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अस्पताल की दुर्व्यवस्था व CMS के खिलाफ छात्र नेताओं ने खोला मोर्चा, 10 अगस्त को बुलाई आपात बैठक

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बलिया के अस्पताल की अव्यवस्थाओं से जनता परेशान हैं। अस्पताल की दुर्व्यवस्था और CMS के खिलाफ अब छात्र नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। शहर के टी. डी. कॉलेज से आव्हान कर छात्रनेताओं ने 10 अगस्त को CMS के खिलाफ आंदोलन की रूप रेखा तय करने के लिए आपात बैठक बुलाई है।

अस्पताल में आए दिन सीएमएस के द्वारा अभद्र व्यवहार के मामले सामने आते हैं। बीते 4 अगस्त को छात्रनेता आदित्य प्रताप सिंह व सूरज गुप्ता एक मरीज के उपचार कराने गए जहां देखा कि चिकित्सक दीपक गुप्ता,  डॉ. ए. के. स्वर्णकार मौके पर अपने केबिन में नहीं बैठे थे।

इससे छात्र नेता नाराज हो गए। उन्होंने CMS बी.पी. सिंह से शिकायत की लेकिन जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं की बात स्वीकारने की बजाए CMS उल्टा अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे। उन्होंने छात्र नेताओं से काफी बदतमीजी में बात की। दोनों के बीच बहस चली। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

मौके पर मौजूद पुलिस ने समझा बुझाकर मामले को शांत कराया लेकिन उसके बाद CMS  ने छात्र नेताओं पर मुकदमा भी दर्ज करवा दिया। छात्रनेता प्रवीण सिंह ने कहा की अधिकांश डॉक्टर अस्पताल में रहकर प्राइवेट प्रैक्टिस कर मरीजों का आर्थिक शोषण करते है और सवाल खडा करने पर मुकदमे दर्ज करवाते हैं।

इस पूरे मामले को लेकर छात्रनेताओं में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने CMS के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। इसी कड़ी में छात्रनेता रुपरेखा बना रहे हैं। आगामी 10 अगस्त को एक बैठक बुलाई गई है।

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बलिया: रसड़ा विधायक ने की मृतक परिवार की मदद, चाकू गोदकर दबंगों ने की थी हत्या

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बलिया के रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह अक्सर अपने क्षेत्र के लोगों की आर्थिक मदद करते हुए पाए जाते हैं। गुरूवार को रसड़ा के महाराजपुर गांव में एक बार फिर उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद की। बीते दिनों गांव के एक मजदूर की हत्या हो गई थी। आज मृतक के परिजनों की विधायक ने आर्थिक मदद की।

महाराजपुर गांव के देवेंद्र चौहान की एक चाकूबाजी की वारदात के दौरान में मौत हो गई थी। देवेंद्र चौहान मजदूरी करने अपने परिवार का पेट पालते थे। उनके तीन छोट-छोटे बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी आठ साल की है। इसके बाद दो बच्चे छह साल और चार साल की उम्र के हैं। परिवार में देवेंद्र चौहान की पत्नी भी हैं।

रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह आज महाराजपुर गांव पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिवार से भेंट की। साथ ही पचास हजार रूपए का आर्थिक मदद भी किया। उमाशंकर सिंह ने मृतक देवेंद्र चौहान के तीनों बच्चों के पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर उठा ली। उन्होंने बच्चों की मां से कहा है कि “इनके शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी मेरी है। हम इनके भविष्य के लिए हमेशा खड़े हैं।”

उमाशंकर सिंह ने कहा कि “किसी परिवार का मुखिया चला जाता है तो उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। परिवार का चल पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन मैं प्रयास करूंगा कि प्रदेश सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद जल्द से जल्द मुहैया कराई जा सके।”

क्या था मामला: देवेंद्र चौहान के मौत की घटना दो हफ्ते पहले की है। हुआ ये कि देवेंद्र चौहान डांसर बुक करने सिंगही चट्टी गए थे। इस दौरान वहां धर्मेंद्र और आशिष नाम के दो लोग पहुंच गए। इन तीनों के बीच बुकिंग को लेकर झमेला खड़ा हो गया। झगड़ा होता देख सड़क से गुजरते हुए दो बाइक सवार वहां पहुंच गए। लेकिन इसी बीच दबंगों ने तीनों पर चाकू से हमला कर दिया।

इस हमले में देवेंद्र चौहान बुरी तरह घायल हो गए। अन्य दो बाइक सवालों को भी चोट आई। देवेंद्र चौहान को रसड़ा के सीएचसी ले जाया गया। प्राथमकि उपचार के बाद उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। वाराणसी जाते हुए सैदपुर में देवेंद्र की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में धर्मेंद्र, आशीष और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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बलिया: लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी का खामियाजा, NHAI के हाथ सौंपी गई परियोजना

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बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज डेवलपमेंट (यूपीडा) को सौंपी गई थी। लेकिन अब परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआइ को दे दी गई है। यूपीडा ने लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया था। जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। जिसके बाद शासन ने यह फैसला लिया है।

