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मझधार में लटका बलिया का लिंक एक्सप्रेस-वे, शासन तक पहुंचा उटपटांग ब्लू प्रिंट

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बलिया के लिंक एक्सप्रेस वे का काम अब अधर में लटक गया है। लिंक एक्सप्रेस वे के ब्लू प्रिंट में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। लिंक एक्सप्रेस वे के लिए जो ब्लू प्रिंट तैयार करके शासन को भेजा गया है उसमें अनियमितता पाई गई है। जिसके बाद अब इस एक्सप्रेस वे के प्रस्तावित रूट को बदलने की तैयारी शुरू कर दी गई है। लिंक एक्सप्रेस वे के लिए मध्य प्रदेश की एसएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड ने ब्लू प्रिंट तैयार किया है। इसे शासन को भी भेजा जा चुका है। लेकिन जांच में यह बात सामने आई है कि लिंक एक्सप्रेस वे का ब्लू प्रिंट राष्ट्रीय राजमार्ग (NH)- 31 के रूट पर ही तैयार कर दी गई है।

खबरों के मुताबिक लगभग 16 में से 13 गांवों में यही गड़बड़ी है। महज तीन गांवों से गुजरते हुए हाईवे की ब्लू प्रिंट सही है। जाहिर है कि एक ही रूट पर दो हाईवे निर्माण नहीं हो सकता है। इसलिए इन दोनों में से किसी एक का रूट बदलना होगा। बता दें कि NH-31 के रूट का गजट प्रकाशित हो चुका है। ऐसे में उसका रूट नहीं बदला जा सकता है। इसलिए अब लिंक एक्सप्रेस वे के रूट को बदलने की ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

क्या है लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना: बलिया जिले को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से जोड़ने के लिए लिंक एक्सप्रेस वे परियोजना बनाई गई है। लिंक एक्सप्रेस वे बलिया के कुल 16 गांवों से होकर गुजरेगा। इसकी लंबाई तकरीबन 24.2 किलोमीटर है। हाईवे की चौड़ाई है 120 मीटर प्रस्तावित है।उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) को पचास करोड़ की रुपए भी आवंटित कर दिए हैं। गौरतलब है कि इस हाईवे का लगभग 10 किलोमीटर का हिस्सा बलिया में है। तो वहीं 14 किलोमीटर भाग गाजीपुर में है। ये एक्सप्रेस वे बलिया के बढ़वलिया, शाहापुर, लकड़ा, अवगिलवा, बंकापुर, टिकरी, सरेह इजरा, बसारतपुर, सुल्तानपुर, रसड़ा, कोटवारी, कुरूचंदा सिंहपुर, पूरा एकौनी, एकौनी और पाह तीखा गांव को प्रभावित करेगा।

 

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बलिया वासियों को सौगात, NH-31 का काम लगभग पूरा, सांसद ने जताया आभार

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बलिया। जर्जर नेशनल हाइवे-31 से परेशान बलियावासियों को राहत मिलने जा रही है। NH-31 का काम लगभग पूरा हो चुका है। जिसको लेकर बलिया सांसद वीरेंद्र सिंह ने ट्वीट कर अपनी खुशी जाहिर की। निमार्ण को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ ही निर्माण कंपनी को भी धन्यवाद दिया।

सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने ट्वीट कर लिखा कि बलिया लोकसभा में सड़क और रेल मार्ग बेहतर हो प्रदेश और देश के मुख्य मार्ग से बलिया को जोड़ कर प्रगति के पथ पर ले जाया जा रहा है। उसी क्रम में NH -31 जो विगत एक दशक से खराब था। बलिया वासियों को बहुत कष्ट झेलना पड़ा था। जिन्हें अब राहत मिल रही है। साथ ही लिखा कि भविष्य में जल्द ही ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस का भी निर्माण चालू होगा।

बता दें NH-31की जर्जर स्थिति से लोग बहुत परेशान थे। यहां तक कि आये दिन हादसे भी होते रहते थे। मामले में लापरवाही सामने आने पर निर्माण कंपनी को भी बदला गया था। हालांकि अब लोगों को राहत मिलती नजर आ रही है।

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बलिया- एक्शन में स्वास्थ्य विभाग, 5 महीने से गायब डॉक्टर पर होगी कार्रवाई !

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बलिया में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक्शन मोड में नजर आ रहा है। जहां अब 5 महीने से गायब डॉक्टर निशांत के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। जिनका ट्रांसफर सोनवानी सीएचसी से सोनबरसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए किया गया था, लेकिन वह सोनबरसा में अपना स्थानांतरण पत्र देने के बाद काम पर नहीं गए। ऐसे में CMO डा. नीरज कुमार पांडेय ने उनके विरूद्ध कार्रवाई का अनुरोध किया है। जिसके लिए उन्होंने विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है।

शिकायत के बाद जांच में खुलासा- दरअसल चिकित्सकों की मनमानी के कारण सीएचसी सोनबरसा की स्वास्थ्य व्यवस्था बिगड़ गई है। लोगों की शिकायत पर सीएमओ की जांच में मामला पकड़ में आया। सीएमओे ने तीन अन्य चिकित्सकों का भी तीन दिन पहले स्थानांतरण किया है। बताया कि व्यवस्था को ठीक करने के लिए लापरवाह लोगों की समीक्षा की जा रही है। चिकित्सा क्षेत्र में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

3 साल से एक जगह पर जमे कर्मचारी हटेंगे- वहीं शासन ने ग्रुप-ग (तृतीय श्रेणी) के कर्मचारियों का हर 3 साल में पटल-क्षेत्र में परिवर्तन करने का निर्देश दिया है। यह परिवर्तन 30 जून तक अनिवार्य रूप से करने को कहा गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग में बड़े बदलाव की तैयारी है। सीएमओ ने बताया कि 3 साल से एक ही पटल देख रहे संवेदनशील या लोक व्यवहार की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा कर बदलाव की किया जाएगा।

