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जन्मदिन विशेष : आज नेता बहुत हैं, लेकिन ‘युवा तुर्क’ जैसा सच कहने वाला नहीं

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बलिया : युवा तुर्क के नाम से मशहूर रहे दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की आज 93वां जयंती है। उनका जन्म 1 जुलाई 1927 को बलिया के इब्राहिम पट्टी गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। हालांकि उनकी जन्मतिथि को लेकर एक और दावा किया जाता है। इनके परिवार के लोगों के द्वारा उनका जन्मदिन 17 अप्रैल को मनाया जाता है। इसके साथ ही उनके समर्थक 17 अप्रैल को ही कई तरह के कार्यक्रम आयोजित करते हैं।

10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 के बीच 11वें प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने वाले चंद्रशेखर की बचपन से ही राजनीति में गहरी रुचि थी। चंद्रशेखर से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जिन्हें आज भी सुनाया जाता है। कहा जाता है कि वो पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने राज्य मंत्री या केंद्र में मंत्री बने बिना ही सीधे प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

चंद्रशेखर के तीखे तेवर

चंद्रशेखर सिंह एक प्रखर वक्ता, लोकप्रिय राजनेता, विद्वान लेखक और बेबाक समीक्षक थे। वे अपने तीखे तेवरों और खुलकर बात करने के लिए जाने जाते थे। इस वजह से ज्यादातर लोगों की उनसे पटती नहीं थी। कॉलेज समय से ही वे सामाजिक आंदोलन में शामिल होते थे और बाद में 1951 में सोशलिस्ट पार्टी के फुल टाइम वर्कर बन गए। सोशलिस्ट पार्टी में टूट पड़ी तो चंद्रशेखर कांग्रेस में चले गए।

जब चंद्रशेखर ने मंत्री बनने से किया इंकार

1975 में जब इमरजेंसी लागू हुई तो चंद्रशेखर उन कांग्रेसी नेताओं में से एक थे, जिन्हें विपक्षी दल के नेताओं के साथ जेल में ठूंस दिया गया। इमरजेंसी के बाद वे वापस आए और विपक्षी दलों की बनाई गई जनता पार्टी के अध्यक्ष बने। अपनी पार्टी की जब सरकार बनी तो चंद्रशेखर ने मंत्री बनने से इनकार कर दिया।

चंद्रशेखर की पद यात्रा

इमरजेंसी के बाद चंद्रशेखर ने सुदूर दक्षिण स्थित कन्याकुमारी से दिल्ली स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट तक पदयात्रा की। इस दौरान उन्होंने 06 जनवरी 1983 से 25 जून 1983 के बीच 4260 किमी की पैदल यात्रा की। यात्रा का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं को करीब से जानना और उन्हें सामने लाना था।

चंद्रशेखर ऐसे व्यक्ति थे जिनका अपने तो अपने विरोधी भी सम्मान करते थे। एक समय था जब मघु दंडवते, मोहन धारिया और चंद्रशेखर भारतीय राजनीति में छाए हुए थे। चंद्रशेखर हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहे। वे शोषित और कमजोर लोगों की आवाज थे। उनका किसी बात को कहने का अंदाज भी अलग होता था। कहते हैं कि जब वह संसद में बोलते थे तब सभी उनकी बात सुनते थे। सदन में जब भी बोलते थे धारा प्रवाह बोलते थे। उन्हें हर विषय पर बहुत अच्छा ज्ञान था।

जब चंद्रशेखर ने इंदिरा से कहा था पूरे करें वादे

बलिया के मामूली परिवार से निकले चंद्रशेखर देश की राजनीति में जब तक रहे निर्णायक रूप से उन्होंने अपनी जगह बनाई। इंदिरा गांधी की इच्छा के खिलाफ 1972 में शिमला में उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी का चुनाव जीता। फिर इंदिरा गांधी को उनकी लोकप्रियता देखकर उन्हें कांग्रेस वर्किंग कमेटी में रखना पड़ा। उन्होंने इंदिरा गांधी को चेताया था कि हमने जो वायदे किए 71 के चुनाव में, जीतने के बाद पहले हमें उनको पूरा करना चाहिए।

