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इब्राहिमपट्टी में बने हॉस्पिटल के जल्द शुरू होने की उम्मीद! DM ने किया निरीक्षण, कहा- शासन को देंगे रिपोर्ट

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बलिया: बलिया जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल आज बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र पहुंची थी जहां उन्होंने  सोनाडीह गांव में विख्यात सोनाडीह मां भागेश्वरी परमेश्वरी धाम मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर आवश्यक निर्देश दिए।  इसके बाद जनचौपाल में ग्रामीणों से भी मुलाकात कीं। मिडिल स्कूल में छात्राओं से भी मिली और फुटबाल टूर्नामेंट खेलकर लौटी खिलाड़ी छात्राओं का हौसला बढ़ाया। डीएम ने छात्राओं के साथ फोटो भी खिंचवाया।

जिलाधिकारी ने इब्राहिमपट्टी में काफी समय पहले से निर्माण हुए और बंद पड़े अस्पताल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने बारीकी से अस्पताल के हर ओर घूमकर देखा। उन्होंने इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजने की बात कही है।1952 में रखी अस्पताल की नींव, 1980 में आए डॉक्टर- जिला मुख्यालय के पश्चिमी छोर स्थित अपने पैतृक गांव इब्राहिमपट्टी में पूर्व पीएम चन्द्रशेखर ने क्षेत्रवासियों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल की नींव रखी। अस्पताल का शिलान्यास समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के हाथों सम्पन्न हुआ। इसके बाद चन्द्रशेखर अस्पताल को मूर्तरूप देने में जुट गए। 1980 में कुछ चिकित्सकों की टीम ने यहां स्वास्थ्य सुविधाएं देनी भी शुरू कर दीं। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में छह महीने बाद ही चिकित्सक चले गए। करीब चार दशक से यह अस्पताल बंद पड़ा है।

काेरोना काल से हॉस्पिटल चालू कराने के प्रयास- कोरोना काल के दौरान से ही शासन स्तर से अस्पताल को दोबारा चालू कराने का प्रयास शुरू हुआ। एक साल के अंतराल में जिम्मेदार अधिकारी कई बार इसका स्थलीय निरीक्षण कर चुके हैं। इस संबंध में राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर ने मुख्यमंत्री से विस्तृत चर्चा की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इसके प्रति सार्थक रुख अपनाया था।  जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल ने कहा कि यह अस्पताल सुसज्जित तरीके से बनाया गया है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इस दौरान सीडीओ प्रवीण वर्मा, तहसीलदार ओपी पांडेय, बीडीओ मधुछंदा सिंह, उभांव इंस्पेक्टर अविनाश कुमार सिंह समेत अनेक अधिकारी मौजूद रहे।

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बलियाः नीलम की मौत के बाद न पति आया न परिजन, पुलिस को करवाना पड़ा अंतिम संस्कार

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बलियाः जिला कारागार में आत्महत्या का प्रयास करने वाली नीलम साहनी की मौत के बाद पुलिस ने ही उसका अंतिम संस्कार किया। युवती की मौत के बाद उसके परिजनों ने शव लेने के लिए इनकार कर दिया था।

वहीं प्रेमिका की मौत होने के बाद उसके परिजन उसकी लाश लेने से इंकार कर दिए। परिजनों द्वारा लाश न लिए जाने के चलते अंत में पुलिस द्वारा नियमानुसार मृतक का दाह संस्कार कराया गया।

जानकारी के मुताबिक बुधवार की सुबह मुलाकात के लिए पहुंची बांसडीहरोड क्षेत्र के सरया डुमरी गांव निवासी नीलम ने अपने पति सूरज के साथ कोई जहरीला पदार्थ खा लिया था। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

नीलम की मौत के बाद दो दिनों तक पुलिस उसके मायके और ससुरालवालों की खोजबीन करती रही। लेकिन कोई परिजन सामने नहीं आया। पुलिस ने मृतका के मायके में उसके चाचा और पहली ससुराल में भी बात की, लेकिन मृतका से दोनों परिवारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया। तीसरे दिन कोतवाली पुलिस ने स्वयं पंचनामा भरकर उसका पोस्टमार्टम कराया और शिवरामपुर गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया।

 

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बलिया पुलिस का ट्विटर हैंडल 24 घंटे बाद भी नहीं हुआ रिकवर !

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बलिया। बलिया पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल को हैक हुए 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है.  ट्विटर अकाउंट कब तक रिकवर हो जाएगा इस पर कोई भी उच्च अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है. हालांकि बलिया पुलिस दावा है कि जांच प्रणाली तैयार कर ली गई है और हैक किए गए ट्विटर हैंडल को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा.

बता दें कि हैकर्स ने बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर अकाउंट बृहस्पतिवार की भोर में हैक किया गया है. हैकर्स ने अकाउंट हैक करने के बाद डीपी हटा दी है और ऑनलाइन गेम से संबंधित ट्वीट रीट्वीट किए हैं. बलिया पुलिस का आधिकारिक ट्विटर हैंडल वेरिफाइड है और @balliapolice के नाम से अकाउंट हैं. अकाउंट को 53.1K हजार लोग फॉलो करते हैं.   

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जानिए कौन हैं गाजियाबाद के पहले पुलिस कमिश्नर बने बलिया के अजय कुमार मिश्र?

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बलिया के रहने वाले अजय कुमार मिश्र गाजियाबाद कमिश्नरेट के पहले पुलिस कमिश्नर बन चुके हैं। 2003 में आइपीएस बने अजय कुमार मिश्र को नई जिम्मेदारी मिलने पर परिवार में हर्ष का माहौल है। बलिया के सिकंदरपुर जमुई गांव के रहने वाले अजय मिश्र का बचपन से ही खाकी से नाता रहा है। उनके पिता कुबेरनाथ मिश्र पुलिस सेवा में रह चुके हैं। बेटा जब आईपीएस बना, उसी साल वह हेडकॉन्सटेबल के पद से रिटायर हुए।

अजय कुमार के बारे में बताते हुए पिता कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही पुलिस का परिवेश मिला। इसलिए अजय ने सिविल सेवा पास करने के बाद आईपीएस चुना। अजय की प्राथमिक शिक्षा गोंडा में हुई, जब पिता का तबादला लखनऊ हुआ तो अजय ने कक्षा 6 से 10वीं तक की पढ़ाई लखनऊ में की। इसके बाद 1989 में वह वाराणसी आ गए।

उन्होंने यहां से 11वीं और इंटरमीडिएट करने के बाद काशी विद्यापीठ से ग्रेजुएशन किया। पैसे की किल्लत हुई तो बच्चों को ट्यूशन पढाया। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग के जरिए पहली नौकरी दिल्ली सचिवालय में ली। लेकिन अजय के मन में हमेशा से पुलिस सेवा में जाने की इच्छा थी, लिहाजा उन्होंने तैयारी की और परीक्षा पास की।वह सुल्तानपुर में नियुक्त रहे। उस समय मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के दो लोगों को गनर उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। अजय पुलिस सेवा में सख्त अंदाज के लिए जाने जाते हैं, वह सिफारिशों को नजरअंदाज कर सीधे पीड़ितों की बात सुनते हैं। उनके पिता कुबेरनाथ का कहना है कि मैं चाहूंगा कि देश और समाज सुरक्षा के लिए वह सदैव कानून व्यवस्था को कायम रखने में सफल रहें।

 

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