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कृषि बिल वापसी पर सांसद वीरेंद्र सिंह बोले, PM मोदी ने लोकतंत्र में असहमति का सम्मान किया

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बलियाः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिन बड़ा फैसला लेते हुए तीनों कृषि बिलों का वापस कर लिया। लंबे समय तक किसान कृषि बिलों के खिलाफ आवाज उठाते रहे, ऐसे में कानून रद्द होना किसान संगठनों के लिए बड़ी जीत है।

केंद्र सरकार के फैसले पर भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बयान दिया है। सोनबरसा स्थित संसदीय कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि बिल वापस करके लोकतंत्र में असहमति का सम्मान किया है। लोकतंत्र में असहमति को सम्मान देना संवैधानिक भी है।

सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह बिल संसद में पास हुआ है और प्रधानमंत्री संसदीय दल के नेता भी है और सरकार के प्रधानमंत्री भी हैं। इसके लिए उनके पास विशेषाधिकार भी है। सांसद ने कहा कि मैं खुद ही इस बिल को संसद में प्रस्तुत करने वाला पहला व्यक्ति था। मैं यह कह सकता हूं आज भी कह सकता हूं और संसद में भी मैंने कहा है कि इस कानून से बहुत लोगों की सहमति भी है।

कृषि राज्य और केंद्र दोनों का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि बहुत सी राज्य सरकारें जैसे पंजाब की सरकार, छत्तीसगढ़ की सरकार कृषि ने इस कानून को अपने राज्य में निरस्त कर दिया था। जो राज्य सरकार अपने राज्य में यह कानून नहीं चाहते हैं तो वह चलेगा। लेकिन प्रधानमंत्रीजी ने इस विवाद का समाधान करने के लिए पूरी तरह से इस कानून को वापस लेते हुए यह संदेश दिया है कि पुनः सारे लोगों की सहमति से एक कानून कृषि का बनाना ही जरूरी है।

वहीं केंद्र सरकार के द्वारा लिए गए फैसले को चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी से संबंधित सवाल पर सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कहा कि हर बात को चुनाव की दृष्टि से देखने की अपने देश में आदत पड़ गई है। घटनाक्रमों का असर चुनाव पर पड़ता है। मुझे नहीं मालूम है कि चुनाव पर इसका क्या असर पड़ेगा। लेकिन गुरु नानक जयंती के अवसर पर पंजाब के किसानों के बीच जो इस बिल को लेकर असहमत थे, उससे जो यह फैसला हुआ है। तो पंजाब के बहुत से लोगों से मेरी बात हुई है। बहुत प्रसन्न है।

उन्होंने कहा कि अमरेंद्र सिंह इस बात के लिए बहुत प्रयासरत थे कि इस कानून पर पुनर्विचार होना चाहिए। कोई अलग व्यवस्था बननी चाहिए। ऐसे में कैप्टन अमरेंद्र सिंह के सुझाव भी मेरे समझ से मानने योग्य है। सांसद ने कहा कि पूरे देश में इस बिल को लेकर असहमति नहीं थी। कुछ जगह के किसानों में असहमति थी तो प्रधानमंत्री जी ने सहमति बनाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। और कृषि प्रधान देश में किसी भी प्रधानमंत्री को ऐसे कदम यह बहुत ही स्वागत योग्य कदम है।

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बलिया स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा, मुख्यमंत्री को दी व्यवस्थाओं की फर्जी रिपोर्ट

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बलिया में स्वास्थ्य विभाग के अब तक कई कारनामे देखने को मिले। जहां एक स्वास्थ्य विभाग का एक और कारनामा देखने को मिला है। जो अब मुख्यमंत्री के सामने तक झूठ पेश करने से नहीं डर रहे हैं। बलिया स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही, मनमानी और अनियमितता के कई मामले सामने आने के बाद भी मुख्य चिकित्साधिकारी मुख्यमंत्री को बलिया में सभी अस्पतालों की व्यवस्था चाक-चौबंद बता रहे हैं।

बलिया के मुख्या चिकित्साधिकारी ने मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में फर्जी रिपोर्ट लगाई है। जिसमें कहा गया है कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं। केवल चिकित्सकों की कमी है। शासन को अवगत कराया गया है। बता दें भाजपा नेता सूर्यभान सिंह ने लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी कि जनपद के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बदतर है।

शिकायत में कहा गया था कि जनरेटर नहीं चलते हैं। एंबुलेंस की सेवा अस्त-व्यस्त है। सीएम कार्यालय द्वारा सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई थी। मुख्य चिकित्साधिकारी ने मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित अपने रिपोर्ट में बताया कि जिले की सभी अस्पतालों पर जब बिजली नहीं रहती है तो लगातार जनरेटर चलते हैं। सभी व्यवस्था चाक-चौबंद है। केवल चिकित्सकों की कमी है।

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बलिया- स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों का एलान, जाने कब से कब तक रहेंगी छुट्टियां

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बलिया में भीषण गर्मी के बीच स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां घोषित कर दी हैं। 20 मई से 15 जून जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेंगे। जिला बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन स्कूलों में ग्रीष्मावकाश और शीतावकाश को लेकर बीएसए शिवनारायण सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किया है। 16 जून से शैक्षणिक सत्र शुरू होगा।

बीएसए ने बताया कि शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक था, जबकि ग्रीष्मावकाश 20 मई से शुरू हो रहा है, जो 15 जून तक रहेगा। ग्रीष्मावकाश के बाद सत्रारम्भ 16 जून से होगा। उप्र बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि अवकाश के संबंध में कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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बलिया : 2016 में हुई हत्या के आरोपी को कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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बलिया में 2016 में हुई हत्या के मामले में आरोपी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही 10 हजार का अर्थदंड लगाया है। पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते आरोपी को सख्त सजा मिल सकी।

पुलिस के द्वारा चिन्हित मुकदमों के त्वरित निस्तारण का अभइयान चलाया जा रहा है। इसी के तहत मानिटरिंग सेल, विशेष लोक अभियोजक, संयुक्त निदेशक अभियोजन व पैरोकारों की प्रभावी पैरवी के चलते फेफना थाने में पंजीकृत धारा 302, 323, 504 भादवि में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने अभियुक्त पवन कुमार यादव उर्फ छांगुर को धारा 302 भादवि में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही 10 हजार रूपये के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया। अर्थ दण्ड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को 02 वर्ष का  अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, धारा 323 भादवि में दोषी पाते हुए 01 वर्ष का कारावास तथा एक हजार रूपये के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया।

अर्थ दण्ड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को 02 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 504 भादवि में दोषी पाते हुए 02 वर्ष का कारावास तथा एक  हजार रुपये के अर्थ दण्ड से दण्डित किया गया। अर्थ दण्ड अदा न करने की दशा में अभियुक्त को 02 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

 

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