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Exclusive – विश्वबैंक ने वापस लिए 36 करोड़, बलिया में आर्सेनिक युक्त जल से लोगों को नहीं मिलेगी निजात!

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बलिया डेस्क : बलिया में आर्सेनिक प्रभावित गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वैश्व बैंक ने नीर निर्मल योजना के तहत जिले के 18 गांवों में पानी टंकी का निर्माण कराने के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये अनुदान दिया था जो की उसने अब वापस ले लिया है। जिससे ये माना जा रहा है कि बलिया में आर्सेनिक युक्त पानी से लोगों को अब भी निजात नहीं मिलेगी। बलिया में आर्सेनिक युक्त जल से हुई कई मौतों के बाद भी लोगों को प्रशासन प्रभावित इलाके में शुद्ध जल मुहैया कराने में फेल साबित हुआ है। जो अनुदान 18 गांवों में पानी टंकी का निर्माण कराने के लिए लगभग 36 करोड़ रुपये का दिया था। हालात ये रही की जल निगम 2019 तक भी कहीं भी निर्माण शुरू नहीं करा सका। नतीजन विश्व बैंक ने 2019 अक्टूबर में सभी परियोजनाओं को निरस्त करते हुए अनुदानित 36 करोड़ वापस ले लिया है।

आर्सेनिक युक्त जल से प्रभावित इलाके के लोग शुद्ध पेयजल के लिए शोर मचाते रहे गए लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। इस क्षेत्र के निवासी इंटक नेता विनोद सिंह बताते हैं कि असंख्य गांवों के लोग आर्सेनिकयुक्त जल के कारण काल के गाल में समा रहे हैं। इसके बावजूद जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक इस ओर गंभीर नहीं हैं। जनता के लिए इससे बड़ी दुखद बात और क्या हो सकती है।

इतनी मोटी रक़म होनी थी खर्च 
बता दें की जिले को आर्सेनिक मुक्त करने के लिए  नंदपुर में 127.78 लाख, बघौंच में 191.90 लाख, बलीपुर सरांक में 178.39 लाख, भरसौंता में 186.19 लाख, भोजापुर में 245.48 लाख, विशुनपुरा में 161.45 लाख, चकहाजी शेखपुर में 115.93 लाख, दोपहीं में 131.86 लाख, गोहिंया छपरा में 182.7 लाख, मझौंवा में 174.71 लाख, पिलुई में 208.57 लाख, रामपुर कोडऱहा में 107.19 लाख, सहरसपाली में 223.24 लाख, सरायां में 138.83 लाख, सरवर ककरघटी में 184.90 लाख, शिवपुर दियर नबंरी में 441.48 लाख, सोनकीभांट में 212.64 लाख और तिखमपुर में 333.16 लाख से पानी टंकी के निर्माण के लिए धन स्वीकृत था।

जिलाधिकारी ने भी लिखा था पत्र
बलिया डीएम  श्रीहरि प्रताप शाही ने 3 दिसंबर 2019 को प्रबंधक निदेशक उप्र जल निगम, लखनऊ को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने इस पत्र के माध्यम से बताया है कि इन परियोजनाओं के निरस्त होने से लाखों जनता शुद्ध पेयजल से वंचित हो जाएगी।

CDO ने की थी सिफारिश
बलिया के मुख्य विकास अधिकारी विपिन जैन ने 23 अक्टूबर 2020 को अधिशासी निदेशक राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन लखनऊ को पत्र प्रेषित किया था। इसमें उन्होंने इस परियोजना को जल जीवन मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत पुनरीक्षित करने की सिफारिश की थी।

सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने केंद्रीय मंत्री को दिया था पत्र
सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने जल संसाधन मंत्री को 10 अक्टूबर 2020 को पत्र लिखा था। उन्होंने भी निरस्त परियोजनाओं को जल जीवन मिशन योजना में परिवर्तित कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की थी।

जिले में 310 बस्तियां प्रभावित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले के 17 विकास खण्डों में कुल 1830 ग्राम हैं जिनमें कुल 5132 बस्तियां हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 310 बस्तियों में ही भूजल में आर्सेनिक की मात्रा 50 पीपीबी (माइक्रोग्राम प्रति लीटर) से अधिक है लेकिन धरातल पर बड़ी संख्या में गांव इसकी चपेट में हैं। डब्लूएचओ के मानक के अनुसार 10 पीपीबी है लेकिन सरकार 50 पीपीबी के ऊपर के आंकड़े को खतरनाक मानती है।

आर्सेनिक पानी से गंगापुर में हो चुकी हैं कई मौतें 
बता दें की गंगापुर गांव के लोगों ने बताया कि आर्सेनिक के कारण इस पंचायत में लगभग 22 लोगों की मौत हो चुकी है। मानवाधिकार में अपील करने के बाद इसकी मजेस्टियल जांच भी वर्ष 2018 में जून माह में हुई थी। उस वक्त जांच टीम में शामिल सदर के तत्कालीन एसडीएम अश्वनी कुमार श्रीवास्तव और एसीएमओ रहे डा. केडी प्रसाद जांच करने पहुंचे थे। उन्हें गांव के लोगों ने अपना बयान भी दर्ज कराया था लेकिन जांच के के बाद भी किसी भी पीडि़त परिवार को न कोई आर्थिक मदद मिली और न ही शुद्ध पेय जल ही उपलब्ध हो पाया।

