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बलियाः जिला अस्पताल की ओपीडी से गायब रहते हैं डॉक्टर, मरीज हो रहे परेशान

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बलिया जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम है। अस्पताल में डॉक्टर न तो समय पर आते हैं न ही मरीजों का ठीक से इलाज करते हैं। हालत यह है कि दूर दराज से मरीज अस्पताल में इलान कराने आते हैं लेकिन ओपीडी में डॉक्टर की नहीं मिलते।

मरीज बिना इलाज कराए बेरंग लौट जाते हैं या फिर प्राइवेट क्लीनिकों के चक्कर लगाते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी खुलने का समय सुबह 8 बजे से है लेकिन 9.30 बजे तक भी ओपीडी में चिकित्सक नहीं बैठते। इससे मरीजों को काफी परेशानी होती है। मरीज सुबह से ही ओपीडी के बाहर बैठकर डॉक्टरों के आने का इंतजार करते हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिवाकर सिंह ने शुरुआत में तो जिला अस्पताल का निरीक्षण इस पर ध्यान दिया। लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।

जिला अस्पताल में रोजाना 1500 से 1800 मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही मरीजों का इलाज हो पाता है। गुरुवार को भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जहां जिला अस्पताल के कक्ष संख्या 21 में नेत्र चिकित्सक डॉक्टर बीपी सिंह और सर्जन डॉक्टर सौरभ सिंह बैठते हैं लेकिन डॉक्टर बीपी सिंह छुट्टी पर हैं और मरीज अपने परीक्षण का इंतजार करते हुए देखे गए।

इसी तरह कक्ष 20 में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष चौधरी की कुर्सी खाली पड़ी रही और मरीज इलाज का इंतजार करते रहे। कक्ष संख्या 19 में भी डॉक्टर आरएन उपाध्याय सर्जन बैठते हैं लेकिन कभी समय पर नहीं आते। कक्ष 18 में डॉक्टर अनिल सिंह और डॉक्टर आऱडी राम बैठते हैं लेकिन दोनों नदारद मिले। जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर के कमरा नंबर पांच में डॉ. अंशुमान राय सर्जन बैठते हैं। कक्ष का दरवाजा बंद था। मरीज इंतजार करते रहे।

जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमर्जी और लापरवाही को लेकर जिला अस्पताल सीएमएस डॉक्टर दिवाकर सिंह का कहना है कि सर्जन और आर्थो सर्जन राउंड पर थे। जिला अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह आठ बजे से दोपहर बाद दो बजे तक है। इस अवधि में किसी भी चिकित्सक को ओपीडी कक्ष न छोड़ने की हिदायत है।

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बलिया

बलिया – पावर ट्रांसफार्मर हुआ खराब, ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 8-10 घंटे मिलेगी बिजली

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बलिया के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में कई कई घंटो बिजली कटौती की जा रही है। अब इस परेशानी को 25 दिन और झेलना पड़ेगा। बिजली विभाग ने सूचित किया है कि ट्रांसमिशन सबस्टेशन का 63 एमवीए पावर ट्रांसफार्मर खराब हो गया है।  जिसके काराण रोस्टर के मुताबिक आपूर्ति की जा  रही है। इससे शहरी क्षेत्र में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 8-10 घंटे की बिजली की आपूर्ति की जा रही है। बिजली विभाग के मुताबिक इस क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को बदलने में लगभग 25 दिन का समय लगेगा। यानि कि अब से लगभग 1 महीने शहरवासियों व ग्रामीणों को बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।

शहरी क्षेत्र में केवल 4-5 घंटे की कटौती हो रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हाल बेहाल है। यहां 15 से 16 घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद रहती है। जिससे ग्रामीणों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। इस अव्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में खासी नाराजगी है।

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बलिया में सरकारी एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल, जिलेभर के मरीज परेशान

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बलिया की एंबुलेंस सेवा खस्ताहाल है। मरीज की स्थिति चाहे सामान्य हो या गंभीर, एंबुलेंस न तो समय पर पहुंचती है और न ही समय पर अस्पताल पहुंचाती हैं। हालत गंभीर होने पर मरीजों को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। ऐसे में जिलेभर में मरीज परेशान हैं।

