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बलिया स्पेशल

बलिया DM के निरीक्षण में क्रय केंद्र मिला बन्द, डिप्टी आरएमओ व प्रभारी का रोका वेतन

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बलिया DM के निरीक्षण में क्रय केंद्र मिला बन्द, डिप्टी आरएमओ व प्रभारी का रोका वेतन

बलिया: जिलाधिकारी अदिति सिंह ने सोमवार को रसड़ा क्षेत्र के तीन धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान एक क्रय केंद्र संचालित नहीं होने पर क्रय केंद्र प्रभारी के साथ जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी का भी वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश दिया है। उन्होंने अन्य केंद्रों पर मिली कमियों को भी सुधारने की चेतावनी दी है। एडीएम, सभी एसडीएम व खरीद से जुड़े अधिकारियों को लगातार क्रय केंद्रों का निरीक्षण करते रहने का निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी क्रय केन्द्र मण्डी समिति रसड़ा पर पहुंचीं। वहां धान खरीद से सम्बन्धित उपकरण नहीं पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। केन्द्र प्रभारी के आईडी-पासवर्ड आदि की भी जानकारी नहीं थी। 18 नवम्बर से ही किसानों का पंजीकरण करने के बाद भी प्रभारी किसी भी किसान के धान का नमूना मँगाकर नमी मापक यन्त्र के माध्यम से यह देखा नहीं कि धान क्रय योग्य है अथवा नहीं। साथ ही अब तक इस केन्द्र पर किसी भी किसान का धान खरीद नहीं हुई पाई गई। किसानों के लिए कोई मूलभूत सुविधाएं भी वहां नहीं थी। इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर की।

मंडी समिति रसड़ा के विपणन शाखा के केन्द्र पर भी खरीद के प्रति कोई सार्थक प्रयास नहीं पाया गया। इस पर क्रय केन्द्र प्रभारी मण्डी निरीक्षक एवं मंडी समिति रसड़ा के सचिव का वेतन रोकने का आदेश दिया है। साथ ही तत्काल धान की खरीद शुरू करने का निर्देश दिया। चीनी मिल परिसर में संचालित होने वाले क्रय केंद्र पर न तो कोई बोर्ड मिला और न ही कोई उपस्थित था।

अब तक यह क्रियाशील ही नहीं हुआ है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी तथा केंद्र प्रभारी का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश एडीएम को दिया। उन्होंने अपर जिलाधिकारी, सभी एसडीएम व जिला खाद्य विपणन अधिकारी को निर्देश दिया है कि तत्काल सुधार लाते हुए धान खरीद की प्रगति को बढ़ाया जाए। सभी अधिकारी फील्ड में उतरकर केंद्रों का निरीक्षण करते रहें।

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बलिया में 11 दिसंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रचार गाड़ी रवाना

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बलिया। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के तत्वाधान में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन दिनांक 11 दिसम्बर 2021 को किया जाना है। जिसके व्यापक प्रचार-प्रसार और जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिये नवागत माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विक़ार अहमद अंसारी की अध्यक्षता में सभी न्यायिक अधिकारीगण की एक आवश्यक बैठक आहूत की गयी।

इस बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व एवं उपयोगिता पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।माननीय जिला न्यायाधीश द्वारा लोक अदालत के कार्य पारदर्शिता और व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु एक प्रचार वैन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। उक्त प्रचार वैन का उद्देश्य जन-जन तक राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व को बताना है तथा जनसामान्य को यह बताना है कि वह अपने किस तरह के मामलें को राष्ट्रीय लोक अदालत में लगाकर, सस्ता व सुलभ न्याय प्राप्त कर सकते है। जनपद बलिया के समस्त लोगो से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने मामलों के त्वरित न्याय के लिये सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दीवानी न्यायालय परिसर बलिया से सम्पर्क कर सकते है।

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बलिया में छात्र संघ चुनाव का रास्ता साफ? नोटिस जारी

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बलिया। धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन की चेतावनी के बाद बलिया में छात्र संघ चुनाव के लिए रास्ता साफ होने लगा है। जिले के जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में आने वाले दिनों में जल्द ही छात्र संघ चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र संघ की नियमावली जारी कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन की सहमति के बाद छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित कर दी जाएगी।

सोमवार यानी आज जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की ओर से एक ज्ञापन जारी किया गया है। कुलसचिव की ओर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि “एतद्द्वारा महाविद्यालयों के छात्रों द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन दिनांक 18 नवंबर, 2021 के अनुक्रम में सत्र 2021-22 में छात्र संघ चुनाव हेतु जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया की चुनाव नियमावली विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अग्रेतर कार्यवाही हेतु अपलोड की जा रही है।”

बता दें कि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से संबद्ध मुरली मनोहर टाउन पीजी कॉलेज (टीडी कॉलेज) के छात्रों की ओर से छात्र संघ चुनाव के लिए लगातार ज्ञापन सौंपा जा रहा था। बीते दिनों टीडी कॉलेज के छात्रों ने इसे लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। बता दें कि छात्रों की ओर से गत रविवार यानी 21 नवंबर को जिला कार्यालय पर ‘हल्ला बोल’ का ऐलान भी किया गया था।

छात्रों ने महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए जिला कार्यालय पर आगामी मंगलवार यानी 23 नवंबर को ‘हल्ला बोल’ करने की घोषणा की है। हालांकि ठीक एक दिन पहले ही विश्वविद्यालय की ओर से छात्र संघ चुनाव को लेकर नोटिस जारी कर दी गई है। जननायक विश्वविद्यालय महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए नियमावली अपने आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर रहा है। जिसके बाद छात्र संघ चुनाव और उसकी तारीखों को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।

