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बलिया का हाल : मंत्री के कहने के बावजूद मरीज को नहीं मिला एंबुलेंस

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बलिया : प्रदेश सरकार में खेल मंत्री उपेंद्र तिवारी ने रविवार को कोरोना महामारी के बीच जनपद की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने जिला अस्पताल, एल-2 बसन्तपुर व फेफना का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी मरीज को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। जो संसाधन हैं, कम से कम उसमें बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जाए। सभी डॉक्टर मानवता व इंसानियत का परिचय देते हुए भगवान का दूसरा रूप वाली छवि लोगों के बीच प्रस्तुत करें। सरकार संसाधनों की कोई कमी नहीं होने देगी।

जिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान एक मरीज के परिजन ने बाहर की दवा लिखने की शिकायत की। इस सीएमएस से सवाल करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा करने वाले डॉक्टर को हिदायत दे दें। अस्पताल में बंद पड़े वार्ड को तत्काल सफ़ाई कराकर मरीजों को उसमें शिफ्ट कराने का निर्देश दिया।

वेंटिलेटर चालू नहीं होने पर जताई नाराजगी

मंत्री तिवारी ने कहा कि सभी वार्डों में आक्सीमीटर रहे। अन्य जांच उपकरण भी काउंटर पर हमेशा रखने को कहा। टेलीफोनिक निर्देश के बावजूद ट्रामा सेंटर में रखे गए 11 वेन्टीलेटर को अभी तक चालू नहीं करने पर नाराजगी जताई। कहा कि अगर उसमें कोई दिक्कत हो तो बताएं, उसे दूर कराया जाएगा। जब प्रत्येक जनपद को 4-4 करोड़ कोविड से लड़ने के लिए दिए गए हैं। ऐसी स्थिति में कुछ सहायक उपकरण नहीं हैं तो खरीद क्यों नहीं हो रही हैं। यह भी सवाल किया कि मैंने अपनी विधायक निधि से भी धन आवंटन के लिए प्रस्ताव मांगा था तो उसमें इन उपकरणों का प्रस्ताव क्यों नहीं भेजा गया।

कोविड अस्तपाल फेफना की व्यवस्था सुधारें

खेल मंत्री श्री तिवारी ने बसन्तपुर स्थित लेवल- 2 अस्पताल में कोरोना मरीजों की स्थिति को देखा। उनसे बात कर व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। सीएमओ डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि यहां कुल 55 मरीजों को एडमिट करने की क्षमता हैं। फिलहाल 25 मरीज हैं। फेफना के कोविड अस्पताल की व्यवस्था में सुधार लाने के साथ वहां स्थाई रूप से विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात करने का निर्देश दिया।

एक एम्बुलेंस तक नहीं दिला सके मंत्री

जिला अस्पताल के निरीक्षण के पश्चात बसंतपुर के लिए निकल रहे मंत्री अचानक महिलाओं को रोता देख अपनी गाड़ी से उतरकर उनके पास पहुंच गए। कारण पूछा तो सहतवार बरियारपुर निवासी छोटेलाल व महिलाएं रोते हुए अस्पताल की दु‌र्व्यवस्था की हकीकत बयान करने लगीं। छोटेलाल ने बताया कि शनिवार से पत्नी को लेकर भर्ती हूं। आक्सीजन के अभाव में मेरी पत्नी ने दम तोड़ दिया। मंत्री ने सीएमएस से शव भेजवाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। मंत्री के जाने के एक घंटे बाद तक जब कोई एंबुलेंस नहीं मिली। परिजन प्राइवेट एंबुलेंस कर शव को घर लेकर गए।

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बलिया- जिस चोरी बुलेट को खोज ना सके उसी से तिरंगा जुलूस में निकले थानाध्यक्ष, जांच के आदेश

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बलिया में एक बेहद ही चौकाने वाला मामला सामने आया है। जहाँ एक चोर नहीं बल्कि नरहीं थानाध्यक्ष को चोरी की बुलेट पर घुमते देखा गया। मीडिया में वीडियो आने के बाद से हड़कंप मचा है। बताया जा रहा है कि ये वही बुलेट है जो 18 महीने पहले चोरी हो गई थी जिसे खोजने में पुलिस को सफलता भी नहीं मिली। पुलिस ने बुलेट चोरी की फ़ाइल भी बंद कर दी थी। अब इन तस्वीरों के सामने आने से कई सवाल उठ रहे हैं।

