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बलिया

यूपी कांग्रेस समिति के प्रदेश सचिव बने चित्तु पांडे के प्रपौत्र जैनेंद्र पांडेय ने बताया बलिया में कांग्रेस कितनी तैयार

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने कमर कस लिया है। पार्टियां अपने संगठन को अब अंतिम बार ठोक-ठेंठा रही हैं। ताकि उन्हें चुनावी मैदान में पूरे दमखम के साथ उतारा जा सके। हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश समिति की घोषणा की है। इस चुनाव समिति में बलिया से कांग्रेसी नेता जैनेंद्र पांडेय को भी शामिल किया गया है। उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस समिति का प्रदेश सचिव बनाया गया है। जैनेंद्र पांडेय स्वतंत्रता सेनानी और शेर-ए-बलिया कहे जाने वाले चित्तू पांडेय के प्रपौत्र हैं।

जैनेंद्र पांडेय को कांग्रेस पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश समिति में प्रदेश सचिव बनाया गया है। जैनेंद्र पांडेय ने बलिया खबर से बातचीत में कहा कि “अभी मैं झारखंड में पार्टी के लिए काम कर रहा था। लेकिन कांग्रेस ने मुझे उत्तर प्रदेश का सचिव बनाया है। हालांकि कौन से जिले का भार हम पर रहेगा अभी यह तय नहीं है। आने वाले दो-चार दिनों में कांग्रेस की ओर से जिले की सूची भी जारी कर दी जाएगी।”

बलिया जिले में कांग्रेस के खस्ताहाल पर जैनेंद्र पांडेय ने कहते हैं कि “राजनीति में यह सब होते रहता है। कभी बलिया में बसपा का बोलबाला था लेकिन आज वो पूरे प्रदेश में कहीं नहीं है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने बलिया में अपना संगठन मजबूत किया है। पहले बलिया में हमारी पार्टी का बूथ स्तर पर संगठन कमजोर था। किंतु आज हमारा बूथ से लेकर ब्लाक स्तर तक संगठन तैयार है।”

थोड़े अतिरिक्त जोश के साथ जैनेंद्र पांडेय कहते हैं कि “इस देश में दो चीजों को कोई नहीं रोक पाया है। वो है आंधी और गांधी। इस बार भी कोई गांधी को नहीं रोक पाएगा। कांग्रेस पार्टी प्रियंका गांधी के नेतृत्व के में प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।”

सियासी गलियारों ये चर्चा अब जोर पकड़ने लगी है कि प्रदेश में प्रियंका गांधी की सक्रियता का नुकसान समाजवादी पार्टी को होगा। जिसका फायदा सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। इस गुणा-गणित पर जैनेंद्र पांडेय ने कहा कि “प्रदेश और पूरे देश में भाजपा के सामने कोई लड़ रहा तो वो है कांग्रेस पार्टी। इसलिए हमने नारा भी दिया है कि ‘परिवर्तन का संकल्प, कांग्रेस ही विकल्प’।” पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि सपा, बसपा और ओवैसी की पार्टी भाजपा की बी टीम है। सदन में विपक्षी एकता के समय ये पार्टियां वाक आउट कर जाती हैं।”

अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश में चार सौ सीटें जीतने के दावे पर कटाक्ष करते हुए जैनेंद्र पांडेय ने कहा कि अखिलेश यादव और भाजपा विधानसभा में उतनी सीटें जीत जाएंगी, जितनी सीट है भी नहीं। जिसका नाम ही ‘अक्ल लेस’ है उस पर अब हम ज्यादा कुछ क्या कहें? हम झूठी संख्या नहीं बताएंगे लेकिन ये जरूर है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी।

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BJP विधायक सुरेंद्र सिंह ने बैरिया विधानसभा से अखिलेश यादव को दी चुनाव लड़ने की चुनौती

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बलियाः आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनैतिक संग्राम शुरु हो चुका है। नेताओं के बीच में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। तो वहीं अपनी जीत का दावा कर रहे नेता विपक्षी नेताओं को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

इसी बीच बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। मंगलवार को सुरेंद्र सिंह जिला मुख्यालय पर बीजेपी किसान मोर्चा के द्वारा आयोजित ट्रैक्टर रैली को लेकर प्रेसवार्ता कर रहे थे। तभी उन्होंने यह बयान दिया।

मीडिया से बात करते हुए सुरेंद्र सिंह सपा अध्यक्ष और उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर जमकर बरसे। उन्होंने अखिलेश यादव पर आरोप तो लगाए ही साथ ही उन्होंने अखिलेश को बैरिया सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती भी दे डाली। उन्होंने कहा कि यदि वह पूर्व मुख्यमंत्री को एक लाख मतों से पराजित नहीं कर पायेंगे तो चुनावी राजनीति से सन्यास ले लेंगे।

