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उत्तर प्रदेश

2019 ध्यान में रखते हुए भाजपा की नई टीम घोषित, कई नए चेहरे शामिल

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प्रदेश भाजपा की नई टीम में एक दर्जन से अधिक नए चेहरों को जगह मिली है। वहीं प्रदेश और केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे पदाधिकारियों को संगठन के दायित्व से मुक्त कर दिया गया है।

संगठन में लगातार सक्रिय रहे कई पदाधिकारियों को तरक्की दी गई है। मिशन 2019 को ध्यान में रखते हुए सोशल इंजीनियरिंग के साथ अगड़े व पिछड़ों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने शुक्रवार देर रात नई टीम की घोषणा करते हुए पूर्व विधायक सुरेश तिवारी को अवध क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया है। शिवनाथ यादव और नवाब सिंह नागर जैसे पुराने लोगों को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाकर मुख्य धारा में शामिल किया गया है।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अश्विनी त्यागी को भूपेंद्र चौधरी की जगह पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया है। काशी क्षेत्र के अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

दयाशंकर सिंह को फिर से प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटे संजीव बालियान भी प्रदेश उपाध्यक्ष होंगे।

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सपा-सुभासपा का हुआ गठजोड़, क्या बलिया में आएगा नया सियासी मोड़?

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बुधवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के बीच मुलाकात हुई। लखनऊ में दोनों नेताओं के बीच एक घंटे तक बातचीत हुई। अखिलेश यादव और ओमप्रकाश राजभर ने इस मुलाकात की तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर भी की।

अखिलेश यादव और ओमप्रकाश राजभर की मुलाकात ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में थोड़ी हलचल बढ़ा दी है। ओमप्रकाश राजभर ने बयान दिया है कि अखिलेश यादव अगर उत्तर प्रदेश चुनाव में सुभासपा को एक भी सीट नहीं देंगे फिर भी हम उनके साथ ही रहेंगे। दोनों पार्टियों के गठजोड़ से अब नए समीकरण बनने लगे हैं।

सपा और सुभासपा का गठजोड़ बलिया के सियासी समीकरण को कितना प्रभावित करेगा ये जानने के लिए हमने न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार अनूप हेमकर से बातचीत की। अनूप हेमकर ने बताया कि “बलिया में तीन विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां राजभर जाति के लोगों की तादाद बड़ी है। राजभर मतदाता इन सीटों पर इस संख्या में हैं जो चुनाव के नतीजों को प्रभावित करते हैं। ये सीटें हैं रसड़ा, बांसडीह और सिकंदरपुर।”

पत्रकार अनूप हेमकर ने कहा कि “सपा ने ओमप्रकाश राजभर को अपने खेमे में लाकर भाजपा को बड़ा झटका दिया है। सपा ने एक सोशल समीकरण को पूरी तरह साध लिया है। लेकिन अब देखने वाली बात ये होगी कि क्या ओमप्रकाश राजभर चुनाव में अपनी जाति के लोगों को अपने साथ लामबंद कर पाते हैं या नहीं?”

सपा और सुभासपा के साथ आने पर बलिया के छात्र नेता अतुल पांडेय कहते हैं कि “ओमप्रकाश राजभर पूरे पूर्वांचल में एक बड़े नेता हैं। बलिया में भी उनका प्रभाव काफी है। रसड़ा और बांसडीह दो ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां राजभर जाति के लोगों की संख्या अच्छी-खासी है। इस लिहाज से बलिया में सपा को सबसे ज्यादा फायदा ओमप्रकाश राजभर की वजह से इन्हीं सीटों पर होगा।”

अतुल पांडेय कहते हैं कि “बलिया के सातों विधानसभा सीटों पर पांच से दस हजार मतों का फर्क ओमप्रकाश राजभर पैदा कर देंगे। जिन सीटों पर सपा पांच-दस हजार वोटों से पिछड़ जाती है वहां सपा को फायदा मिल सकता है।”

देखना दिलचस्प होगा कि सपा और सुभासपा का एक मंच पर आना चुनाव में क्या रंग दिखाता है? हालांकि ओमप्रकाश राजभर के इस कदम ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा है भागीदारी संकल्प मोर्चा सपा के साथ रहेगी। लेकिन अब सवाल है कि ओमप्रकाश राजभर के भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल असद्दूदीन ओवैसी भी सपा का साथ देंगे? सपा और सुभासपा ने मिलकर नया समीकरण तैयार किया है। साथ ही कई नए सवाल भी पैदा किए हैं। जिनके जवाब भविष्य में छिपे हुए हैं।

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उत्तर प्रदेश

अम्बेडकर वाहिनी के सहारे दलितों का साधना कितना होगा सफल!

