प्रत्येक मतगणना केन्द्र पर मेडिकल हेल्थ डेस्क होगी, जहां जरूरी दवाईयां उपलब्ध रहेगी. मास्क व सामाजिक दूरी अनिवार्य होगी.
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भाजपा ने जारी की उम्मीदवारों की लिस्ट, धनंजय कन्नौजिया का टिकट कटा, रसड़ा से बब्बन राजभर मैदान में

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भारतीय जनता पार्टी ने अपने 91 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने कई दिग्गजों को दोबारा चुनावी मैदान में उतारा है तो वहीं कुछ का टिकट काट दिया है। इसी बीच बड़ी अपडेट ये हैं कि पार्टी ने बलिया की बेल्थरारोड सीट से विधाक धनंजय कन्नौजिया का टिकट काट दिया है। उनकी जगह बसपा से भाजपा में गए छट्ठू राम को प्रत्याशी बनाया गया है।

कन्नौजिया ने पंचायत चुनाव में अपनी मां को क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में उतारा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था जिससे पार्टी की किरकिरी हुई थी। वहीं सूत्रों की मानें तो शेष सभी सीटों पर सिटिंग विधायकों पर ही पार्टी दांव लगाने जा रही है। रसड़ा में राजभर वोटों को साधने के लिए पार्टी ने बड़ा दांव चला है। इस सीट से बब्बन राजभर को प्रत्याशी बनाया गया है। राजभर इससे पहले बसपा के टिकट पर सलेमपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद रह चुके हैं। वहीं तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद उपेन्द्र तिवारी अपना टिकट बचाने में सफल हुए है। फेफना से पार्टी ने उनपर विश्वास जताया है।

सिकंदरपुर सीट की बात करें तो संजय यादव पर पार्टी ने विश्वास जताया है। भाजपा से मिल रही अंदरूनी खबरों के अनुसार बलिया नगर विधानसभा से आनंद स्वरूप शुक्ल और बैरिया से सुरेंद्र सिंह का भी टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है।

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सपा ने एक फिर रिजवी पर खेला दांव, क्या इत्र नगरी सिकन्दरपुर में फिर फैलेगी समाजवादी खुशबू!

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बलिया की सिकंदरपुर विधानसभा सीट से जुड़ा इलाका गुलाब के उत्पादन और इत्र की खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। अब यहां से अखिलेश यादव ने अपने पुराने और कद्दावर चेहरे मो.जियाउद्दीन रिजवी को टिकट देकर समाजवादी खुशबू फैलाने की जिम्मेदारी दी है। सिकंदरपुर इत्र कारोबार के लिए पूरी दुनिया में अपनी पहचान रखता है। यहां का इत्र विदेशों तक अपनी खुशबू बिखेरता रहा है। हालांकि, अब यह काम सिमट कर छोटे पैमाने पर हो रहा है। राजनीतिक समीकरण की बात करें तो सिकन्दरपुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की भी संख्या अच्छी खासी है। यादव, राजभर और भूमिहार भी ठीक-ठाक संख्या में हैं।

बलिया की सिकंदरपुर सीट पर 2017 में पहली बार कमल खिला था। हालांकि सिकंदरपुर सीट पर बीजेपी की जीत का कारण मोदी लहर को माना गया था। जब राजनीति के सभी समीकरण फेल हो गए थे और यही वजह है कि एक बार फिर अखिलेश यादव ने मोहम्मद जियाउद्दीन पर भरोसा जताया है। जो मुस्लिम वोट बैंक के लिहाज से भी काफी अहम माना जा रहा है। दो बार के विधायक और मंत्री रहे रिजवी- मो.जियाउद्दीन रिजवी कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। रिजवी पहली बार 2002 में समाजवादी पार्टी से विधायक निर्वाचित हुए थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल में अनेकों विकास कार्य किए हैं, जबकि दूसरी बार 2012 में दोबारा विधायक निर्वाचित हुए इस बीच 2007 में बसपा के श्रीभगवान ने सिकंदरपुर में अपना कब्जा जमाया। लेकिन 2017 में ऐसा पहली बार हुआ जब बीजेपी के हाथ में यह सीट चली गई।