 

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बलिया के बड़े भवनों में नहीं है आग से बचाव के इंतजाम, स्कूलों- अस्पतालों में सुरक्षा उपकरण नदारद

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बलियाः गर्मी के मौसम में आगजनी की घटनाओं में इजाफा हो जाता है। कभी-कभार आग इतनी भयानक हो जाती है कि दमकल की गाड़ियां भी आग बुझाने में नाकाम साबित होती है। ऐसे में जरुरी है कि संस्थानों में आग से बचाव की व्यवस्थाएं हों। लेकिन जिले के सरकारी व व्यवसायिक भवनों में आग से बचने के इंतजाम न के बराबर हैं।यहां तक कि स्कूल-कॉलेजों में भी आगजनी से बचने सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। होटल-लॉज, निजी व सरकारी अस्पतालों के भी यही हाल हैं। सभी भवनों में शासन के द्वारा जारी मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

लापरवाही का आलम भी यह है कि मानकों का पालन न करने वाले भवनों को संबंधित विभाग व जिम्मेदार अधिकारियों ने एनओसी भी जारी कर दिया है। जबकि एनओसी देने के पहले अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम को भवनों का भौतिक सत्यापन करना चाहिए, आग से बचाव के उपकरण लगें हैं या नहीं, सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, इन सभी बातों पर निरीक्षण के बाद ही एनओसी देने का प्रावधान हैं लेकिन विभागीय अधिकारी भवनों का बिना सत्यापन करे ही एनओसी जारी कर रहे हैं।

यही वजह है कि अब गांव देहात ही नहीं बल्कि शहरों में भी बगैर सुरक्षा उपकरणों के ही स्कूल-कॉलेज व अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन भवनों में आग से बचाव के इंतजाम नदारद हैं। इन्हीं लापरवाहियों की वजह से आग की घटनाएं बड़े हादसे का कारण बनती हैं। मानकों के अनुसार सरकारी, गैर सरकारी भवनों में स्प्रिरंकलर सिस्टम बनाना चाहिए। इसमें एक फव्वारा होता है, जो आग लगने की स्थिति में ऑटोमैटिक पानी फेंकने लगता है।

सबसे बुरा हाल बलिया के सरकारी जिला अस्पताल का है। यहां हर रोज हजारों मरीज अपना इलाज करवाने आते हैं, कई मरीज भर्ती रहते हैं। लेकिन इतने बड़े अस्पताल में आग से बचने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल के नए भवन में स्प्रिरंकलर सिस्टम (फायर हाइड्रेंट) स्थापित किया गया है। इसमें भी नियमित पानी नहीं भरने के चलते शोपीस ही बना रहता है। अग्निशमन विभाग के अफसरों की मानें तो किसी भी एसी कमरे में आग लगने पर तेजी से फैलने का खतरा होता है। शहर के कई अस्पताल ऐसे हैं जहां आपतकालीन स्थितियों में बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी एग्जिट की व्यवस्था तक नहीं हैं।

इस संबंध में सीएफओ डीपी सिंह यादव का कहना है कि फायर सुरक्षा नहीं करने वाले संस्थानों व विभागों को समय-समय पर नोटिस भेजा जाता है। इसकी सूची बनाकर जिलाधिकारी व मुख्यालय को भेजी जाती है। इसके अलावा आगजनी रोकने नगरपालिका के इंतजाम भी नाकाफी हैं। नगरपालिका के द्वारा शहर के अलग अलग स्थानों पर करीब 31 हाइड्रेंट लगाए गए थे, लेकिन इनमें से 8 खराब स्थिति में पड़े हैं।

पुराना पोस्ट ऑफिस, विशुनीपुर मस्जिद, एससी कॉलेज, जापलिनगंज नया चौक, आर्य समाज रोड व सतनीसराय में स्थित हाइड्रेंट मिट्टी के नीचे दब चुके हैं। अग्निशमन विभाग के अफसरों का कहना है कि इमरजेंसी में शहर के हाइड्रेंटों की जरूरत पड़ती है, लेकिन कई बार पत्र लिखने के बाद भी नगर पालिका की ओर से इस दिशा में पहल नहीं हो सकी है।

वहीं शहर के प्रमुख प्रतिष्ठान तो खुले स्थानों पर हैं, लेकिन कई छोटे व मझोले प्रतिष्ठान सकरी गलियों में हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का वाहन मौके पर नहीं पहुंच पाता है। कई बार यहां आगजनी की घटनाओं में आग बुझाने में परेशानी हुई है। चौक, विशुनीपुर, टाउन हॉल आदि स्थानों पर सकरी गलियों में आभूषणों की दुकानें हैं, जहां हमेशा गैस सिलेंडर मौजूद रहते हैं। हालांकि कई दुकानदारों ने आग से बचने के प्राथमिक उपाय मसलन सीज फायर आदि की व्यवस्था कर रखी है।

बता दें कि शासन व कोर्ट के द्वारा बताए गए मानकों के अनुसार बड़ी बिल्डिंगों में ओवरहेड या अंडरग्राउंड (स्ट्रेटिक) टैंक होने चाहिए। हाइड्रेंट सिस्टम बनाकर हमेशा पर्याप्त पानी की व्यवस्था होनी चाहिए, चौड़ा रास्ता हो ताकि फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच सके। भवनों के बाउंड्री वॉल से दोनों ओर रास्ता और भवनों में डबल सीढ़ी होनी चाहिए। लेकिन जिले के सरकारी व निजी भवनों में इन मानकों का पालन नहीं हुआ।

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