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पूर्वांचल

पूर्वांचल के गाँधी, जिन्होंने दिल्ली के क्लब में धोती-कुर्ता के लिए बदलवा दिया था नियम

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सलेमपुर/ बलिया– आज पूर्वांचल के गाँधी के नाम से मशहूर पूर्व सांसद हरिकेवल प्रसाद को याद किया जा रहा है. आज उनकी सातवीं पुण्यतिथि है. चार बार लोकसभा सांसद और दो बार विधायक रहें हरिकेवल प्रसाद उत्तर प्रदेश समता पार्टी और जनता दल के यूपी अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोहंग (देवरिया) से पढाई करने के बाद हरिकेवल प्रसाद ने खुद को समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया और उन्हें ज़मीन से जुड़ा नेता माना जाता था.

आज भी लोग उन्हें याद करते हैं और गलत को गलत कहने के उनके तेवर को सलाम करते हैं. आपातकाल के दौरान उन्हें 21 महीने जेल में गुजारना पड़ा. उनकी पैदाइश भागलपुर के महथापार गाँव में हुई थी और अपनी सियासी सफ़र की शुरुआत उन्होंने प्रधान का चुनाव निर्विरोध जीतकर की थी. बीस सालो तक प्रधान रहने के बाद वह पहली बार सलेमपुर से विधायक चुने गए.

आपको बता दें कि जब जेपी आन्दोलन की शुरुआत हुई तो वह अपने भाई के साथ उससे जुड़ गए और सत्ता की तानाशाही के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की. उन्होंने लोकनायक और उग्रसेन सिंह को अपना राजनीतिक गुरु माना और उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज के लिए खुद को समर्पित कर दिया. उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा यह है कि 1991-92 के दौरान एक बार जब वह राजधानी दिल्ली के जिम खाना क्लब में धोती कुर्ता पहनकर गए तो एक सांसद होने के बावजूद उन्हें ड्रेस कोड के नाम पर रोक दिया गया.

यह बात उन्हें इस कदर लगी कि वह दस सासंदों को लेकर गए और धोती कुर्ते में उसके अन्दर घुसकर अंग्रेजो का बनाया ड्रेस कोड कानून तोड़ डाला. उनका कहना था कि गांधी और लोहिया के देश में धोती कुर्ता पर कोई कैसे रोक लगा सकता है. आज उनकी याद में भाजपा की तरफ से एक प्रोग्राम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें डिप्टी सीएम केशवप्रसाद मौर्य और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी शामिल होंगे.

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पूर्वांचल

कृषि विधेयक को युवा चेतना ने बताया काला क़ानून, मोदी सरकार पर बोला हमला !

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बलिया डेस्क : केंद्र सरकार ने गुरुवार को कृषि सुधार की ओर कदम बढ़ाते हुए तीन कृषि सुधार बिल लोकसभा में पारित किए। किसानों की दोगुनी आय, फसल का उचित मूल्य मिलने के साथ उत्पादन और कृषि के रिस्क को अकेले किसान पर न डालने वाले इस विधेयक को सरकार की ओर से किसानों के लिए प्रतिबद्ध कदम बताया जा रहा है। हालांकि किसान और कई राजनीतिक दल इन विधेयकों का विरोध भी कर रहे हैं।

इसी क्रम में अब युवा चेतना भी आगे आई है और खुलकर इन विधेयकों के खिलाफ आवाज उठा रही है।  रविवार को मऊ जिले में पहुचे युवा चेतना के  संयोजक स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी एवं युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने द्वार-द्वार पाँव-पाँव अभियान के तहत लोगों से भेंट कर उनको मोदी-योगी सरकार की गलत नीतियों से अवगत कराया।

स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की भाजपा शासन में देश का बहुत नुक़सान हुआ।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की मोदी राज में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और प्रधानमंत्री मौन हैं।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की किसान अगर ख़ुश नहीं रहेगा तो भारत विश्वगुरु कैसे बनेगा।स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा की युवा चेतना किसान-नौजवान की लड़ाई लड़ रही है जनता को सहयोग करना चाहिए।

युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा की कृषि बिल-2020 काला क़ानून साबित होगा। उन्होंने कहा की किसान और नौजवान भूखा है मोदी सरकार ने दोनों के साथ धोखा किया है। रोहित  सिंह ने कहा की हम स्वामी सहजानंद सरस्वती के वंशज हैं किसानों को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करेंगे।

श्री सिंह ने कहा की देश में बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है। योगी राज में अपराध अपने चरम पर है हमसबों को एकजुट होकर 2022 में महापरिवर्तन कराना होगा। गाँव,गरीब,किसान,मजदूर और नौजवान के समृद्धि हेतु हमसबों को संघर्ष करना होगा।

इस अवसर पर सूरज राय,दिलीप राय कुंदन,मनीष वर्मा,सूरज राय,पप्पू राय,अजय राय मुन्ना,बैजू राय,संजय ठाकुर,आलोक राय,आदित्य चौबे आदि उपस्थित रहे।

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पूर्वांचल

सलेमपुर से मांझी तक बने फोरलेन, रविंद्र कुशवाहा ने संसद में उठाई आवाज

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बलिया। सलेमपुर के सांसद रविंद्र कुशवाहा ने सलेमपुर से लेकर बिहार बॉर्डर के माझी तक फोरलेन सड़क बनाने के लिए सदन में आवाज उठाई है।

श्री कुशवाहा ने कहा कि 2014 से लगातार गोरखपुर से लेकर बलिया जनपद की मांझी तक फोरलेन सड़क बनाने की मांग करता आ रहा हूं ।

ताकि पूर्वी उत्तर प्रदेश के अति पिछड़े इलाके का रोड कनेक्टिविटी हो जाए, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके ।

उन्होंने मंगलवार को सदन में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मांग किया कि गोरखपुर से लेकर सलेमपुर तक तो सड़क फोरलेन बन गई है, लेकिन सलेमपुर से लेकर बिल्थरारोड सिकंदरपुर होते हुए मनियर बांसडीह सहतवार तथा रेवती होते हुए मांझी घाट तक फोरलेन सड़क बनाई जाए।

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पूर्वांचल

कस्तूरबा के शिक्षकों को अब 12 की जगह अब सिर्फ इतने ही महीने का मिलेगा मानदेय

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बलिया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में लगभग दो दशकों से पढ़ा रहे शिक्षकों पर नए नियमों से गाज गिर रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ खण्डपीठ में इस संबंध में 3-4 याचिकाएं दायर हो चुकी हैं और शिक्षक लगातार इस पर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। नए नियमों व शर्तों से लगभग 2200 शिक्षक ऐसे हैं जो प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि अब इन शिक्षकों को 12 की जगह 11 महीने का ही मानदेय मिलने वाला है।

22000 नहीं अब इतना ही मिलेगा मानदेय- प्रदेश में 746 केजीबीवी में लगभग 5500 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी हैं। नए नियमों के तहत लगभग 400 से 500 शिक्षकों को अंशकालिक से पूर्णकालिक और इतनी ही शिक्षिकाएं पूर्णकालिक से अंशकालिक की जा रही हैं। पूर्णकालिक से अंशकालिक होने में मानदेय 22000 से सीधे 9800 हो जाएगा। वहीं अंशकालीन से पूर्णकालिक होने में मानदेय तो बढ़ेगा लेकिन जरूरी नहीं कि शिक्षिका इस अवस्था में हो कि वो केजीबीवी में रह सके। पूर्णकालिक शिक्षकों को स्कूल में ही 24 घण्टे रहना पड़ता है।

लगभग 1100 शिक्षक ऐसे हैं जो असंगत विषयों के या पूर्णकालिक विषयों के पुरुष शिक्षक हैं। पुरुष शिक्षक अंशकालिक के रूप में केजीबीवी में तैनात किए जाते हैं लेकिन यदि अंग्रेजी, गणित या विज्ञान के पुरुष शिक्षक हैं तो उन्हें पूर्णकालिक नहीं किया जा सकता। लिहाजा अंशकालिक विषयों में पद न होने पर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

क्या बोले डीसी: आनंद प्रकाश मिश्रा ने कहा कि 28 फरवरी तक संविदा का विस्तार होना है, उसके बाद कुछ भी हो सकता है। वैसे अभी तक पुरानी पद्धति से ही सब कुछ चल रहा है।

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