खबरों के मुताबिक दो दिन पहले यूपीडा और एनएचएआइ के बीच एक संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट को एनएचएआइ को सौंपने पर सहमति बन गई। एनएचएआइ अब लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएगी। अभी तक इस एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही तैयार हो सका है। जिसमें बलिया जिले के ब्लू प्रिंट में गलती पाई गई थी।

योजना के अनुसार लिंक एक्सप्रेस-वे 24.2 किलोमीटर लंबी होगी। एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई है 120 मीटर प्रस्तावित है। लिंक एक्सप्रेस-वे का चौदह किलोमीटर हिस्सा गाजीपुर में है। तो वहीं 10.2 किलोमीटर हिस्सा बलिया से होकर गुजरेगा। बलिया जिले के कुल तेरह गांवों से यह एक्सप्रेस-वे होकर जाएगा। बीते अगस्त महीने में यूपीडा ने इसके लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार कर शासन को भेजी थी।

यूपीडा के ब्लू प्रिंट में जो रूट दर्शाया गया उसमें अनियमितता पाई गई। दरअसल बलिया से होकर जाने वाले एनएच-31 के ही रूट पर लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट बना दिया गया था। शासन ने इस पर यूपीडा को ब्लू प्रिंट ठीक करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एक्सप्रेस-वे का पूरा कार्य एनएचएआइ को सौंप दिया गया है। लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए शासन की ओर से यूपीडा को पचास करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी थी। अब यूपीडा यह राशि एनएचएआइ को स्थानांतरित करेगी।

लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बलिया जिला पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा। उसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे दिल्ली पहुंचा जा सकेगा। इस तरह बलिया से दिल्ली तक का सफर आसान हो जाएगा। लेकिन ये सारी बातें भविष्य की बैताल हैं। ऐसा होगा तो वैसा हो जाएगा के फार्मेट पर पूरी कहानी टिकी हुई है। दिल्ली अभी बहुत दूर है। जब यूपीडा जैसी संस्था एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही किसी दूसरी सड़क के रूट पर बना दे तो दिल्ली की दूरी और अधिक हो जाती है।

देखना होगा कि बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़कर बारह घंटे दिल्ली पहुंचाने का ख्वाब कब तक रात के अंधेरे से निकलकर जमीन के उजाले में प्रवेश करती है?

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बलिया- बड़े भाई की मार्कशीट लगा फर्जी तरीके से ली सिपाही की नौकरी, ऐसे खुली पोल

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बलिया: सरकारी नौकरी की चाह में युवा अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने से भी नही कतराते। इसी बीच पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया जिसने अपने बड़े भाई के शैक्षिक प्रमाणपत्र लगाकर पुलिस विभाग में फर्जी तरीक़े से नौकरी ले ली और बिना योग्यता के ही सिपाही बन बैठा। फिलहाल आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है। जिससे पूछताछ की जा रही है।

बता दे कि बलिया जिले के रसड़ा थाना क्षेत्र के संवरा निवासी आरोपी रोहित कुमार अपने सगे भाई राहुल के हाईस्कूल व इंटर के अंकपत्र का लगाकर 2019 में पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद भर्ती हुआ। उसने फर्जीवाड़े से नौकरी पा ली और प्रशिक्षण के बाद उसकी पहली पोस्टिंग बस्ती जिले के हर्रैया थाने में हुई थी।

ऐसे खुली पोल-
आरोपी फर्जी तरीके से सिपाही बन नौकरी करने लगा। वर्दी की हनक दिखाने में कसर नहीं छोड़ता था। लेकिन आरोपी की पोल उस वक़्त खुली जब सिपाही छुट्टी लेकर 31 मार्च 2021 को बलिया के रसड़ा स्थित अपने गांव गया था। वहां विपक्षियों से मारपीट हो गई, जिसमें आरोपित सिपाही ने गोली चला दी थी। बलिया के ही रसड़ा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने सिपाही को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

जांच हुई तो विपक्षियों ने भाई के अंकपत्र पर फर्जी तरीके से आरक्षी की नौकरी हासिल करने की शिकायत एसपी से की। जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो आरोपी की असलियत सामने आ गई। सीओ रुधौली के अनुसार पहचान छिपाते हुए उसने नौकरी हासिल की। प्रकरण में शिकायत के बाद एसपी आशीष श्रीवास्तव ने सीओ धनंजय सिंह कुशवाहा को जांच सौंपी थी। जांच में भाई के अंकपत्र के आधार पर नौकरी की पुष्टि हुई। जिसके बाद आरोपी रोहित कुमार सिंह को पुलिस ने केंद्रीय विद्यालय, फर्टिलाइजर, गोरखपुर से दबोचा। आरोपी रोहित कुमार सिंह के खिलाफ बलिया जनपद के रसड़ा थाने में हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट समेत तीन मुकदमे दर्ज हैं।

एसपी आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि बलिया जिले के रहने वाले आरोपी रोहित कुमार सिंह को कोतवाली शिवाकांत मिश्रा की टीम ने केन्द्रीय विद्यालय फर्टिलाइजर गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

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