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UP Panchayat Election : 25 दिसंबर से छिन जाएंगे ग्राम प्रधानों के अधिकार !

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उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को खत्म हो जाएगा. इसके साथ ही भुगतान आदि का पावर ग्राम प्रधान के पास नहीं रहेगा. 25 दिसंबर के बाद नये तरीके से काम होगा. वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाएगा या सचिव और एडीओ पंचायत का प्रशासक बनाया जाएगा, यह तय नहीं हुआ है.

संवैधानिक रूप से अब तक चुनाव करवाने व नई ग्राम पंचायतों का गठन हो जाना चाहिए था. लेकिन कोरोना महामारी के चलते चुनाव टलते गए, ऐसे में अब फरवरी 2021 में पंचायत चुनाव होने के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि परिसीमन की दिक्कते पंचायत चुनावों को और आगे खींच सकती हैं. इस बात की चर्चा जोरों पर है कि 25 दिसंबर के बाद एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा.

प्रशासक की नियुक्ति के लिए पंचायत राज विभाग में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इधर, अधिकार समाप्त होने से पहले प्रधान तेजी से विकास कार्य कराने और भुगतान कराने की प्रक्रिया में जुट गए हैं. दरअसल, अब भी कई ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां लाखों रुपए के बिल का भुगतान होना है. प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भुगतान की दिक्कत हो जाएगी. उनको तरह-तरह की कमियां बताकर परेशान किया जाएगा.

ऐसी स्थिति में अभी से ही लोग दौड़भाग करने लगे हैं. प्रधान, पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी के चुनाव को लेकर गांवों में गहमागहमी चल रही है. चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी करने वाले अभी से लोगों को अपने पक्ष में करने में जुट गए हैं और 1-1 वोट का अभी बंदोबस्त कर रहे हैं. मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का काम तेजी से चल रहा है. और विरोधियों के नाम कटवाने के भी खेल किए जा रहे हैं.

ग्राम पंचायत चुनाव का लेकर गांवों की राजनीति गरमाने लगी है. भावी उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए सक्रिय हो गए हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं जनवरी-फरवरी तक हो सकता है. माना जा रहा है कि अगले साल मार्च-अप्रैल के बीच पंचायत चुनाव हो सकते हैं. राजनीतिक दलों की तैयारियां भी जारी है. बीजेपी से लेकर दूसरी पार्टियों ने पंचायत चुनाव को लेकर कमर कस ली है.

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बलिया में टायर व पेट्रोल शव जलाने का वीडियो वायरल, 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

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बलिया ।  बलिया में पुलिस की संवेदनहीनता सामने आई है। यहां गंगा में बहती लाशों को निकाल कर अंतिम संस्कार के समय उस पर पेट्रोल छिड़क दिया गया, जिससे वह जल्दी जल जाए। इतना ही नहीं चिता पर लकड़ी के साथ-साथ टायर भी रख दिए गए।

इसका वीडियो वायरल होने के बाद एसपी ने पांच सिपााहियों को सस्पेंड कर दिया है। पूरे मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक संजय कुमार को सौंपी गई है ।

 

बताया गया है कि विडिओ यह फेफना के माल्देपुर घाट का है। यहां गंगा नदी से लाशों को निकालने के बाद सही तरीके से उनका अंतिम संस्कार नही किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि चिता पर लड़की के साथ टायर रखे गए हैं। शव को जल्दी से जलाने के लिए बीच-बीच में उसपर पेट्रोल भी छिड़का जा रहा है। यह सब सिपाहियों की मौजूदगी मे होता है।

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बुजुर्ग महिला को आवास नहीं मिला तो बलिया के बलवंत ने चंदा जुटा कर बनवा दिया घर

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बलिया। कहते हैं रोटी कपड़ा और मकान के लिए ही लोग जीवन भर संघर्ष करते रह जाते हैं। इसमें भी मकान का तो क्या ही कहना। जैसा समय है, व्यक्ति रोटी, कपड़ा का जुगाड़ कर ले बहुत है। लेकिन बलिया के एक शख्स ने कमाल का काम किया है।

