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बलिया में भी ट्रैक्टर पॉलिटिक्स, समाजवादी पार्टी ने मारी एंट्री !

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बलिया डेस्क : पिछले कुछ दिनों से कृषि विधेयकों के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी देहाती इलाकों में ट्रैक्टर पर सवार होकर खेती बचाओं किसान बचाओ का संदेश दे रहे हैं। जिसको सत्ता पक्ष ने ट्रैक्टर पॉलिटिक्स का नाम दिया है तो वहीँ बलिया भी अब ट्रैक्टर पॉलिटिक्स को लेकर समाजवादी पार्टी ने एंट्री मारी है। जिसके बाद चर्चाओं का बाज़ार गर्म है

इसी क्रम में गुरुवार को बलिया में पचासों गांव के हजारों किसानों ने समाजवादी पार्टी के नेता पूर्व मंत्री नारद राय के नेतृत्व में जलभराव की समस्या से निजात एवं उससे हुए नुकसान के मुआवजा की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर सैकड़ों ट्रैक्टर से पहुंचे और वहाँ प्रदर्शन किया।

अपनी मांगों से सम्बंधित महामहिम राज्यपाल को संबोधित पत्रक दिया। किसान ट्रैक्टर और ट्राली सहित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए। जिससे कलक्ट्रेट चारों तरफ से ट्रैक्टर से ही घिर गया और कचहरी से टीडी कालेज चौराहा, ओवरब्रिज में ट्रैक्टर की लंबी कतार लग गई।

बलिया जनपद के लिए प्रदर्शन का यह एक अलग और अनोखा अन्दाज रहा। कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी नहीं थे। जिस पर समाजवादियों का पारा चढ़ गया तथा घोषणा किया गया कि जिलाधिकारी स्वयं पत्रक लें या हम लोगों से वार्ता कर संतुष्ट करें। तब पत्रक दिया जाएगा। अन्यथा हम लोग यहीं ट्रैक्टर के साथ बैठेंगे।

जिसपर प्रशासन हरकत में आ गया और जिलाधिकारी को फोन पर नारद राय से बात की। जिसके उपरान्त पार्टी के जिला प्रवक्ता सुशील पाण्डेय कान्हजी ने उपस्थित जनसमूह के सामने पत्रक में उल्लेखित समस्याओं को पढ़ कर सुनाया तथा पत्रक में कही गयी बातों पर हाथ उठवा कर समर्थन लिया।

जिसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट को पत्रक दिया गया। पत्रक के माध्यम से किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि इलाके के किसान 2018 से प्रतिवर्ष जलभराव से जूझ रहे है और फसल बर्बाद हो रही है। जिससे हम लोगों का परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गया है और उक्त के सम्बंध में हम लोगों की तरफ से बार-बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन से गुहार लगाई गई।

लेकिन दुखद यह है कि उन लोगों द्वारा हमारे दर्द को हमेशा अनदेखा किया जाता रहा। जिससे मजबूर होकर हम लोगों को अब आन्दोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा। जिसका यह प्रथम चरण है। अगर फिर भी  हमारी बात नही सुनी जाएगी तो हम इस आंदोलन को और तेज करेंगे।

मुआवजा दिलाऊंगा, नहीं तो आर या पार होगा– वहीँ इस  इस अवसर पर पूर्व मंत्री नारद राय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के सरकार में नगर क्षेत्र सहित बोहा क्षेत्र एवं सुरहा ताल से जल निकासी के सुविधा को प्रस्तावित कर कुछ कार्य भी किया गया था,

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लेकिन वर्तमान सरकार जिसे कि जनहित के कार्यों से कोई सरोकार नहीं है, उस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। उस इलाके के किसान आज भूखमरी के शिकार हो रहे हैं। जिसे देखते हुए समाजवादी पार्टी ने निर्णय लिया है कि बोहा, सुरहा ताल एवं नगर क्षेत्र के जल निकासी के लिए पार्टी पूरी तरह से संघर्ष को तैयार है और किसानों को प्रति एकड़ 15000 हजार रु़ मुआवजा भी दिलाएगी अन्यथा अब आर या पर होगा।

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बलिया के सुखपुरा में तैनात लेखा सहायक हुए गायब, अपहरण की आशंका !