सात महीनों तक बने प्रधानमंत्री

साल 1990 में चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला। जब उनकी ही पार्टी के विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार भाजपा के सपोर्ट वापस लेने के चलते अल्पमत में आ गई। चंद्रशेखर के नेतृत्व में जनता दल में टूट हो गई। 64 सांसदों का धड़ा अलग हुआ और उसने सरकार बनाने का दावा ठोंक दिया। उस वक्त राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया।

पीएम बनने के बाद चंद्रशेखर ने कांग्रेस के हिसाब से चलने से इंकार कर दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि सात महीने में ही राजीव गांधी ने समर्थन वापस ले लिया। अपने कार्यकाल में उन्होंने डिफेन्स और होम अफेयर्स की जिम्मेदारियों को भी संभाला था।

8 जुलाई 2007 को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का नई दिल्ली में निधन हो गया था। वे आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन राजनीति में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। वो व्यक्तिगत राग द्वेष से दूर रहने वाले राजनेता थे। देश के बारे में सोचा करते थे। इसलिए लोग उन्हें सुनते भी थे। चंद्रशेखर का जाना इस देश की राजनीति से साहस की विदाई है। वैसा कोई नेता अभी दिखाई नहीं देता जो पद और राजनीति की चिंता छोड़कर सच कह सके।

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बलिया में 11 दिसंबर को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, प्रचार गाड़ी रवाना

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बलिया। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के तत्वाधान में आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन दिनांक 11 दिसम्बर 2021 को किया जाना है। जिसके व्यापक प्रचार-प्रसार और जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिये नवागत माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, विक़ार अहमद अंसारी की अध्यक्षता में सभी न्यायिक अधिकारीगण की एक आवश्यक बैठक आहूत की गयी।

इस बैठक में राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व एवं उपयोगिता पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।माननीय जिला न्यायाधीश द्वारा लोक अदालत के कार्य पारदर्शिता और व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु एक प्रचार वैन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। उक्त प्रचार वैन का उद्देश्य जन-जन तक राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व को बताना है तथा जनसामान्य को यह बताना है कि वह अपने किस तरह के मामलें को राष्ट्रीय लोक अदालत में लगाकर, सस्ता व सुलभ न्याय प्राप्त कर सकते है। जनपद बलिया के समस्त लोगो से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने मामलों के त्वरित न्याय के लिये सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दीवानी न्यायालय परिसर बलिया से सम्पर्क कर सकते है।

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बलिया DM के निरीक्षण में क्रय केंद्र मिला बन्द, डिप्टी आरएमओ व प्रभारी का रोका वेतन

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बलिया DM के निरीक्षण में क्रय केंद्र मिला बन्द, डिप्टी आरएमओ व प्रभारी का रोका वेतन

बलिया: जिलाधिकारी अदिति सिंह ने सोमवार को रसड़ा क्षेत्र के तीन धान क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान एक क्रय केंद्र संचालित नहीं होने पर क्रय केंद्र प्रभारी के साथ जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी का भी वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश दिया है। उन्होंने अन्य केंद्रों पर मिली कमियों को भी सुधारने की चेतावनी दी है। एडीएम, सभी एसडीएम व खरीद से जुड़े अधिकारियों को लगातार क्रय केंद्रों का निरीक्षण करते रहने का निर्देश दिया है।

जिलाधिकारी क्रय केन्द्र मण्डी समिति रसड़ा पर पहुंचीं। वहां धान खरीद से सम्बन्धित उपकरण नहीं पाए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। केन्द्र प्रभारी के आईडी-पासवर्ड आदि की भी जानकारी नहीं थी। 18 नवम्बर से ही किसानों का पंजीकरण करने के बाद भी प्रभारी किसी भी किसान के धान का नमूना मँगाकर नमी मापक यन्त्र के माध्यम से यह देखा नहीं कि धान क्रय योग्य है अथवा नहीं। साथ ही अब तक इस केन्द्र पर किसी भी किसान का धान खरीद नहीं हुई पाई गई। किसानों के लिए कोई मूलभूत सुविधाएं भी वहां नहीं थी। इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर की।