मोदी लहर में जीते संजय यादव- 2017 के चुनावों में यूपी की जिन सीटों पर मोदी लहर के चलते जीत मानी गई थी, उनमें से सिकंदरपुर सीट भी एक है। सभी जातिगत समीकरण ध्वस्त हो गए थे और पहली बार यहां कमल खिला था। बीजेपी ने शानदार सफलता हासिल की। पार्टी के उम्मीदवार संजय यादव को 69 हजार 536 वोट पड़े जबकि सपा के कद्दावर नेता और कई बार विधायक रह चुके जियाउद्दीन रिजवी को 45 हजार 988 मतों से ही संतोष करना पड़ा। इससे पहले यहां से सपा और बसपा के उम्मीदवार जीतते आ रहे थे।

सिकंदरपुर में काफी लोकप्रिय रिजवी- मोहम्मद रिजवी ने विधायक बनते ही यूपी-बिहार को जोड़ने वाले सबसे महत्वपूर्ण काम खरीद दरौली पर पीपा का पुल दिया, बाद में क्षेत्र के लोगों की मांग पर मोहम्मद रिजवी ने मुख्यमंत्री रहे, अखिलेश यादव से पक्का पुल बनाने की मांग कर दी, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोहम्मद रिजवी की मांगों को मानते हुए तत्काल खरीद दरौली घाट पर पक्का पुल बनाने की घोषणा कर दी। खरीद दरौली घाट पर पक्का पुल मोहम्मद रिजवी का ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक था, इन्होंने पूरे क्षेत्र में सड़कों का चौड़ीकरण करवाया। 

हालांकि इत्र नगरी सिकंदरपुर में मुस्लिम और ओबीसी जिधर रुख करते हैं, उसी पार्टी का विधायक जीतता है। मुस्लिम वोटबैंक काफी अहम भूमिका निभाते हैं। सपा और बसपा के बीच सीधा मुकाबला होने की यह एक बड़ी वजह रही है। सिकंदरपुर में 3 मार्च को वोटिंग होना है। और अब देखना होगा कि मोहम्मद रिजवी को दोबारा मैदान में उतारने का सपा को कितना फायदा मिलता है। यहां दो बार विधायक रहे मो. रिजवी का नाम गुरूवार को लखनऊ में जारी सपा उम्मीदवारों की लिस्ट में देखकर उनके समर्थकों में जोश भर गया।

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फेफना के कोल्डस्टोरेज में सरकारी उपकरण मिलने पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल, कही ये बात

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बलिया। फेफना विधानसभा के कनैला गांव स्थित एक कोल्डस्टोरेज में दिव्यांगजनों को दिये जाने वाला उपकरण भारी मात्रा में पकड़े जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कहा जा रहा है कि ये कोल्डस्टोरेज बीजेपी नेता का है। जिसके बाद से राजनैतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तमाम विपक्षी पार्टियों ने भाजपा पर सवाल भी उठाए हैं।

इसी बीच मामले को लेकर पूर्व विधायक व सपा नेता संग्राम सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि “चुनाव प्रभावित करने के लिए ट्राई साइकिल रखी गई थी। उन्होंने अधिकारियों पर भी मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में अधिकारी भी मिले हैं, निष्पक्ष चुनाव के लिए अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।”

संग्राम सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि “आखिर सरकारी सामान को प्राइवेट गोदाम में क्यों रखा गया? मंत्री उपेंद्र तिवारी पर वार करते हुए कहा कि उन्होंने दिव्यांगों को भी नहीं छोड़ा।” मामले पर अभी तक ठोस कार्यवाही न होने से भी सपा नेता नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि मामले कार्रवाई ना होना डीएम की मजबूरी है।

बता दें कि बीते दिन कनैला गांव स्थित एक कोल्डस्टोरेज में दिव्यांगजनों को दिये जाने वाला उपकरण भारी मात्रा में पकड़े गए थे। जिसके बाद जांच टीम ने उपकरणों को सोहांव ब्लॉक पर बीडीओ की निगरानी में सौंप दिया है। निजी स्थान पर उपकरण मिलने पर दिव्यांगजन अधिकारी को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में कोल्ड स्टोरेज को भाजपा के बड़े नेता और सरकार में एक मंत्री के करीबी का बताया गया था।

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