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पूर्वांचल

सब्जी बेचने वाले का बेटा बना घोसी सीट से विधायक

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मऊ डेस्क: घोसी विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा के विजय राजभर ने बड़े उलटफेर के बाद जीत हासिल की है। पहले राउंड से ही भाजपा के विजय और सपा समर्थित प्रत्याशी सुधाकर सिंह के बीच कांटे की टक्कर चलती रही। हालांकि इस टक्कर में भी भाजपा प्रत्याशी हर राउंड में बढ़त बनाए रहे। विजय राजभर ने सुधाकर को 1773 वोटों से हराया। 

बीजेपी के विजय राजभर को 68371 और सपा समर्थित निर्दल प्रत्याशी सुधाकर सिंह को 66598 वोट मिले।  घोसी से विधायक बने विजय राजभर बेहद गरीब परिवार से आते हैं। अपने पिता के साथ सब्जी बेचने का कार्य करते थे। विजय ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है। विजय बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते रहे।  2012 व 2013 में आरएसएस में बहुत ज्यादा सक्रिय हुए। बीजेपी की केंद्र में सरकार बनने के बाद मऊ के नगर अध्यक्ष बने। 2018 में जिले में महामंत्री बने।

नगर पालिका में 2012 में सभासद भी रहे। पार्टी में सक्रियता और जमीनीस्तर पर कार्य भी करते रहे। घोसी सीट फागू चौहान के बिहार का राज्यपाल बनने से खाली हुई थी। यहां 11 प्रत्यशियों के बीच मुकाबला था। तीसरे पर बसपा और चौथे पर कांग्रेस रही। बसपा के कयूम अंसारी को 50775 और कांग्रेस के राजमंगल यादव को 11624 वोट मिले। समाजवादी पार्टी का कोई अधिकृत प्रत्याशी नहीं था। 

सुधाकर सिंह को टिकट दिया गया था लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया। ऐसे में निर्दल प्रत्याशी के रूप में उन्होंने ताल ठोकी और सपा ने समर्थन दिया था। साढ़े नौ बजे आये पहले रुझान में बीजेपी के विजय राजभर 2263 मत पाकर सपा समर्थित निर्दल प्रत्याशी सुधाकर सिंह से 112 मतों की लीड बना चुके थे।

सुधाकर को 2051 मत मिले थे। बसपा के कयूम अंसारी 1047 और कांग्रेस के राजमंगल यादव को 174 मिले थे। दूसरे राउंड में बीजेपी 263 मतों से आगे हो गई। बीजेपी के विजय राजभर को  4509, सपा समर्थित निर्दल सुधाकर को 4246, बीएसपी के कयूम अंसारी को 1824 और कांग्रेस के राजमंगल यादव 383 मत मिले थे।

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मनोज सिन्हा बनाए गए जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता मनोज सिन्हा अब जम्मू और कश्मीर के नए उपराज्यपाल होंगे. बुधवार शाम को गिरीश चंद्र मुर्मू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अब गुरुवार सुबह राष्ट्रपति भवन की ओर से मनोज सिन्हा की नियुक्ति का ऐलान किया गया है.

आपको बता दें कि 5 अगस्त को ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे एक साल पूरा हुआ है, इसी बीच बुधवार शाम को अचानक जीसी मुर्मू के इस्तीफे की खबर आई थी. मुर्मू का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है.

अब जब मनोज सिन्हा को नए LG की जिम्मेदारी सौंपी गई है, मतलब साफ है कि एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के उच्चस्थ पद पर राजनीतिक एंट्री हुई है. इससे पहले जब जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य था तब सत्यपाल मलिक यहां के राज्यपाल थे, लेकिन जब केंद्रशासित प्रदेश बना तो अधिकारी जीसी मुर्मू को भेजा गया. जीसी मुर्मू की गिनती भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास अधिकारियों में होती रही है.

कौन हैं मनोज सिन्हा?

मनोज सिन्हा पूर्व में गाजीपुर से सांसद रहे हैं और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के बड़े चेहरे हैं. हालांकि, 2019 का लोकसभा चुनाव वो हार गए थे, जिसे एक बड़ा झटका माना गया था. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मनोज सिन्हा मंत्री रह चुके हैं और उनके पास रेलवे के राज्यमंत्री और संचार राज्यमंत्री का कार्यभार था.

उत्तर प्रदेश के 2017 के विधानसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली थी, तब मनोज सिन्हा ही मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे थे. वो दिल्ली से वाराणसी पूजा करने पहुंच गए थे और उम्मीद में थे कि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

लेकिन पार्टी की ओर से योगी आदित्यनाथ को आगे किया गया. मनोज सिन्हा की गिनती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद नेताओं में होती है. ऐसे में अब एक बार फिर केंद्र सरकार की ओर से मनोज सिन्हा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है.

