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रिकॉर्ड वैक्सीनेशन की हकीकत, बलिया के इस गांव में लोगो को बिना वैक्सीनेशन मिला सर्टिफिकेट !

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बलिया। शुक्रवार को भारत में एक करोड़ लोगों को वैक्सीन लगने का रिकोर्ट बना। यूपी में एक दिन में 30 लाख लोगों को टीका लगा। लेकिन इस रिकोर्ड के पीछे की हकीकत कुछ और ही है। यूपी के बलिया जिले में फर्जी वैक्सीनेशन के मामले उजागर हो रहे हैं। जहां लोगों को वैक्सीन तो लगी नहीं, लेकिन वैक्सीनेट होने का मैसेज जरुर मिल रहा है। टीडी कॉलेज के छात्र नेता रहे नीरज दुबे की कोशिश से फर्जी वैक्सीनेशन का खुलासा हुआ है। दरअसल बलिया जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर हुसैनाबाद गांव पड़ता है। इस गांव की आबादी करीब 15 हज़ार हैं, यहां के रहने वाले 34 वर्षीय विनायक चौबे हरियाणा के गुड़गांव में नौकरी करते थे।

यहां उन्होंने वैक्सीन के लिए एप पर रजिस्टेशन तो करा लिया था, लेकिन वैक्सीन नहीं लिया था. गुरुवार को विनायक अपने गांव पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि शुक्रवार को गांव में वैक्सीन कैंप लगने वाला है। विनायक अपने छोटे भाई विमलेश चौबे और बहन प्रियंका चौबे के साथ वैक्सीन लगवाने चले गए। वहां उन्होंने अपनी तमाम जानकारी दे दी और बैठकर अपनी बारी का इंतज़ार करने लगे। कैंप में काफी भीड़ थी। इस तरह शाम बीत गई लेकिन उनकी बारी नहीं आई। और वह बिना वैक्सीनेशन ही घर लौट आए। लेकिन रात के करीब 10 बजे उन्हें वैक्सीनेट होने का मैसेज मिला।

ऐसा सिर्फ विनायक या उनके भाई-बहनों के साथ ही नहीं हुआ। हुसैनाबाद के प्रधान संजीत यादव के मुताबिक उनके गांव में करीब 20-30 ऐसे लोग हैं जिनके साथ ऐसा ही हुआ है। बिना वैक्सीनेशन ही लोगों को वैक्सीनेट होने के मैसेज मिले हैं। जबकि सरकार लाखों लोगों को वैक्सीनेट करने का दावा कर वाहवाही लूट रही है। जिम्मेदारों के जवाब- अव्यवस्था के सवाल पर गांव के प्रधान संजीत कहते हैं, ‘‘जब वैक्सीन लग रहा था तब वहां पर कुछ विवाद हो गया था। किसी ने पत्थर मार दिया। इससे वैक्सीन लगाने आई एक मैडम को चोट लग गई, इसके बाद कई लोग वहां से चले गए। जिनका नाम लिखा गया था, वो वहां थे नहीं। लेकिन कम्प्यूटर में नाम चढ़ गया था तो शायद इसी वजह से गड़बड़ी हुई हो।

इस गड़बड़ी को लेकर बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. तन्मय कक्कड़ से बात की गई तो वो कहते हैं कि ‘‘वैक्सीन नहीं लगी और मैसेज चला गया तो यह टेक्निकल गलती है। इस शिकायत को हम अपने टेक्निकल यूनिट को दे देंगे। टेक्निकल यूनिट लखनऊ बात करके इसको सुलझाएगा। अगर वैक्सीन नहीं लगा होगा तो लग जाएगा।’’  बताया जा रहा है कि ये पहली घटना नहीं है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते है। हालांकि छात्र नेता रहे नीरज दुबे की कोशिश से फर्जी वैक्सीनेशन का खुलासा हुआ है। और अब मामले को दिखवाने की बात कही जा रही है, देखना होगा कि मामले में क्या कार्रवाई की जाती है, और आगे से ऐसा न हो इसके लिए क्या कदम उठाया जाता है।

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‘मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जे से नहीं है मंत्री का संबंध’, क्या फैलाई गई झूठी खबर?