पुराना मकान

सहतवार के बिसौली गांव के रहने वाले बलवन्त ने एक दिव्यांग महिला का घर बनवाने की जिम्मेदारी ले ली है। वह बीते कुछ महीनों से चंदा जुटा कर धीरजा देवी का घर बनवा रहे हैं।
देखिए कुछ तस्वीरें

मुख्यमंत्री तक ने नहीं सुनी बात
बलवंत बताते हैं कि शासन-प्रशासन के यहां वह दौड़ भाग करके थक गए। लेकिन सत्ता में बैठे किसी भी जनप्रतिनिधि का ना तो मन पसीजा और ना ही अपनी निधि से एक गरीब के लिए वह घर ही बनवा पाए।

उन्होंने धीरजा देवी का घर बनवाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक से गुहार लगाई। सीएम आदित्यनाथ के के जनता दरबार में कहने के बाद भी उनकी बात नहीं सुनी गई और गरीब का घर नहीं बन सका।

बलवंत ने हमें बताया की बलिया के तत्कालीन डीएम भवानी सिंह खंगरौत तक बात गई थी। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने धीरजा देवी के घर के लिए डीएम से कहा था। बलवंत खुद कई बार जिम्मेदारी समझते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर कह चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

लगातार संपर्क और दौड़ भाग के बाद भी जब किसी ने कोई मदद नहीं की तो बलवंत ने खुद ही घर बनवाने का बीड़ा उठा लिया। बलवंत ने तय किया है कि वह चंदा जुटा कर ही धीरजा राजभर का घर बनवाएंगे। फिलहाल घर बन रहा है और इलाके में इस प्रयास की काफी चर्चा हो रही है। बलवंत ने बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो दो-तीन महीनों में ही घर तैयार भी हो जाएगा।

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बेटी के सिर से उठ गया था पिता का साया, उमाशंकर सिंह ने निभाई पिता की भूमिका, कराई शादी

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बलिया। जिले के रसड़ा विधानसभा से विधायक उमाशंकर सिंह ने क्षेत्र के एक गांव की गरीब बेटी की शादी अपने खर्च पर कराई है। जिसकी चर्चा पूरे इलाके में हो रही है।  बता दें कि शादी के ठीक छह महीने पहले  नेहा के पिता का साया उसके सिर से उठ गया।

छठ पूजा के दिन ही कुछ लोगों ने रसड़ा क्षेत्र के सरया गांव निवासी हीरामन यादव की गोली मारकर हत्या कर दी। पूरा परिवार बेसुध पड़ा था। पिता के शव पर बेटी का विलाप सबको झकझोर दे रहा था। भारी भीड़ के बीच रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह भी मौके पर पहुंचे थे। बेटी नेहा चीख-चीखकर कह रही थी, अब उसकी शादी कैसे होगी? मेरा कन्यादान कौन करेगा?

उसके सवाल लोगों का कलेजा चीर रहे थे। विधायक ने भरोसा दिया कि पिता को तो मैं वापस नहीं ला सकता लेकिन दोषियों पर कार्रवाई जरूर कराएंगे तथा शादी भी उसी धूमधाम से सम्पन्न कराएंगे, जैसा आपके पिता चाहते थे।

छह महीना पहले बंधायी गयी इस आस को रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह ने 14 मई को पूरा किया। बेटी के तिलक से लेकर विवाह तक की सारी तैयारी अपनी देखरेख में करायी। बेटी के लिए उपहार व बरातियों-रिश्तेदारों के स्वागत में कोई कमी न रह जाय, इसकी सारी तैयारी खुद पूरी करायी।

तिलक के दिन ढेर सारा उपहार नेहा की ससुराल जगदीशपुर में भेजवाया तो 14 मई को शादी के दिन घंटों नेहा के घर पर एक अभिभावक की तरह मौजूद रहे। द्वारपूजा से लगायत अन्य सभी रस्मों में तत्परता से एक ‘बाबुल की भूमिका निभायी। कन्यादान नेहा के चाचा ने किया।

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