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जयराम अनुरागी

बलिया। सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव ने भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर के नाम पर अपनी पार्टी में समाजवादी अम्बेडकर वाहिनी नाम से एक अलग फ्रंटल संगठन का निर्माण किया है, जिसका राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी पूर्व बसपा नेता मिठाई लाल भारती को बनाया गया हैं। ज्ञात हो कि श्री भारती बसपा के स्थापना काल से ही पार्टी से जुड़े रहे है और कई प्रदेशों के प्रभारी रहने के साथ-साथ विभिन्न जोनों में जोनल को-आर्डिनेटर के रुप में कार्य कर चुके हैं। करीब दो साल पहले ये बहुजन समाज पार्टी को छोड़कर लखनऊ में अखिलेश यादव के समक्ष समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण किये हैं।

राजनैतिक विष्लेषकों की माने तो अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में 24 प्रतिशत दलित मतों को साधने के लिए ये एक प्रयोग किया हैं। अखिलेश यादव को यह भी पता है कि उत्तर प्रदेश में बिना दलितों को जोड़े सत्ता पर काबिज नहीं हुआ जा सकता हैं। उत्तर प्रदेश में बसपा से नाराज या निकाले गये अधिकांश बसपा के नेता समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर चुके हैं और इन्हें जोड़ने में अम्बेडकर वाहिनी के बनाये गये राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती का अहम योगदान माना जाता हैं। यही कारण है कि अखिलेश यादव ने अम्बेडकर वाहिनी के नाम से अलग फ्रंटल संगठन बनाकर श्री भारती को इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है ताकि उत्तर प्रदेश में अम्बेडकरवादी दलितों को आसानी से समाजवादी पार्टी के साथ जोड़ा जा सकें।

देखा जाय तो सपा सुप्रीमों अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव, जब-जब सरकार में आये है, दलित राजनीति के नाम पर अपने मंत्री मण्डल में फैजाबाद जनपद के निवासी अवधेश प्रसाद को ही शामिल करने का काम किया हैं, जो दलितों में पासी जाति से आते हैं। इसको भी लेकर उत्तर प्रदेश के दलित राजनीति में सबसे अधिक संख्या वाले जाटव समाज में हमेशा नाराजगी रही हैं। चूॅकि श्री भारती भी जाटव समाज से आते हैं। यही कारण है कि अखिलेश यादव श्री भारती को अम्बेडकर वाहिनी का अध्यक्ष बनाकर पार्टी के उपर लगे जाटव विरोधी धब्बे को मिटाना भी चाहते हैं।

यहीं नहीं 2012 में जब उतर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी तो अखिलेश यादव ने ताबड़-तोड़ कई दलित विरोधी फैसले लिये थे, जिसमें सबसे बड़ा फौसला था अनुसूचित जाति/जनजातियों के प्रमोशन में आरक्षण समाप्त करना। इस फैसले के चलते लाखों दलित कर्मचारी पदावनत हो गये थे। यही नहीं सरकारी ठेकों में दलितों का आरक्षण भी खत्म कर दिया गया था। एस0सी0/एस0टी0 एक्ट 1989 के लाखों मुकदमें वापस ले लिये गये थे, जो सीधे दलितों के उत्पीड़न से जुड़े थे। एस0सी/एस0टी0 के लोग पहले कृषि योग्य भूमि अपने वर्ग में ही बेच सकते थे, लेकिन अब ये किसी को भी बेच सकते हैं, ये विधेयक भी अखिलेश यादव की सरकार ने ही लाया था।
अनुसूचित जाति के छात्रावासों में 30 प्रतिशत सामान्य वर्ग के छात्रों का प्रवेश सम्बन्धित आरक्षण सम्बन्धी शासनादेश अखिलेश यादव ने ही जारी किया था।

कांशीराम के नाम पर बने अरबी-फारसी व कृषि विश्वविद्यालय का नाम अखिलेश यादव ने ही बदला था। डॉ0 अम्बेडकर उपवन का नाम बदलकर जनेश्वर मिश्रा पार्क इन्होंने ही किया था। दलित महापुरूषों के नाम पर बने जिलों का नाम भी इन्होंने ने ही बदला था, जिसमें संत रविदास नगर का नाम बदलकर भदोही और भीम नगर का नाम बदलकर सम्भल कर दिया था। थानाध्यक्षों की नियुक्ति में एस0सी0/एस0टी0/ओ0बी0सी0 का आरक्षण अखिलेश यादव ने ही खत्म किया था। इस तरह के सैकड़ों संस्थानों, विभागों और योजनाओं का नाम बदलने का काम अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में किया था, जिसे उत्तर प्रदेश के दलित खासतौर से अम्बेडकरवादी अभी तक भूले नहीं हैं।
हालाकि वर्तमान राजनैतिक परिस्थितियों के चलते उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ परिवर्तन सा होता दिख रहा हैं।