इसी के साथ सुरेंद्र सिंह ने भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश टिकैत को भी आड़े हाथों लिया और उन्हें पेशेवर राजनेता करार दिया। उन्होंने कहा कि टिकैत ‘फंडिंग’ की बदौलत ही राजनीति कर रहे हैं। वह सपा और कांग्रेस के कहने पर किसान आंदोलन करा रहे हैं। साथ ही कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है तो फिर आंदोलन जारी रखने का क्या औचित्य है।

भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने राकैत टिकैत और सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर ‘बेईमान’ होने का आरोप लगाया और कहा कि यह दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी के सामने नहीं टिक पायेंगे। उन्होंने कहा कि मोदी ने संसार को अपना परिवार माना है जबकि अखिलेश यादव के लिए उनका परिवार ही संसार है। परिवार को ही संसार मानने वाला ‘बेईमान’ होता है। वहीं भाजपा विधायक के इन बयानों के बाद सियासी पारा चढ़ता हुआ नजर आ रहा है।

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बलियाः अनियंत्रित ट्रक ने बुजुर्ग को मारी टक्कर, गंभीर हालत में उपचार जारी

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बलियाः एनएच-31 पर एक हादसा हो गया। जहां अलसुबह एक बुजुर्ग को अनियंत्रित ट्रक ने अपनी चपेट में ले लिया। जिससे बुजुर्ग गंभीर रुप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि केहरपुर निवासी 65 वर्षीय रमाकांत ओझा किसी काम से रामगढ़ बाजार गए थे। तभी यह हादसा हुआ। ओझा अपना काम कर घर वापस आ रहे थे। तभी हल्दी थाना क्षेत्र के रामगढ़ में स्थित स्टेट बैंक के समीप ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। वहीं बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनका इलाज जारी है।

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बलिया में कितने फीसदी लोग हैं गरीब, नीति आयोग ने बता दिया

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भारत सरकार के नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों का बहुआयामी गरीबी सूचकांक यानी एमपीआई जारी किया है। नीति आयोग के इस बहुआयामी गरीबी सूचकांक में बलिया जिले के लोगों की गरीबी का आंकड़ा भी बताया गया है। एमपीआई के मुताबिक बलिया में तेरह लाख पैंतीस हजार नौ सौ साठ (1335960) लोग गरीब हैं। बलिया की कुल आबादी लगभग 36 लाख है।

नीति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार बलिया की कुल आबादी के 37.11 प्रतिशत लोग गरीब हैं। आयोग ने सभी जिलों के ग्रामीण और शहरी इलाकों में भी गरीबी के आंकड़े जारी किए हैं। बलिया के ग्रामीण इलाकों में गरीबी शहरी क्षेत्रों से ज्यादा है। हालांकि ये अंतर बहुत अधिक नहीं है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 37.73 फीसदी लोग गरीब हैं। तो वहीं शहरी आबादी के 31.60 फीसदी लोग गरीब हैं। आंकड़े बताते हैं कि बलिया के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है।

उत्तर प्रदेश गरीबी के मामले में बलिया 37वें स्थान पर है। जबकि पड़ोसी आजमगढ़ और मऊ क्रमशः 50वें और 51 वें पायदान पर हैं। यानी कि आजमगढ़ और मऊ के मुकाबले बलिया में गरीबी ज्यादा है। हालांकि शहरी इलाकों में गरीबी के मामले में मऊ अन्य दो जिलों से भी आगे है।

गौरतलब है कि गत शुक्रवार यानी 27 नवंबर को नीति आयोग ने एमपीआई जारी की थी। नीति आयोग ने देशभर के राज्यों और जिलों में वर्ष 2015-16 के बेसलाइन सर्वे पर बहुआयामी गरीबी सूचकांक तैयार की है। इस सूचकांक में लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर को पैमाना बनाया गया है। इसमें पोषण, बाल किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते की संख्या को भी आधार बनाया गया है।

सूचकांक में सभी मानकों की स्थिति को अलग-अलग बताया गया है। बलिया में पोषण 40.90 प्रतिशत है। बाल और किशोर मृत्यु दर 5.92 फीसदी। प्रसव पूर्व देखभाल 41 फीसदी। स्कूली शिक्षा 11.86 प्रतिशत। स्कूल में उपस्थिति 8.47 फीसदी। खाना पकाने के ईंधन में 81.61 प्रतिशत। स्वच्छता में 76.73 फीसदी। बैंक खाते बलिया में 3.60 प्रतिशत हैं।

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