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Corona Update- बलिया में आज 69 नए मामले, पड़ोसी जिलों में भी बढ़े केस

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बलिया डेस्क : बलिया में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहा है। लॉकडाउन के बीच मरीजों की तादात बढ़ने से लोग दह शत में हैं। हालांकि इसके बावजूद सड़कों पर गहमागहमी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबित जनपद में मंगलवार को 69 नये पॉजिटिव केस सामने आये। हालांकि इसके सापेक्ष 70 लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज भी कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जनपद में कोरोना मरीजों की कुल तादात 487 हो चुकी है, जबकि 279 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके है।  जिले में कुल एक्टिव केस की संख्या 206 बताई गई है। 

 

देवरिया में कोरोना:  बलिया के पड़ोसी जिले देवरिया में भी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिले में मंगलवार को 12 नए कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। अब जिले में कुल संक्रमितों की संख्या 480 पहुंच गई है। सीएमओ डा. आलोक पांडेय ने की है। उन्होंने बताया कि इनमें से 248 लोग अभी तक ठीक होकर घर जा चुके हैं। संक्रमितों की बढ़ती संख्या को लेकर लोगों में दहशत है। नगरपालिका, विकास भवन, रूद्रपुर कस्बे को सील कर दिया गया है।

 

मऊ में कोरोना  :  मऊ में मंगलवार को 78 लोगों की रिपोर्ट आई, जिसमें 15 लोग पाजिटिव पाए गए। सभी नगर क्षेत्र के ही रहने वाले हैं। इनमें सर्वाधिक संख्या कतुआपुरा मुहल्ले की रही, वहीं के आठ लोग कोरोना संक्रमित मिले। रिपोर्ट में रोडवेज के लिपिक और वेल्डर भी संक्रमित पाए गए हैं। इसकी सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें सभी जगहों पर पहुंच गईं। वहीं 122 लोग कोरोना को मात देकर जंग जीत चुके हैं उन्हें डिस्चार्ज कर घर भेजा जा चुका है।

 

 

 

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जब ईओ मणि मंजरी राय ने कहा था- भईया अब याचना नहीं…. !

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जब मै खामोश थी
तुमसे कुछ भी ना कहा था
ना बताया था अपना दर्द, ना
तुम्हे तुम्हारा, किस्सा ही सुनाया था

तब मैने
किताबो से वक़्त चुराकर
दुनिया कि नजरो से छुपकर
सपनो की घाटिया रची थी
और बहोत खुश थी तुम्हे
उन घाटीयो मे पाकर,
ये कवितायेँ मणि मंजरी राय ने अपने ब्लॉग में  लिखी  था जो अब इस दुनिया में नहीं रहीं

नगर निकाय मनियर अधिशाषी अधिकारी मणि मंजरी राय जोकि अब इस दुनिया में नहीं हैं. बीते दिनों उन्होंने अपने आवास पर फांसी लगाकर खु’दकुशी कर ली. यह खबर अब बलिया से निकलकर पूरी यूपी और देश भर में हो रही हैं और सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि एक तेज़ तर्रार लड़की जो आईएएस बनना चाहती थी, उसने यह कदम क्यों उठाया. ऐसी क्या मजबूरियां थी? ऐसा कौन सा दबाव था?

खैर कहा यह जा रहा है कि मनियर नगर पंचायत के कार्यपद्धति और अनियमित तौर पर खोले गये 2 करोड़ के टेंडर को लेकर मणि मंजरी रायका फी डिप्रेशन में चल रही थी. इस गड़बड़ी को लेकर वह काफी नाराज़ थी. इसलिए उन्होंने वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया था. जिसकी वजह से उन पर काफी दबाव बनाया जा रहा था.

खैर, उनके सोसाइड नोट और पुलिस की तफ्तीश से उम्मीद है कि इस मामले में जल्द ही कोई नया खुलासा होगा और कई सफेदपोश चेहरे सामने आयेंगे. लेकिन अफ़सोस यह है कि हमने एक इमानदार अफसर खो दिया.

उनके साथ पढ़ाई करने वाले पत्रकार अमीश राय ने सोशल मीडिया पर उनकी बातों को याद करते हुए लिखा है कि इतनी बहादुर अफसर बेटी को हमने खो दिया. अचानक से मणि से हुई पुरानी बातचीत याद आ गयी। इस लड़की ने BHU के लड़कियों के आंदोलन के दौरान कहा था कि भैया, अब याचना नहीं, रण होगा.

मणि मंजरी राय ब्लॉग भी लिखती थी. उनकी कविताएं आज भी उनके ब्लॉग पर मौजूद हैं. ज़िन्दगी को करीब से जीने वाले, महसूस करने वालीं और चुनौतियों का सामने करने वालीं अफसर ऐसा कदम उठाएगी, शायद ही किसी ने सोचा होगा.

ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि हालात वाकई में काफी दर्दनाक और परेशान करने वाले रहे होंगे कि उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
यह है उनका ब्लॉग, जहाँ आप उनकी लिखी कविताएँ पढ़ सकते हैं.
http://khwabmanjari.blogspot.com/

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