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कौन था एक लाख का इनामी अपराधी हरीश पासवान, जिसे यूपी STF ने बलिया में मार गिराया

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3 सितंबर यानी बीते शुक्रवार को यूपी एसटीएफ ने कुख्यात बदमाश हरीश पासवान को मार गिराया।

बलिया के रसड़ा में कुख्यात बदमाश हरीश पासवान यूपी एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया। यूपी एसटीएफ की टीम ने शुक्रवार को रसड़ा में हुए मुठभेड़ में हरीश पासवान को ढेर कर दिया। पुलिस की टीम लंबे समय से हरीश पासवान की तलाश में जुटी थी। दबिश के दौरान ही एसटीएफ की टीम और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हो गया। जिसमें आखिरकार हरीश पासवान मारा गया। बीते गुरुवार यानी 2 अगस्त को ही अपर पुलिस महानिदेशक (वाराणसी रेंज) बृज भूषण ने हरीश पासवान की इनामी राशि बढ़ाने का ऐलान किया। एडीजी ने हरीश पासवान पर एक दिन पहले ही इनाम की राशि एक लाख रुपए घोषित की थी। जो कि पहले पचास हजार रुपए थी।जलेश्वर सिंह हत्याकांड से जुड़े थे तार- हरीश पासवान मूलतः बलिया के हल्दी थाना क्षेत्र के बाबूबेल का रहने वाला है। पिछले दिनों पुलिस ने उसकी खोजबीन तब तेज कर दी जब जिला पंचायत के पूर्व सदस्य जलेश्वर सिंह की हत्या में हरीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। इस मामले में उसके खिलाफ धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। बता दें कि 7 जुलाई को पूर्व जिला पंचायत सदस्य जलेश्वर सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में हरीश पासवान के अलावा आजमगढ़ का अलीशेर भी आरोपी है। जलेश्वर सिंह हत्या के कुछ अन्य आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

पूर्वांचल के अपराधियों में था बड़ा नाम- हरीश पासवान पूर्वांचल के कुख्यात बदमाशों में से एक था। उसका आपराधिक इतिहास इस बात की गवाही देती है। हरीश के खिलाफ हत्या, लूट और डकैती समेत अन्य कई अपराधों में कुल 35 मुकदमे दर्ज हैं। बलिया से बाहर भी उसके अपराध की छाया पसरी हुई थी। बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी हरीश पासवान पर कुछ मुकदमे दर्ज हैं। बताया जाता है कि 2004 से ही हरीश पासवान अपराध की दुनिया में सक्रिय था। 2004 में ही पहली बार एक लूट के मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। 2004 से 2021 यानी 17 सालों के अपराध का अध्याय आज एसटीएफ ने बंद कर दिया।

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प्रदेश में चला तबादला एक्सप्रेस, बदल गए बलिया के ASP और DSP

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प्रदेश में चला तबादला एक्सप्रेस, बदल गए बलिया के ASP और DSP

बलिया जिले के प्रशासनिक महकमे में बड़ा फेरबदल हुआ है। जिले के अपर पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक बदल दिए गए हैं। बलिया में तीन साल से अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार गुरूवार यानी आज तबादला हो गया है। संजय कुमार के स्थान पर यह जिम्मेदारी विजय त्रिपाठी को सौंपी गई है। विजय त्रिपाठी बलिया जिले के नए अपर पुलिस अधीक्षक बनाए गए हैं।

पुलिस अधिक्षक के साथ ही बलिया के पुलिस उपाधीक्षक भी बदल दिए गए हैं। बलिया के पुलिस उपाधिक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी का तबादला हरदोई जनपद में कर दिया गया है। बता दें कि हरदोई जनपद के पुलिस उपाधिक्षक शिवराम कुशवाहा को बलिया भेजा गया है। अब बलिया जनपद के नए पुलिस उपाधीक्षक शिवराम कुशवाहा हैं।

बता दें कि बलिया जनपद के नए अपर पुलिस अधीक्षक विजय त्रिपाठी पीपीएस अधिकारी हैं। इससे पहले उनकी तैनाती वाराणसी में उप सेनानायक 36 वीं वाहिनी पीएसी के पद पर थी। वाराणसी से उन्हें बलिया में अपर पुलिस अधीक्षक पद का कमान संभालने भेजा गया है।

देखना होगा कि दोनों नए अधिकारियों के आने से बलिया के माहौल पर क्या फर्क पड़ता है? पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी भी अपने नए अपर पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक उत्साहित हैं। गौरतलब है कि आज उत्तर प्रदेश में शासन की ओर से तबादला एक्सप्रेस दौड़ाया गया था। जो प्रदेश के कई जनपदों से होकर गुजरा है। इस रूट में बलिया का भी नाम आ गया। जिसके चलते अपर पुलिस अधीक्षक और उपाधीक्षक का तबादला हो गया।

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बलिया: रसड़ा विधायक ने की मृतक परिवार की मदद, चाकू गोदकर दबंगों ने की थी हत्या

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बलिया के रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के विधायक उमाशंकर सिंह अक्सर अपने क्षेत्र के लोगों की आर्थिक मदद करते हुए पाए जाते हैं। गुरूवार को रसड़ा के महाराजपुर गांव में एक बार फिर उन्होंने पीड़ित परिवार की मदद की। बीते दिनों गांव के एक मजदूर की हत्या हो गई थी। आज मृतक के परिजनों की विधायक ने आर्थिक मदद की।

