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पंचायत चुनाव- बलिया में सुभासपा प्रवक्ता और पुलिस के बीच बातचीत का ऑडियो वायरल

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बलिया। अक्सर लोग कहा करते हैं जिसकी सत्ता, उसकी पुलिस। आम तौर देखा भी जाता है कि सत्ताधारी दल सरकारी तंत्र का प्रयोग कर चुनाव जीतने की कोशिश करते हैं। कुछ ऐसा ही बलिया में देखने को मिल रहा है। यहां जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के पहले राजनीति शबाव पर है। हर रोज नए-नए राजनैतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच पुलिस भी सत्ता पक्ष के समर्थन में खुलकर सामने आने लगी है। पुलिस विरोधियों पर तो एफआईआर दर्ज कर रही है, स्थानीय जिला पंचायत सदस्यों के घर पर दबिश दे रही है। लेकिन सत्ताधारी दलों पर कोई खास कार्रवाई नहीं हो रही है।

बलिया में चल रहा पुलिस का यह खेल समझ से परे है।सुभासपा के प्रदेश प्रवक्ता सुनील सिंह और गड़वार एसओ राजीव सिंह के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल हो रहा है। जिसके बाद से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।बलिया में आए दिन जिला पंचायत सदस्यों के लापता होने की खबरें सामने आ रही हैं। इसके पीछे किसका हाथ हैं, कोई नहीं जानता लेकिन इन घटनाओं ने गंदी राजनीति का चेहरा उजागर कर दिया है। पुलिस भी इन सदस्यों को खोजने के नाम पर इनके घरों पर भारी फोर्स के साथ दबिश देती है। पुलिस की इस तरह की कार्रवाई से परेशान सुभासपा के जिला

पंचायत सदस्य के परिजनों की शिकायत पर जब इस दल के प्रवक्ता सुनील सिंह ने थानाध्यक्ष गड़वार से जब इस संबंध में बातचीत की गई तो उनका एक ही जबाब था, जिला पंचायत सदस्य से बात करा दीजिये ।वहीं इस वायरल ऑडियो मामले में सुभासपा के प्रवक्ता द्वारा गड़वार के थाना प्रभारी को फोन कर पूछा जाता है कि हमारे जिला पंचायत सदस्य विपिन राजभर के घर पुलिस बार-बार जा रही है वही प्रभारी द्वारा जबाब मिलता है कि कहां है वो ,पुलिस जानना चाहती हैउनसे बात कराए वो कहा है। प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि क्या किसी ने तहरीर या मुकदमा है तो जवाब मिलता है कोई मुकदमा नही है।

बावजूद प्रभारी द्वारा उनकी जानकारी मांगी जा रही है। आरोप लगया कि पुलिस के द्वारा बेवजह परेशान किया जा रहा है। पुलिस ने इस तरह की कार्रवाई ने जिला पंचायत सदस्यों के परिजनों को परेशान कर के रख दिया है। साथ ही कई सवाल उठ रहे हैं। इन कार्रवाहियों और वायरल ऑडियो पर गौर करें तो कहीं न कहीं पुलिस सत्ता पक्ष की कठपुतली बनी नजर आ रही है और साफ दिख रहा है कि पुलिस की सभी कार्रवाई राजनीति के अधीन हैं।

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बलिया DM ने सुनी जनता की समस्या, पांच अधिकारियों का रोका वेतन !

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बलिया: सम्पूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी अदिति सिंह ने बैरिया तहसील में जनता की समस्याओं को सुना और त्वरित निस्तारण के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। इस दौरान तमाम तरह की समस्याएं आई, जिनमें कुछ का मौके पर निस्तारण कराया गया। वहीं, शेष समस्याओं को सम्बन्धित अधिकारियों को ​इस निर्देश के साथ सौंपा कि समयान्तर्गत व गुणवत्तापरक निस्तारण सुनिश्चित कराएं।

सम्पूर्ण समाधान दिवस पर अवैध कब्जे, राशन, पेंशन, भूमि विवाद सम्बन्धी मामले प्रमुख रूप से आए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि जनता की समस्याओं को गंभीरता से लें। कोई भी शिकायत डिफाल्डर की श्रेणी में नहीं जानी चाहिए। ध्यान रहे कि निस्तारण की गुणवत्ता भी बेहतर हो, ताकि शिकायकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो जाए। जिलाधिकारी ने पुलिस से जुड़ी समस्याओं को भी सुना और थाना प्रभारियों को आवश्यक दिशा—निर्देश दिए। इस अवसर पर सीडीओ प्रवीण वर्मा, एसडीएम अभय सिंह, सीओ अशोक मिश्र, डीएसओ केजी पांडेय, नायब तहसीलदार रजत सिंह, समाज कल्याण अधिकारी अभय सिंह, पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी राजीव यादव समेत जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

समाधान दिवस में अनुपस्थित पांच अधिकारियों का रोका वेतन

बैरिया तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में पांच अधिकारियों का अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी अदिति सिंह ने उनका एक दिन का वेतन रोकने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी की जनसुनवाई में जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, सहायक निदेशक मत्स्य और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता अनुपस्थित थे। तीन दिन के अंदर इन सभी अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है।

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बलिया: सहयोग राशि देने में वादा खिलाफी के आरोप पर क्या बोले विधायक धनंजय कन्नौजिया?

