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पुण्यतिथि विशेष- आजादी से पहले ही बलिया को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानी चित्तू पांडेय!

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बलिया डेस्क : शेरे बलिया के नाम से दुनिया भर में मशहुर चितु पांडये की आज  74वीं पुण्यतिथि है.  चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया भारत में सबसे पहले आजाद हुआ था. 23 मई 1984 को बलिया में चित्तू पांडेय की प्रतिमा का अनावरण करते हुए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कहा था कि सारा देश बलिया को चित्तू पांडे के कारण जानता है.

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जवाहर लाल नेहरू ने जेल से छूटने के बाद कहा था कि ‘मैं पहले बलिया की स्वाधीन धरती पर जाऊंगा और चित्तू पांडे से मिलूंगा.’ पता नहीं कि ऐसे चित्तू पांडेय की कहानी किसी प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल है भी या नहीं?

जब कांग्रेस कार्य-समिति के सदस्य हो गए थे गिरफ्तार

स्वतंत्रता सेनानियों के सामने 19 अगस्त 1942 को बलिया जिले के कलेक्टर ने आत्मसमर्पण कर दिया था. कलेक्टर को जन दबाव के कारण जेल में बंद चित्तू पांडेय और उनके साथियों को रिहा करना पड़ा. जेल से निकलने में थोड़ी देर हुई तो लोगों ने फाटक तोड़ दिया था.

इसके बाद आंदोलनकारियों ने कलेक्टरी पर कब्जा कर लिया और चित्तू पांडेय को वहां का जिलाधिकारी घोषित कर दिया.

चित्तू पांडेय का जन्म बलिया  के रत्तू-चक गांव में 1865 में हुआ था. उनका निधन आज ही के दिन (6 दिसंबर ) 1946 में हुआ. आजादी की लड़ाई के दौरान चित्तू पांडेय अपने साथियों जगन्नाथ सिंह और परमात्मानंद सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिए गये थे. इससे बलिया की जनता क्षुब्ध थी.

इस बीच नौ अगस्त 1942 को गांधी और नेहरू के साथ-साथ कांग्रेस कार्य समिति के सभी सदस्य गिरफ्तार कर अज्ञात जगह भेज दिए गए. इससे जनता उत्तेजित हुई.

बलिया जिले के हर प्रमुख स्थान पर प्रदर्शन व हड़तालें शुरू हो गईं. तार काटने, रेल लाइन उखाड़ने, पुल तोड़ने, सड़क काटने, थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमला करके उन पर राष्ट्रीय झंडा फहराने के काम में जनता जुट गई थी.

चौदह अगस्त को वाराणसी कैंट से विश्व विद्यालय के छात्रों की ‘आजाद ट्रेन’ बलिया पहुंची. इससे जनता में जोश की लहर दौड़ गई. 15 अगस्त को पांडेय पुर गांव में गुप्त बैठक हुई .उसमें यह तय हुआ कि 17 और 18 अगस्त तक तहसीलों तथा जिले के प्रमुख स्थानों पर कब्जा कर 19 अगस्त को बलिया पर हमला किया जाएगा.

धोखे से 19 स्वतंत्रता सेनानियों की हत्या

17 अगस्त की सुबह रसड़ा बैरिया, गड़वार, सिकंदरपुर , हलधरपुर, नगरा, उभांव आदि स्थानों पर जनता ने धावा बोल दिया. बैरिया थाने पर जनता ने जब राष्ट्रीय झंडा फहराने की मांग की तो थानेदार राम सुंदर सिंह तुरंत तैयार हो गया.

यही नहीं, उसने स्वयं गांधी टोपी पहन ली. झंडा फहराने के बाद जब जनता ने हथियार मांगे तो थानेदार ने दूसरे दिन देने की बात करके समस्या को टाल दिया.

दूसरे दिन करीब 40-50 हजार लोगों की भीड़ थाने पहुंची. थानेदार ने धोखा देकर करीब 19 स्वतंत्रता सेनानियों को मार डाला. गोली-बारूद खत्म हो जाने के बाद थानेदार ने अपने सिपाहियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. पर जनता ने किसी पुलिसकर्मी पर आक्रमण नहीं किया.

बैरिया की तरह नृशंस कांड रसड़ा में गुलाब चंद के अहाते में भी हुआ. पुलिसिया जुल्म में बीस लोगों की जानें गईं. इस तरह आंदोलनकारियों ने 18 अगस्त तक 15 थानों पर हमला करके आठ थानों को पूरी तरह जला दिया.

19 अगस्त को जिले में राष्ट्रीय सरकार का विधिवत गठन किया गया जिसके प्रधान चित्तू पांडेय बनाए गए. जिले के सारे सरकारी संस्थानों पर राष्ट्रीय सरकार का पहरा बैठा दिया गया.

सारे सरकारी कर्मचारी पुलिस लाइन में बंद कर दिए गए. हनुमान गंज कोठी में राष्ट्रीय सरकार का मुख्यालय कायम किया गया.