महाराजपुर गांव के देवेंद्र चौहान की एक चाकूबाजी की वारदात के दौरान में मौत हो गई थी। देवेंद्र चौहान मजदूरी करने अपने परिवार का पेट पालते थे। उनके तीन छोट-छोटे बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी आठ साल की है। इसके बाद दो बच्चे छह साल और चार साल की उम्र के हैं। परिवार में देवेंद्र चौहान की पत्नी भी हैं।

रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह आज महाराजपुर गांव पहुंचे। उन्होंने मृतक के परिवार से भेंट की। साथ ही पचास हजार रूपए का आर्थिक मदद भी किया। उमाशंकर सिंह ने मृतक देवेंद्र चौहान के तीनों बच्चों के पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर उठा ली। उन्होंने बच्चों की मां से कहा है कि “इनके शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी मेरी है। हम इनके भविष्य के लिए हमेशा खड़े हैं।”

उमाशंकर सिंह ने कहा कि “किसी परिवार का मुखिया चला जाता है तो उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। परिवार का चल पाना मुश्किल हो जाता है। लेकिन मैं प्रयास करूंगा कि प्रदेश सरकार से मिलने वाली आर्थिक मदद जल्द से जल्द मुहैया कराई जा सके।”

क्या था मामला: देवेंद्र चौहान के मौत की घटना दो हफ्ते पहले की है। हुआ ये कि देवेंद्र चौहान डांसर बुक करने सिंगही चट्टी गए थे। इस दौरान वहां धर्मेंद्र और आशिष नाम के दो लोग पहुंच गए। इन तीनों के बीच बुकिंग को लेकर झमेला खड़ा हो गया। झगड़ा होता देख सड़क से गुजरते हुए दो बाइक सवार वहां पहुंच गए। लेकिन इसी बीच दबंगों ने तीनों पर चाकू से हमला कर दिया।

इस हमले में देवेंद्र चौहान बुरी तरह घायल हो गए। अन्य दो बाइक सवालों को भी चोट आई। देवेंद्र चौहान को रसड़ा के सीएचसी ले जाया गया। प्राथमकि उपचार के बाद उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। वाराणसी जाते हुए सैदपुर में देवेंद्र की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में धर्मेंद्र, आशीष और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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बलिया: लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण में गड़बड़ी का खामियाजा, NHAI के हाथ सौंपी गई परियोजना

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बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज डेवलपमेंट (यूपीडा) को सौंपी गई थी। लेकिन अब परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआइ को दे दी गई है। यूपीडा ने लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए ब्लू प्रिंट तैयार किया था। जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। जिसके बाद शासन ने यह फैसला लिया है।

खबरों के मुताबिक दो दिन पहले यूपीडा और एनएचएआइ के बीच एक संयुक्त बैठक हुई थी। बैठक के दौरान इस प्रोजेक्ट को एनएचएआइ को सौंपने पर सहमति बन गई। एनएचएआइ अब लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य आगे बढ़ाएगी। अभी तक इस एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही तैयार हो सका है। जिसमें बलिया जिले के ब्लू प्रिंट में गलती पाई गई थी।

योजना के अनुसार लिंक एक्सप्रेस-वे 24.2 किलोमीटर लंबी होगी। एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई है 120 मीटर प्रस्तावित है। लिंक एक्सप्रेस-वे का चौदह किलोमीटर हिस्सा गाजीपुर में है। तो वहीं 10.2 किलोमीटर हिस्सा बलिया से होकर गुजरेगा। बलिया जिले के कुल तेरह गांवों से यह एक्सप्रेस-वे होकर जाएगा। बीते अगस्त महीने में यूपीडा ने इसके लिए एक ब्लू प्रिंट तैयार कर शासन को भेजी थी।

यूपीडा के ब्लू प्रिंट में जो रूट दर्शाया गया उसमें अनियमितता पाई गई। दरअसल बलिया से होकर जाने वाले एनएच-31 के ही रूट पर लिंक एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट बना दिया गया था। शासन ने इस पर यूपीडा को ब्लू प्रिंट ठीक करने के निर्देश दिए थे। लेकिन एक्सप्रेस-वे का पूरा कार्य एनएचएआइ को सौंप दिया गया है। लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए शासन की ओर से यूपीडा को पचास करोड़ की राशि आवंटित की जा चुकी थी। अब यूपीडा यह राशि एनएचएआइ को स्थानांतरित करेगी।

लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण से बलिया जिला पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाएगा। उसके बाद आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे के जरिए सीधे दिल्ली पहुंचा जा सकेगा। इस तरह बलिया से दिल्ली तक का सफर आसान हो जाएगा। लेकिन ये सारी बातें भविष्य की बैताल हैं। ऐसा होगा तो वैसा हो जाएगा के फार्मेट पर पूरी कहानी टिकी हुई है। दिल्ली अभी बहुत दूर है। जब यूपीडा जैसी संस्था एक्सप्रेस-वे का ब्लू प्रिंट ही किसी दूसरी सड़क के रूट पर बना दे तो दिल्ली की दूरी और अधिक हो जाती है।

देखना होगा कि बलिया को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़कर बारह घंटे दिल्ली पहुंचाने का ख्वाब कब तक रात के अंधेरे से निकलकर जमीन के उजाले में प्रवेश करती है?

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