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बलिया। बलिया के सुखपुरा में तैनात पराग डेयरी के लेखा सहायक ज्ञानदेव मिश्रा बुधवार को बैंक जाते समय अचानक लापता हो गए। बलिया पुलिस उनके लापता होने के पोस्टर भी जारी किये हैं और छानबीन कर रही है। गायब होने की खबर मिलते ही बलिया पहुंचे परिजन उनके अगवा होने की आशंका जता रहे हैं। उधर यह खबर जैसे ही आजमगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि. के अधिकारियों को हुई चारो तरफ अफरा-तफरी मची हुई है। विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारी उनका पता लगाने में जुट गए है।

जानकारी के मुताबिक बुधवार को पूर्वांह्न दस बजे लेखा सहायक ज्ञानदेव मिश्र डेरी के किसी काम से जिला मुख्यालय स्थित यूनियन बैंक की मुख्य शाखा में किसी काम से जा रहे थे। अचानक रास्ते से गायब हो गए। देर रात तक वह न तो पराग डेरी के कार्यालय पहुंचे और न ही अपने आवास। श्री मिश्र मूलत: कानपुर के रहने वाले हैं। उनके गायब होने की खबर डेयरी के अधिकारियों ने जब घर वालों को दी, तो कानपुर से उनकी पत्नी व बेटे गुरुवार को सीधे बलिया पहुंच गए। परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई है।

हालांकि पराग डेरी के अधिकारियों ने तहरीर में उनके लापता होने की बात कही गई है। पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। उधर घटना की सूचना पुलिस कप्तान बलिया, क्षेत्राधिकारी नगर तथा थानाध्यक्ष सुखपुरा को दी है। मजे की बात यह है कि गायब लेखा सहायक ज्ञानदेव मिश्र का मोबाइल नंबर भी बंद बता रहा है। इससे तरह-तरह की आशंका जताई जा रही है।

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बलिया में अंतर्धार्मिक शादी को लेकर भड़की करणी सेना, जमकर किया हंगामा, युवक पर केस दर्ज

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बलिया। जिले में एक दलित युवती के साथ मुस्लिम युवक द्वारा कथित तौर पर विवाह करने का मामला सामने आया। करणी सेना ने इसे लव जिहाद बता कर जमकर हंगामा किया और दोनों को थाने ले गए। जहां पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। बताया जा रहा है कि जिले के उभांव थाना क्षेत्र के एक गांव की 18 वर्षीय दलित युवती को लेकर पड़री गांव का निवासी दिलशाद जिला मुख्यालय स्थित कचहरी में विवाह का पंजीकरण कराने गया था।

युवती ने बुरका पहन रखा था। तभी कचहरी में मौजूद करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने युवती से पूछताछ की और बाद में लवजिहाद बताते हुए जमकर हंगामा शुरु कर दिया। करणी सेना के लोग हंगामा करते हुए दलित युवती और मुस्लिम युवक को थाने ले गए। जहां पुलिस ने कार्रवाई की।करणी सेना के हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। जिसमें लोग लड़की को हिंदू दलित बताते हुए उसके परिजन को बुलाने और युवक को धमकाते तथा थाने ले जाने की बात कहते दिख रहे हैं।

लड़की करणी सेना से यह कहते हुए साफ दिख रही है कि वह अपनी मर्जी से शादी करने आई है। लेकिन फिर भी करणी सेना वाले नहीं माने और युवक-युवती को बलिया शहर कोतवानी ले गए। इसके बाद उभांव थाना में बुधवार रात दिलशाद के विरुद्ध लड़की के पिता की शिकायत पर अपहरण के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। उभांव थाना के प्रभारी ज्ञानेश्वर मिश्र ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

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सो रहा बलिया का बिजली विभाग, जर्जर तार की चपेट में आकर बुजुर्ग की मौत, हादसे के बाद नहीं पहुंचे अधिकारी

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बलिया। बलिया का बिजली विभाग सो रहा है और जनता रो रही है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बिजली अधिकारियों की लापरवाही अब लोगों की जान ले रही है। हाल ही में जर्जर तार की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। मामला नरही के सोहांव गांव का मामला है। जहां खेत में काम करते हुए एक बुजुर्ग जर्जर तार की चपेट में आ गया। जिससे करंट लगने से उनकी मौत हो गई। लेकिन बिजली विभाग की लापरवाही की इंतेहा देखिए कि बुजुर्ग की मौत के बाद भी बिजली विभाग मौके पर नहीं पहुंचा।

बुजुर्ग का शव घटनास्थल पर ही पड़ा रहा।बुजुर्ग की मौत के बाद परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीण कई बार बिजली अधिकारियों से इसको लेकर शिकायत कर चुके हैं लेकिन फिर भी बिजली विभाग सोता रहा।अगर बिजली विभाग ने समय पर कार्रवाई करते हुए उस जर्जर तार को हटवा दिया होता तो आज शायद बुजुर्ग की जान बच जाती। लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी आंखों और कानों पर पट्टी बांधे बैठे हैं। जिन्हें न तो ग्रामीणों की परेशानी सुनाई देती न दिखाई।

ग्रामीण चीख-चीखकर बिजली जर्जर तार हटाने की मांग करते रहे लेकिन विभाग के अधिकारियों को फर्क नहीं पड़ा। नतीजतन एक बुजुर्ग को अपनी जान गंवाना पड़ी। वहीं बिजली विभाग के इस उदासीन रवैये से साफ जाहिर है कि उसे किसी बड़े हादसे का इंतजार है। ऐसे में उच्च अधिकारियों को जल्द ही ठोस कदम उठाने चाहिए।

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