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The Strange Story of Ballia’s this Constituency, will Prove Right in 2022 election again?

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Ballia: Belthara Road constituency in Ballia district of U.P. has many times proved that the party whose candidate wins the election from this constituency is likely to form the government in Lucknow. Ballia is considered as the most backward district of U.P. and probably because of this reason no party or leader has paid any attention to this place. It may be taken as a matter of chance or the political consciousness of local people but it is almost 100% true that the party whose candidates wins from Belthara Road (reserved) (old name: Sear) assembly constituency is likely to form the government in the state.

The story of the rebel Belthara Road (reserved) assembly constituency, situated on the bank of river Ghagra and adjacent to the borders of two districts is strange. According to the results of all assembly elections after the Independence three times consecutively i.e. in 1952, 1957, 1962 party whose candidate won from this seat ,the same party from the government in U.P . In the 1980 elections when Congress Party had formed the government, in this state its candidate Babban Singh had won from this seat.

In 1984 after Indira Gandhi’s death, there was congress wave all over the country but inspite of this, Shardanand Anchal of Lok Dal, because of his own struggle and people’s cooperation, won the election from this constituency, though Congress formed the government. In 1991 when Hari Narayan Rajbhar of BJP won from this place, BJP formed the government in the state. In 1993 Shardanand Anchal again won from this constituency on S.P. ticket and this time Samajwadi Party formed the government in the state.

In 1996 Hari Narayan Rajbhar again won this place on BJP ticket and BJP formed the government in the state Thereafter in 2002 when Shardnand Anchal won from S.P., this party formed the government. In 2007 when Kedar Nath Sharma won on B.S.P. ticket, BSP formed the government in the state. And in 2012 when SP’s Gorakh Paswan won this seat, Samajwadi Party government again formed the government. While in last assembly elections in 2017 BJP’s Dhananjay Kannaujia won elections from this constituency and BJP ruled the state. It will be interesting to see will this formula works in upcoming 2022 elections or not.

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बलिया: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिक्षकों का हल्ला बोल, उत्पीड़न का आरोप?

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बलिया में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ प्राथमिक शिक्षक संघ ने धरना दिया।

बलिया में इन दिनों दिनों शिक्षकों के विरोध-प्रदर्शन ने माहौल गरमाया हुआ है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिक्षक संघ लगातार आक्रामक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार को प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में एक बार फिर बड़े स्तर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के परिसर में धरना हुआ। शिक्षकों ने जिला बेसिक शिक्षक अधिकारी पर घोटाले और उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

प्राथमिक शिक्षा संघ के आह्वाहन पर जिले के ज्यादातर शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइया विद्यालय न जाकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय परिसर में पहुंच गए। सोमवार को परिसर में प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग हजार से अधिक थी। बताया जा रहा है कि जिले में महज एक या दो विद्यालयों पर ही पढ़ाई-लिखाई हुई।

बलिया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शिक्षकों ने लंबे समय से मोर्चा खोला हुआ है। प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से आज एक व्यापक धरने के लिए शिक्षकों को बुलाया गया था। इसे देखते हुए गत रविवार की शाम ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से एक चेतावनी भरी नोटिस जारी की गई थी।

नोटिस में शिक्षकों को अपने विद्यालय से कहीं और या धरना-प्रदर्शन में न शामिल होने की सलाह दी गई थी। लेकिन इस नोटिस का शिक्षकों पर उल्टा असर हो गया। आज कार्यालय परिसर में हजारों की संख्या में शिक्षक धरना देने पहुंचे। इस दौरान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई।

नाराज शिक्षकों का आरोप है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लंबे समय से घोटाले कर रहे हैं। अपनी मर्जी मुताबिक विद्यालयों में सरकारी किताबें भेजने का आरोप भी लगाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि अधिकारी जानबूझकर शिक्षकों को परेशान करने के लिए जांच करवाते हैं। जांच के दौरान शिक्षकों का शोषण किया जाता है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पर आरोप है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के का धौंस दिखाकर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जाता है।

प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा बुलाए गए इस धरने का कई संगठनों ने समर्थन किया था। सीनियर बेसिक शिक्षक संघ, कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति, आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, रसोईया संघ जैसी संगठनों ने आज शिक्षकों के धरने को अपना समर्थन दिया था।

