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पेयजल परियोजनाओं में बलिया फिसड्डी, 25 परियोजनाएं अधूरी, 43 का हस्तांतरण ही नहीं हुआ

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बलिया जिले में साल 2022-23 के लिए पेयजल की कई परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन बलिया लक्ष्य से कोसों दूर है। स्थिति यह हैं कि केवल 6 ही परियोजनाएं पूरी हो सकी हैं। 25 परियोजनाएं अधूरी पड़ी है। लापरवाही का आलम यह है कि 43 पुरानी परियोजनाएं अब तक ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित नहीं की जा सकी है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो जिले में राष्ट्रीय पेयजल मिशन के तहत होने वाले कामों पर ग्रहण लगा हुआ है। 2022 गुजरने में कुछ ही महीने बाकी हैं लेकिन फिर भी परियोजनाओं का काम कछुआचाल से किया जा रहा है। हालात इतने खराब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी लोग पेयजल को लेकर भटकते फिरते हैं।

परियोजनाओं स्वीकृत तो हो गई लेकिन धरातल पर काम नहीं हुआ। यही वजह है कि कई इलाकों में पानी की किल्लत बनी हुई है। यह इस साल की परेशानी नहीं, बल्कि हर साल यही स्थिति होती है। साल 2021-22 में भी 31 परियोजनाएं स्वीकृत हुई थी लेकिन 2 साल गुजरने के बाद भी इन परियोजनाओं का काम पूरी नहीं हुआ।

पेयजल परियोजनाओं को संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित करने का निर्देश वर्षों पहले का है लेकिन वर्तमान में भी 43 परियोजनाओं का संचालन जल निगम के पास ही है। समझा जा सकता है कि पेयजल मिशन के तहत होने वाले कामों में लापरवाही बरती जा रही है। जिसके चलते न तो परियोजना पूरी हो रही हैं और न लोगों को शुद्ध पेयजल मुहैया हो पा रहा है।

वहीं जल निगम अधिशासी अभियंता अजीत कुमार सिंह का कहना है कि अभी फिलहाल में ही कार्यभार ग्रहण किया हूं लिहाजा पूरी जानकारी नहीं है। सभी परियोजनाओं की समीक्षा करके दुरुस्त किया जाएगा। निर्माणाधीन परियोजनाओं को जल्द पूरा कराया जाएगा।

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टशन में रह गए बलिया के बड़े अधिकारी और दिनदहाड़े हो गया खेल!

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बलिया में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता बेहद ही संवेदनशील मामला उजागर हुआ है। जहां एक आरोपी ने न सिर्फ़ अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकी बल्कि फर्जी अधिकारी बनकर अधिकारियों के साथ ही छापामार कार्रवाई की। इस कार्रवाई में कुछ व्यापारियों को गिरफ्तार भी किया गया। अब व्यापारी फर्जी अधिकारी के साथ मौजूद अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

नाम बदलकर पैसा ऐंठता है आरोपी- बता दें कि जड़ी बूटी विक्रेता पारसनाथ गुप्ता, रोशन कुमार पटेल, संदीप कुमार, संजीव कुमार और अनिल कुमार को वन विभाग ने बीते 18 और 19 सितंबर को छापा मारके आपत्तिजनक सामग्री बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस बीच पीड़ित परिजनों को हरियाणा के जिंद जिले के एसपी ने फोन कर बताया कि आप लोगों की दुकानों पर छापेमारी के दिन जो वन अधिकारी बनकर गया था। वे कोई अधिकारी नहीं बल्कि फर्जी आदमी है।

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग- आरोपी दीपक की इसके पहले कई जगह गिरफ्तारी भी हुई है। बीते दिनों अयोध्या में भी उसकी गिरफ्तारी हुई थी। हर जगह वे अपना नाम बदल कर घटना को अंजाम देता है, फिर पैसा ऐंठकर फुर्र हो जाता है। यह खबर आग की तरह व्यापारियों में फैलते ही व्यापारियों ने ओकडेगंज पुलिस चौकी के सामने चक्काजाम कर दिया। शनिवार को कलेक्ट्रेट में भी प्रदर्शन किया। और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