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बलिया में चित्रगुप्त मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करने के विरोध में धरना-प्रदर्शन हुआ। भृगु मंदिर के निकट चित्रगुप्त मंदिर है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ने मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा होने का आरोप लगाया है। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के डॉ. दयाल शरण वर्मा के नेतृत्व में कब्जे के खिलाफ धरना हो रहा था।

अखिल भारतीय कायस्थ महासभ इस मुद्दे पर क्रमिक अनशन कर रही थी। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमन्त्री और बलिया सदर के विधायक आनंद स्वरूप शुक्ला का नाम घसीटा जा रहा है। कहा जा रहा है कि आनंद स्वरूप शुक्ला के समर्थन से ही मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है। कुछ खबरिया चैनलों ने लिखा है कि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला पर है। साथ ही अखिल भारतीय कायस्थ महासभा का क्रमिक अनशन आनंद स्वरूप शुक्ला के खिलाफ था।

भारत समाचार द्वारा इस मसले पर किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

भारत समाचार द्वारा इस मसले पर किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस मामले को समझने के लिए हमने धरना-प्रदर्शन में मुख्य भूमिका निभा रहे अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के दयाल शरण वर्मा से बातचीत की। उन्होंने बताया कि “हमारा धरना मंदिर परिसर की जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ था। ना कि मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला जी के खिलाफ। आनंद स्वरूप शुक्ला का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।”

दयाल शरण शर्मा ने बताया कि “आज नगर मजिस्ट्रेट आए थे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मंदिर की जमीन पर अवैध कब्जा रोका जाएगा। लेकिन जो कब्जा कर रहा है वो रात के समय में अवैध निर्माण करा देता है। हालांकि हमने इसे लेकर आज नगर मजिस्ट्रेट को पत्रक सौंपा है।” बता दें कि भृगु मंदिर के पीछे चित्रगुप्त मंदिर है। मंदिर की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर अवैध निर्माण करवा दिया है। जिसके खिलाफ क्रमिक अनशन हो रहा था।

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प्रियंका गांधी का ऐलान, कांग्रेस उतारेगी 40 फीसदी महिला प्रत्याशी, बलिया से इनका नाम?

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प्रियंका गांधी का ऐलान, कांग्रेस उतारेगी 40 फीसदी महिला प्रत्याशी, बलिया से इनका नाम?

मंगलवार को कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश चुनाव की प्रभारी प्रियंका गांधी ने लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। प्रियंका गांधी ने ऐलान किया है कि कांग्रेस पार्टी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चालीस फीसदी सीटों पर महिला प्रत्याशियों को टिकट देगी। बलिया जिले में कई महिला कांग्रेसी इस बार अपनी मेहनत अजमाने की तैयारी कर रही हैं। बलिया खबर ने प्रियंका गांधी की इस घोषणा पर बलिया के महिला कांग्रेस नेताओं से बातचीत की।

बलिया के सदर विधानसभा सीट से कांग्रेस की महिला नेता हैं पूनम पांडेय। पूनम पांडेय फिलहाल बलिया आशा संघ की जिलाध्यक्ष हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश के महिला कांग्रेस कमेटी की सचिव रह चुकीं पूनम पांडेय विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही हैं। पूनम पांडेय ने कहा कि प्रियंका गांधी के इस फैसले का बलिया में बड़ा असर देखने को मिलेगा।”

उन्होंने बताया कि “मैं खुद बलिया के नगर विधानसभा सीट(361) से दावेदारी पेश करने की तैयारी कर रही हूं। अगर चालीस फीसदी सीटों में मुझे भी मौका मिलता है बलिया से हमलोग एक बड़ा संदेश देने का काम करेंगे।” बता दें कि पूनम पांडेय बलिया के महिला कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष और प्रवक्ता भी रह चुकी हैं।

बलिया जिले के सदर विधानसभा सीट के अंतर्गत ही 2021 में जिला पंचायत सदस्य बनीं रेखा कवयित्री भी सक्रिय नेता हैं। रेखा कवयित्री 2022 के समर में उतरने की तैयारी कर रही हैं। 2021 के जिला पंचायत सदस्य चुनाव में रेखा कवयित्री कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी हैं। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव के बाद बलिया कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से रेखा कवयित्री की मनमुटाव की बातें भी सामने आई हैं।

रेखा कवयित्री ने बलिया खबर से बातचीत में कहा कि “मैं अपनी तैयारी कर रही हूं। अगर कांग्रेस पार्टी टिकट देगी तो अपनी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेंगे।” बलिया कांग्रेस के नेताओं से मनमुटाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि “पार्टी के साथ मेरी कोई नाराजगी नहीं है। लेकिन जिले में कुछ ऐसे नेता जरूर हैं जो पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहे हैं।”

बलिया से कांग्रेस की पुरानी महिला नेता उषा सिंह भी विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही हैं। बलिया खबर से बातचीत में उषा सिंह ने कहा कि “प्रियंका गांधी जी का फैसला ऐतेहासिक है। मैं बलिया के नगर विधानसभा सीट (361) से तैयारी कर रही हूं। हालांकि कई जगह मेरा नाम सदर विधानसभा सीट के लिए भी चलाया जा रहा है। लेकिन हम नगर सीट से तैयारी कर रहे हैं।”

