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बेल्थरा रोड

बिल्थरारोड- हाथरस घटना के विरोध में सपा ने निकाला कैंडल मार्च

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बिल्थरारोड डेस्क : उत्तर प्रदेश के  हाथरस घटना के विरोध में और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर बिल्थरारोड में भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को प्रदर्शन किया और कैंडल मार्च निकाला .

कैंडल मार्च निकालने से पहले पूर्व विधायक पासवान ने इस जघन्य घटना में दोषियों को सीधा बचाने का जहाँ आरोप लगाया ,वहीं कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल व्याप्त है.

वहीँ सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आद्यशंकर यादव ने योगी सरकार की नाकामियों की विस्तार से चर्चा की, और कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था कंट्रोल से बाहर हो चुकी है.  इस स्थिति में उन्हें मुख्यमंत्री पद से त्याग पत्र दे देनी चाहिए.

बता दें की कैंडल मार्च बिल्थरारोड रेलवे चौराहे से चौधरी चरण सिंह तिराहे पर स्व. चरण सिंह की मूर्ति के पास जलती कैंडल को स्थापित कर मार्च को विसर्जित कर दिया गया।

इस कैंडल मार्च में प्रशान्त कुमार जायसवाल ”मंटू’, शाहिद समाजवाद, अंगद यादव, रुद्रप्रताप यादव, रामाश्रय यादव ‘फाइटर”, जनार्दन यादव, ध्रुव यादव, भोलू भाई, रवि जायसवाल, विनोद कुमार पप्पू, गीता देवी, रामसरन चौहान, आफताब अहमद, अनिल पटेल, अमलेश कन्नौजिया, विजय कुमार यादव, रामविनय मौर्य, राम लाल राजभर, सुरेन्द्र यादव, अमरनाथ यादव, गोपाल गुप्ता, राजाराम यादव, भरत यादव, राजीव जायसवाल आदि लोग शामिल रहे.

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बलिया

बलिया – फिर चर्चाओं में उभाँव थाना पुलिस, नवरात्रि में चौकसी के बाद भी 2 जगह चोरी

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बलिया। हमेशा निष्किय कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियों में रहने वाली उभाँव थाना पुलिस में बदलाव नहीं होने से अब पुलिस अधीक्षक पर ही लोग सवाल उठ रहे हैं। बेल्थरा रोड क्षेत्र में आपराधिक घटनाओ को रोकने में उभाँव थाने के जिम्मेदार पूरी तरह से असफल हैं। नवरात्रि में चौकसी होने के बाद भी चोरी की वारदात हुई। ऐसे में लोग पूछ रहे अब तो रिकॉर्ड भी बन गया। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

बता दें चोरो का आतंक इस कदर लोगों मे दहशत पैदा कर रहा कि लोग घर दुकान छोड़कर रात में कही जाने से भी डर रहे है। मंगलवार की ही चोरों ने पुलिस को चैलेंज देते हुए नगर के दो स्थानों कुण्डैल ढाला स्थित दुर्गा पूजा पण्डाल से लगभग 7 हजार रुपये पड़े दान पेटिका और एक रेस्टोरेंट से सीसी कैमरा, डीबीआर और रूम हीटर लेकर चले गए। जिससे पुलिस की सुरक्षा देने की बातें खोखली साबित हो रही है ।

सबसे बड़ी बात यह है कि दुर्गापूजा के मद्देनजर नगर में हर जगह पुलिस ड्यूटी लगाई गई है फिर भी चोरी की घटना होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठता है। आज तक पूर्व में हुई वाहन और घरों में चोरी की घटना का पता लगाने में उभांव पुलिस नाकाम रही है। जिससे लोगों में पुलिस से सुरक्षा को लेकर भरोसा उठने लगा है।

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बलिया में पत्रकारों की एंट्री बैन करने के लिए CHC के डॉक्टरों ने चली चाल?

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सीयर CHC की ओर से जारी की गई लिस्ट

Ballia News – बलिया के बेल्थरा रोड स्थित सीयर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर से एक लिस्ट जारी की गई. लिस्ट बाकायदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की दीवार पर चस्पा की गई है. इसमें 25 पत्रकारों के नाम हैं. सभी पत्रकार अलग-अलग संस्थानों से जुड़े हुए हैं. इसके साथ एक आदेश जारी किया गया है कि अधीक्षक और प्रभारी चिकित्सक अधिकारी इन्हीं पत्रकारों के सवालों का जवाब दें. इसके अलावा ‘अनाधिकृत’ पत्रकारों के सवालों का जवाब देने के लिए अधिकारी बाध्य नहीं हैं.

ये लिस्ट जिला प्रशासन बलिया, स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी की गई है. लिस्ट पर किसी अधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है. ना ही कोई मुहर लगी हुई है. तो सवाल ये है कि लिस्ट की प्रमाणिकता क्या है? पहली प्रमाणिकता ये है कि इसे सीएचसी की दीवार पर चस्पा किया गया है. यानी चोरी-छिपे ये काम नहीं हुआ है. हमने पुख्ता जानकारी के लिए सीयर सीएचसी के इंचार्ज डॉ. राकेश से फोन पर बातचीत की.

