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गड़वार ब्लॉक का इकलौता गाँव जहाँ 1995 के बाद से पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर नहीं हुआ चुनाव !

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बलिया डेस्क : अगले साल ग्राम पंचायत का चुनाव होना तय है। इसकी प्रशासनिक तैयारी जोरों पर चल रही है। अभी ग्राम पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। वहीं प्रत्याशियों की तैयारी में आरक्षित सीट थोड़ी अड़ंगा डाल रही है।

क्योंकि किस गांव में किस वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव कराया जा सकता है इसकी जानकारी अभी किसी के पास नहीं है। वहीं, इधर गड़वार ब्लॉक में कुल 68 गांव है। इन 68 गांवों में से इकलौता एक गांव सिंहपुर है, जहां पर 1995 के बाद से अब तक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर एक बार भी ग्राम प्रधान पद का चुनाव नहीं कराया गया है। जबकि सिंहपुर गांव में सबसे अधिक जनसंख्या पिछड़ा वर्ग का ही है।

सिंहपुर गांव में सामान्य वर्ग की वोटरों की संख्या लगभग 700 है। वहीं पिछड़ा वर्ग की वोटरों की संख्या करीब 1200 से अधिक है। इसके बाद भी इस गांव में हमेशा सामान्य सीट पर ही ग्राम प्रधान पद के लिए चुनाव कराया जाता रहा है। 2021 के ग्राम पंचाचत चुनाव में सिंहपुर गांव में आरक्षित सीट पर चुनाव कराने की उम्मीद है, क्योंकि सहायक विकास अधिकारी के अनुसार इस गांव की पूरी जनसख्या का विवरण जिला निर्वाचनधिकारी को उपलब्ध करा दिया गया है। अब इस मामले को जिला निर्वाचनधिकारी इस बार गंभीरता से ले सकते है।

वहीं एक तरफ इस मामले की जांच मुख्य विकासधिकारी विपिन जैन भी कर रहे हंै। इस गांव में 1995 से अब तक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव नहीं कराया गया है, इस मामले की जानकारी डीपीआरो शशिकांत पांडेय भी जुटा रहे है।

ग्राम पंचायत चुनाव की सियासी गहमागहमी तेज- ग्राम पंचायत चुनाव की सियासी गहमागहमी तेज हो चुकी है। गांव से लेकर सियासी गलियारे तक पंचायत चुनाव को लेकर तमाम चर्चा जारी है। कोरोना संकट के बीच अप्रैल से पहले ग्राम पंचायत चुनाव होने की खबर है। फिलहाल संभावित उम्मीदवारों की तैयारी दिखने लगी है। गांव के घर-घर पर चुनावी पोस्टर दिखने लगे हैं। वहीं, संभावित कैंडिडेट्स भी जोर-आजमाइश करने में लगे हैं।

वैसे भी होगा आरक्षण का दूसरा चक्रानुक्रम- 2015 के पिछले पंचायत चुनाव में हाईकोर्ट ने कहा था कि चूंकि सीटों का आरक्षण का चक्र लगभग पूरा हो चुका है, अब नये सिरे से आरक्षण का निर्धारण किया जा सकता है, इसलिए 2015 में नये सिरे से आरक्षण तय किया गया। इस बार आरक्षण का दूसरा चक्रानुक्रम है। अब इस बार प्रदेश सरकार को फिर नये सिरे से आरक्षण तय तो नहीं करना चाहिए। नए सिरे से आरक्षण तय करने का आधार सिर्फ एक ही हो सकता है जब बड़ी संख्या में नयी ग्राम पंचायतें बन गई हों, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है।

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बलिया में धारा 144 लागू, इतने महीने तक जारी रहेगा प्रतिबंध

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बलिया डीएम अदिति सिंह ने जिले में धारा 144 लागू कर दी है। 15 सितंबर से आगामी 2 माह तक के लिए धारा 144 लागू रहेगी। जिला मजिस्ट्रेट अदिति सिंह ने बताया है कि जनपद सीमा के अन्तर्गत किसी भी सार्वजनिक स्थानों पर पांच या पांच से अधिक व्यक्त्ति एक समूह के रूप में एक साथ एकत्रित नहीं होगे और न ही कोई जुलूस निकालेगें और न ही कोई धरना प्रर्दशन करेगा और न ही कोई ऐसा अफवाह फैलायेगें, जिससे शान्ति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।आपको बता दें कि जनपद में त्यौहारों के मद्देनजर धारा 144 लागू की गई है। विश्वकर्मा पूजा 17 सितम्बर को, अनन्त चतुदर्शी 19 सितम्बर को, चहल्लुम का त्यौहार 28 सितम्बर को मनाया जायेगा। साथ ही नवरात्र का त्यौहार 07 अक्टूबर को प्रारम्भ होगा, महानवमी 14 अक्टूबर व दशहरा विजय दशमी 15 अक्टूबर को, बारावफात 19 अक्टूबर एवं दीपावली 04 नवम्बर को, गोवर्धन पूजा 05 नवम्बर को, भैया दूज/चित्रगुप्त जयन्ती 06 नवम्बर व छठ पूजा 10 नवम्बर को मनाया जायेगा। इसको देखते हुए जनपद सीमा के भीतर निवास करने वाले तथा आने जाने वाले समस्त व्यक्तियों को धारा 144 के तहत आदेशों का पालन करना होगा।