गौरतलब है कि छात्र संघ के चार पदों के लिए चुनाव कराए जाते हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और पुस्तकालय मंत्री। कोरोना महामारी के आने के बाद से छात्र संघ का चुनाव बंद कर दिया गया था। लेकिन कोरोना महामारी पर काबू पा लेने और गतिविधि के शुरू हो जाने के बाद भी इस बार प्रशासन की मंशा छात्र संघ चुनाव कराने की नहीं दिख रही है।

छात्र संघ चुनाव अब पूरी तरह जिला प्रशासन की सहमति पर निर्भर है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसे हरी झंडी मिल चुकी है। देखना होगा कि मंगलवार को जिला कार्यालय पर हल्ला बोल पर प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या होगी?

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1913 में बलिया का ददरी मेला

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1913 में बलिया का ददरी मेला

यह रसीद वर्ष 1913 में बलिया में लगने वाले प्रसिद्ध ददरी मेले की है। जिसमें मेले में बिक्री के लिए आने वाले पशुओं पर अलग-अलग प्रवेश शुल्क लगाया गया है। इसमें प्रत्येक गाय, बैल, भैंस और अन्य मवेशी के लिए दो आना, घोड़े के लिए चार आना, हाथी के लिए एक रुपए, ऊँट के लिए आठ आना और बकरी या भेड़ के लिए एक आने का शुल्क शामिल है। उल्लेखनीय है कि जुलाई 1909 में ही युक्त प्रांत की सरकार द्वारा एक विज्ञप्ति जारी कर ददरी मेले में पशुओं पर शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया। यह प्रावधान युक्त प्रांत नगरपालिका क़ानून, 1900 के अंतर्गत किया गया था।रसीद वर्ष 1913 में बलिया में लगने वाले प्रसिद्ध ददरी मेले की हैरसीद वर्ष 1913 में बलिया में लगने वाले प्रसिद्ध ददरी मेले की है

बाद में, युक्त प्रांत के नगरपालिका विभाग द्वारा अक्टूबर 1913 में इस विज्ञप्ति में संशोधन किया गया।मेलों के बारे में टिप्पणी करते हुए यायावर दार्शनिक कृष्णनाथ ने लिखा है कि ‘मेला संस्कृति का दर्पण है। इसमें लोक सिंगार-पटार कर दीखता है। यह संस्कृति का ऋंगार है। इसमें बूढ़े-जवान, स्त्री-पुरुष, लड़के-लड़कियाँ अपने सबसे सँवरे रूप में होते हैं। अच्छे-अच्छे कपड़े पहनते हैं। मिलते-जुलते हैं। सपने देखते हैं। और हँसते हैं। मेला संस्कृति की हँसी है।’ किंतु औपनिवेशिक सरकार ने मेलों के सांस्कृतिक पक्ष की बजाय उसके आर्थिक पक्ष को ज़्यादा तवज्जो दी और मेलों को आय के स्रोत के रूप में देखना शुरू किया।

लिहाज़ा हम पाते हैं कि वर्ष 1909 की बलिया नगरपालिका बोर्ड की विज्ञप्ति और उसमें चार साल बाद 1913 में किए गए संशोधन में व्यापारियों पर शुल्क लगाने और उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रयास औपनिवेशिक सरकार द्वारा किए जा रहे थे। इसमें मेला क्षेत्र में प्रवेश करते ही बिक्री के लिए लाए गए सभी पशुओं पर शुल्क लगाना, दुकानदारों द्वारा ली गई ज़मीन पर शुल्क लगाना, मेले में घूमने वाले विक्रेताओं से वसूली करना और बेचे जाने वाले पशुओं पर नियमानुसार रजिस्ट्री शुल्क वसूलना शामिल था।

मसलन 1913 की संशोधित दरों के अनुसार, रजिस्ट्री शुल्क प्रत्येक गाय, भैंस और अन्य मवेशी के लिए एक आना, घोड़े के लिए तीन आना, हाथी के लिए एक रुपए, ऊँट के लिए चार आना और बकरी या भेड़ के लिए तीन पैसे था। प्रवेश और बाहर जाने के लिए बने द्वार पर टिकट क्लर्कों की नियुक्ति होती थी, जो इस बात का ध्यान रखता था कि सभी व्यापारियों से पशुओं की संख्या के अनुसार प्रवेश और रजिस्ट्री शुल्क अवश्य वसूल किया जाए।

इसके साथ ही नगरपालिका बोर्ड के चेयरमैन द्वारा एक अधिकारी की नियुक्ति की जाती थी, जो यह देखता था कि मेला क्षेत्र में लगने वाले ‘मीना बाज़ार’ में व्यापारियों को प्लॉट का वितरण और उसके शुल्क का निर्धारण नियमानुसार हो। साथ ही, मेले में घूमकर सामान बेचने वाले विक्रेताओं से भी तहबाज़ारी शुक्ल वसूला जाता था। औपनिवेशिक काल में युक्त प्रांत की सरकार द्वारा बनाई गई यह व्यवस्था आज भी बलिया के नगरपालिका बोर्ड द्वारा कमोबेश ढंग से अपनाई जा रही है, जिसमें पशु व्यापारियों से प्रवेश और रजिस्ट्री शुल्क वसूलना और मीना बाज़ार के लिए व्यापारियों को प्लॉट का वितरण और तहबाज़ारी शुल्क शामिल है।

स्टोरी – शुभनीत कौशिक

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