उषा सिंह फिलहाल कांग्रेस व्यापार प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले उषा सिंह बलिया यूथ कांग्रेस जिला कांग्रेस कमेटी की जिला उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उषा सिंह का परिवार लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि उषा सिंह की दावेदारी टिकट के लिए मजबूत है।

बलिया के बांसडीह विधानसभा सीट से सोनम बिंद चुनावी मैदान में उतरने का मन बना रही हैं। हमने फोन पर सोनम बिंद से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो सकी। जिले के छात्र नेता अतुल पांडेय बताते हैं कि “सोनम बिंद को राजनीति में आए ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। लेकिन कम समय में ही उन्होंने क्षेत्र में ठीक-ठाक पकड़ बना ली है। बांसडीह में उनके खुब पोस्टर लगे हुए हैं।” अतुल के अनुसार “सोनम बिंद को उनकी जाति का अच्छा समर्थन मिलेगा और महिला उम्मीदवार के तौर पर एक बढ़िया विकल्प हो सकती हैं कांग्रेस के लिए।”

बता दें कि लखनऊ में प्रियंका गांधी ने आज कांग्रेस की पहली प्रतिज्ञा की घोषणा की। प्रियंका गांधी ने कहा कि हमने तय किया है कि “आने वाले चुनाव में कांग्रेस पार्टी चालीस प्रतिशत टिकट महिलाओं को देगी। हमारी प्रतिज्ञा है कि महिलाएं उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूरी तरह से भागीदार होंगी।”

देखने वाली बात होगी क्या कांग्रेस पार्टी बलिया के सात विधानसभा सीटों पर कितनी महिला प्रत्याशियों को टिकट देती है? सियासतगंज के सूरमाओं का कहना है कि अधर में लटकी हुई कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ी चाल चली है। प्रदेश में महिला मतदाताओं कि संख्या हालांकि यह फैसला कांग्रेस के लिए कितना कारगर साबित होता है यह चुनाव नतीजों से ही पता चलेगा।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 14.12 करोड़ थी। पूरे प्रदेश में 6.44 करोड़ महिला मतदाता हैं। पुरुष मतदाताओं की संख्य 7.68 करोड़ थी। देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस के चालीस फीसदी सीटों पर महिला प्रत्याशियों को टिकट देने के फैसला महिला मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है?

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रसड़ा विधायक ने समझा बाढ़ पीड़ितों का दर्द, सदन में रखी मुआवजे की मांग

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बलिया में बाढ़ ने इस बार तबाही मचाई। कई खेत-खलिहानों को बाढ़ के पानी ने अपनी चपेट में ले लिया। कई खेतों में कटान होने लगा। फसलें पूरी तरह चौपट हो गई। जिससे किसान काफी परेशान है। अब किसानों की परेशानी को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने समझा है। उन्होंने सोमवार को विधानसभा में नियम 51 के तहत टोंस की बाढ़ के कारण किसानों के फसल व आवास के नुकसान का मुआवजा देने की मांग रखी।

बसपा विधायक ने बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा को सामने रखते हुए कहा कि बाढ़ ने कई लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त किया। विधानसभा क्षेत्र के सरायभारती, अतरसुहा, मुस्तफाबाद, कोप, खजुहा, वेसवान, तिराहीपुर, प्रधानपुर, फिरोजपुर, कोडरा, मिर्जापुर, लखुवा, जवनिया, सिलहटा, हजौली, लोहटा, सवरुपुर, बैजलपुर, संवरा आदि गांवों के अलावा खेतों में बाढ़ का पानी घुस गया। फसलें चौपट हो गई। सैंकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो गई। कई रिहायशी मकान ध्वस्त हो गए।

विधायक ने इन गांवों का 26 व 27 सितंबर को निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि कई किसान आवास के अभाव में खुले आसमान में रहने को विवश हैं। उनके सामने भूखमरी की स्थिति आ गयी है। सरकार से मांगी की कि क्षतिपूर्ति का आंकलन कराकर तत्काल राहत उपलब्ध कराएं। इसी क्रम में विधायक ने नियम 301 के तहत बताया कि रसड़ा विस क्षेत्र में टोंस नदी के किनारे रिंग बांध, जो गाजीपुर जनपद को जोड़ते हुए बलिया तक बना है, उमसें पांच-पांच सौ मीटर का गैप हो गया है। इसी रास्ते बाढ़ का पानी गांवों में पहुंच रहा है। कई गांवों के अस्तित्व पर ही खतरा है। उमाशंकर सिंह ने अधूरे बंधे के गैप को बनाने के साथ साथ नदी किनारे ठोकर बनवाने की भी मांग की। बाढ़ प्रभावित लंबे समय से परेशान है। ऐसे में विधायक ने उनकी परेशानी को समझा है जिससे प्रभावितों के चेहरों पर हल्की मुस्कान आई है।

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