पहली बात कि उतर प्रदेश में बसपा की स्थिति अब पहले जैसे नहीं रही, जिसके चलते उत्तर प्रदेश के दलित मतदाता फिलहाल असमंजस में हैं। दूसरी कि भाजपा की सरकार में दलित अपने को बहुत ही असहाय सा महसुस कर रहा हैं। इन सब बातों को देखते हुए दलित पहले अपने सुरक्षा की बात सोच रहा हैं। इधर नये दलित चेहरे के रुप में आजाद समाजपार्टी के रुप में चन्द्रशेखर आजाद का भी उदय हो गया हैं, जो दलित युवाओं के एक तरफ से आईकान बने हुए हैं। ऐसे में सभी दल दलितों को अपने पक्ष में करने के लिए अपने-अपने स्तर से कसरत करने में लगे हैं। इसी रणनीति के तहत अखिलेश यादव ने बसपा से आये मिठाई लाल भारती को अम्बेडकर वाहिनी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर एक प्रयोग करने का निर्णय लिया हैं।

देखा जाय तो श्री भारती को अम्बेडकर वाहिनी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना देने मात्र से ही उत्तर प्रदेश के दलित खुश होने वाले नहीं हैं। इसके लिए अखिलेश यादव को अपनी पूर्ववर्ती सरकार में किये गये दलित विरोधी फैसलों के लिए उत्तर प्रदेश के दलितों से सार्वजनिक रुप से माफी मांगनी होगी तथा ये भरोसा दिलाना होगा कि पूर्ववर्ती सरकार में जो हमसे गलतियाँ हुई हैं, अब उसकी पुनरावृत्ति नहीं होगी और दलितों के मान-सम्मान, सुरक्षा व विकास के बारे में प्राथमिकता दी जायेगी। तब कही जाकर हो सकता है कि उत्तर प्रदेश के दलित अपने साथ किये गये दलित विरोधी फैसलों और र्दुव्यवहारों को भुलकर अखिलेश यादव को मांफ कर दें। इस काम को अन्जाम तक पहुँचाने में अम्बेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये गये श्री मिठाई लाल भारती कितने सफल सिद्ध होंगे, ये तो अगले साल उत्तर प्रदेश के होने वाले विधानसभा के चुनाव में ही पता चल पायेगा ।

जयराम अनुरागी जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार है ।

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बलिया में राकेश टिकैत पर जमकर बरसे योगी सरकार के मंत्री, कर डाली नार्को टेस्ट की मांग

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बलिया। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के उस बयान से खलबली मच गई है जिसमें उन्होंने चुनाव के पहले किसी बडे हिंदू नेता की हत्या की आशंका जताई थी। उनके इस विवादित बयान पर राजनीति गरमा गई है। अब यूपी सरकार के मंत्री आनंद स्वरुप शुक्ला ने राकेश टिकैत पर जमकर हमला बोला।

बलिया की धरती से मंत्री शुक्ला राकेश टिकैत पर जमकर बरसे और कहा कि राकेश टिकैत का नार्को टेस्ट होना चाहिए, किस आधार पर वो इस प्रकार का बयान दे रहे हैं। तालिबान, पाकिस्तान और आईएसआई (ISI) के साथ उनका क्या कनेक्शन है, इसकी जांच होनी चाहिए। किस आधार पर वो हिन्दू नेताओं की हत्या होने की धमकी दे रहे हैं। टिकैत देश विरोधी ताकतों के साथ मिले हैं।मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने राकेश टिकैत पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि वो कोशिश कर रहे हैं कि जाट समुदाय उनके साथ नमाज पढ़े। मंत्री ने कहा हम उनके इस बयान की निंदा करते है। योगी राज में आम आदमी और साधु-संत सभी सुरक्षित हैं। मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने राकेश टिकैत को सलाह देते हुए यहां तक कह दिया कि ”राकेश टिकैत को कहना चाहता हूं कि ‘अल्लाह हु अकबर’ बोलने से पहले खतना कराना पड़ता है, उस बारे में भी विचार करिए और यदि खतना कराने की आवश्यकता हो तो अभी कराइए।”

उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत की जांच होनी चाहिए। ये धमकी है या चेतावनी निश्चित रूप से उनको इस बारे में स्पष्ट करना चाहिए। मंत्री ने कहा कि सस्ती लोकप्रियता और प्रचार पाने के लिए वो इस प्रकार की बयानबाजी कर रहे हैं। राकेश टिकैत बौखलाहट में हैं। उन्होंने ‘अल्लाह हु अकबर’ का नारा लगाया है, उनके समाज के लोग उनको बहिष्कृत करने का निर्णय लेने जा रहे हैं। इसलिए वो बौखलाहट में इस प्रकार का बयान दे रहे हैं। गौरतलब है कि राकेश टिकैत के बयान के बाद राजनैतिक गलियारों में हलचलें तेज हो गई हैं।

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