बता दें नगरा में पालचंद्रहा के ओमप्रकाश यादव की बुलेट यूपी 60 एएफ 7103 21 जनवरी 2021 को चोरी हो गई थी। काफी कोशिश के बाद नगरा पुलिस ने 27 जनवरी 2021 को मुकदमा पंजीकृत किया। जांच कर कुछ दिनों बाद फाइल बंद दी। पीड़ित ने उच्चाधिकारियों से गुहार लगाकर भी उम्मीद छोड़ दी। तभी नरहीं क्षेत्र में 14 अगस्त को पुलिस ने तिरंगा जुलूस निकाला था। चोरी वाली बुलेट पर नरही थानाध्यक्ष मदन पटेल सवार थे। यात्रा की फोटो और वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुई तो बुलेट मालिक ने उसकी पहचान कर ली।

पुलिस को जब मामले की जानकारी लगी तो आनन फानन में बुलेट को थाने में मंगा लिया। हालांकि उक्त वाहन का नंबर गायब था। वाहन की पहचान होने के बाद जब बुलेट मालिक ओमप्रकाश यादव थाने में जाकर संबंधित से संपर्क किए तो उन्हें बताया गया कि उक्त वाहन के कागजात नहीं हैं। अब यह मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में भी आ
गया है। इससे संबंधित की परेशानी और भी बढ़ गई है।

वहीं अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी का कहना है कि बुलेट से थानाध्यक्ष के घूमने और इंटरनेट मीडिया में प्रसारित इस प्रकरण की गहनता से जांच होगी। दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

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जिस जगह हुई थी बलिया के आजादी की घोषणा वहां लगा गंदगी का अंबार, अधिकारी बेख़बर

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बलिया। पूरे देश ने बड़ी धूमधाम से आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस है। पूरा प्रशासनिक अमला बड़े आयोजन की तैयारी में जुटा है। इस दिन सूबे के मुख्यमंत्री भी बलिदान दिवस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। लेकिन साल 1942 में जिस स्थान पर बलिया की आजादी की घोषणा हुई, उस जगह का हाल विचलित कर देने वाला है।

जिले के क्रांति मैदान बापू भवन के बाहर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नगर पालिका का इस ओर ध्यान नहीं है। एक तरफ आजादी का जश्न मनाया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ जिस जगह आजादी की घोषणा हुई, वहां गंदगी पसरी है। आजादी के अमृत महोत्सव में बलिया से सामने आई यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है।

Pic Credit- Roshan

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1947 से 5 साल पहले, आज ही के दिन बांसडीह तहसील को मिली थी आज़ादी!

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बलिया डेस्क : आज 17 अगस्त है, बलियावासियों के लिए गौरव का दिन। आज ही के दिन बलिया की एक तहसील आज़ादी से पांच साल पहले अंग्रेज़ों की ग़ुलामी से आज़ाद हो गई थी। हम बात बांसडीह तहसील की कर रहे हैं, जिसे 17 अगस्त 1942 को गजाधर शर्मा के नेतृत्व में तकरीबन 20 हज़ार किसानों-नौजवानों की टीम ने अंग्रेज़ी हुकूमत से आज़ाद करा लिया था।

वीर सेनानियों की इस टीम में सकरपुरा के वृंदा सिंह, चांदपुर के रामसेवक सिंह और सहतवार के श्रीपति कुंअर भी शामिल थे। बताया जाता है कि सेनानियों की टीम ने तहसील पर कब्ज़े की तैयारी इतनी खामोशी के साथ की थी कि इसकी भनक अंग्रेज़ी हुकूसत को भी नहीं लग सकी थी। 17 अगस्त की सुबह होते ही तकरीबन 8 बजे सेनानियों की एक टोली ने तहसील और थाने को चारों तरफ़ से घेर लिया। सेनानियों की तादाद और उनके देश प्रेम के जज़्बे को देखकर तहसीलदार और थानाध्यक्ष ने सरेंडर कर दिया।

जिसके बाद सेनानियों का तहसील और थाने पर कब्ज़ा हो गया। बलिया ख़बर से बातचीत में कॉमरेड प्रणेश सिंह  एक किताब का हवाला देते हुए बताते हैं कि तहसील और थाने पर कब्ज़े के बाद सेनानियों ने वहां के ख़ज़ाने को अपने कब्ज़े में ले लिया और उसी खज़ाने से कर्मचारियों को एक महीने का वेतन देकर उन्हें 24 घंटे के भीतर बलिया छोड़ने को कहा।

तहसील पर कब्ज़े के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष गजाधर शर्मा को तहसीलदार बना दिया गया और इसी के साथ सेनानियों ने स्वदेशी सरकार की स्थापना भी कर दी। प्रणेश बताते हैं कि तहसीलदार बनने के बाद गजाधर शर्मा ने दो बड़े केस पर पंचायती राज के तहत फैसला सुनाया था। जिसमें कोरल क्षेत्र का एक खानदानी मुकदमा था और एक नरतिकी से लूट का केस था।

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