सीयर सीएचसी की ओर से जारी की गई पत्रकारों की लिस्ट.

सीयर सीएचसी की ओर से जारी की गई पत्रकारों की लिस्ट.

डॉ. राकेश ने बताया कि “ये लिस्ट प्रमाणिक है. सीएमओ साहब के व्हाट्सएप ग्रुप में ये लिस्ट भेजा गया था. जिसका प्रिंट निकालकर चिपकाया गया था. लेकिन बाद में इस पर गलत तरीके से सवाल उठने लगा और गलत ढंग से लिया जाने लगा तो हमने लिस्ट हटा दी.” हमने डॉ. राकेश से पूछा कि आखिर इस सूची के जारी करने का मकसद क्या था और क्या वजहें थीं? उन्होंने कहा कि “दरअसल हम लोग कई बार पत्रकारों को पहचानते नहीं हैं. तो बस पहचान के तौर पर ऐसा किया गया था. लेकिन ऐसा नहीं है कि कोई और पत्रकार हमसे बयान लेने आए तो हम जवाब नहीं देते.” “लिस्ट के पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी. इसीलिए जब मैसेज गलत गया तो लिस्ट हटा दी गई.” डॉ. राकेश ने कहा.

क्या बोले CMO ?

अब हमने मुख्य चिकित्सा अधिकारी यानी सीएमओ डॉ. जयंत कुमार से फोन पर बातचीत की. सीएमओ बलिया ने कहा कि “हमने सूचना विभाग से पत्रकारों के नाम की सूची मांगी थी. जो हमें मिली थी. लेकिन बाद में लिस्ट में किसी ने खेल कर दिया. किसी ने जानबूझकर लिस्ट के नीचे विवादित आदेश लिख दिया और सीएचसी में लगा दिया. मामला संज्ञान में आते ही हमने आदेश जारी कर लिस्ट हटवा दिया.”

सीएमओ बलिया के कहे अनुसार सीएचसी के स्तर पर ये फर्जीवाड़ा हुआ. लेकिन सीएचसी इंचार्ज का बयान ठीक उलट है. सीयर सीएचसी इंचार्ज की मानें तो लिस्ट सीएमओ के व्हाट्सएप ग्रुप में आधिकारिक तौर पर भेजी गई थी. दोनों के बयान विरोधाभासी हैं. कौन सच है और कौन झूठ? फिलहाल ये गुत्थी नहीं सुलझी है. लेकिन सीएमओ के बयान से इस मामले का एक सिरा सूचना विभाग से जुड़ता है. तो हमने सूचना विभाग में भी बातचीत की.

ज़िला सूचना अधिकारी ने बलिया ख़बर से बातचीत में कहा कि “हमने पत्रकारों की एक सामान्य सी सूची भेजी थी. उसमें हमारी ओर से कोई आदेश नहीं लिखा गया था. बाद में लिस्ट में फर्जीवाड़ा किया गया है.”

सवालों के घेरे में सीयर CHC:

बलिया के सीएमओ डॉ. जयंत कुमार और ज़िला सूचना अधिकारी का बयान एक जैसा है. दोनों के बयान बताते हैं पत्रकारों को बयान देने वाला विवादित आदेश सीएचसी के स्तर पर लिखा गया. सवाल ये है कि क्या पत्रकारों की सूची में विवादित आदेश सीएचसी के अधिकारियों ने अलग से लिखा? क्या ये छेड़खानी इसलिए हुई ताकि सीएचसी की खामियों पर ख़बर ना हो सके? अगर दोनों सवालों के जवाब हां हैं तब बड़ा सवाल ये है कि ये काम किसने किया?

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बलिया- सेतु निगम ने प्रशासन को लिखा पत्र, इस दिन वाहनों के आवागमन रोक लगाने की अनुमति मांगी

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बिल्थरारोड। तुर्तीपार – भागलपुर पुल से एकबार फिर आवाजाही बंद होगी। नवरात्र बाद चार दिन तक इस पुल पर गाड़ियों के इंट्री पर पूरी तरह से ब्रेक लग जायेगा। हालांकि अभी समय निर्धारित नहीं हुआ है। इसको लेकर सेतु विभाग व देवरिया प्रशासन के बीच मंथन चल रहा है। सेतु निर्माण निगम लिमिटेड (देवरिया) ने इसके लिए वहां के जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।

हालांकि अभी देवरिया प्रशासन ने फिलहाल इसकी अनुमति नहीं दी है। सेतु निर्माण निगम ने 10 व 11 अक्तूबर तथा 13 व 14 अक्तूबर को पुल पर वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगाने की अनुमति मांगी है। पुल निर्माण निगम की मानें तो पुल पर वाहनों का लोड बढ़ गया है। लिहाजा मरम्मत करनी है, जिसके लिए कम से कम चार दिन का समय चाहिए।1185 मीटर लंबे इस भागलपुर पुल का निर्माण दिसंबर 2001 में पूरा हुआ था और महज 21 वर्ष में ही आधा दर्जन बार मरम्मत किया जा चुका है।

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