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टीडी कॉलेज में छात्र संघ के लिए लामबंद हुए छात्र नेता, ज्ञापन सौंप प्रशासन को दी ये चेतावनी

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बलिया जिले के श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र नेताओं ने छात्र संघ चुनाव को लेकर ज्ञापन सौंपा।

सोमवार को बलिया जिले के श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र नेताओं ने छात्र संघ चुनाव को लेकर ज्ञापन सौंपा। छात्र नेताओं ने महाविद्यालय के प्राचार्य को लिखित पत्रक सौंपा। छात्र नेताओं ने मांग की है कि वर्तमान सत्र में छात्र संघ चुनाव कराया जाए। छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया को लेकर तिथि घोषित करने की मांग रखी गई है।

मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य को दिए गए पत्रक में छात्र नेताओं ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और उदय प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हुए छात्र संघ चुनाव का उदाहरण दिया है। कहा गया है कि कोरोना महामारी के दौरान भी सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इन शिक्षण संस्थानों में छात्र संघ चुनाव संपन्न कराए गए थे।

टीडी कॉलेज के छात्र नेताओं का कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौरान ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव भी कराए गए। ये चुनाव कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए कराए गए थे। बता दें कि बीते साल देश समेत पूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में आ गया था। जिसकी वजह लगभग सभी गतिविधियां बंद कर दी गई थीं।

कोरोना के ही वजह से मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्र संघ चुनाव नहीं कराए गए। लेकिन छात्र नेताओं की मांग है कि जब कोरोना वायरस का संक्रमण लगभग खत्म हो चुका है और ज्यादातर लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है तब छात्र संघ चुनाव की तिथि घोषित की जाए।

छात्र संघ चुनाव और छात्र नेताओं के ज्ञापन सौंपने पर हमने महाविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर डॉ. धीरेंद्र कुमार यादव से फोन के जरिए संपर्क किया। डॉ. धीरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि “अभी मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। मैं कहीं गया हुआ था और फिलहाल अपने घर पर हूं। इसलिए मुझे इस बारे में कोई सूचना नहीं है।”

गौरतलब है कि प्राचार्य को दिए गए ज्ञापन में छात्र नेताओं ने साफ लिखा है कि “अगर इस वर्ष छात्र संघ चुनाव नहीं होता है तो आंदोलन किया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की ही होगी।”

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बलिया के निखिल करेंगे माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई, 2022 में रचेंगे इतिहास, पढ़िए पूरी कहानी

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बलिया जिले के निखिल प्रताप सिंह आगामी साल 2022 में माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने की तैयारी कर रहे हैं। निखिल प्रताप सिंह जिले के नगरा थाना क्षेत्र के लहसानी गांव के रहने वाले हैं। 29 वर्षीय निखिल एडवेंचर जंकी और सोशल इंटरप्रेन्योर हैं। निखिल पूर्वांचल के पहले पर्वतारोही हैं जो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने जा रहे हैं।

2015 में संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया भर से गरीबी खत्म करने, धरती की सुरक्षा और यह सुनिश्चित करने का लक्ष्य तय किया था कि 2030 तक दुनया भर के लोग सुखी और समृद्ध हो जाएंगे। इन लक्ष्यों को सतत विकास लक्ष्य या वैश्विक लक्ष्य का नाम दिया गया। इसी के तहत निखिल प्रताप सिंह माउंट एवरेस्ट और अलग-अलग महाद्वीपों के पर्वतों की चढ़ाई करने जा रहे हैं। जिससे भारत और पूरी दुनिया के लोग प्रभावित होंगे।

2022 के अप्रैल महीने में निखिल प्रताप सिंह माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करेंगे। लेकिन इससे पहले निखिल प्रताप सिंह दक्षिण अफ्रिका के तंजानिया में माउंट किलीमंजारो, यूरोप के माउंट एलब्रस, दक्षिण अमेरिका के माउंट एकोन्कागुआ, उत्तरी अमेरिका के माउंट डेनाली, आस्ट्रेलिया के माउंट कोसिउसको, और आस्ट्रेलिया के जया पीक पर चढ़ेंगे।

