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बलिया स्पेशल

बलिया के मशहुर सामाजिक कार्यकर्ता एवं विडियो जर्नलिस्ट अनुरागी को मिला बड़ा अवार्ड !

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बलिया के मशहुर सामाजिक कार्यकर्ता एवं विडियों जर्नलिस्ट जयराम अनुरागी को मध्य प्रदेश में “नेशनल प्राइम अवार्ड 2019 ” से सम्मानित किया गया, जिससे जिले में ख़ुशी का माहौल है।
बता दें की कि ये अवार्ड समाज कल्याण , शिक्षा , साहित्य , उद्योग , खेल कूद एवं गैर सरकारी सँगठनो आदि के क्षेत्र मे उत्कृष्ट कार्य करने वाले देश के चुनिंदा 80 हस्तियों को दिया गया है ।

नेशनल एँटी हरासमेंट फाऊंडेशन (भोपाल) ने जयराम अनुरागी को इस अवार्ड से 25 अगस्त को सम्मानित किया । अनुरागी को ये अवार्ड सोशल एक्टिविज्म एवं विडिओ जर्नलिज्म के माध्यम से समाज मे बदलाव लाने के लिये दिया गया है। नेशनल प्राइम अवार्ड समारोह मे मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक पवन जैन के साथ वालीवुड सेलिब्रिटी अरुण वर्मा, अरब देश कतर के उद्योगपति एम० एस० बुखारी एवं मिस मल्टीनेशनल इँडिया 2017 सुश्री सेफाली शर्मा जैसी शख्सियतो ने अनुरागी को सम्मानित किया ।

जानें कौन हैं जयराम अनुरागी– बलिया के चिलकहर ब्लाक के असनवार गांव के रहने वाले अनुरागी सोशल एक्टिविज्म एवं विडिओ जर्नलिज्म का जाना-माना चेहरा हैं। इलेक्ट्रिकल इँन्जीनियरिँग मे प्रथम श्रेणी मे डिप्लोमा करने के बावजूद इँजीनियर बनने का सपना छोड़ पिछले 25 सालो से समाज के वँचित वर्ग के अधिकारो के लिए सतत सँघर्षशील है । अब तक 650 से भी अधिक क्षेत्रीय ,प्राँतीय एवं राष्ट्रीय कार्यशालाओं, सेमिनारों मे भाग लेकर वँचित वर्ग की आवाजो को बुलंद कर चुके अनुरागी एक अच्छे वक़्ता के लिए भी जाने जाते हैं ।

फिलहाल इस वक़्त गोवा की सुप्रसिद्ध कम्युनिटी न्यूज नेटवर्क ” विडिओ वाँलटियर्स “ से जुडकर हाशिये पर खडे लोगों की बुनियादी समस्याओं पर विडिओ पत्रकारिता के माध्यम से समाज में बदलाव की कोशिश में जी जान से जुटे हुए है। इनके सामजिक कार्यों को देखते हुए भारतीय दलित साहित्य अकादमी (दिल्ली) ने 2002 मे डा० अम्बेडकर फेलोशिप सम्मान से सम्मानित कर चुकी है। इनके जनहित से जुडे लेख विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं मे भी अक्सर प्रकाशित होते रहते हैं ।
भोपाल से अवार्ड लेकर वापस लौटे अनुरागी ने मीडिया को बताया “राष्ट्रीय स्तर पर इस पुरस्कार के मिलने से मेरा हौसला काफी बढ़ा है । अब मै एक नई उर्जा के साथ समाज कल्याण एवं विडिओ जर्नलिज्म के क्षेत्र मे काम करते हुए सामाजिक बदलाव लाने का और अधिक प्रयास करुंगा”।

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बलिया में जब UPTET का एग्जाम देने साले की जगह पहुंचा जीजा…

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बलिया। यूपी टीईटी-2021 की परीक्षा में कड़े इंतजाम के बाद भी गड़बड़ी देखने को मिली। जहां साले की जगह पर उसका शिक्षक जीजा एग्जाम देने पहुंच गया। और किसी को पता तक नहीं चला। हालांकि बाद भी शिक्षा विभाग को सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। तत्काल पुलिस को बुलाया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शिक्षा जीजा को तो गिरफ्तार कर लिया लेकिन साला चुपचाप निकल गया। जिसकी तलाश अब की जा रही है। पुलिस ने फेफना थाना पुलिस ने जीजा के साथ ही साले पर भी मामला दर्ज कर लिया है।

दरअसल पकड़ी थाना क्षेत्र के हथौज का रहने वाला घनश्याम सीवानकला प्राइमरी स्कूल में सहाय अध्यापक के पद पर कार्यरत है। पुरुषोत्तम पट्टी थाना मनियर निवासी संगम उसका साला है। जिसका परीक्षा केंद्र अगरसंडा स्थिति सनबीम स्कूल में था। दोनों ने मिलकर जालसाजी की। घनश्याम ने संगम के प्रवेश पत्र पर अपना फोटो लगा लिया। केंद्र के बाहर जांच के दौरान वह बच निकला। उसने टोपी व मास्क लगा रखा था।ऐसे हुआ खुलासा- पहली पाली की परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही किसी व्यक्ति ने संगम के केंद्र के बाहर होने की बात शिक्षा विभाग को दी।