आंदोलनकारियों को सात साल की कैद और बीस बेंत की सजा

लोगों ने नई सरकार को हजारों रुपए दान दिए. चित्तू पांडे के आदेश से हफ्तों बंद दुकानें खोल दी गईं. 22 अगस्त को ढाई बजे रात में रेल गाड़ी से सेना की टुकड़ी नीदर सोल के नेतृत्व में बलिया पहुंची.

नीदर सोल ने मिस्टर वॉकर को नया जिलाधिकारी नियुक्त किया. 23 अगस्त को 12 बजे दिन में नदी के रास्ते सेना की दूसरी टुकड़ी पटना से बलिया पहुंची. इसके बाद अंग्रेजों ने लोगों पर खूब कहर ढाये.

आंदोलनकारियों को अदालत में पेश किया गया. उन्हें सात-सात साल की कैद और बीस-बीस बेंत की सजा दी गई.

किसी को नंगा करके पीटा गया तो किसी को हाथी के पांव में बांध कर घसीटा गया. उन घरों को ध्वस्त किया गया जहां सत्याग्रही जुटते थे.

अंग्रेजों ने अनेक गांवों के सैकड़ों घर जलाए. एक सौ सोलह बार गोलियां चलाई गईं जिनमें 140 नागरिकों की जानें गईं. सरकारी कर्मचारी सुबह होते ही किरोसिन लेकर गांव को फूंकने के लिए निकल पड़ते थे.

गांवों पर सामूहिक जुर्माना लगाया गया. चित्तू पांडेय भूमिगत हो गए थे. बलिया देश के उन थोड़े से स्थानों में था जहां अंग्रेजों ने सर्वाधिक जुल्म ढाये. क्या यह सच नहीं है कि ऐसे बलिदानों से मिली आजादी को आज के हमारे अधिकतर नेताओं ने अपने स्वार्थवश काफी बदरंग कर दिया है?

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बलिया के साहित्यकारों ने बढ़ाया मान, मिला साहित्य अकादमी भाषा सम्मान

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बलिया के दो साहित्यकारों को संयुक्त अकादमी भाषा सम्मान की घोषणा की गई है। भोजपुरी भाषा में उत्कृष्ट लेखन के लिए साहित्यकार डॉ. अशोक द्विवेदी व अनिल ओझा ‘नीरद’ को संयुक्त रूप से साहित्य अकादमी भाषा सम्मान से नवाजा जाएगा। भोजपुरी में यह सम्मान, हरेराम द्विवेदी, मोती बीए और धरीक्षण मिसिर को पहले मिल चुका है।

साहित्य अकादमी के द्वारा शनिवार को 2020 के अनुवाद पुरस्कारों की घोषणा भी की गई है। इसमें 24 पुस्तकों को साहित्य अकादमी अनुवाद पुरस्कार 2020 के लिए अनुमोदित किया गया। यह घोषणा साहित्या अकादमी के द्वारा कामायनी सभागार में अकादमी अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कंबार की अध्यक्षता में कार्यकारी मंडल की बैठक में की गई।

आपको बता दें कि अनिल ओझा ‘नीरद’ रुद्रपुर, गायघाट, बलिया के मूल निवासी हैं। वह फिलहाल पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रहते हैं। वहीं डॉक्टर अशोक द्विवेदी बलिया शहर के निवासी है। दोनों ने बलिया का मान बढ़ाया है। विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अध्यक्ष अजित दुबे ने इस पर कहा कि विगत 8 वर्षों के बाद गैर मान्यता प्राप्त भाषा की श्रेणी में भोजपुरी के साहित्यकारों का सम्मान भोजपुरी भाषा और साहित्य के लिए प्रोत्साहित करने वाला निर्णय है। इसमें सम्मान स्वरूप एक लाख रुपया और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।

24 भाषाओं के लेखक जो हुए पुरस्कृत

मान्यता प्राप्त 24 भाषाओं में पुरुस्कार दिए जाते हैं। जिसमें अपूर्व कुमार शइकीया-असमिया,  अंग्रेजी-अरुंधति सुब्रमण्यम, हिंदी-अनामिका, शंकर-बांग्ला, बोडो-स्व.धरणीधर औवारि, गुजराती-हरीश मीनाश्रू, कन्नड़-एम. वीरप्पा मोइली, कश्मीरी- स्व. हृदय कौल भारती, कोंकणी-आर. एस. भास्कर, मैथिली-कमलकान्त झा, नेपाली-शंकर देव ढकाल, उडिय़ा-यशोधरा मिश्रा, पंजाबी-गुरदेव सिंह रूपाणा, मलयालम-ओमचेरी एन.एन. पिल्लई, मणिपुरी-देवेन सिंह, राजस्थानी-भंवरसिंह सामौर,  संताली-रूपचंद हांसदा, सिंधी-जेठो लालवाणी, तमिल-इमाइयम, तेलगू-निखिलेश्वर,संस्कृत-महेश चन्द्र शर्मा गौतम, और उर्दू-हुसैन-उल-हक को सम्मानित किया गया है।