मंडी समिति रसड़ा के विपणन शाखा के केन्द्र पर भी खरीद के प्रति कोई सार्थक प्रयास नहीं पाया गया। इस पर क्रय केन्द्र प्रभारी मण्डी निरीक्षक एवं मंडी समिति रसड़ा के सचिव का वेतन रोकने का आदेश दिया है। साथ ही तत्काल धान की खरीद शुरू करने का निर्देश दिया। चीनी मिल परिसर में संचालित होने वाले क्रय केंद्र पर न तो कोई बोर्ड मिला और न ही कोई उपस्थित था।

अब तक यह क्रियाशील ही नहीं हुआ है। इस पर नाराजगी जताते हुए जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी तथा केंद्र प्रभारी का वेतन अग्रिम आदेश तक रोकने का आदेश एडीएम को दिया। उन्होंने अपर जिलाधिकारी, सभी एसडीएम व जिला खाद्य विपणन अधिकारी को निर्देश दिया है कि तत्काल सुधार लाते हुए धान खरीद की प्रगति को बढ़ाया जाए। सभी अधिकारी फील्ड में उतरकर केंद्रों का निरीक्षण करते रहें।

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बलिया में छात्र संघ चुनाव का रास्ता साफ? नोटिस जारी

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बलिया। धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन की चेतावनी के बाद बलिया में छात्र संघ चुनाव के लिए रास्ता साफ होने लगा है। जिले के जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में आने वाले दिनों में जल्द ही छात्र संघ चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्र संघ की नियमावली जारी कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन की सहमति के बाद छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित कर दी जाएगी।

सोमवार यानी आज जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की ओर से एक ज्ञापन जारी किया गया है। कुलसचिव की ओर से जारी इस नोटिस में कहा गया है कि “एतद्द्वारा महाविद्यालयों के छात्रों द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन दिनांक 18 नवंबर, 2021 के अनुक्रम में सत्र 2021-22 में छात्र संघ चुनाव हेतु जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया की चुनाव नियमावली विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अग्रेतर कार्यवाही हेतु अपलोड की जा रही है।”

बता दें कि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय से संबद्ध मुरली मनोहर टाउन पीजी कॉलेज (टीडी कॉलेज) के छात्रों की ओर से छात्र संघ चुनाव के लिए लगातार ज्ञापन सौंपा जा रहा था। बीते दिनों टीडी कॉलेज के छात्रों ने इसे लेकर धरना-प्रदर्शन भी किया था। बता दें कि छात्रों की ओर से गत रविवार यानी 21 नवंबर को जिला कार्यालय पर ‘हल्ला बोल’ का ऐलान भी किया गया था।

छात्रों ने महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराने के लिए जिला कार्यालय पर आगामी मंगलवार यानी 23 नवंबर को ‘हल्ला बोल’ करने की घोषणा की है। हालांकि ठीक एक दिन पहले ही विश्वविद्यालय की ओर से छात्र संघ चुनाव को लेकर नोटिस जारी कर दी गई है। जननायक विश्वविद्यालय महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए नियमावली अपने आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर रहा है। जिसके बाद छात्र संघ चुनाव और उसकी तारीखों को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।

गौरतलब है कि छात्र संघ के चार पदों के लिए चुनाव कराए जाते हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और पुस्तकालय मंत्री। कोरोना महामारी के आने के बाद से छात्र संघ का चुनाव बंद कर दिया गया था। लेकिन कोरोना महामारी पर काबू पा लेने और गतिविधि के शुरू हो जाने के बाद भी इस बार प्रशासन की मंशा छात्र संघ चुनाव कराने की नहीं दिख रही है।

छात्र संघ चुनाव अब पूरी तरह जिला प्रशासन की सहमति पर निर्भर है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इसे हरी झंडी मिल चुकी है। देखना होगा कि मंगलवार को जिला कार्यालय पर हल्ला बोल पर प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या होगी?

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