इसके बाद सूचना मिलते ही थोड़ी देर में पुलिस पहुंच गई। पुलिस को देखते ही बाहर खड़ा संगम वहां से निकल लिया। घनश्याम का मास्क, टोपी निकलवाकर देखा तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया। विद्यालय प्रशासन की तहरीर पर फेफना थाने में मुकदमा कायम हुआ।पुलि स ने आरोपी शिक्षक के साथ ही उसके साले पर भी मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच उपनिरीक्षक अमित कुमार सिंह को सौंपी गई है। अपर पुलिस अधीक्षक विजय त्रिपाठी ने बताया कि फरार आरोपित की तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गई हैं। उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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बलिया में साहित्य, कला और संस्कृति को उभारने की पहल, ‘संकल्प सृजन’ पत्रिका लॉन्च

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बलिया में साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘संकल्प सृजन’ पात्रिका लॉन्च हुई। जो बलिया की समृद्धशाली साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मील पत्थर साबित होगी। यह कहना है, छपरा कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रवक्ता प्रो. पृथ्वीनाथ सिंह का। उन्होंने आगे कहा, आज के दौर में लोग साहित्य, कला और संस्कृति से कटते जा रहे हैं। तकनीक उनपर हावी हो रही है। पत्रिका प्रकाशित करना और उसे लोगों तक पहुंचाना एक चुनौती है, बावजूद ‘संकल्प सृजन’ लक्ष्य को साधेगी, यह उम्मीद और विश्वास है।समाज निर्माण में लघु पत्रिका अहम- इस दौरान मुख्य वक्ता डॉ. जैनेंद्र पाण्डेय ने कहा कि समाज के निर्माण में लघु पत्रिकाओं की अहम भूमिका है। वर्तमान समय में गढ़े जा रहे सत्य और मानवता के मिथक को लघु पत्रिकाएं ही तोड़ेंगी। इस दौरान डॉ. शुभनीत कौशिक ने कहा कि आजादी की लड़ाई में भी बलिया से कई पत्रिकाएं निकलती रहीं हैं। बीच में यह कड़ी टूट गई थी। ऐसे में संकल्प सृजन का प्रकाशन अंधेरे में रोशनी जैसा है।

साहित्य कला से युवा को जोड़ना उद्देश्य– पत्रिका के सम्पादक संस्कृतिकर्मी आशीष त्रिवेदी ने कहा कि युवा पीढ़ी को साहित्य, कला और संस्कृति से जोड़ने के साथ ही उनके अंदर मानवीय संवेदना विकसित करना उद्देश्य है। बलिया की साहित्यिक परम्परा को अगर थोड़ा भी आगे बढ़ा सकें तो यह हमारी सफलता होगी। इसके अलावा साहित्यकार रामजी तिवारी ने पत्रिका की सृजनात्मक और संरचनात्मक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।

वहीं कार्यक्रम शुरू होते ही संकल्प के रंगकर्मी सोनी, ट्विंकल गुप्ता, आनन्द चौहान, अनुपम पाण्डेय, मुकेश, शुभम ने रंगकविता और जनगीतों की प्रस्तुति की। इस दौरान अशोक पत्रकार, अचिन्त्य त्रिपाठी, डॉ. मनजीत सिंह, नम्रता द्विवेदी, डॉ. इफ़्तेख़ार खां, रणजीत सिंह, डॉ. राजेन्द्र भारती, शिवजी रसराज, संजय मौर्य, डॉ कादम्बिनी सिंह, उपेंद्र सिंह इत्यादि सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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बलिया में साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिसाल, हिंदू परिवार ने कब्रिस्तान के लिए दान की 3 डिसमिल जमीन

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बलिया । लालगंज के हृदयपुर ग्राम पंचायत में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली। जहां एक हिंदू परिवार ने मुस्लिम समाज की मांग पर अपनी 3 डिसमिल जमीन कब्रिस्तान के लिए दान में दे दी। और समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द्र की मिशाल कायम की। जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। साथ ही महंगाई के दौर में जमीन दान करने पर भी लोग हैरान हैं।

हिंदुस्तान अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक कब्रिस्तान के लिए जमीन के अभाव में ग्राम पंचायत हृदयपुर के लोगों को दूसरे गांव के कब्रिस्तान में जाकर शव को दफनाना पड़ता है। ऐसे में लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में शिवकुमार पाठक और कृष्ण कुमार पाठक से गांव के मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान के लिए जमीन की मांग की।

मुस्लिम समाज की मांग पर कृष्ण कुमार पाठक ने अपने परिवार से राय कर मुरारपट्टी मौजे की अपनी निजी भूमि में से तीन डिसमिल भूमि मुसलमानों को दान देकर उसमें शव को दफनाने की अनुमति दे दी। इतना ही नहीं बुधवार को मुस्लिम परिवार की महिला को उसी जमीन में दफनाया भी गया। हिन्दू-मुस्लिम एकता की इस मिसाल की चर्चा क्षेत्र भर में हो रही है।

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