क्या बोले जल निगम के अधिकारी 
जल निगम के अधिशासी अभियंता अंकुर श्रीवास्तव ने कहा है कि जनपद के 18 स्थानों पर पानी टंकी के निर्माण के लिए विश्व बैंक ने अनुदान दिया था जनपद के 18 स्थानों पर पानी टंकी के निर्माण के लिए विश्व बैंक ने अनुदान दिया था। पानी टंकी के निर्माण के लिए बोरिंग करने पर कुछ स्थानों पर काफी नीचे तक आर्सेनिक की मात्रा मिली थी, वहीं कुछ स्थानों पर पानी टंकी के लिए जमीन नहीं मिली। ऐसे में विश्व बैंक के अनुदानित धन को शासन को समर्पित कर दिया गया। वहां से यह धन विश्व बैंक को वापस हो गया। अब नए सिरे से सभी स्थानों के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है। अब शासन से धन स्वीकृत होने के बाद ही सभी स्थानों पर निर्माण संभव हो सकेगा।

रिपोर्ट- तिलक कुमार

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योगी के दौरे पर युवा चेतना का तंज, मुख्यमंत्री ने बलिया को “पिकनिक स्पाट” बना दिया

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बलिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बलिया दौरे पर युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने तंज कसा है। रोहित सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बलिया आए और बिना जनता की समस्याओं का जायज़ा लिए चले गए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उज्ज्वला योजना की जन्मभूमि हैबतपुर गाँव आए थे अन्न योजना जाँचने परंतु 4 वर्ष से हैबतपुर सहित दर्जन भर गाँव एवं बलिया शहर को बचाने हेतु बांध निर्माण के माँग पर कुछ नहीं किया।

उज्ज्वला योजना का डंका बजाकर भाजपा 2017 में आइ परंतु हैबतपुर को सरकार ने दरकिनार किया।उन्होंने कहा की भाजपा एवं मुख्यमंत्री ने बलिया और हैबतपुर गाँव को पिकनिक स्पाट बना दिया है। चित्तु पांडेय चौराहा के समीप कटहल नाला पुल की स्थिति जर्जर है, NH 31 की स्थिति जरजर है,बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है,पूरा बलिया जलमग्न है आख़िर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन चीज़ों का अवलोकन क्यों नहीं किया।

रोहित  सवाल दागते हुए  कहा की चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री की इस यात्रा से बलिया की जनता को क्या मिला। राजधानी रोड स्थिति कटहल नाला पुल को टीन के घेरे से ढक दिया गया ताकि मुख्यमंत्री को बलिया की विकराल स्थिति न दिखे। ऐसा ही 2021 में अहमदाबाद में हुआ था जब ट्रम्प आए थे। रोहित ने कहा की 2022 में परिवर्तन तय हो चुका है भाजपा का पोल खुल गया है।  बलिया की दुर्गति इतना पहले कभी किसी सरकार में नहीं हुआ था जो भाजपा राज में हो रहा है। धर्म के आधार पर राजनीति कर भाजपा ने जनता को दिग्भ्रमित कर दिया है अब कोई इनके झाँसे में नहीं आएगा।

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बलिया में पत्रकार वार्ता के नाम पर भाषण दे गए सीएम योगी, पत्रकारों में नाराजगी

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बलिया में योगी आदित्यनाथ के आगमन के बाद प्रदेश भर में इसकी चर्चा रही। लेकिन जिस बात की चर्चा नहीं थी हम वह आपको बताना चाहते हैं । सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहां ‘पत्रकार वार्ता’ की जिसमें चुनिंदा पत्रकारों को शामिल होने की अनुमति थी। ध्यान रहे कि सीएम से कोई भी सवाल नहीं पूछा जा सका और सीएम के राजनीतिक भाषण को पत्रकार वार्ता कहा गया। जिंदा पत्रकार भी सीएम आदित्यनाथ से सवाल नहीं पूछ सकते सिर्फ मौजूद रहे। राजनीतिक इस बातचीत को पत्रकार वार्ता का नामा दिया गया था।

क्या- क्या हुआ जान लिजीए– मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जहां जिला प्रशासन कलेक्ट्रेट सभागार में सीएम की बैठक को सफल बनाने के लिए दिनरात लगा रहा। वहीं मीडिया को सीएम की बैठक से दूर रखा। जैसे ही मीडियाकर्मी कलेक्ट्रेट सभागार पहुंचे, उन्हें वहां से मना कर दिया गया। कहा यह गया कि कुल १५ पत्रकारों की सूची हमें उपलब्ध है। वहीं पत्रकार मुख्यमंत्री के ब्रिफिंग में शामिल होंगे। जबकि कुछ पत्रकार हेलीपैड की तरफ पहुंचे तो वहां भी पुलिसकर्मियों ने उन्हें यह बताया कि आपको यहां नहीं रहना है।