सवालों में प्रशासन- सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस दिन दीपक फर्जी वन अधिकारी बनकर छापेमारी करने आया था उस दिन साथ में डीएफओ, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी भी जांच के दौरान मौजूद थे। क्या किसी की आंखें फर्जी वन अधिकारी को नहीं पहचान पाई। जबकि पुलिस को स्कैनिंग करने की खास ट्रैनिंग दी जाती है। बावजूद जिस तरह दीपक ने सबकी आंखों में धूल झोंका है। उससे यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि डीएफओ, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी अपने पद के काबिल नहीं है।

जिले में शिवम ठाकुर बनकर दिया घटना को अंजाम –  बता दें कि फर्जी वन अधिकारी का असल नाम दीपक है। जबकि 18 और 19 सितंबर को जिस दिन चौक में छापेमारी हुई थी, उस दिन दीपक अपना नाम शिवम ठाकुर बताया था। इतना ही नहीं डीएफओ के पास भी जो दस्तावेज दिए उसमें वे शिवम ठाकुर ही बताया। लेकिन अधिकारियों ने दस्तावेज का वेरिफिकेशन नहीं किया। 

पहले से मामले हैं दर्ज-  उसके ऊपर पहले से ही 420 ई ब्लैक मेलिंग के मुकदमे दर्ज हैं। जब इस बात की सूचना बलिया मे पहुंची तो अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वही व्यापार मंडल ने इस मामले को डीएम के समक्ष रखकर व्यापारियों की रिहाई और संलिप्त अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। अब सवाल यह है कि जालसाज इतनी बड़ी साजिश को स्थानयी पुलिस और अधिकारियों के सामने अंजाम देता हैं और किसी को इसकी भनक तक नहीं पड़ती।

रिपोर्ट- तिलक कुमार 

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बलिया – किशोरी हत्याकांड में 9 साल बाद सजा, एक युवक समेत 4 लोगों को उम्रकैद

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बलिया में 9 साल पुराने हत्याकांड में कोर्ट ने एक युवक समेत 4 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने किशोरी की हत्या करने के मामले में जांच के बाद एक युवक समेत 4 लोगों को दोषी करार दिया। और आजीवन कारावास की सजा सुनायी। साथ ही 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

अभियोजन विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेश पाठक ने बताया कि अपर जिला न्यायाधीश प्रशांत बिलगैयो की अदालत ने शनिवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी उपेंद्र पाल, उसकी मां कौशल्या देवी, केदारनाथ और तेजनाथ को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 25 – 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

2013 में हुई थी हत्या- घटना के बारे में उन्होंने बताया कि जिले के चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली कक्षा 8 की छात्रा (13) की 11 मई 2013 को दोपहर में जलाकर हत्या कर दी गयी। किशोरी की मां की तहरीर पर 4 लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। साथ ही बताया कि पुलिस ने विवेचना के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। शनिवार को अदालत ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

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बलिया- साहित्य जगत के वरिष्ठ साहित्यकार महावीर प्रसाद गुप्त का निधन

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बलिया में हिंदी और भोजपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार महावीर प्रसाद गुप्त का निधन हो गया। उन्होंने 86 साल की उम्र में अपने कस्बा स्थित आवास पर आखिरी सांस ली। उनके निधन से न सिर्फ साहित्य जगत में बल्कि समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। स्वर्गीय गुप्त हिंदी के जाने-माने साहित्यकार थे।

वरिष्ठ साहित्यकार महावीर प्रसाद गुप्त को गीत, गजल, निबंध में महारत हासिल थी। इसी क्रम में भोजपुरी कजरी के गायन एवं रचना में भी उनका कोई सानी नहीं था। वह योग्य शिक्षक भी रहे। शुरू में उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय सुखपुरा में शिक्षण कार्य किया। बाद में उनकी नियुक्ति इंटर कॉलेज सुखपुरा में प्रवक्ता पद पर हो गई।

बता दें सेवानिवृत्ति होने के बाद भी वह साहित्यिक रचना में पूरी तन्मयता से लगे रहे। रविवार को ही गंगा तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके जेष्ठ पुत्र गणेश प्रसाद गुप्त ने दिया।

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