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बलिया के बेल्थरारोड विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया पर एक राम कथा कार्यक्रम में मंच से 11 हजार रुपए का वादा करके सिर्फ 1 हजार देने का आरोप लगा है। राम कथा कार्यक्रम के आयोजकों ने विधायक धनंजय कन्नौजिया से नाराज होकर उन्हें 1 हजार रुपया लौटा दिया। साथ ही उन्हें दिया गया स्मृति चिन्ह भी वापस ले लिया। इस पूरे बखेड़े पर भाजपा विधायक ने चुप्पी तोड़ी है।

मंच से 11 हजार देने का वादा करके 1 हजार रुपए देने के आरोप पर विधायक धनंजय कन्नौजिया ने कहा है कि “मैंने ऐसी कोई घोषणा नहीं की थी। मंच से 11 रुपए देने की बात अफवाह है। लोग बेवजह मेरी छवि खराब करने के लिए इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। मैं कभी भी धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग राशि देने की घोषणा नहीं करता हूं।”

पूरा बखेड़ा समझिए: बलिया के बेल्थरारोड में पूरा और पतोई गांव द्वारा हर साल नवरात्र के समय राम कथा कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। गांव के ही एक दुर्गा मंदिर पर इस साल भी यह आयोजन किया गया था। राम कथा कार्यक्रम में बेल्थरारोड से भाजपा विधायक धनंजय कन्नौजिया को बतौर अतिथि बुलाया गया था। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल पर मंच से धनंजय कन्नौजिया ने ग्यरह हजार की सहयोग राशि देने की घोषणा की। लेकिन बाद में पलट गए और सिर्फ एक हजार रुपया ही दिया। दिलचस्प बात यह है कि राम कथा कार्यक्रम का आयोजक खुद भारतीय जनता पार्टी का ही एक बूथ अध्यक्ष है।ग्यारह हजार का वादा कर एक हजार रुपया थमाने पर कार्यक्रम के आयोजक नाराज हो गए। आयोजकों ने विधायक धनन्जय कन्नौजिया को उनका एक हजार रुपया लौटा दिया। साथ ही कार्यक्रम में दिया गया स्मृति चिन्ह भी वापस ले लिया। आयोजकों ने इस बात की घोषणा बाकायदे मंच पर चढ़ कर दिया। आयोजकों द्वारा मंच से दी गई इस जानकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर रायता फैला रहा है।

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बलिया पुलिस ने तीन किसान नेताओं को किया नजरबंद, यह है वजह!

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बलिया के सुखपुरा से ख़बर, जहां तीन किसान नेताओं को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के किसान व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा के द्वारा पुतला दहन करने की घोषणा की थी। जिसके बाद गुरुवार शाम से ही तीनों किसानों नेताओं के नजरबंद किया गया है। शनिवार को भी यही हालात हैं।

किसान नेताओं में अखिल भारतीय किसान सभा के जिला मंत्री व बोड़िया के यमुना प्रसाद वर्मा, किसान मजदूर शोषित गरीब असहाय संगठन के जिलाध्यक्ष शिव बहादुर यादव एवं संगठन मंत्री रामनाथ यादव (निवासी गण अपायल) शामिल हैं। इनके आवास पर एक-एक पुलिस कांस्टेबल की तैनाती की गई है। उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

पुलिस का पहरा इतना कड़ा है कि परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य कोई भी किसान नेताओं से नहीं मिल सकता। किसान नेताओं को ज़रा भी बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। जिसको लेकर अन्य किसान नेताओं में आक्रोश है। किसानों की नजरबंदी की विप्लव सिंह, पारसनाथ सिंह, विक्रमा राम, शिवजी राम, अख्तर अली, दीनानाथ सिंह, सुरेश राजभर, गुलाम राजभर, राजू सिंह, फुलमुहम्मद मास्टर आदि ने भर्त्सना की है। उनका कहना है कि यह कार्यवाही गलत है। सरकार कुछ भी कर ले, किसानों की आवाज को दबा नहीं पाएगी। किसान आखिर दम तक लड़न को तैयार हैं।

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