आपको कलेक्ट्रेट सभागार में बाहर मुख्यमंत्री के ब्रिफिंग में आमंत्रित किया गया है। कहा गया कि उन पत्रकारों की सूची सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों के पास है। करीब ढाई बजे के बाद पत्रकार कलेक्ट्रेट सभागार परिसर में पहुंचे। कुछ देर के बाद मुख्यमंत्री उनसे रू-ब-रू हुए। जबकि उसके पहले कप्तान डा. विपिन टाडा ने पत्रकारों से निवेदन किया कि सीएम के ब्रिफिंग में आपको कोई सवाल नहीं करना है। हालांकि पत्रकारों ने इस पर आपत्ति जाहिर की, लेकिन कप्तान साहब हंसकर निकल पड़े। जब वे अंदर घुसे तो एलआईयू द्वारा यह कहा गया है कि आप कोई सवाल न पूछे।

सीएम ने पत्रकार वार्ता में क्या-क्या कहा?– मुख्यमंत्री 15 मिनट तक कोरोना से संबंधित जानकारियां देते रहे और किसानों के गेहूं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी। मजे की बात यह रही कि जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री को छत के नीचे रखा और मीडिया कर्मियों को धूप में खड़ा करवा दिया। करीब 15 मिनट तक धूप में खड़े होकर मीडियाकर्मी सीएम का कवरेज करते रहे और पसीेने से तरबतर हो गए। सीएम के साथ मीडिया के सामने मंत्री उपेंद्र तिवारी, मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल, सांसद रवींद्र कुशवाहा, सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, राज्यसभा सांसद

सकलदीप राजभर, विधायक संजय यादव, विधायक सुरेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू मौजूद रहे। सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि किसी ने यह नहीं कहा कि मीडिया के साथी आप धूप में है थोड़ा अंदर आ जाइए। खैर मीडिया कवरेज में धूप और छांव की कोई परवाह नहीं की जाती है, वह हमेशा अपने काम में लगे रहे। लेकिन बाहर यह चर्चा जरूर रही कि जिस तरीके से सभागार के अंदर सीएम ने अपने मातहतों को संबोधित किया। उसी तरीके से मीडिया को भी संबोधित किया। सीएम की ब्रिफिंग के बाद मीडिया में काफी नाराजगी थी कि कुछ सवाल हमारे थे जिसको पूछने का अधिकार जिला प्रशासन ने नहीं दिया।

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जबतक जिला अस्पताल में रहे CM योगी तबतक मरीज रहे परेशान

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बलिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को बलिया दौरे पर आए।जिले के अधिकारियों सहित भाजपा नेताओं ने उनका अच्छे से स्वागत किया। अपने बलिया दौरे पर सीएम योगी ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया, लेकिन इस दौरान जब तक मुख्यमंत्री अस्पताल में रहे तबतक सभी मरीज हलकान हो गए। किसी को ठीक से इलाज नहीं मिला, क्योंकि पूरा अस्पताल प्रशासन योगी की आवभगत करने में व्यस्त था।

जिला चिकित्सालय में ऐसे बहुत सारे मरीज थे जिन्हें कुछ घंटे के लिए इलाज नहीं मिल पाया। लोग अपनी पीड़ा को दबाए इस आशा में खड़े रहे कि कब मुख्यमंत्री अस्पताल से जाएं और उनका इलाज हो सके। एक मरीज ऐसा था जिसकी जबड़े की हड्डी उतर चुकी थी और वो दर्द से कराह रहा था, वहीं ऐसे हालात में पूरी तरह से जिला चिकित्सालय को प्रशासन ने घेरा बंद कर रखा था। यही नहीं किसी भी परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति को अंदर जाने नहीं दिया गया, चाहे वह मर ही क्यों ना जाए।

लोग यही कहते रहे कि मुख्यमंत्री योगी कब अस्पताल से निकल जाएं। ये कैसी व्यवस्था है। लोगों ने ये भी कहा कि, कृपया बुद्धिजीवी और जनप्रतिनिधि हमें इस असामाजिक और अमानवीय व्यवस्था से अवगत कराएं। बता दें कि योगी ने सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड में स्थापित पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों से स्वास्थ्य सुविधाओं और दवा के बारे में पूछताछ की। मरीजों व तीमारदारों ने बताया कि सब ठीक है।

पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती एक मरीज से उन्होंने पूछा कि व्यवस्थाएं आजकल में हुई हैं या पहले से थी। महिला ने बताया कि पहले से थी और दवा भी ठीक-ठाक से मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप कहीं मत जाइएगा।यहीं पर रहिएगा। आप स्वस्थ होकर यहां से जाइएगा। इस प्रकार अन्य मरीजों से भी मुख्यमंत्री योगी ने बातचीत की।

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