बता दे कि जनपद में दो माह के लगाई गई धारा 144 के दौरान कई क्रियाकलापों पर प्रतिबंद रहेगा। इसमें सावर्जनिक आयोजन भी शामिल रहेंगे। हालांकि विशेष परिस्थितियों में जुलूस आदि के लिए सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त किया जाना अनिवार्य होगा। यह प्रतिबन्ध परम्परागत, सामाजिक या धार्मिक संस्कारों एवं रीति-रिवाज तथा जुमे की नमाज पर लागू नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र जैसे लाठी, डंडा, चाकू भाला, फारसा, बन्दूक, राइफल रिवाल्वर, पिस्टल आदि आग्नेयास्त्र या अन्य धारदार हथियार एवं किसी प्रकार का विस्फोटक पदार्थ को लेकर नहीं चलेगा और न ही ऐसा करने के लिये किसी को प्रेरित करेगा। कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक

स्थान, मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, धर्म, सड़क मकान के अन्दर अथवा छत पर ईट, पत्थर, शीशा, बोतल व काच के दुकड़े तथा विस्फोटक आदि न एकत्र करेंगे और न ऐसा करने के लिए किसी अन्य को प्रेरित करेगा। कोई भी व्यक्ति साम्प्रदायिकता भड़काने वाले पोस्टर, बैनर, कटआउट आदि न तो लगायेगा और न ही किसी अन्य को ऐसा करने के लिए प्रेरित करेगा। उक्त आदेश का उल्लंघन भारतीय दण्ड विधान की धारा-188 के अंतर्गत दंडनीय अपराध होगा।

 

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बलिया में युवाओं ने मनाया जुमला दिवस, पीएम मोदी के जन्मदिन पर काटा गया कद्दू केक

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बलिया में युवाओं ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मदिन मनाई।

बलिया में युवाओं ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मदिन मनाई। बलिया जिले के अलग अलग जगहों पर युवकों ने केक काटकर खास अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। युवा हल्ला बोल की टीम से लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक ने प्रधानमंत्री का जन्मदिन निराले अंदाज में मनाया। बांसडीह में प्रधानमंत्री के जन्मदिन को जुमला दिवस के रूप में मनाया गया। नौजवानों ने जुमला लिखा हुआ केक भी काटा।

युवा हल्ला बोल की टीम के कार्यकर्ता बांसडीह में इकट्ठा हुए। कार्यकर्ताओं के हाथ में कई दफ्तियां थीं। जिन पर “जुमला दिवस की बधाई”, “बेरोजगारी”, “कमाई”, “पढ़ाई”, “महंगाई” लिखा हुआ था। युवा हल्ला बोल टीम के कार्यकर्ताओं ने कहा कि “हम किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। हमारी सरकार से तीन प्रमुख मांगें हैं- पढ़ाई, कमाई और दवाई। इन मुद्दों पर हमारी बात नहीं सुनी जाएगी तब हम सड़कों पर भी पूरी शक्ति के साथ उतरेंगे।”

दूसरी ओर बलिया में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाया। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव अभिजीत तिवारी सत्यम के नेतृत्व में बेरोजगार युवकों ने केक के बदले कद्दू का काटकर जन्मदिन मनाया। युवा कांग्रेस के इस जुटान में मुख्य रूप से महिला नेत्री सोनम बिंद, ब्लाक अध्यक्ष विजेंद्र पांडेय, इंटक जिलाध्यक्ष अरुण सिंह, विद्याशंकर पांडेय, राहुल सिंह, मनोज सिंह, सरिता यादव, मधु सिंह, राज कुमारी व अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

गौरतलब है कि 17 सितंबर यानी आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी इस मौके पर विशेष आयोजन कर रही है। तो वहीं विपक्षी दल समेत कई संगठन के कार्यकर्ता अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। बलिया से लेकर दिल्ली तक इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। एक तरफ भाजपा इस दिन को “ब्रांड मोदी” के प्रचार के लिए इस्तेमाल कर रही है तो दूसरी ओर विपक्षी दल इसे विरोध के लिए प्रचारित कर रहे हैं।

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“बलिया के विकास में मील का पत्थर साबित होगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे”

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बलिया के विकास को पंख लगाने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे मील का पत्थर साबित होगा। यह एक्सप्रेस-वे माल्देपुर, जनाड़ी तभी बलिया सदर से दक्षिण छोर से होकर निकलेगा। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने बीते दिन पहले इस एक्सप्रेस-वे का सौगात दिया था।

इसी क्रम में अब भारत सरकार जल्द ही किसान भाइयो को उनका मुआवजा उपलब्ध कराएगी जिसमे बलिया और गाजीपुर के लोगो को लगभग 1500 करोड़ रुपए के मुआवजा का प्रावधान किया गया है। जिसका टेंडर दिसंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा। सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने बताया कि इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के बन जाने से जो (गाजीपुर – बलिया) विकास के मामले मे वर्षो पिछड़ गया था आज उसको एक नया आयाम देने से कोई नहीं रोक सकता एवं इस मार्ग से जुड़े लोगो के लिए नये रोजगार एवं विकास के मार्ग प्रशस्त होंगे। उन्होंने इस नए एक्सप्रेस वे के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी को धन्यवाद दिया है।

वहीं इस एक्सप्रेस वे से बलिया के विकास की नई इबारत लिखी जाएगी। इस एक्सप्रेस वे से जहां राहगीरों को तो फायदा होगा ही वहीं दूसरी ओर व्यावसाय को नया आयाम मिलेगा और व्यापारियों को बड़ा फायदा होगा।

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