निखिल पर्वतारोही तो हैं ही साथ में केकिंग, राफ्टिंग भी करते हैं। उन्हें जंगलों में रहने और सर्वाइवल की विशेषज्ञता भी हासिल है। निखिल प्रताप सिंह प्लानेट ट्रोटर नाम से एक कंपनी चलाते हैं। जो देश के सुदुरवर्ती इलाकों के गांवों में अलग-अलग तरह के कार्यक्रम चलाते हैं। ये कंपनी एडवेंचर को लेकर शिक्षा भी देती है।

निखिल प्रताप सिंह के पिता प्रेम प्रताप सिंह सेंट्रल इंडस्ट्री सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ के जवान हैं। मां मीना सिंह गृहणी हैं। पिता प्रेम प्रताप सिंह की तैनाती फिलहाल झारखंड की राजधानी रांची में है। सीआईएसएफ में काम करने की वजह से प्रेम प्रताप सिंह की की तैनाती देश के अलग-अलग राज्यों में होती रही है। जिसके चलते निखिल की पढ़ाई किसी एक ही राज्य में नहीं हुई।

बलिया खबर से बातचीत में निखिल प्रताप सिंह ने बताया कि “शुरुआती दो सालों की पढ़ाई-लिखाई आंध्र प्रदेश में हुई। लेकिन फिर कक्षा एक से कक्षा पांच तक की शिक्षा केरल के केंद्रीय विद्यालय में पूरी हुई। फिर अगले साल पिता की पोस्टिंग चेन्नई में हो गई। तो निखिल की पढ़ाई चेन्नई के केंद्रीय विद्यालय में शुरू हो गई।”

“कक्षा दस की पढ़ाई छत्तीसगढ़ के केंद्रीय विद्यालय में पूरी हुई। तो वहीं इंटरमीडिएट की शिक्षा हासिल की गुजरात के केंद्रीय विद्यालय में। 2011 में मैंने देहरादुन स्थित उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की। अपनी पढ़ाई के दौरान मेरी दिलचस्पी खेलकूद में भी थी। घर वालों ने भी खेल के क्षेत्र में प्रोत्साहित किया। इंजीनियरिंग के दौरान ही मैंने नार्थ ज़ोन के लिए इंटर यूनिवर्सिटी क्रिकेट टूर्नामेंट खेला।” निखिल ने बताया।

सेना में काम करने को लेकर भी निखिल की दिलचस्पी रही। निखिल कहते हैं कि “मैंने पांच बार नेवी, आर्मी, एयरफोर्स में साक्षात्कार दिया। लेकिन पांचों बार कान्फ्रेंस आउट हो गया।”

इंजीनियरिंग के बाद निखिल को एक नौकरी मिल चुकी थी। लेकिन नौकरी करने में उनका मन नहीं लगा। घर वालों को ये बात बताकर निखिल ने अपनी नौकरी छोड़ दी। उन्होंने बताया कि “2017-18 में मैंने दार्जलिंग के हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीच्युट से माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा किया। इसके बाद नदी और समुद्र में तैराकी से लेकर राफ्टिंग तक भी सीखने लगा।”

इसके बाद निखिल प्रताप सिंह ने अपनी कंपनी शुरू की। जो बच्चों की शिक्षा से लेकर उन्हें हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए जागरूक करना शुरू किया। ये कंपनी मुख्यधारा से कटे गांवों को गोद लेती है। इन गांवों में निखिल प्रताप सिंह की टीम रूरल टूरिज्म को बढ़ावा देती है। इसके अलावा बच्चों की शिक्षा से लेकर गांवों के स्कूल और अस्पताल के लिए काम करती है। महिला सशक्तिकरण को लेकर भी कंपनी काम करती है।

निखिल प्रताप सिंह का एक प्रोडक्शन हाउस भी है।  यह प्रोडक्शन हाउस डाक्यूमेंट्री बनाती है। ज्यादातर डाक्यूमेंट्री फिल्में गांवों में बनाई जाती है जहां कंपनी काम कर रही होती है। फिलहाल निखिल मैंगलोर में अपनी ट्रेनिंग में जुटे हुए हैं। उन्हें एमएमए और कर्माटक के मुएथाई स्पोर्ट स्टेट इंचार्ज नितेश कुमार के तहत ट्रेनिंग मिल रही है।

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