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बलिया में छात्र संघ चुनाव का मामला गरमाया, जिलाधिकारी कार्यालय पर हल्ला बोल

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बलिया में छात्र संघ चुनाव की तारीखों के घोषणा के लिए जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन।

बलिया में छात्र संघ चुनावों को लेकर गहमागहमी बढ़ी हुई है। मंगलवार को बलिया के छात्रों ने जिला कार्यालय पर हल्ला बोल दिया। छात्र संघ चुनाव की तिथि घोषित कराने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय के सामने छात्रों का यह प्रदर्शन हुआ। छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं की जाती है तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा।

जनपद में छात्र संघ चुनाव की तारीखों के ऐलान की मांग करते हुए बलिया के छात्र जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। कार्यालय पर जमकर नारेबाजी हुई। आज हुए हल्ला बोल की रणनीति छात्र बीते कुछ दिनों से बना रहे थे। सोशल मीडिया पर हल्ला बोल का पोस्टर खूब शेयर किया जा रहा था। आज जिलाधिकारी कार्यालय पर छात्रों ने कहा कि “लंबे समय से धरना-प्रदर्शन और संघर्ष करने के बावजूद अभी तक छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई। तो हमने भी तय किया है कि जब तक तिथि नहीं बताई जाएगी तब तक ये आंदोलन चलता ही रहेगा।

इस मौके पर छात्र नेता प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि “अगर जल्द ही प्रशासन की ओर से छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं की जाती है तो हमारा यह आंदोलन व्यापक रूप धारण करेगा।” बता दें कि बीते कई हफ्तों से जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव को लेकर खूब हंगामा मचा हुआ है। आए दिन धरना-प्रदर्शन देखने को मिल रहा है।

गौरतलब है कि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की ओर से छात्र संघ चुनाव की नियमावली जारी कर दी गई है। लेकिन अब सारा पेंच जिला प्रशासन की ओर से फंसा है। छात्र संघ चुनाव में जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा मुहैया कराई जाती है। जिला प्रशासन से हरी झंडी मिलते ही छात्र संघ चुनाव की तारीखों की घोषणा की जा सकती है।

आज बलिया जिलाधिकारी कार्यालय पर हुए प्रदर्शन में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नितेश यादव, महामंत्री अमित सिंह, रोशन सिंह, हिमांशु सिंह, अभिनव सिंह, सूरज यादव, दीपू मिश्रा, अमरेश यादव, आकाश सिंह, तेज प्रताप सिंह, आलोक कुमार भारती, मनु कुमार समेत सैकड़ों की संख्या में छात्र मौजूद रहे।

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बलियाः नीलम की मौत के बाद न पति आया न परिजन, पुलिस को करवाना पड़ा अंतिम संस्कार

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बलियाः जिला कारागार में आत्महत्या का प्रयास करने वाली नीलम साहनी की मौत के बाद पुलिस ने ही उसका अंतिम संस्कार किया। युवती की मौत के बाद उसके परिजनों ने शव लेने के लिए इनकार कर दिया था।

वहीं प्रेमिका की मौत होने के बाद उसके परिजन उसकी लाश लेने से इंकार कर दिए। परिजनों द्वारा लाश न लिए जाने के चलते अंत में पुलिस द्वारा नियमानुसार मृतक का दाह संस्कार कराया गया।

जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह मुलाकात के लिए पहुंची बांसडीहरोड क्षेत्र के सरया डुमरी गांव निवासी नीलम ने अपने पति सूरज के साथ कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

नीलम की मौत के बाद दो दिनों तक पुलिस उसके मायके और ससुरालवालों की खोजबीन करती रही। लेकिन कोई परिजन सामने नहीं आया। पुलिस ने मृतका के मायके में उसके चाचा और पहली ससुराल में भी बात की, लेकिन मृतका से दोनों परिवारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। तीसरे दिन कोतवाली पुलिस ने स्वयं पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया और शिवरामपुर गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया।

 

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बलिया पुलिस का ट्विटर हैंडल 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ रिकवर !

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बलिया। बलिया पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को हैक हुए 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है.  ट्विटर अकाउंट कब तक रिकवर हो जाएगा इस पर कोई भी उच्च अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है. हालांकि बलिया पुलिस दावा है कि जांच प्रणाली तैयार कर ली गई है और हैक किए गए ट्विटर हैंडल को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा.

बता दें कि हैकर्स ने बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बृहस्पतिवार की भोर में हैक किया गया है. हैकर्स ने अकाउंट हैक करने के बाद डीपी हटा दी है और ऑनलाइन गेम से संबंधित ट्वीट रीट्वीट किए हैं. बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर हैंडल वेरिफाइड है और @balliapolice के नाम से अकाउंट हैं. अकाउंट को 53.1K हजार लोग फॉलो करते हैं.   

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जानिए कौन हैं गाजियाबाद के पहले पुलिस कमिश्नर बने बलिया के अजय कुमार मिश्र?

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बलिया के रहने वाले अजय कुमार मिश्र गाजियाबाद कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर बन चुके हैं। 2003 में आइपीएस बने अजय कुमार मिश्र को नई जिम्मेदारी मिलने पर परिवार में हर्ष का माहौल है। बलिया के सिकंदरपुर जमुई गांव के रहने वाले अजय मिश्र का बचपन से ही खाकी से नाता रहा है। उनके पिता कुबेरनाथ मिश्र पुलिस सेवा में रह चुके हैं। बेटा जब आईपीएस बना, उसी साल वह हेडकॉन्सटेबल के पद से रिटायर हुए।

अजय कुमार के बारे में बताते हुए पिता कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही पुलिस का परिवेश मिला। इसलिए अजय ने सिविल सेवा पास करने के बाद आईपीएस चुना। अजय की प्राथमिक शिक्षा गोंडा में हुई, जब पिता का तबादला लखनऊ हुआ तो अजय ने कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई लखनऊ में की। इसके बाद 1989 में वह वाराणसी आ गए।

उन्होंने यहां से 11वीं और इंटरमीडिएट करने के बाद काशी विद्यापीठ से ग्रेजुएशन किया। पैसे की किल्लत हुई तो बच्चों को ट्यूशन पढाया। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग के जरिए पहली नौकरी दिल्ली सचिवालय में ली। लेकिन अजय के मन में हमेशा से पुलिस सेवा में जाने की इच्छा थी, लिहाजा उन्होंने तैयारी की और परीक्षा पास की।वह सुल्तानपुर में नियुक्त रहे। उस समय मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के दो लोगों को गनर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। अजय पुलिस सेवा में सख्त अंदाज के लिए जाने जाते हैं, वह सिफारिशों को नजरअंदाज कर सीधे पीड़ितों की बात सुनते हैं। उनके पिता कुबेरनाथ का कहना है कि मैं चाहूंगा कि देश और समाज सुरक्षा के लिए वह सदैव कानून व्यवस्था को कायम रखने में सफल रहें।

 

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