 

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बलिया में बिजली चोरों पर कार्यवाही, 14 लोगों पर केस दर्ज, 25 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे

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बलिया में बिजली चोरों का आतंक है। अब इनके आतंक को कम करने के लिए बिजली विभाग ने कमर कस ली है। लगातार विभागीय अधिकारियों के द्वारा अवैध रूप से विद्युत उपयोग करने वालों पर कार्यवाही की जा रही है। शनिवार को विद्युत विभाग के अधिकारियों व विजलेंस टीम ने नगर के अस्पताल रोड पर छापामारी कर विद्युत कनेक्शनों की जांच की। इस दौरान कुल 14 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी का केस दर्ज करवाया। इसके अलावा 25 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटे गए और बकाया बिल के एवज में साढ़े तीन लाख रुपये की वसूली की।

आपको बता दे कि बिजली चोरी पर रोक लगाने के लिए अब विभाग ने लाइन लॉस वाले फीडरों को चिन्हित किया है। इसके तहत ज़िले के विभिन्न इलाकों के फीडरों की चेकिंग की जा रही है। शनिवार को विशुनीपुर उपकेंद्र के अस्पताल रोड फीडर की जांच पड़ताल के लिए शनिवार को विद्युत विभाग के अवर अभियंता आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में विजिलेंस टीम ने अस्पताल रोड स्थित आवासों के कनेक्शनों की जांच की।

इस दौरान कुल 10 लोग चोरी से बिजली का प्रयोग करते मिले जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। चार ऐसे उपभोक्ता मिले जिनकी बिजली बिल बकाया में काटी गई थी लेकिन वह बिजली का प्रयोग कर रहे थे, इनके खिलाफ भी जेई हिमालय चौहान ने विद्युत थाने में मुकदमा दर्ज करवाया। इस कार्यवाही से इलाके में हड़कंप मच गया। बिजली चोरों में अफरा तफरी का माहौल देखा गया। पूरी कार्यवाही के दौरान बिल बकाया होने के कारण 25 उपभोक्तओं की बिजली काटी गई और कुल साढ़े तीन लाख रुपये बकाया बिल के सापेक्ष वसूली भी की गई। वहीं विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रेश उपाध्याय ने बताया कि लाइन लॉस वाले फीडरों के कनेक्शन आदि की जांच की जा रही है। यह कार्रवाई लगातार चलेगी।

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डी. फार्मा. की परीक्षा में शाहीन परवीन ने किया बलिया टॉप, शहबान मेमोरियल कॉलेज ने लहराया परचम

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शाहीन परवीन ने डी. फार्मा. की परीक्षा में बलिया जनपद में टॉप किया है।

उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद ने साल 2021 के मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है। इस साल यह परीक्षा कोरोना महामारी की वजह से ऑनलाइन ही हुई थी। डिप्लोमा इन फार्मेसी में शाहीन परवीन ने पूरे बलिया जनपद में टॉप किया है। शाहीन परवीन ने डिप्लोमा इन फार्मेसी के अंतिम वर्ष की परीक्षा 90 फीसदी अंक हासिल किया है। शाहीन परवीन बलिया के नगरा स्थित मु. शहबान मेमोरियल कॉलेज ऑफ फार्मेसी की छात्रा हैं।

उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा परिषद की 2021 के परीक्षा में मु. शहबान मेमोरियल कॉलेज ऑफ फार्मेसी के छात्र छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस साल पूरे कॉलेज का रिजल्ट 96 फीसदी रहा है। कॉलेज में सबसे अधिक अंक शाहीन परवीन को मिला है। कॉलेज में दूसरा स्थान हासिल किया है नवाज़ अहमद ने। नवाज़ को 88 फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं। संजीदा अतीक़ 86 फीसदी अंकों के साथ तीसरे स्थान पर काबिज हैं। जबकि विनीता रंजन और अभिषेक यादव क्रमशः 82.5 और 80.5 फीसदी अंकों के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।

मु. शहबान मेमोरियल कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्रबंधक मुहम्मद इमरान ने कॉलेज के विद्यार्थियों की इस सफलता पर कहा कि “मैं अपनी संस्था की ओर से शाहीन परवीन को विशेष बधाई देता हूं। साथ ही अन्य परीक्षार्थियों को भी बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। बच्चों के परिवार वालों को भी बधाई।” उन्होंने आगे कहा कि “ऐसा पहली बार हुआ कि परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की गई। इसमें इंटरनेट एक बड़ी चिंता थी। परीक्षा के दौरान भी कई बार परीक्षार्थियों को इंटरनेट की दिक्कतों से सामना करना पड़ा। लेकिन अंत में सफलता हासिल हुई।”

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