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शिक्षा

UPTET 2018 Exam- 12 मार्च को होने वाली शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा टली

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यूपी में UPTET 2018 Exam: इसी महीने की 12 तारीख को 68,500 पदों के लिए होने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित कर दी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राज प्रताप सिंह ने बताया कि परीक्षा की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।

बताया जाता है कि प्रदेश सरकार ने हाइकोर्ट में टीईटी के रिजल्ट को लेकर चल रहे मामले के कारण यह निर्णय लिया है। इससे पहले हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लिखित परीक्षा को टालने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने टीईटी 2017 की उत्तरमाला को खारिज करते हुए परीक्षा में पूछे 14 सवालों को हटाकर संशोधित रिजल्ट जारी करने का निर्देश दिया है। सरकार इसके खिलाफ विशेष अपील कर चुकी है। अब इस मामले में आने वाले निर्णय के बाद ही लिखित परीक्षा होगी। विशेष अपील पर सोमवार को सुनवाई होनी है।

पहली बार हो रही लिखित परीक्षा में टीईटी 2017 उत्तीर्ण करने वालों को भी मौका मिला है। टीईटी के रिजल्ट के खिलाफ 300 से भी ज्यादा याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। 6 मार्च को आये निर्णय के अनुसार विभाग को टीईटी का संशोधित रिजल्ट जारी करना है।

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बलिया

बलियाः जमुनाराम मेमोरियल स्कूल में हुआ स्वास्थ्य शिविर का आयोजन

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बलिया के चितबड़ागांव में जमुना राम मेमोरियल स्कूल में मेडिकल चेकअप कैंप का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य की जांच की गई। इस स्वास्थ्य शिविर का उद्घाटन प्रबंधक डॉक्टर धर्मात्मा नंद के द्वारा किया गया।

जमुना राम मेमोरियल स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों के बौद्धिक विकास के साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाता है। ताकि कोई भी बच्चा बीमारियों की चपेट में न आए और मन लगाकर पढ़ाई कर सके। इसी क्रम में विद्यालय में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया।

जिसमें आंखों की जांच, ऑक्सीजन लेवल, दात की जांच, ब्लडप्रेशर व अन्य जांच की गई। इस दौरान मेडिकल जांच टीम के संयोजक डॉक्टर गिरिजेश पाण्डेय उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं समस्त स्टाफ़ भी उपस्थित रहे। इस दौरान प्रबंधक डॉक्टर धर्मात्मा नन्द ने सभी बच्चों एवं स्टाफ़ को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया एवं इसके महत्व पर प्रकाश डाला।

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‘सुप्रीम’ फैसले से बलिया के मयंक बनेंगे बिहार में जज, जानिए पूरा मामला

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मयंक कुमार पांडेय

गाहे-बगाहे लोगों का भरोसा न्याय तंत्र से डगमगाने लगता है। लेकिन देश की अदालतें हमेशा अपने फैसलों से जनता का भरोसा लोकतंत्र के इस जरूरी खंभे पर टिकाए रहती हैं। एक बार फिर ऐसा ही हुआ है। देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने एक साधारण पृष्ठभूमि के युवक के साथ अन्याय होने से बचा लिया है। पूरा मामला आगे बताएंगे। एक लाइन में ख़बर ये है कि बलिया ज़िले के बांसडीह के रहने वाले मयंक कुमार पांडेय बिहार में जज बनने वाले हैं।

बिहार लोक सेवा आयोग ने मयंक पांडेय की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। मेरिट लिस्ट में होने के बावजूद मयंक की नियुक्ति पर ब्रेक लगा था। मयंक को पटना हाईकोर्ट से भी निराशा हाथ लग चुकी थी। लेकिन जब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था तब फैसला मयंक के हक में आया है। अब बिहार में सिनियर जज जूनियर डिविजन के तौर पर न्याय व्यवस्था में मयंक अपनी भूमिका निभाते नज़र आएंगे।

क्या है मामला ?

बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC ने साल 2018 में पीसीएस (जे) की परीक्षा कराई। मयंक पांडेय भी परीक्षा में शामिल हुए। परिणाम सामने आया तो मयंक का नाम मेरिट लिस्ट में शुमार था। नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब उन्हें अपने सभी दस्तावेजों के ओरजिनल कॉपी के साथ हाजिर होने को कहा गया। मयंक सभी दस्तावेजों की ओरिजिनल कॉपी के साथ पहुंचे। लेकिन इनमें चरित्र प्रमाण पत्र यानी कैरेक्टर सर्टिफिकेट की फर्स्ट कॉपी नहीं थी।

मयंक कुमार पांडेय बलिया ख़बर के साथ बातचीत में बतातें है कि कैरेक्टर सर्टिफिकेट किसी और जगह जमा होने की वजह से ओरिजिनल कॉपी नहीं दे पाया था। बस इसी बात पर BPSC ने उनकी नियुक्ति रोक दी। मयंक इस मामले में पटना हाईकोर्ट भी गए। हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। लेकिन हाईकोर्ट ने BPSC के फैसले को सही करार दिया। इस तरह हाईकोर्ट से मयंक को निराशा हाथ लगी।

हाईकोर्ट से जब फैसला मयंक के हक में नहीं आया तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एस. अब्दुल नज़ीर और जस्टिस विक्रम सेठ की बेंच ने इस मामले में सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने BPSC को नियुक्ति पर लगी रोक को हटाने के आदेश दिए हैं। साफ कहा गया है कि कैरेक्टर सर्टिफिकेट की ओरिजिनल कॉपी नहीं जमा करने की वजह से नियुक्ति रोकना कतई जायज नहीं है। इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को भी पलट दिया है।

मयंक को जानिए ?

दिमाग़ में ये सवाल तो आ ही रहा होगा कि जिस मयंक कुमार पांडेय की बात हो रही है वो हैं कौन? तो जल्दी-जल्दी बता देते हैं। मयंक पांडेय ज़िला बलिया से आते हैं। विधानसभा क्षेत्र बांसडीह लगता है। शुरुआती पढ़ाई-लिखाई ज़िला-जवार से ही हुई है। शुरुआती मतलब स्नातक यानी ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई बलिया से ही कर रखी है। सतीश चंद्र कॉलेज (एस. सी. कॉलेज) से ग्रेजुएट हैं। लेकिन इसके बाद लॉ की पढ़ाई करने के लिए मयंक पांडेय दिल्ली पहुंच गए। दिल्ली यूनिवर्सिटी यानी DU से लॉ की डिग्री हासिल की। अब पड़ोसी राज्य बिहार में जज बनने वाले हैं।

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बलिया: पेपर लीक मामले में कार्रवाई, प्रशासन की सख्ती या खुद को बचाने की कवायद?

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पेपर लीक मामले में पत्रकार की गिरफ्तारी के विरोध में धरना

उत्तर प्रदेश अब भी उस साल के इंतजार में है जब कोई परीक्षा बगैर किसी किंतु-परंतु के संपन्न हो जाए। यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट की परीक्षा में हुए पेपर लीक ने इस इंतजार को और लंबा कर दिया है। अंग्रेजी का प्रश्न पत्र परीक्षा हॉल में पहुंचने से पहले बाजारों में पहुंच गया। प्रश्न पत्र लीक होने का कलंक चढ़ा है बलिया जिले के माथे पर। प्रशासन इस मामले में अपनी सख्ती दिखा रही है। अब तक 34 लोगों को पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनमें बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक यानी DIOS बृजेश मिश्रा और अमर उजाला अखबार के पत्रकार अजित ओझा दिग्विजय सिंह और राष्ट्रीय सहारा के मनोज गुप्ता शामिल हैं।

पेपर लीक मामले की जांच यूपी एसटीएफ को सौंपी गई है। एसटीएफ अब तक इस मामले में 42 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। पहले ही ये बात बता चुके हैं। लेकिन जिले भर में एक गिरफ्तारी को लेकर गहमागहमी बढ़ी हुई है। तीनों पत्रकारों  की गिरफ्तारी से प्रशासन खुद कठघरे में पहुंच गया है। जिले भर के पत्रकार दिग्विजय सिंह और अजित ओझा की गिरफ्तारी के विरोध में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही तीनों को रिहा करने की मांग कर रहे हैं।क्या है मामला, क्यों हुई गिरफ्तारी? बात करते हैं इस विवाद के पहले दिन से यानी 30 मार्च से। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की परीक्षा चल रही थी। 30 मार्च को कक्षा-12 के अंग्रेजी विषय की परीक्षा थी। द्वितीय पाली में परीक्षा होनी थी। परीक्षा शुरू होने से कुछ देर पहले चारों तरफ ये ख़बर आग की तरह फैलती है कि सरकार ने 24 जिलों की परीक्षा निरस्त कर दी है। वजह बताई गई कि अंग्रेजी का पर्चा लीक हो चुका है।