बता दें कि जिले में मरीजों की सुविधा के लिए निशुल्क एंबुलेंस सेवा संचालित की जा रही है। इसके लिए 76 एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें 38 एंबुलेंस 102 नंबर और 38 एंबुलेंस 108 नंबर की है। इन एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 11 मिनट तय किया गया है। यानि कि जब मरीज फोन करे तो 11 मिनट में ही एंबुलेंस पहुंचना चाहिए। लेकिन इन नियमों का पालन नहीं हो रहा। 11 मिनट की बजाए एंबुलेंस आधे से एक घंटे से देर से पहुंच रही है। चालक दूर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।

हालत बिगड़ने पर मरीज को निजी साधन से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। कई बार समय से न पहुंचने के कारण एंबुलेंस में ही प्रसव हो जाते हैं। कई एंबुलेंस तो मरम्मत व रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो गई हैं। जिला अस्पताल में कुछ एंबुलेंस को इधर-उधर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। धूप, बारिश में वे खुले में सड़ रही हैं। सीएमओ आवास पर कई एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं। उनके अधिकांश पार्ट्स गायब हैं या खराब हो चुके हैं।

एम्बुलेंस प्रभारी प्रभाकर यादव ने बताया कि जिला अस्पताल से करीब 12 से 14 मरीज वाराणसी के लिए रेफर होते हैं। वहां 108 एंबुलेंस जाकर 12 घंटे तक फंस जाती है। मरीजों के लिए पास के हनुमानगंज में पांच एंबुलेंस रहती है जिन्हें तत्काल भेज दिया जाता है। वहीं सीएमओ डॉक्टर जयंत कुमार का कहना है कि कई बार हमने देरी से पहुंचने की बात को बैठकों में कहा है। रिस्पांस टाइम का पालन हो, इसके लिए सेवा प्रदाता को पत्र भेजा गया है। हर हाल में समय का पालन होना चाहिए।

 

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बलियाः जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट का कारनामा, मरीज को खड़ा कर ही लगा दिया इंजेक्शन

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बलिया जिला अस्पताल की बदतर व्यवस्थाओं के किस्से आपने सुने होंगे। अब अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक तस्वीर सामने आई है। जहां फार्मासिस्ट अशोक सिंह ने मरीज को लेटाकर इंजेक्शन लगाने के बजाय खड़ा कराकर ही इंजेक्शन लगा दिया। फार्मासिस्ट की इस लापरवाही से बुजुर्ग मरीज दर्द से कराहता रहा।

बुजुर्ग को खड़े कर इंजेक्शन लगाने की तस्वीर वायरल हुई है। जिसके बाद तमाम सवाल उठ रहे हैं। जब फार्मासिस्ट से पूछा कि आपने इस तरीके से सुई क्यों लगाई, जिस पर अपनी गलती मानने के बजाए वह पत्रकारों को धमकाया। बता दें कि जिला अस्पताल में अक्सर स्टाफ मरीजों की सही से देखभाल नहीं करते और आए दिन इलाज में लापरवाही करते हैं।

इसी बीच रविवार दोपहर चार बजे फार्मासिस्ट अशोक सिंह वार्ड में गए और मरीज को खड़े-खड़े ही इंजेक्शन लगा दिया। वहां मौजूद पत्रकार ने इस लापरवाही को अपने कैमरे में कैद कर लिया। बस फिर क्या, फार्मासिस्ट अशोक सिंह पत्रकारों पर भड़क गए। उन्होंने कहा कि मेरी मर्जी में कैसे भी इंजेक्शन लगाऊं, आप पत्रकार लोग वीडियो कैसे बनाएं, हम आपकी जिला अस्पताल में इंट्री बंद करवा देंगे। उधर इस संबंध में जब सीएमएस डॉक्टर दिवाकर सिंह से बात की गई तो उन्होंने छुट्टी का हवाला देकर प्रभारी सीएमएस डॉक्टर वीके सिंह के पाले में गेंद डाल दी। वहीं जब पत्रकारों ने डॉक्टर वीके सिंह से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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