पेपर लीक का केंद्र बना बलिया। जब बात कुछ और साफ हुई तो पता चला कि बलिया से ही पर्चा लीक हुआ है। जिन 24 जिलों में बलिया के ही सेट के प्रश्न पत्र पहुंचे थे उन जिलों में परीक्षा निरस्त कर दी गई। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने यह बात स्पष्ट की है कि “बलिया के समान प्रश्न पत्र जिन 24 जिलों में गए हैं उनकी परीक्षा निरस्त की गई है। ताकि किसी भी छात्र के साथ भेदभाव ना हो।”

नई-नवेली सरकार का गठन हुए अभी हफ्ते भर नहीं बीते थे। योगी 2.0 ने 25 मार्च को शपथ ली और 30 को ये कांड हो गया। लखनऊ से सीधा और सख्त आदेश पहुंचा बलिया। साफ शब्दों में कठोर कार्रवाई का निर्देश जिला प्रशासन को दिया गया। तो कार्रवाई शुरू हुई और धर-पकड़ के दौर का भी आगाज हो गया।

कैसे आया पत्रकार का नाम? अंग्रजी के प्रश्न पत्र लीक होने की ख़बर अमर उजाला ने छापी। ख़बर प्रकाशित की गई कि सोशल मीडिया पर अंग्रेजी की परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र और उसका सॉल्व पेपर 500 रुपए के भाव में बिक रहा है। ख़बर लगातार दो दिन प्रकाशित की गई। फिर 30 मार्च को परीक्षा निरस्त होती है और गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू होता है। जिसके बाद पुलिस की हथकड़ी पत्रकार अजीत ओझा के हाथों तक पहुंच गई।

अजीत ओझा, पत्रकार, बलिया

अजीत ओझा, पत्रकार, बलिया

अजीत ओझा इस प्रकरण को लेकर कहते हैं कि “30 मार्च को यानी अंग्रेजी परीक्षा वाले दिन ही जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह औ DIOS बृजेश मिश्रा ने मुझसे संपर्क किया। दोनों अधिकारियों ने अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर और सोशल मीडिया पर वायरल अंग्रेजी के प्रश्न पत्र की जानकारी मांगी। अधकारियों ने कहा तो मैंने अंग्रेजी की वायरल हो रही पेपर दोनों को व्हाट्सऐप पर भेज दिया। जिसे बाद में आधार बना कर मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। अजीत ओझा की गिरफ्तारी इस आधार पर हुई है कि उन्होंने अंग्रेजी का प्रश्न पत्र वायरल किया है। प्रशासन इस मामले में उनसे पूछताछ कर रही है।

दिग्विजय सिंह , पत्रकार, बलिया

गिरफ्तारी का विरोध: पत्रकार अजीत ओझा की गिरफ्तारी का जिले भर में विरोध हो रहा है। प्रशासन पर आरोप लग रहे हैं कि जिसने सच को उजागर किया उस पर ही कार्रवाई की जा रही है। हालांकि चर्चा यह भी है कि अजीत ओझा की गिरफ्तारी इसलिए हुई है उन्होंने पेपर लीक का सच उजागर कर प्रशासन की फजीहत करा दी है। प्रशासनिक महकमे में जो लोग नकल गिरोह से मिले हुए हैं उनके लिए संकट खड़ा कर देने का अंजाम भुगतना पड़ रहा है।

इस पूरे मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार कहीं से भी लचर नहीं दिखना चाहती है। पूरी सख्ती दिखाने का फरमान है ताकि जनता को यकीन हो कि नकल गिरोह पर लगाम कसने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है। यही वजह है कि प्रशासन हर रोज संदिग्ध लोगों पर नकेल कस रही है।

सभी गिरफ्तारियों के बीच एक पत्रकार की गिरफ्तारी ने प्रशासन की कार्रवाई पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। सवाल है कि क्या पत्रकार अजीत ओझा को इसलिए गिरफ्तार किया गया है ताकि मामले को दबाया जा सके? या कुछ और बड़े सच और आला अधिकारियों की पोल-पट्टी ना खुल जाए इसलिए इस मामले की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है? बहरहाल देखना होगा कि आने वाले समय में इस मामले में क्या कुछ कार्रवाई होती है?

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